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पहले शिवसेना अब अकाली दल, क्या दरकने लगा है एनडीए का किला?

वाजपेयी युग में तमाम गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करके जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बना था,उसमें करीब 24 छोटे बड़े

26-09-2020 21:41:00

पहले शिवसेना अब अकाली दल, क्या दरकने लगा है एनडीए का किला? NDA Shivsena AkaliDal BJP4India officeofssbadal Shivsena Comms VinodAgnihotri7

वाजपेयी युग में तमाम गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करके जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बना था,उसमें करीब 24 छोटे बड़े

2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना अलग अलग चुनाव लड़े लेकिन चुनाव के बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनाई। 2019 के लोकसभा चुनावों तक हालाकि भाजपा और शिवसेना के बीच खासी दरार आ गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के साथ गठबंधन टूटने नहीं दिया और पहले लोकसभा फिर विधानसभा चुनावों में दोनों दल मिलजुल कर मैदान में उतरे और जीते। लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर अड़कर भाजपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। वैसे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले तेलुगू देशम, उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा) और जीतनराम मांझी की पार्टी हम ने भी एनडीए से नाता तोड़ लिया था, लेकिन उनकी चुनाव में जो दुर्गति हुई, उसे सबने देखा। हालाकि मांझी अब फिर एनडीए में लौट आए हैं जबकि कुशवाहा अभी उहापोह में हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के नाम पर धोखा हुआ, निधि राजदान का दावा - BBC News हिंदी किसान आंदोलन: नौंवें दौर की बातचीत में भी नहीं बात - BBC Hindi आज तक @aajtak

अकाली दल के झगड़े में नवजोत सिद्धू भाजपा से गएलेकिन दूसरी तरफ पंजाब में अकाली दल और भाजपा की दोस्ती में कभी भी दरार नहीं आई। यहां तक कि अकाली दल से झगड़े की वजह से ही नवजोत सिंह सिद्धू जैसे आक्रामक और लोकप्रिय स्टार प्रचारक जैसे नेता को भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामना पड़ा। भाजपा ने अकाली दल से दोस्ती को तरजीह दी और सिद्धू को जाने दिया। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा का एक धड़ा पंजाब में अकाली दल से अलग होकर चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे पुराने सहयोगी दल और उसके बुजुर्ग नेता प्रकाश सिंह बादल का साथ न छोड़ने का फैसला किया और मिलकर चुनाव लड़ा। इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। तब से ही भाजपा के भीतर यह धारणा जोर पकड़ने लगी कि उसे पंजाब में अब अकाली दल का बोझ उतारकर जनता के बीच अपने बलबूते पर जाना चाहिए था। लेकिन अकाली दल से अलग होने का कोई उचित और तार्किक कारण भाजपा के पास नहीं था और केंद्र की सरकार में अकाली दल शामिल था।

लेकिन किसान और कृषि सुधार से जुड़े विधेयकों ने पहले अकाली दल को सरकार से निकलने और उन विधेयकों के कानून बन जाने से एनडीए छोड़ने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि पंजाब में इन कानूनों का जितना व्यापक और जोरदार विरोध हो रहा है, उसे देखते हुए अकाली दल के सामने अपने किसान जनाधार को बचाने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। उधर, भाजपा का एक बड़ा तबका खुश है कि पार्टी अकाली दल से खुद अलग होने के आरोप से बच गई और अब उसे पंजाब में खुल कर राजनीति करने का मौका मिलेगा। headtopics.com

बिहार में भाजपा पर बढ़ा दबावलेकिन सवाल सिर्फ महाराष्ट्र और पंजाब का नहीं पूरे देश का है। शिवसेना और अकाली दल के अलग होने से बिहार में जनता दल(यू) के सामने भाजपा पर दबाव बढ़ गया है। कड़ी राजनीतिक सौदेबाजी के लिए मशहूर नीतीश कुमार अब भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर अच्छी खासी सौदेबाजी करेंगे।साथ ही राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी भी भाजपा पर दबाव बढ़ाएगी कि उसे ज्यादा से ज्यादा सीटें दी जाएंगी। पासवान पुत्र और लोजपा के युवराज चिराग पासवान पहले से ही नीतीश कुमार और जद(यू) को लेकर आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा के साथ एनडीए में अब जद(यू) सबसे बड़ा घटक दल है और इसका सियासी फायदा उठाने से नीतीश कुमार नहीं चूकेंगे। अकाली दल के अलग होने से केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए किसान कानूनों को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला करने का और मौका मिलेगा। इसका असर मध्यप्रदेश में होने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव, जिन्हें मिनी विधानसभा चुनाव कहा जा रहा है, पर भी पड़ सकता है।

अन्य दल भी बढ़ाएंगे दबावएनडीए से अकाली दल के अलग होने के बाद सरकार को गाहे बगाहे बाहर से समर्थन देकर राज्यसभा में संकट से बचाने वाले बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का भी दबाव सरकार पर बढ़ेगा। हालांकि लोकसभा में भाजपा की अपनी 303 सीटें हैं इसलिए सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अगर उसे बाहर से समर्थन देने वाले ये दल भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाने लगेंगे तो संसद में सरकार की मुश्किलें बढ़ती रहेंगी, विशेषकर राज्यसभा में जहां भाजपा सबसे बड़ा दल तो है लेकिन उसके पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। इसलिए अगर सिर्फ पंजाब के हिसाब से देखें तो भाजपा नेतृत्व खुश हो सकता है कि अब उसे देश के सीमांत प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ अकेले लड़ने का मौका मिल सकेगा और पार्टी का विस्तार पूरे पंजाब में हो सकेगा।

भाजपा के लिए चिंता का सबबलेकिन राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखने पर पहले शिवसेना और अब अकाली दल का भाजपा से रिश्ता तोड़कर एनडीए से अलग होना भाजपा के लिए चिंता का सबब होना चाहिए। कहावत है किला कितना भी मजबूत हो लेकिन उसकी एक एक चट्टान महत्वपूर्ण होती है और अगर वो दरकना शुरू कर दे और समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो किले की मजबूती भी ज्यादा समय तक नहीं रहती। फिर अगर चट्टानें नींव का पत्थर हों तो खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए अगर महाराष्ट्र में शिवसेना से नाता टूटना तत्कालीन भाजपा नेतृत्व की सियासी विफलता थी, तो अब अकाली का एनडीए से जाना मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्ड़ा के लिए चुनौती है। लेकिन दोनों मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निरपेक्ष रहना चौंकाता है, क्योंकि पहले एनडीए का चुंबक अगर अटल बिहारी वाजपेयी थे, निश्चित रूप से 2013 से एनडीए का सूर्य नरेंद्र मोदी हैं, जिनके इर्द-गिर्द सारे घटक एकजुट हैं और अपने घटक दलों को अपने साथ बनाए रखना भाजपा अध्यक्ष के साथ-साथ उनकी भी जिम्मेदारी है।

भारतीय जनता पार्टी के जन्म से ही उसका सबसे बेहद भरोसेमंद सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) से अलग होने के एलान के साथ ही यह सवाल सियासी गलियारों में उठने लगा है कि क्या अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने जिस गठबंधन की नींव डालकर भाजपा को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया था, पहले शिवसेना और अब अकाली दल के अलग होने से उसकी बुनियाद दरकने लगी है, या अभी ऐसा कहना बहुत जल्दबाजी होगी क्योंकि लोकसभा चुनावों में अभी साढ़े तीन साल से ज्यादा का वक्त है।क्योंकि शिवसेना और अकाली दल, दोनों भाजपा के सबसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगी दल थे। उधर बिहार में जनता दल(यू) और लोक जनशक्ति पार्टी की तकरार अगर नहीं थमी तो चिराग पासवान किस रास्ते पर जाएंगे कहना मुश्किल है। headtopics.com

आज तक @aajtak कार्टून: अब मज़ा नहीं आएगा - BBC News हिंदी आज तक @aajtak

विज्ञापनवाजपेयी युग में शामिल थे 24 दल दल शामिल थे, जिनमें प्रमुख रूप से भाजपा, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना,जनता दल(एकीकृत), लोक जनशक्ति पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, तेलुगू देशम, बीजू जनता दल, नेशनल कांफ्रेंस आदि थे। इनमें से वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के आखिरी दौर में द्रमुक एनडीए से बाहर हुआ और उसकी जगह अन्ना द्रमुक ने ले ली। 2004 में भाजपा के चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस और बीजद अलग हो गए। देश की राजनीति और एनडीए के भीतर भी खासा उतार चढ़ाव आया, लेकिन अकाली दल और शिवसेना का भाजपा से नाता बना रहा। यहां तक कि 2013 में नीतीश कुमार के जनता दल(यू) ने भी भाजपा और एनडीए से अपना रिश्ता खत्म कर लिया था और 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा, जीता, सरकार बनाई और डेढ़ साल बाद जद(यू) ने फिर पलटी मारी और भाजपा से नाता जोड़कर सरकार बनाई।

2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना अलग अलग चुनाव लड़े लेकिन चुनाव के बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनाई। 2019 के लोकसभा चुनावों तक हालाकि भाजपा और शिवसेना के बीच खासी दरार आ गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के साथ गठबंधन टूटने नहीं दिया और पहले लोकसभा फिर विधानसभा चुनावों में दोनों दल मिलजुल कर मैदान में उतरे और जीते। लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर अड़कर भाजपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। वैसे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले तेलुगू देशम, उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा) और जीतनराम मांझी की पार्टी हम ने भी एनडीए से नाता तोड़ लिया था, लेकिन उनकी चुनाव में जो दुर्गति हुई, उसे सबने देखा। हालाकि मांझी अब फिर एनडीए में लौट आए हैं जबकि कुशवाहा अभी उहापोह में हैं।

अकाली दल के झगड़े में नवजोत सिद्धू भाजपा से गएलेकिन दूसरी तरफ पंजाब में अकाली दल और भाजपा की दोस्ती में कभी भी दरार नहीं आई। यहां तक कि अकाली दल से झगड़े की वजह से ही नवजोत सिंह सिद्धू जैसे आक्रामक और लोकप्रिय स्टार प्रचारक जैसे नेता को भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामना पड़ा। भाजपा ने अकाली दल से दोस्ती को तरजीह दी और सिद्धू को जाने दिया। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा का एक धड़ा पंजाब में अकाली दल से अलग होकर चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे पुराने सहयोगी दल और उसके बुजुर्ग नेता प्रकाश सिंह बादल का साथ न छोड़ने का फैसला किया और मिलकर चुनाव लड़ा। इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। तब से ही भाजपा के भीतर यह धारणा जोर पकड़ने लगी कि उसे पंजाब में अब अकाली दल का बोझ उतारकर जनता के बीच अपने बलबूते पर जाना चाहिए था। लेकिन अकाली दल से अलग होने का कोई उचित और तार्किक कारण भाजपा के पास नहीं था और केंद्र की सरकार में अकाली दल शामिल था।

लेकिन किसान और कृषि सुधार से जुड़े विधेयकों ने पहले अकाली दल को सरकार से निकलने और उन विधेयकों के कानून बन जाने से एनडीए छोड़ने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि पंजाब में इन कानूनों का जितना व्यापक और जोरदार विरोध हो रहा है, उसे देखते हुए अकाली दल के सामने अपने किसान जनाधार को बचाने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। उधर, भाजपा का एक बड़ा तबका खुश है कि पार्टी अकाली दल से खुद अलग होने के आरोप से बच गई और अब उसे पंजाब में खुल कर राजनीति करने का मौका मिलेगा। headtopics.com

बिहार में भाजपा पर बढ़ा दबावलेकिन सवाल सिर्फ महाराष्ट्र और पंजाब का नहीं पूरे देश का है। शिवसेना और अकाली दल के अलग होने से बिहार में जनता दल(यू) के सामने भाजपा पर दबाव बढ़ गया है। कड़ी राजनीतिक सौदेबाजी के लिए मशहूर नीतीश कुमार अब भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर अच्छी खासी सौदेबाजी करेंगे।साथ ही राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी भी भाजपा पर दबाव बढ़ाएगी कि उसे ज्यादा से ज्यादा सीटें दी जाएंगी। पासवान पुत्र और लोजपा के युवराज चिराग पासवान पहले से ही नीतीश कुमार और जद(यू) को लेकर आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा के साथ एनडीए में अब जद(यू) सबसे बड़ा घटक दल है और इसका सियासी फायदा उठाने से नीतीश कुमार नहीं चूकेंगे। अकाली दल के अलग होने से केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए किसान कानूनों को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला करने का और मौका मिलेगा। इसका असर मध्यप्रदेश में होने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव, जिन्हें मिनी विधानसभा चुनाव कहा जा रहा है, पर भी पड़ सकता है।

अन्य दल भी बढ़ाएंगे दबावएनडीए से अकाली दल के अलग होने के बाद सरकार को गाहे बगाहे बाहर से समर्थन देकर राज्यसभा में संकट से बचाने वाले बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का भी दबाव सरकार पर बढ़ेगा। हालांकि लोकसभा में भाजपा की अपनी 303 सीटें हैं इसलिए सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अगर उसे बाहर से समर्थन देने वाले ये दल भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाने लगेंगे तो संसद में सरकार की मुश्किलें बढ़ती रहेंगी, विशेषकर राज्यसभा में जहां भाजपा सबसे बड़ा दल तो है लेकिन उसके पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। इसलिए अगर सिर्फ पंजाब के हिसाब से देखें तो भाजपा नेतृत्व खुश हो सकता है कि अब उसे देश के सीमांत प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ अकेले लड़ने का मौका मिल सकेगा और पार्टी का विस्तार पूरे पंजाब में हो सकेगा।

किसानों के लिए सड़कों पर उतरी Congress, Rahul और Priyanka Gandhi भी पहुंचे पीएम मोदी 23 जनवरी को जाएंगे बंगाल, सुभाष चंद्र बोस की जयंती कार्यक्रम में होंगे शामिल Army Day: फौज ने दिखाया शौर्य, आर्मी चीफ की China-Pakistan को दो टूक

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10तक: नौकरी के नाम पर वोट मांगने वाले क्यों करवाते हैं सालों तक नौकरी का इंतजार?

रोहित सरदाना के साथ दस्तक में आज आप देखेंगे वो राजनीति जो नौकरी के नाम पर वोट तो मांगती है लेकिन नौकरी के लिए 22 साल तक इंतजार करा देती है. इसके साथ ही देखिये मौत देने वाले चाइनीज एप पर कैसे आपकी दी हुई दस्तक का असर हुआ है. दस्तक उस अव्यवस्था के खिलाफ भी जो जनता से सुरक्षित इलाज पाने का हक छीनती है.

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 In logo ky achy din aa gy jo smabhl gy nhi to muh ki khani padti okk sir or haa nda to har rhi h bihar sy fir kio pessa barbad kar rhy h y bjp waly... Inko ab Pata chl jyga ki janta kitni jaag gai h okk ji BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 नहीं, स्थानीय पार्टियों की अपनी आकांक्षा बढ़ गई है जबकि बीजेपी वहीं पर स्थिर है ।

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 राजनीति, जिसकी नींव ही स्वार्थ पर आधारित है, बहुत जालिम है पल भर में दुश्मन को दोस्त और दोस्त को दुश्मन बना देती है । BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 NDA का किला नहीं दरक रहा है, यहाँ लुटियंस सोच के लोग बाहर निकल रहे हैं। लुटियंस गैंग के लोगों के लिए अब NDA मे जगह नहीं है।

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 आखिर स्वार्थ भी तो कोई चीज है BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 पहले बेरोजगार, अब किसान और मजदूर BJP का किला ढहने की शुरुआत बहुत पहले ही हो चुकी है।🎯🎯🎯 BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 येे जितने भी मौकापरस्त साथी हैं....इनके अलग होने से कोई दुख नहीं होना चाहिए: १.शिवसेना मुख्यमंत्री के पद के लिए एनडीए से अलग हुआ, उसको मुख्यमंत्री बना के उसके साथियों ने वो सब करवाया जो थूक के चाटने जैसा है। २.देश के लालची वोटरों को रिझाना बहुत कठिन है इसीलिए गठबन्धन मजबूरी है।

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 TDP ki haalat yaad hai na dost. BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 Invested in group_gayatri 10 years back..property didnot get built..refund pending since 4 years..checks bounced..canarabank filed case..pls help..upcmoffice CeoNoida UPGovt myogiadityanath PMOIndia narendramodi RahulGandhi nsitharaman MoHUA_India UPRERAofficial

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 Sher akela chlega BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 Jab bahumat jayada ho, janta ka accha support mil raha ho,aese me b. J. P me अहंकार aana tay he. BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 Nhi. BJP ka dayara badhne lava h

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 Atamnirvhar...bjp 😂😂😂 Kb hai holi... kb 😂😂😂 BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 मौन खतरनाक हो रहा।युवा को सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षा मे सालो साल की देरी क्यो? ssccglresults 2018 का 3साल। BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 No, only fears of Modi's zero tolerance policy against Corruptions, Frauds and Drugs

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 पोल‌ पे वोटिंग करवालो। BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 चलिए मान लीजिए की NDA का किला दरक गया ... आगे ये भी मान लें क्या कि ये अकाली, शिव सेना, कांग्रेस ,NCP, SP, RJP, कम्युनिस्ट, तृणमूल, AAP सब एक साथ मिल के इस से भी ज्यादा मजबूत, एक दरक-प्रूफ किला बना लेंगे? और जो बनेगा वो किले जैसा दिखेगा भी ... या कुछ और लगेगा?

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 sare chaploos chale jaye... bz sher sher he rahta hi... jhund mi to gidaad aate hi shivsena ke aukat he nhi ke apne dum pe gov banye... n akalis ka drug bussiness... BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 NDA is Intact.. Some political parties have their own compulsions..

BJP4India officeofssbadal ShivsenaComms VinodAgnihotri7 झूठ की लम्बी उमर नहीं होती है। जनता धीरे धीरे इनकी राजनीति समझ रही कब तक हिन्दू मुस्लिम पर हमको आपस में लड़वाते रहोगे।

सिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम का निधन, दो महीने पहले हुए थे कोरोना पॉजिटिवसिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम का शुक्रवार को निधन हो गया. फिल्ममेकर वेंकट प्रभु ने सोशल मीडिया पर एसपी बालासुब्रमण्यम को श्रद्धांजलि अर्पित की है. बहुत ही दुखद एक अच्छे कलाकार ऐसे अकस्मात चलें जाना Nóted Multilingual Indian Respected Singer Balasubramaniam Ji Is No More My Innate Coñdólences To South India & All Of India.. Here was A Singer That Made Hi us Mark In Bollywood In Super Star Tier Level in Huts Mostly With Kamal Hassan Movies'Co Hits ! : PradeepRajTak12

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बड़े पैमाने पर पराली जलाए जाने के पहले संकेत अमृतसर के पास से मिलेपिछले वर्षों में दिल्ली समेत तमाम शहरों में जहरीली हवा से बचने के लिए कुछ लोग मास्क का इस्तेमाल करते भी दिखाई देते थे. हालांकि इस साल कोरोना महामारी की वजह से पहले से ही हर शख्स के चेहरे पर मास्क है. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ आगाह कर रहे हैं कि पराली जलाने से सांस में दिक्कत की शिकायतें बढ़ेंगी और इससे महामारी की स्थिति और विकट हो सकती है. rajfortyseven 😍फॉलोवर्स बढ़ाना है 🤗 🍒रिट्वीट, फॉलो 💕 कर के अपनी 🆔 दो 👩‍🎤 Note -जिनको फालोबैक नही मिली है वे कमेंट मे fb जरूर लिखे🙏 rajfortyseven शुशांत, रिहा और दीपिका से फुरसत मिल गयी क्या आपको? rajfortyseven It's good for soil, go do some research

पहले अकेले फिर करिश्मा के साथ दीपिका पादुकोण से NCB करेगी पूछताछबॉलीवुड के ड्रग्स के दलदल की जांच कर रही एनसीबी कल सुबह तीन बड़ी हीरोइनों से पूछताछ करेगी. इनमें सबसे बड़ा नाम दीपिका पादुकोण का है जिनको एनसीबी ने कल सुबह 10 बजे अपने गेस्ट हाउस में बुलाया है. इनके अलावा सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को पूछताछ के लिए एनसीबी ने कल सुबह ही साढ़े दस बजे बुलाया है. आज क्वान कंपनी की मैनेजर करिश्मा प्रकाश से सीबीआई ने पूछताछ की लेकिन कल भी उन्हें बुलाया है और कल उन्हें दीपिका के साथ आमने सामने बिठाकर भी पूछताछ की जाएगी. उससे पहले एनसीबी दीपिका से अकेले में पूछताछ करेगी. देखें 10तक. chitraaum mausamii2u Maal Do Na h kyaa Deepika padukone ke liye lena hai😊 chitraaum mausamii2u Kisano ko v dikhado bikau media,,RIP_IndianMedia chitraaum mausamii2u Mc aaj tak ke dallo. Kisano ka dard nahi dikh raha tum BJP ke pillo ko! 5बजकर25मिनट