पवन वर्मा जेडीयू से निकलेंगे या निकाल दिए जाएँगे?

पवन वर्मा जेडीयू से निकलेंगे या निकाल दिए जाएँगे?

24.1.2020

पवन वर्मा जेडीयू से निकलेंगे या निकाल दिए जाएँगे?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पवन वर्मा के बीच नागरिकता क़ानून और दिल्ली चुनाव को लेकर छिड़ी है ज़ुबानी जंग.

ये एक्सटर्नल लिंक हैं जो एक नए विंडो में खुलेंगे शेयर पैनल को बंद करें इमेज कॉपीरइट Getty Images दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने जा रही है. जेडीयू के लिए ये पहला मौका होगा जब बिहार के बाहर भी बीजेपी के साथ उनका गठबंधन होगा. इसी बात से नाराज़ होकर जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राज्यसभा सांसद पवन वर्मा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चिट्ठी लिख दी. 21 जनवरी की इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा,"मेरी समझ में जेडीयू और बीजेपी आने वाले दिल्ली चुनाव में भाजपा के साथ चुनाव लड़ रही है. हाल के दिनों में ये पहला मौका है जब बिहार के बाहर हम बीजेपी के साथ गठबंधन को बढ़ा रहे हैं. मैं इस बात से बेहद हैरान हूं और आपसे इस बारे में वैचारिक स्पष्टीकरण चाहता हूं" इमेज कॉपीरइट Twitter@pavan K. Varma दो पन्ने की इस चिट्ठी में उन्होंने कुछ निजी बातचीत का भी जिक्र किया. पवन वर्मा के मुताबिक निजी बातचीत में नीतीश कुमार हमेशा से मानते आए हैं कि नरेन्द्र मोदी और उनकी पॉलिसी देश के लिए बेहद ख़तरनाक हैं और वो भी 'आरएसएस मुक्त' भारत की परिकल्पना करते हैं. इस चिट्ठी को पवन वर्मा ने नीतीश कुमार को ईमेल से भेजा और ट्विटर पर भी पोस्ट कर दिया. चिट्ठी को सार्वजनिक करने की बात पर पवन वर्मा से नाराज़गी नीतीश कुमार छुपा नहीं पाए. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक नीतीश कुमार ने कहा है,"इसको कहते हैं पत्र? कोई आदमी पार्टी का रहता है और पत्र लिखता है और पत्र देता है तब न उसका जवाब देता है. ईमेल पर भेज दीजिए कुछ और प्रेस में जारी कर दीजिए?" ज़ाहिर है नीतीश कुमार को पवन वर्मा का ये क़दम ठीक नहीं लगा. इमेज कॉपीरइट Twitter@ANI पवन वर्मा का स्पष्टीकरण बीबीसी ने पवन वर्मा से इस बारे में बात की. उनसे पूछा कि आखिर उन्होंने निजी बातों को सार्वजनिक क्यों किया? दिल्ली से जयपुर के रास्ते में जाते हुए पवन वर्मा ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया,"मैंने सबसे पहले नीतीश जी को उनके ऑफ़िशियल मेल आईडी पर पत्र भेजा. उस मेल आईडी पर जिस पर पहले भी कई बार हम एक दूसरे से बात कर चुके हैं. उसके बाद मैंने पत्र को ट्विटर पर पोस्ट किया ." निजी बातचीत को सार्वजनिक करने के आरोप पर पवन वर्मा ने कहा,"वो निजी बातचीत नहीं थी, वो बातें सार्वजनिक मंच पर नहीं, वो पार्टी के फ़ोरम में हुई बातचीत थी जब सिर्फ मैं नहीं पार्टी के दूसरे सदस्य भी मौजूद थे." "मैं तो पत्र के ज़रिए बस एक स्पष्टीकरण चाह रहा कि क्या जब हम बिहार के बाहर बीजेपी के साथ गठबंधन में जा रहे हैं, तो पार्टी में एक वैचारिक स्पष्टीकरण तो होना चाहिए कि हम किन बातों पर बीजेपी के साथ हैं और किन बातों पर साथ नहीं हैं. ये देश हित में हैं और पार्टी हित में भी." लेकिन क्या यही एक मात्र ज़रिया था? क्या पार्टी फोरम के अंदर और बैठकों में ये बात करने की ज़रूरत नहीं थी? इस सवाल के जवाब में पवन वर्मा ने कहा,"दुख की बात है. सीएए पर पार्टी में बैठक हुई ही नहीं. मैंने उन्हें खुद फोन करके कहा. इस पर चर्चा होनी चाहिए. सीएए को हमारा समर्थन ग़लत है. पार्टी संविधान के विरुद्ध है" ग़ौरतलब है कि जेडीयू ने संसद में सीएए का समर्थन किया था. इस बात से भी पवन वर्मा पहले से ही नाराज़ थे. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा "लोकसभा में पार्टी ने जब सीएए के पक्ष में वोट किया, तो मैंने उनसे फोन पर बात कर कहा कि इस विषय में हमें सोचने की ज़रूरत है. लेकिन बावजूद इसके राज्यसभा में भी हमने सीएए का समर्थन किया." सीएए के मुद्दे पर नीतीश कुमार और पवन वर्मा के बीच की दूरी अब दिल्ली चुनाव आते आते खाई में तब्दील हो चुकी है. इमेज कॉपीरइट Getty Images नीतीश कुमार का पक्ष गुरुवार को जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पत्रकारों ने पवन वर्मा की ताज़ा चिट्ठी के बारे में पूछा तो उनका जवाब था,"ये उनका अपना मैटर है. जहां जाना हो वहां जाएं. कोई एतराज नहीं है. कुछ लोगों के बयान से जनता दल यूनिइटेड को मत देखिए. जेडीयू बहुत ही दृढ़ता के साथ अपना काम करती है. कुछ चीज़ो पर हम लोगों का स्टैंड बहुत साफ होता है. एक भी चीज़ के बारे में हम लोग किसी कंफ्यूजन में नहीं रहते हैं." पवन वर्मा की चिट्ठी को लेकर नीतीश कुमार ने आगे कहा,"किसी के मन में कोई बात है तो आकर विमर्श करना चाहिए, बातचीत करनी चाहिए. उसके लिए जरूरी समझें तो पार्टी की बैठक में चर्चा करनी चाहिए. लेकिन इस तरह का वक्तव्य देना उचित नहीं. आप ख़ुद दे लीजिए. ये आश्चर्य की बात है, आप इस तरह का वक्तव्य दे रहे हैं कि आप हमसे क्या बात करते थे. हम क्या कभी कह सकते हैं कि हमसे क्या बात करते थे? क्या ये कोई तरीका है? इन बातों को छोड़ दीजिए. मुझे फिर भी सम्मान है. इज्जत है. लेकिन जहां उनको अच्छा लगे, वहां जाएं. मेरी शुभकामनाएं." इमेज कॉपीरइट Getty Images जेडीयू में बने रहेंगे या नहीं? उनके इस बयान के बाद से इस बात की अटकलें लगनी शुरू हो गईं कि क्या पवन वर्मा पार्टी छोड़ देंगे या उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाई करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. इस सवाल के जवाब में पवन वर्मा साफ़ साफ़ कुछ नहीं बोले. उन्होंने कहा,"मुझे आज भी अपने पत्र के जवाब का इंतजार है. उसके बाद ही अगला कदम बताउंगा" "पार्टी ने अभी तक तो मुझे निकाला नहीं है. जब मुझे जाना होगा, मैं उनको सूचित करूंगा. जब मैंने पत्र लिखा था, तब तो मैं राष्ट्रीय महासचिव भी था. पत्र तो पत्र होता है और आजकल ईमेल पर ही भेजा जाता है." कांग्रेस या फिर आरजेडी में जाएँगे पवन वर्मा? इस सवाल के जवाब में उन्होंने सीधे सीधे 'ना' भी नहीं कहा. लेकिन इंतज़ार करने के लिए ज़रूर कहा. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या पार्टी पवन वर्मा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी. जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा,"इन्होंने (पवन वर्मा) ने बिना मतलब के पत्र लिखा. पता नहीं उनका क्या हिडेन एजेंडा है. कुछ मालूम नहीं चलता क्या है. अब तक राज्य सभा में थे, अब नहीं हैं. हम क्या बताएं. पार्टी की बात थी तो अंदर उठाना चाहिए था." जब बीबीसी ने पूछा कि पवन वर्मा कह रहे हैं पार्टी में कोई बैठक नहीं हुई उन्होंने अपनी आपत्ति नीतीश कुमार को फोन करके दर्ज कराई तो इस पर उन्होंने कहा,"पवन वर्मा पटना आए और मुख्यमंत्री से न तो मिले न ही मिलने का वक्त मांगा." लेकिन पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या नहीं ये सवाल वो टाल गए. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप और पढो: BBC News Hindi

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आप एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त खबरिया संचार संस्था हैं ; इन छोटी मोटी स्तरीय खबरों के लिए स्थानीय पत्रकारों की रोजी रोटी पर लात मरना उचित नही है ! इसकी अपनी औक़ात क्या है। अपने दमपर चुनकर नही आ सकता। कीसी और पार्टीको जिता नही सकता। नितीश के बदौलत राज्यसभा का एमपी बन गया। Pawan Verma is very honest person but with some misconceptions on national issues. Being a former deplomat, he should be above the board while making political statements.

तेरे को क्या टेंशन है...? निकाल दीजिये नीतीश बाबू Hyderabad police foil Shaheen bagh -like protest 👏 a group of women to stage Shaheen Bagh-like protest against the CAA (NPR) and the National Register of Citizens (NRC) was foiled by the Hyderabad Police

सीएए-एनआरसी पर हमारा रुख साफ, पीके और पवन वर्मा के बयानों पर मत जाइये: नीतीशसीएए-एनआरसी पर हमारा रुख साफ, पीके और पवन वर्मा के बयानों पर मत जाइये: नीतीश CAA NRC NitishKumar PrashantKishor PavanK_Varma NitishKumar PrashantKishor PavanK_Varma In dono ko party se kyun nahi nikaal dete ho

पवन वर्मा की चिट्ठी से नीतीश खफा, कहा- किसी और पार्टी में जा सकते हैंनीतीश कुमार ने कहा कि अगर किसी के पास कोई मुद्दा है तो वह पार्टी या पार्टी की बैठकों में इस पर चर्चा कर सकता है, लेकिन इस तरह के सार्वजनिक बयान आश्चर्यजनक हैं. वह जा सकते हैं और किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं, जिसे वह पसंद करते हैं. सही है सर जी अब आपका भी दिन लदने वाला है। अब आपकी घुमावदार बातों में जनता फंसने वाली नहीं। ईशरतजहां के अब्बु भड़क गए।

...तो क्या JDU में साइडलाइन कर दिए गए प्रशांत किशोर और पवन वर्मा!पटना. बीते 15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से जब पत्रकारों ने एनआरसी-सीएए (NRC-CAA) के मुद्दे को लेकर प्रशांत किशोर और पवन वर्मा (Prashant Kishor and Pawan Verma) के बयानों पर पत्रकारों ने सवाल किया था तो उन्होंने साफ कहा था कि 19 जनवरी को मानव श्रृंखला के आयोजन के बाद वे इसपर बोलेंगे. 19 तारीख के चार दिन बाद सीएम नीतीश ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने पार्टी के नेता पवन वर्मा को साफ कह दिया है कि वे जहां जाना चाहें, चले जाएं. उनके साथ मेरी शुभकामनाएं हैं. इसके साथ ही सीएम नीतीश ने प्रशांत किशोर के लिए भी नसीहत दी है और कहा कि ऐसे लोगों को जेडीयू को समझने की जरूरत है. | bihar News in Hindi - हिंदी न्यूज़, समाचार, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी PrashantKishor कुछ और नही बस ArvindKejriwal का दूसरा रूप हैं बहुत जल्दी CM बनने की चाह में NitishKumar जी के बिहार में विकास के आंदोलन को कुचलने में देर नही करेंगे चुनावी गणित से जीत दिखाकर देशविरोधी पार्टियों से मिल जाने जैसी सलाह भी आराम से दे सकते हैं Thanks Nitish Ji बिलकुल सही किया है अभी से सतर्क हो कर नीतीश जी को कदम दर कदम बढ़ाने चाहिए।

निर्भया के दोषियों के वकील की अर्जी- तिहाड़ जेल पवन-अक्षय के दस्‍तावेज नहीं दे रहानिर्भया गैंगरेप केस (Nirbhaya Gang Rape Case) के दोषियों के वक़ील एपी सिंह ने पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने अभी तक उन्हें दोषी पवन और अक्षय के दस्तावेज मुहैया नहीं कराए हैं. याचिका में कहा कि पवन, अक्षय और विनय दया याचिका भी दाखिल करना चाहते हैं, लेकिन दस्तावेज के न मिलने की वजह से वो दाखिल नहीं कर पा रहे हैं. यह भी कहा गया है कि पवन और अक्षय को सुप्रीम कोर्ट में क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल करनी है. पटियाला हाउस कोर्ट शनिवार को मामले की सुनवाई कर सकता है. दस्तावेज से बलात्कारियों के वकील क्या अपनी बेटी का रिश्ता करेगा बहोत खेल हो गया अब इनका भी इनकाउंटर कर देना चाहिए, जितना निर्भया तड़पी थी उससे ज्यादा हमारा कानून दर्द उसकी आत्मा को दे रहा है इन बलात्कारियों के वकील से ज्यादा इज्जत की कमाई किसी वेश्या की होती है । वो समाज के लिए तो खतरा नहीं होती ।

नीतीश की चेतावनी पर पवन वर्मा का जवाब- मुझे चिट्ठी का जवाब नहीं मिलाबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर पवन वर्मा का जवाब आ गया है. जदयू प्रवक्ता का कहना है कि वो अभी भी उस जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जो चिट्ठी में उन्होंने पूछा है. CAA के मसले पर पवन वर्मा लगातार विरोध करते हैं. ईसको सेकुलरीजम का भुत सवार हुआ है ये भी कहीं गुम हो जाएंगा PavanK_Varma जी, मर्द धमकी नहीं देते। गोजर का एक टंगड़ी टूट जाने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। नीतीश जी के साफ़-साफ़ कह देनें के बाद भी इंतज़ार किस बात की? Aur kis tarah ka jawab chahiye. Do took mein de di Nitish ji ne apni rai.

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