नेहरू या बोस , किससे प्रभावित थे भगत सिंह ? - BBC News हिंदी

23 साल की उम्र में फांसी पर चढ़े भगत सिंह की 108वीं जयंती है.

28-09-2020 07:45:00

23 साल की उम्र में फांसी पर चढ़े भगत सिंह की 113वीं जयंती है. भगत सिंह न तो कांग्रेसी थे और न कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य. उनकी क्रांतिकारिता में किसी को शक नहीं. पर भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू के बारे में क्या ख्याल रखते थे?

23 साल की उम्र में फांसी पर चढ़े भगत सिंह की 108वीं जयंती है.

समाप्तक्यों यूरोप में स्वस्तिक का चिह्न धारण करना सभ्यता के ख़िलाफ़ माना जाता है, यह समझने के लिए क्या हर किसी को आश्वित्ज़ की यात्रा करनी ही चाहिए?एक शख्स ऐसा था जिसने सुभाष चंद्र बोस के फासीवाद की ओर झुकाव का बहुत पहले अनुमान कर लिया था.वह एक नौजवान था, कोई इक्कीस साल का. उसका नाम भगत सिंह था. वह न तो कांग्रेसी था और न कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य. उनकी क्रांतिकारिता में किसी को शक नहीं. उनका सुभाष चंद्र बोस के बारे में क्या ख्याल था?

प्रेग्नेंसी में अनुष्का का ध्यान रख रहे विराट कोहली, मैच के बीच पूछा- खाना खाया? डॉक्टरों समेत उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 55 हज़ार स्टाफ़ को नहीं मिला वेतन? - BBC News हिंदी बिहार में पहले चरण की वोटिंग के बीच मोदी-राहुल करेंगे चुनाव प्रचार- आज की बड़ी ख़बरें - BBC Hindi

1928 में भगत सिंह कोई 21 साल के जवान थे. ‘किरती’ नामक पत्र में उन्होंने ‘नए नेताओं के अलग-अलग विचार' नाम से एक लेख लिखा.वे असहयोग आंदोलन की असफलता और हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों की मायूसी के बीच उन आधुनिक विचारों की तलाश कर रहे थे जो नए आंदोलन के लिए नींव का काम करें.

वे इस लेख में दो नए उभरते नेताओं ‘बंगाल के पूजनीय श्री सुभाष चंद्र बोस और माननीय पंडित श्री जवाहरलाल नेहरू’ के विचारों की पड़ताल करते हैं.‘भावुक बंगाली’इमेज स्रोत,GANDHI FILM FOUNDATIONभगत सिंह के अनुसार सुभाष ‘भारत की प्राचीन संस्कृति के उपासक’ और नेहरू ‘पश्चिम के शिष्य’ माने जाते हैं. पहला ‘कोमल हृदयवाला भावुक’ और दूसरा ‘पक्का युगांतरकारी’ माना जाता है. लेकिन खुद भगत सिंह सुभाष और नेहरू के बारे में क्या राय रखते हैं?

भगत सिंह अमृतसर और महाराष्ट्र में कांग्रेस के सम्मेलनों के इनके भाषणों को पढ़कर कहते हैं कि हालाँकि दोनों पूर्ण स्वराज्य के समर्थक हैं लेकिन इनके विचारों में ‘ज़मीन आसमान का अंतर’ है.बंबई की एक जनसभा का वे ख़ास जिक्र करते हैं जिसकी अध्यक्षता नेहरू कर रहे थे और भाषण सुभाष ने दिया.

उन दोनों के वक्तव्यों को पढ़कर वे सुभाष को एक ‘भावुक बंगाली’ कहते हैं. उन्होंने भाषण शुरु किया कि हिन्दुस्तान का दुनिया के नाम एक विशेष संदेश है. वह दुनिया को आध्यात्मिक शिक्षा देगा.वे उनके भाषण को ‘दीवाने’ का प्रलाप ठहराते हुए टिप्पणी करते हैं, "यह भी वही छायावाद है. कोरी भावुकता है. वे हर बात में पुरातन युग की महानता देखते हैं. वे हर चीज़ को प्राचीन भारत में खोज निकालते हैं, पंचायती राज को भी और साम्यवाद को भी."

परिवर्तनकारी या युगांतरकारी?इमेज स्रोत,netaji research bureauभगत सिंह सुभाष के राष्ट्रवाद को भी अजीबोगरीब मानते हैं और उनके इस विचार से कतई सहमत नहीं कि हिंदुस्तानी राष्ट्रीयता कोई नायाब चीज़ है और बाक़ी राष्ट्रीयताएं भले ही संकीर्ण हों, भारतीय राष्ट्रवाद ऐसा हो नहीं सकता.

भगत सिंह सुभाष चन्द्र बोस के उलट नेहरू से अधिक प्रभावित जान पड़ते हैं.वे कहते हैं कि सुभाष परिवर्तनकारी हैं जबकि नेहरू युगांतरकारी.भगत सिंह का मानना था, "एक के विचार में हमारी पुरानी चीज़ें बहुत अच्छी हैं और दूसरे के विचार में उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया जाना चाहिए. एक ‘भावुक’ कहा जाएगा और दूसरा ‘युगांतरकारी और विद्रोही."

मैक्रों ने फ़्रांस में दूसरे लॉकडाउन की घोषणा की - BBC News हिंदी फैक्ट चेक: फिल्म के दृश्यों को बताया जा रहा है मदरसे में हो रही अश्लीलता की तस्वीरें भारत के डर से IAF पायलट अभ‍िनंदन को छोड़ा था, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री का बयान

21 साल के क्रांतिकारी भगत सिंह की यह टिप्पणी और भी मानीखेज है, "सुभाष बाबू राष्ट्रीय राजनीति की ओर उतने समय तक ही ध्यान देना आवश्यक समझते हैं जितने समय तक दुनिया की राजनीति में हिन्दुस्तान की रक्षा और विकास का सवाल है. लेकिन पंडित नेहरू राष्ट्रीयता के संकीर्ण दायरों से निकलकर खुले मैदान में आ गए हैं."

विचारों का भटकावइमेज स्रोत,netaji research bureauसुभाष और नेहरू में किसका चुनाव किया जाए?भगत सिंह अपना निर्णय सुनाते हैं, "सुभाष आज शायद दिल को कुछ भोजन देने के अलावा कोई दूसरी मानसिक खुराक नहीं दे रहे हैं....इस समय पंजाब को मानसिक भोजन की सख्त ज़रूरत है और यह पंडित जवाहरलाल नेहरू से ही मिल सकता है."

भगत सिंह उनके अंधे पैरोकार बन जाने के ख़िलाफ़ हैं. लेकिन जहाँ तक विचारों का संबंध है, वहां वे उनके साथ लग जाने की सलाह देते हैं ताकि नौजवान इंकलाब के वास्तविक अर्थ, हिन्दुस्तान के इंकलाब की आवश्यकता, दुनिया में इंकलाब के स्थान, आदि के बारे में जान सकें.

नेहरू इसमें नौजवानों की मदद करेंगे कि वे "सोच-विचार कर अपने विचारों को स्थिर करें ताकि निराशा, मायूसी और पराजय के समय में भी भटकाव के शिकार न हों और अकेले खड़े होकर दुनिया से मुकाबले में डटे रह सकें."भावुकतावादी राष्ट्रवादइमेज स्रोत,AFPअपने इस लेख को लिखने के कोई तीन साल बाद भगत सिंह ने फाँसी के फंदे को गले लगाया.

कोई तेरह साल बाद सुभाष का भावुक और संकीर्ण राष्ट्रवाद उन्हें हिटलर तक ले गया. बीसवीं सदी में मानवता के सबसे बड़े अपराधियों में से एक के साथ हाथ मिलाने सुभाष को दुविधा न हुई.भगत सिंह जीवित रहते तो कहते कि मैंने बरसों पहले नौजवानों को सावधान कर दिया था.

भगत सिंह की यह चेतावनी कि नौजवान सुभाष चंद्र बोस के संकरे भावुकतावादी राष्ट्रवाद के विचारों से सावधान रहे, क्या 100 पहले के जवानों के लिए थी, आज के जवानों के लिए नहीं? और पढो: BBC News Hindi »

जिस देश में राजदूत ही नहीं, वहां से उसे वापस बुलाने की बात कर रहे विदेश मंत्री

पाकिस्तान की संसद ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्लाम विरोधी बयान को लेकर सोमवार को निंदा प्रस्ताव पेश किया। इतना ही नहीं विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने फ्रांस से अपने राजदूत वापस बुलाने का भी प्रस्ताव दिया। लेकिन, यहां गौर करने वाली बात यह है कि फ्रांस में पिछले तीन महीने से पाकिस्तान का कोई राजदूत है ही नहीं। | Pakistan National Assembly in a unanimous resolution has asked the government to recall its ambassador to France

वीर शपूत को शत् शत् नमन्। बहरों को सुनाने के लिए एक बार फिर संसद में बम धमाके होंगे। ( भगत सिंह इंकलाब जिंदाबाद! ) सारा हिंदुस्तान आज गुलाम बन रहा है।-सभी किसान बेरोजगार युवा गरीब सब मारे जा रहे हैं। समाचारों में चर्चा हीरोइन के हो रहे हैं। Jai hind भगतसिंह एक सच्चे कान‌‌‌र्तिकारी ‌ थे, उन्होंने बिना किसी लोभ के अपनी आहुति दे दी। उस समय के प्रभावशाली नेता अपनी कीर्ति कम होने के भय से चुप रहे।

AAPKO SALAM AAP HAMARI PRERNA H गांधी वही बनता है जिसकी भगत सिंह बनने की औकात नहीं होती भगतसिंह, चंद्र शेखर आजाद किसान मजदूर परिवारों से थे जो निस्वार्थ आजादी के आंदोलन में कूद पड़े लेकिन आजादी के आंदोलन की राजनीति में शरीफ लोगो का किया काम तभी तो फाँसी के वावजूद भी 2 गज जगह दिल्ली में नही मिली और न भारत रत्न

इस्लाम के दृष्टिकोण से भगत सिंह काफिर थे चुनाचे सजा ए मौत के हकदार दे क्यूंकि भगत सिंह अल्लाह या ईश्वर को नहीं मानते थे मेरे भाग्य को किसी उन्माद का सहारा नहीं चाहिए, मैं यथार्थवादी हूं. -भगत सिंह वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रपब्लिकन एसोसिएशन के मेंबर थे और मार्क्सिस्ट थे। वो कम्युनिस्ट पार्टी का हिस्सा नहीं थे, लेकिन लेनिन, मार्क्स से प्रेरित थे

Jay hind তিনি ও তার বৈপ্লবিক তত্ত্ব অমর ও সমস্ত যুগের উর্দ্ধে। 23 বছর বয়সে ফাঁসি দেওয়া এই ভগত সিংয়ের আজ 113 তম জন্মবার্ষিকী। তিনি ছিলেন বিশ্বের শোষিতদের অন্যতম বৈপ্লবিক নেতা। Salam भगत सिंह जी आप को हमेशा याद किया जाऐगा वे राष्ट्रवादी थी राष्ट्रवाद किसी पार्टी की बपौती नहीं है वीर भगत सिंह हमारे हीरो थे हीरो है और रहेगा आज हम जो आजाद हैं वीर भगत सिंह जी की वजह से ❤❤❤❤

👍👍👍👍👍 salam h inko ब्रह्मसेना की ओर साहस, शौर्य और बलिदान के प्रतीक अमर शहीद सरदार भगत सिंह जी को शत शत नमन💐💐💐💐💐💐💐💐 भगत_सिंह भगत_सिंह_अमर_रहे BhagatsinghJayanti इन्कलाब जिंदाबाद DESH PAR MAR MITNEY WAALEY FAKIR KO .... BESHARM DESH LOOTER .... NAMAN KAR RAHEY HAIN BESHARAMI KE SAATH THE SOULS OF PATRIOTS MUST BE CURSING THEM FROM HEAVENS

नेहरू गांधी का चमचा था और गांधी ने भगत सिंह को मरने दिया। Writer apana perseption glorify kr rha hai yaha... Dushman ka dushman dost hota hai... Subhash babu ko sirf Aajadi chahiyi thi... But neharu ko (Aazadi + Congress adhyaksh padh).... मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है। ~ भगत सिंह जन्मदिवस

जन्मदिन की हार्दिक बधाई ❤️🙏❤️! 💐 श्रद्धांजलि सुना है कि RSS का नाम लेने भर से ही बिदक जाते थे भगत सिंह अब पता नहीं सही सुना है या गलत राम ही जाने एक देशभक्त क्रांतिकारी के साथ- साथ भगत सिंह एक अच्छे लेखक , तर्कवादी इंसान और धरम पर बेबाक टिप्पणी करने वाले नास्तिक थे। इतनी छोटी उम्र ये सब खूबियां उन्हें महान बनाती है। भगत सिंह के विचार , लेखन को सरकार, स्कूली पाठयक्रम में शामिल करे,बिना कांट छांट के तो एक अच्छा कदम होगा।

इतनी कम उम्र में इतनी तेज चिकित्सक बुद्धि के धनी थे महान भगत सींग। काश वे जल्दी न जाते (हमारी भलाई की खातीर). वे एक महान चिंतक थे और बेहद स्पष्ट विचार वाले थे। नमन Jai hind.. He was Atheist and Inspired by Left ideology. ब्रिटिश शासक नीच प्रवृति वाले इंसानों की लुटेरी कौम थी। MODI,YOGI A SUB KYA DESH BHAKT REHGA,DESH BHAKT BHAGAT SINGH.BHAGAT SINGH K NAAM SE HUM LOG KA SEENA 56 INCH KA HOTA HAI.

पहले. दो शक्शियतो ने भारत आजाद करने मे अपना योगदान दिया और तीसरे ने भारत बरबाद करने में ... Jai hind Sab ne apni jaan di ek rss hi thi jinhone angerzo ki gulami ki thi Didn’t like भगत सिंह लेहरू को टुच्चा समझते थे 🤣 Bhagat singh lean towards Marxism in his last days. So technically he became Leftist and Atheist

शहीद भगत सिंह किसी के बारे में चाहे जो सोच रखते थे लेकिन निस्संदेह ओ भारत मां के सच्चे सपूत एवं सच्चे देशभक्त थे और उनका नाम देशभक्तों में सबसे ऊपर लिखा रहेगा जय हिंद नमन है ऐसे वीर सिपाहियो का जिन्होने आजादी के लिए कुर्वानी दी है। प्रार्थना है ऐसे बीर सिपाहियो को ईतिहास मे उचित स्थान दिया जाए, और बताया जाए आजादी विना खड्ग विना ढाल नही बल्कि ऐसे लाखो वीर सपूतो की कुर्वानी से आई है।

समर्पण मातृभूमि के लिए वो सदा सीखा गए जीते जी वो कभी अपने ईमान से ना डिगे आज के हालात के है वो गवाही ऐसे मातृ पुत्र को सदा नमन जिन्होंने खुद की कुर्बानी देके देश की स्वतंत्रता की नींव रखी भारत के पीएम ने एक बार स्कूल नही जा रहे बच्चो के अभिभावको के बारे मे नही बोला जो आठ का फीस कहाॅ से भरे जबकि बच्चा स्कूल गया नही

Bhagat singh ji Nehru ko ghandi ji ka chamcha bolte the 🤓🤓 वीर भगत सिंह हमारे हीरो थे हीरो है और रहेगा आज हम जो आजाद हैं वीर भगत सिंह जी की वजह से ❤❤❤❤🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 आज भगत सिंह पीएम मोदी जैसे पूजीपतिया का कठपुतली पीएम देख सर पीट रहे होंगे 👃⚘

सुशांत सिंह राजपूत की बहन ने शेयर की भाई के बचपन की तस्वीर, कही ये बातश्वेता सिंह कीर्ति ने भाई सुशांत के बचपन की फोटो को शेयर किया है. ये फोटो बहुत क्यूट है और सुशांत इसमें बेहद प्यार लग रहे हैं. देखकर लगता है कि सुशांत इस फोटो को खिंचवाने के लिए 10-12 साल के रहे होंगे. उनकी आंखें सभी का ध्यान खीच रही हैं और उन्हीं आंखों को लेकर श्वेता ने अपना कैप्शन भी लिखा है. श्वेता लिखती हैं- वो चमचमाती आंखें...उसके अन्दर की पवित्रा का प्रतिबिंब है. आजतक को तो बंद कर देना चाहिए The Cute Guy become BiggestCharsi Population of India ? After 10 years what is position ? Kindly thinking about it? Bharat bachana hai , to population ke liye Kuch law banana hoga. Fuck politics Mera bharat mahan 🇮🇳

मनमोहन सिंह, वो राजनेता जिसने बदल दी देश की इकोनॉमी की दशा और दिशापूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज 88 साल के हो गये हैं. इस अवसर पर देश की अर्थव्यवस्था में उनके योगदान की एक बार फिर से चर्चा हो रही है. मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक उदारीकरण और आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है. और मोदी जी को क्या कहा जाता है?🤔 आर्थिक संग्रह का भी .....? नरसिम्हा राव जी, न कि मनमोहन सिंह।

सिंह राशि के लोग मित्र की सहायता से पाएंगे लाभHoroscope Today 28 September 2020, Aaj Ka Rashifal, Daily Horoscope 28 September 2020 in Hindi: कुंभ राशि के लोग खाली समय का आनंद ले सकेंगे। दिन बहुत लाभदायक नहीं है- इसलिए अपनी जेब पर नज़र रखें और ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्चा न करें।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिन; दो साल पहले सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री को लेकर आया था फैसलाआज तीन शख्सियतों का जन्मदिन है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के साथ-साथ भारत के लिए पहला व्यक्तिगत ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले अभिनव बिंद्रा का भी आज जन्मदिन है। | What Is The Significance Of Today? What Famous Thing Happened On This Day In history; शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिन; दो साल पहले सबरीमाला में महिलाओं की इंट्री को लेकर आया था फैसला On Dainik Bhaskar (दैनिक भास्कर) - Bhaskar.com mangeshkarlata तर्क किए बिना किसी बात को आँख बंद के मान लेना भी एक प्रकार की ग़ुलामी है BhagatSingh mangeshkarlata Inqalab zindabad 🙏🙏👍👍👍👍 mangeshkarlata शहीद शिरोमणि भगत सिंह जी को उनकी पावन जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से कोटिशः नमन।

मीडिया कवरेज से परेशान हुईं ड्रग्स केस में फंसी रकुल प्रीत सिंह, अदालत से इस पर रोक लगाने की मांग कीरकुल प्रीत सिंह ने आरोप लगाया है कि मीडिया उनके खिलाफ फेक खबरें चला रहा है,एक्ट्रेस पहले भी हाईकोर्ट जा चुकीं, तब मीडिया ट्रायल के खिलाफ उठाई थी आवाज | Rakul Preet Singh reached Delhi High Court to stop media coverage against herself;सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस से जुड़े ड्रग्स मामले में फंसी एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। Rakulpreet Haaa Rakulpreet केमरे से परेशान हैं वाह वाह

रकुल प्रीत सिंह ने किया दिल्ली हाईकोर्ट का रुख, मीडिया ट्रायल से हुईं परेशानरकुल प्रीत सिंह ने किया दिल्ली हाईकोर्ट की ओर रुख, मीडिया ट्रायल से हुईं परेशान RakulPreetSingh DelhiHighCourt Rakulpreet Rakulpreet Why don't she request to ban media in this country. What she thinks herself to be, queen victoria? Besharm log.