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Lifeexpentancy, Infantmortalityrate

देश में जीवन प्रत्याशा दर बढ़ी, पुरुषों की तुलना में महिलाएं औसतन ज्यादा जी सकती हैं - रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पुरुष औसतन 63 साल से कम जीते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश में शहरी महिला औसतन 81 साल तक जी सकती

28-09-2020 07:37:00

देश में जीवन प्रत्याशा दर बढ़ी, पुरुषों की तुलना में महिला एं औसतन ज्यादा जी सकती हैं - रिपोर्ट LifeExpentancy InfantMortalityRate

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पुरुष औसतन 63 साल से कम जीते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश में शहरी महिला औसतन 81 साल तक जी सकती

1970-75 के बीच ये 49.7 साल थी लेकिन साल 2014-18 के बीच ये बढ़कर 69.4 साल हो गई है। अगर जन्म के एक साल तक बच्चा जीवित रह जाता है तो उसकी जीवन प्रत्याशा दर तीन साल तक बढ़ जाती है। इससे पता चलता है कि कैसे किसी भी देश की जीवन प्रत्याशा दर पर नवजात मृत्युदर का असर पड़ता है।

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ज्यादातर भारतीय 70 साल से ज्यादा जी सकते हैं, अगर वो अपने जीवन के पहले साल को पार कर जाएं। हालांकि छत्तीसगढ़, असम और उत्तर प्रदेश पर ये नियम लागू नहीं होता। यहां बच्चा अपना पहला साल जीने के बाद भी 70 साल तक अपना जीन जीने की संभावना कम रखता है।देश की शहरी महिलाओं में, केरल और उत्तराखंड राज्य की महिलाओं को छोड़कर जीवन प्रत्याशा दर ज्यादा देखी जाती है। इन दोनों राज्यों में ग्रामीण महिलाएं, शहरी महिलाओं की तुलना में ज्यादा जीवन जीती हैं। जम्मू-कश्मीर मेें शहरी महिलाओं की जीवन प्रत्याथा 86.2 साल है, पंजाब में 85.4 साल और हिमाचल प्रदेश में 85.2 साल है।

हिमाचल में शहरी महिलाएं औसतन 80.6 साल जीवन जीती हैं और जो कि ग्रामीण पुरुषों के जीवन प्रत्याशा से 11.4 साल ज्यादा है, ग्रामीण पुरुष औसतन 69.2 साल जीते हैं। वैश्विक दृष्टि से देखें या अपने देश में महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जीवन प्रत्याशा दर रखती हैं।हालांकि ये नियम बिहार और झारखंड में लागू नहीं होता है। उत्तर प्रदेश में महिला और पुरुष के जीवन प्रत्याशा के बीच का अंतर काफी कम है, मात्र एक साल है। जबकि असम और पश्चिम बंगाल में ये अंतर दो साल है। सबसे ज्यादा अंतर हिमाचल प्रदेश में है, जहां महिलाएं, पुरुषों से सात साल ज्यादा जीवन जीती हैं। उत्तराखंड में यह अंतर 6.4 साल और केरल में 5.4 साल है।

एक भारतीय औसतन कितने साल तक जी सकता है? ये एक ऐसा सवाल है, जिसका उत्तर हर किसी के लिए अलग हो सकता है। ये इस पर निर्भर कर सकता है कि आप किस राज्य में रहते हो, शहरी या ग्रामीण इलाकों में रहते हो या फिर आपका लिंग क्या है?विज्ञापन हैं। एक ही देश के नागरिक होने के बाद भी इन दोनों के जीवन जीने की समयसीमा में 18 साल का अंतर है। मतगणना और रजिस्ट्रार जनरल के ऑफिस की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के मुताबिक भारत में जन्म से जीवन प्रत्याशा बढ़ गई है।

1970-75 के बीच ये 49.7 साल थी लेकिन साल 2014-18 के बीच ये बढ़कर 69.4 साल हो गई है। अगर जन्म के एक साल तक बच्चा जीवित रह जाता है तो उसकी जीवन प्रत्याशा दर तीन साल तक बढ़ जाती है। इससे पता चलता है कि कैसे किसी भी देश की जीवन प्रत्याशा दर पर नवजात मृत्युदर का असर पड़ता है।

ज्यादातर भारतीय 70 साल से ज्यादा जी सकते हैं, अगर वो अपने जीवन के पहले साल को पार कर जाएं। हालांकि छत्तीसगढ़, असम और उत्तर प्रदेश पर ये नियम लागू नहीं होता। यहां बच्चा अपना पहला साल जीने के बाद भी 70 साल तक अपना जीन जीने की संभावना कम रखता है।देश की शहरी महिलाओं में, केरल और उत्तराखंड राज्य की महिलाओं को छोड़कर जीवन प्रत्याशा दर ज्यादा देखी जाती है। इन दोनों राज्यों में ग्रामीण महिलाएं, शहरी महिलाओं की तुलना में ज्यादा जीवन जीती हैं। जम्मू-कश्मीर मेें शहरी महिलाओं की जीवन प्रत्याथा 86.2 साल है, पंजाब में 85.4 साल और हिमाचल प्रदेश में 85.2 साल है।

हिमाचल में शहरी महिलाएं औसतन 80.6 साल जीवन जीती हैं और जो कि ग्रामीण पुरुषों के जीवन प्रत्याशा से 11.4 साल ज्यादा है, ग्रामीण पुरुष औसतन 69.2 साल जीते हैं। वैश्विक दृष्टि से देखें या अपने देश में महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जीवन प्रत्याशा दर रखती हैं। और पढो: Amar Ujala »

Bihar Election 2020: बिहार चुनाव में वोट खींच पाएगा मोदी मैग्नेट? देखें खबरदार

आज बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान पूरा हो गया है. बिहार की 71 सीटों पर 53 प्रतिशत वोटिंग हुई है. सबके मन में सवाल है कि आज के मतदान से बिहार का इशारा क्या है? इस वोटिंग की डीटेल आपको देंगे. ये भी बताएंगे कि पहले फेज के मतदान में किस तरह के संकेत मिले हैं. मतदान के प्रतिशत से बिहार के मूड के बारे में क्या पता चलता है. 53 प्रतिशत मतदान में किसका कितना फायदा हो सकता है और कितना नुकसान ये पूरी वोट रिपोर्ट आपको दिखाएंगे. इसके बाद आपको बिहार चुनाव के रैली वाले रण में ले चलेंगे. वहां हो रही धुआंधार रैलियों का संपूर्ण रिपोर्ट कार्ड दिखाएंगे. जंगल राज के युवराज वाले डायलॉग से लेकर पकौड़ा संवाद तक. बिहार की रैलियों में बहुत कुछ हो रहा है. तमाम नेता वोटों की तलाश में भटक रहे हैं. दिग्गज ज़ुबानी फायरिंग कर रहे हैं. पीएम मोदी ने भी ताकत झोंक दी है. सवाल ये भी है कि बिहार में कितने वोट खींच पाएगा पीएम मोदी का मैग्नेट? इसके अलावा देश को आक्रोशित करने वाले हरियाणा के बल्लभगढ़ हत्याकांड को राजनीति और लव जेहाद वाले लेंस से स्कैन करेंगे. देखिए खबरदार, श्वेता सिंह के साथ.

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