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दीदी...ओ...दीदी: हर चुनावी रैली में यह रट क्यों लगा रहे हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी? जानिए क्या है वजह

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की कोई भी जनसभा सुन लीजिए। प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का

12-04-2021 20:30:00

दीदी...ओ...दीदी: हर चुनावी रैली में यह रट क्यों लगा रहे हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी? जानिए क्या है वजह WestBengal AssemblyElection2021 WestBengalElection2021 MamataOfficial BJP4India INCIndia ECISVEEP AmitShah

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की कोई भी जनसभा सुन लीजिए। प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का

पश्चिम बंगाल में पहले चरण से चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज के लिए गए पंकज सिन्हा कहते हैं कि हिन्दी भाषी, दूसरे राज्यों से गए लोगों की प्रधानमंत्री की जनसभा में संख्या ठीक-ठाक होती है। पंकज के मुताबिक हिन्दी पट्टी से गए लोग पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लोगों से परेशान हैं। इसलिए जब प्रधानमंत्री दीदी...दीदी कहते हैं तो हिन्दी पट्टी से लेकर तृणमूल कांग्रेस की राजनीति से निराश लोगों को काफी खुशी होती है। बताते हैं कि जनसभा में बीच-बीच में भाजपा के कार्यकर्ता और अन्य लोगों से नारे लगवाकर वह उत्साह बढ़ाते हैं।

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तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता सरकार में मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री को राज्य की जनता जवाब देगी। उनके यह बोल अब लोगों में चिढ़ पैदा कर रहे हैं। सुब्रत मुखर्जी का कहना है कि एक देश के प्रधानमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती। इसका जवाब उन्हें दो मई को मिल जाएगा।

ममता सरकार के एक अन्य मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री की इस भाषण शैली पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। दीदी कहकर चिकोटी काटने वाली रट लगाने का सवाल आपको प्रधानमंत्री से पूछना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि क्या यही महिलाओं का सम्मान है? पार्थ चटर्जी कहते हैं कि उन्हें कहने दीजिए। दो मई के बाद हम सरकार बनाने जा रहे हैं। टीएमसी के अन्य नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री जिस तरीके से भाषण देते हैं, बहुत तकलीफ होती है। वह इसके जरिए अपने पूरे व्यक्तित्व की झलक दिखाते हैं। headtopics.com

अरुण कोचगवे और विनीत सान्याल मूलत: बंगाल के ही है। दोनों का कहना है कि प्रधानमंत्री के दीदी कहने और भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा जयश्री राम का नारा लगाने से तीन लोगों को चिढ़ पैदा होती है। इस नारे से चिढ़ कुछ महीने पहले ममता बनर्जी के प्रतिक्रिया देने के बाद तेजी से बढ़ी है।

भाजपा को हो सकता है नुकसान : कोचगवेकोचगवे कहते हैं कि इससे राज्य का अल्पसंख्यक, तृणमूल का कार्यकर्ता, नेता और तृणमूल का साथ देने वाले बंगाल मूल के लोग चिढ़ते हैं। हालांकि सान्याल का कहना है कि इससे भाजपा को जितना फायदा होगा, उससे अधिक नुकसान हो सकता है। क्योंकि सभ्य बंगाली समाज में इस तरह के व्यवहार की अधिक गुंजाइश नहीं रहती। वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि प्रधानमंत्री और केन्द्रीय गृहमंत्री के भाषण को आप ध्यान से सुनिए। खुद समझ में आएगा। दोनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को न केवल चिढ़ाकर प्रवोक (भड़काने की कोशिश) करते हैं, बल्कि इसके सहारे लोगों तक पहुंचना भी चाह रहे हैं।

शांतनु कहते हैं कि प्रधानमंत्री की पश्चिम बंगाल में फॉलोइंग है। उनकी जनसभा में भीड़ भी होती है। वह और अमित शाह पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में पर्याप्त समय दे रहे हैं। कुल मिलाकर मकसद मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़कर ममता बनर्जी और तृणमूल को नुसकान पहुंचाना ही है। झारखंड और दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक दल की टीम के लिए चुनाव विशेषज्ञ यानी सेफालॉजिस्ट के तौर पर काम करने वाले सूत्र का कहना है कि यह राजनीतिक दल के नेताओं के संवाद का अपना-अपना तरीका है। इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी।

सूत्र का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का सीधा हमला बोलने का एक तरीका है, लेकिन यह गुजरात विधानसभा चुनाव के अलावा कहीं नहीं चल पा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के सलाहकारों ने उन्हें कुछ समझ दी होगी और वह नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलने के बोलने के बजाय मुद्दों पर ज्यादा केन्द्रित हो गए। headtopics.com

जवाबदेही से बच नहीं सकता चुनाव आयोग, अप्रैल की शुरुआत में कोविड के दैनिक मामले पहुंच गए थे एक लाख के पार AAP के पूर्व विधायक जरनैल सिंह का निधन, CM अरविंद केजरीवाल ने जताया शोक मोदी के मंत्री बोले- कुछ चीज़ें नियंत्रण से बाहर हैं...क्या हम फांसी लगा लें? - BBC Hindi

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा बैटिंग कर रही थी तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया ने जनता में अपनी छवि का ख्याल रखकर संतुलित रास्ते को चुन लिया।बताते हैं भाजपा को झारखंड, दिल्ली दोनों को याद रखना चाहिए। मेरे विचार में चुनाव के दौरान नेताओं का संवाद बड़ा असर डालता है। यह ठीक उसी फार्मूले पर होता है कि आप किसी के साथ बुरा व्यवहार करके अपनी छवि को अच्छा नहीं बना सकते। इससे विरोधी पक्ष को सहानुभूति मिलने की पूरी संभावना रहती है।

विस्तारआप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सिलिगुड़ी या नाम लिए बिना हुए उन्हें हर दूसरी-तीसरी लाइन में दीदी....दीदी....ओ दीदी....अरे दीदी कहकर संबोधित करते नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री व्यंग्य, तंज से लेकर कई अंदाज में दीदी को निशाने पर लेते हैं। आइये जानते हैं कि प्रधानमंत्री ऐसी रट बार बार क्यों लगा रहे हैं?

विज्ञापनपश्चिम बंगाल में पहले चरण से चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज के लिए गए पंकज सिन्हा कहते हैं कि हिन्दी भाषी, दूसरे राज्यों से गए लोगों की प्रधानमंत्री की जनसभा में संख्या ठीक-ठाक होती है। पंकज के मुताबिक हिन्दी पट्टी से गए लोग पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लोगों से परेशान हैं। इसलिए जब प्रधानमंत्री दीदी...दीदी कहते हैं तो हिन्दी पट्टी से लेकर तृणमूल कांग्रेस की राजनीति से निराश लोगों को काफी खुशी होती है। बताते हैं कि जनसभा में बीच-बीच में भाजपा के कार्यकर्ता और अन्य लोगों से नारे लगवाकर वह उत्साह बढ़ाते हैं।

प्रधानमंत्री को ऐसा बोलना शोभा नहीं देता : सुब्रत मुखर्जीतृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता सरकार में मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री को राज्य की जनता जवाब देगी। उनके यह बोल अब लोगों में चिढ़ पैदा कर रहे हैं। सुब्रत मुखर्जी का कहना है कि एक देश के प्रधानमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती। इसका जवाब उन्हें दो मई को मिल जाएगा। headtopics.com

क्या यही है महिला का सम्मान: पार्थ चटर्जीममता सरकार के एक अन्य मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री की इस भाषण शैली पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। दीदी कहकर चिकोटी काटने वाली रट लगाने का सवाल आपको प्रधानमंत्री से पूछना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि क्या यही महिलाओं का सम्मान है? पार्थ चटर्जी कहते हैं कि उन्हें कहने दीजिए। दो मई के बाद हम सरकार बनाने जा रहे हैं। टीएमसी के अन्य नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री जिस तरीके से भाषण देते हैं, बहुत तकलीफ होती है। वह इसके जरिए अपने पूरे व्यक्तित्व की झलक दिखाते हैं।

ममता के खिलाफ नाराज लोगों पर है पीएम की नजरअरुण कोचगवे और विनीत सान्याल मूलत: बंगाल के ही है। दोनों का कहना है कि प्रधानमंत्री के दीदी कहने और भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा जयश्री राम का नारा लगाने से तीन लोगों को चिढ़ पैदा होती है। इस नारे से चिढ़ कुछ महीने पहले ममता बनर्जी के प्रतिक्रिया देने के बाद तेजी से बढ़ी है।

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भाजपा को हो सकता है नुकसान : कोचगवेकोचगवे कहते हैं कि इससे राज्य का अल्पसंख्यक, तृणमूल का कार्यकर्ता, नेता और तृणमूल का साथ देने वाले बंगाल मूल के लोग चिढ़ते हैं। हालांकि सान्याल का कहना है कि इससे भाजपा को जितना फायदा होगा, उससे अधिक नुकसान हो सकता है। क्योंकि सभ्य बंगाली समाज में इस तरह के व्यवहार की अधिक गुंजाइश नहीं रहती।

बंगाल को चिढ़ा रहे पीएम: शांतनु बनर्जीवरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि प्रधानमंत्री और केन्द्रीय गृहमंत्री के भाषण को आप ध्यान से सुनिए। खुद समझ में आएगा। दोनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को न केवल चिढ़ाकर प्रवोक (भड़काने की कोशिश) करते हैं, बल्कि इसके सहारे लोगों तक पहुंचना भी चाह रहे हैं।

शांतनु कहते हैं कि प्रधानमंत्री की पश्चिम बंगाल में फॉलोइंग है। उनकी जनसभा में भीड़ भी होती है। वह और अमित शाह पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में पर्याप्त समय दे रहे हैं। कुल मिलाकर मकसद मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़कर ममता बनर्जी और तृणमूल को नुसकान पहुंचाना ही है।

किसी के साथ बुरा बर्ताव करके अच्छी छवि नहीं बना सकते : विशेषज्ञझारखंड और दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक दल की टीम के लिए चुनाव विशेषज्ञ यानी सेफालॉजिस्ट के तौर पर काम करने वाले सूत्र का कहना है कि यह राजनीतिक दल के नेताओं के संवाद का अपना-अपना तरीका है। इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी।

सूत्र का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का सीधा हमला बोलने का एक तरीका है, लेकिन यह गुजरात विधानसभा चुनाव के अलावा कहीं नहीं चल पा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के सलाहकारों ने उन्हें कुछ समझ दी होगी और वह नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलने के बोलने के बजाय मुद्दों पर ज्यादा केन्द्रित हो गए।

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा बैटिंग कर रही थी तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया ने जनता में अपनी छवि का ख्याल रखकर संतुलित रास्ते को चुन लिया।बताते हैं भाजपा को झारखंड, दिल्ली दोनों को याद रखना चाहिए। मेरे विचार में चुनाव के दौरान नेताओं का संवाद बड़ा असर डालता है। यह ठीक उसी फार्मूले पर होता है कि आप किसी के साथ बुरा व्यवहार करके अपनी छवि को अच्छा नहीं बना सकते। इससे विरोधी पक्ष को सहानुभूति मिलने की पूरी संभावना रहती है।

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महासंकट में भारतीय सेना का कमिटमेंट, क्या Corona की त्रासदी से बचाएगी सेना? देखें खबरदार

देश पर महासंकट के बीच कुछ राहत की खबर ये है कि दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ जैसे कुछ राज्यों में रोजाना के केस कुछ कम हुए हैं. हालांकि ये बात भी सच है कि जहां 18 से 19 लाख टेस्ट रोज हो रहे थे, वहां रविवार को सिर्फ 15 लाख टेस्ट हुए. अब भी बहुत बड़ी चुनौती इसलिए है, क्योंकि 12 राज्य ऐसे हैं, जहां एक्टिव केस 1 लाख से भी ज्यादा हैं. इस चुनौती के साथ बड़ा सवाल ये है कि देश का आक्सीजन संकट कब खत्म होगा. खासतौर पर दिल्ली में जो हाहाकार मचा है. उसमें हर कोशिश नाकाम क्यों हो रही हैं. आज भी कई अस्पतालों से ऑक्सीजन के लिए इमरजेंसी मैसेज आए. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से सेना की मदद लेने को कहा था. दिल्ली सरकार ने रक्षा मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है. जिसमें ऑक्सीजन सप्लाई के लिए सेना के संसाधन लगाने और बेड्स के लिए अस्थाई अस्पताल बनाने की मांग है. दिल्ली सरकार की मांग पर रक्षा मंत्रालय विचार कर रहा है. सेना अपनी पूरी ताकत से कैसे दिल्ली और देश की मदद कर सकती है. सेना की तैयारी क्या है? वहीं आज सरकार ने कोरोना जांच के लिए सीटी स्कैन पर लोगों को आगाह किया है. देखें खबरदार.

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