दिल्ली हिंसा: जस्टिस एस. मुरलीधर क्यों चर्चा में हैं?

दिल्ली हिंसा: जस्टिस एस. मुरलीधर क्यों चर्चा में हैं?

2/26/2020

दिल्ली हिंसा: जस्टिस एस. मुरलीधर क्यों चर्चा में हैं?

जस्टिस एस. मुरलीधर अपने फ़ैसलों को लेकर काफ़ी चर्चित रहे हैं और बीते हफ़्ते उनके तबादले को लेकर भी सवाल उठे थे.

ये एक्सटर्नल लिंक हैं जो एक नए विंडो में खुलेंगे शेयर पैनल को बंद करें इमेज कॉपीरइट Image caption दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर दिल्ली में भड़की हिंसा और पीड़ितों के ज़रूरी इलाज को लेकर मंगलवार देर रात दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर के घर में सुनवाई हुई. जस्टिस एस मुरलीधर के आवास में हुई इस सुनवाई में जस्टिस अनूप भंभानी भी शामिल थे. मानवाधिकार मामलों की वकील सुरूर मंदर के द्वारा दाख़िल की गई इस याचिका की सुनवाई जस्टिस एस मुरलीधर के आवास पर हुई थी. सुरूर मंदर ने अपनी याचिका में कोर्ट से दरख़्वास्त की थी कि दिल्ली पुलिस ये सुनिश्चित करे कि मुस्तफ़ाबाद के अल-हिंद अस्पताल से घायलों को जीटीबी अस्पताल और दूसरे सरकारी अस्पतालों में ले जाया जा सके ताकि उन्हें उनका इलाज हो सके. जस्टिस मुरलीधर के आवास में देर रात लगभग 12:30 पर इस मामले की सुनवाई हुई. दिल्ली हिंसा मामले में बुधवार दोपहर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच ने की. चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं. पोस्ट यूट्यूब समाप्त BBC News Hindi भड़काऊ भाषणों के मामले में कपिल मिश्रा समेत दूसरे नेताओं के ख़िलाफ़ एक्शन ना लेने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर से कहा कि वो जाकर अपने कमिश्नर को बता दें कि अदालत बहुत नाराज़ है. हाई कोर्ट ने कहा कि बीजेपी के तीन नेताओं अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा पर एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अन्य वीडियो के आधार पर भी एफ़आईआर दर्ज की जाए. अदालत ने कहा कि पुलिस इस मामले में गुरुवार को अदालत को बताए कि कितनी प्रगति हुई है. अदालत ने कहा कि इन्हीं तरीक़ों से शांति बहाल की जा सकती है. मामले की सुनवाई दो जजों वाली बेंच ने की. इस बेंच की अध्यक्षता जस्टिस एस मुरलीधर ने की. अदालत ने कहा, ''हम नहीं चाहते कि दिल्ली की हिंसा 1984 के दंगे का रूप ले ले.'' इमेज कॉपीरइट Getty Images कौन हैं जस्टिस एस. मुरलीधर? जस्टिस एस. मुरलीधर काफ़ी चर्चित रहे हैं. बीते हफ़्ते उनके तबादले को लेकर भी सवाल उठ रहे थे और वकीलों ने इसके विरोध में 20 फ़रवरी को प्रदर्शन भी किया. जस्टिस एस. मुरलीधर का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में किया जा रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने एक रेजोल्यूशन पास करके उनके तबादले का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के इस फ़ैसले पर नाराज़गी ज़ाहिर की. दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित माथुर ने कहा कि जस्टिस एस. मुरलीधर काफ़ी वरिष्ठ हैं और उनका तबादला जिस तरह किया जा रहा है वो अनुचित है. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''हम लोगों ने एक रेजोल्यूशन पास किया था. अगर आप एक जज का तबादला कर रहे हैं तो उसमें कुछ चीज़ों का ख्याल रखना चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठता के मामले में जस्टिस मुरलीधर तीसरे नंबर पर हैं. इतने वरिष्ठ जज का ट्रांसफ़र जब होता है तो आप उन्हें किसी राज्य में चीफ़ जस्टिस बनाकर भेजें लेकिन आप उन्हें यूहीं जज बना रहे हैं, दूसरे राज्य में. हमें इस बारे में सूचित किया जाना चाहिए था और उनके तबादले को लेकर चर्चा की जानी चाहिए थी. कॉलेजियम ने बिना किसी वजह के उनका इस तरह तबादला करने का फ़ैसला ले लिया.'' इमेज कॉपीरइट Image caption जस्टिस एस. मुरलीधर जस्टिस मुरलीधर के तबादले को लेकर पहले भी चर्चाएं उठी. ऐसी ख़बरें आई थीं कि दिसंबर 2018 में उनका तबादला करने पर विचार किया जा रहा था. दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़, जस्टिस एस. मुरलीधर ने सितंबर 1984 में चेन्नई में वकालत शुरू की. साल 1987 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत करना शुरू किया. एस. मुरलीधर दो बार सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सक्रिय सदस्य रहे. एस. मुरलीधर बिना किसी फीस के लोगों के केस लड़ने के लिए चर्चित रहे हैं इनमें भोपाल गैस त्रासदी और नर्मदा बांध पीड़ितों के केस भी शामिल हैं. कई जनहित याचिकाओं के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें न्याय मित्र बनाया. एस. मुरलीधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और भारतीय निर्वाचन आयोग के सलाहकार भी रहे हैं. साथ ही दिसंबर 2002 से मई 2006 तक वो लॉ कमिशन के पार्ट टाइम सदस्य भी रहे हैं. साल 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया. जस्टिस एस. मुरलीधर को साल 2003 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री मिली. उन्होंने साल 2004 में 'लॉ, पॉवर्टी एंड लीगल एड: एक्सेस टु क्रमिनिल जस्टिस' नाम की एक किताब भी लिखी है. इमेज कॉपीरइट Getty Images जस्टिस मुरलीधर और उनके कड़े फैसले जस्टिस एस. मुरलीधर 1984 में हुए सिख दंगों में शामिल रहे सज्जन कुमार के मामले में भी फ़ैसला सुनाने वालों में से एक थे. साल 2009 में नाज फ़ाउंडेशन के मामले की सुनवाई करने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच में जस्टिस मुरलीधर भी शामिल थे जिसने पहली बार समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था. साल 2018 में उन्होंने कई बड़े फ़ैसले सुनाए. इनमें गौतम नवलखा समेत कई एक्टिविस्ट को माओवादियों से संबंध होने के मामले में ज़मानत देना भी शामिल है. इसके अलावा साल 1987 में हुए हाशिमपुरा नरसंहार मामले में भी उन्होंने दोषियों को सज़ा दी थी. जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने आईपीसी के तहत पीएसी के 16 पूर्व पुलिसकर्मियों को हत्या, अग़वा, आपराधिक साज़िश और सबूतों को मिटाने का दोषी पाया था और उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. दिल्ली हिंसा: सुनवाई करने वाले दूसरे जज कौन हैं? इमेज कॉपीरइट और पढो: BBC News Hindi

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सरकार बेशर्मी के साथ साथ नंगई पर भी उतर आई है, जो ज़रा सा भी सरकारी दंगेपन के ख़िलाफ़ खडे होने की हिम्मत दिखायेगा वो या तो मार दिया जायेगा या ट्रांसफ़र कर दिया जायेगा । जस्टिस मुरलीधर जिन्दा बाद जिन्दा बाद जस्टिस एस मुरलीधरन अपना कर्तव्य निभा रहे है। BBC Babu It is easy to give sermon but difficult to face bullet death like police men How many advocates journalists n judges have died like police men serving people or nation Can u tell us

ISLIYEA CHARCHA MEIN HAI KIYUNKI YE BBC NDTV QUINT ALTNEWS KE JAAT BHAI NIKLE HAI कोई भी नेता के ऊपर टिप्पणी करो और सुर्खियों में आओ। Collegium proposes transfer of Justice S Muralidhar from Delhi to Punjab and Haryana HC. Bcoz usne court me jhoot Bola usne video nhi dkha Kapil Mishra ka

मोदी की जीनियस बताने में जस्टिस मिश्रा कहां चूक गए?अतीत में कई फ़ैसलों में सुप्रीम कोर्ट सरकारों के फ़ैसलों को पलटते हुए अपनी स्वतंत्रता का प्रदर्शन किया है. You are getting worst every day. BBC needs to be ignored & banned but I will not recommend as I believe in freedom of press. Even Trump praised him all the time in his two days visit. But definitely ur loosing credibility in India. Be BBC tere picchwade me kya ghusa? 😠😠😠 Mirchi hahaha amitmalviya TajinderBagga

SC के 6 जज स्वाइन फ्लू की चपेट में, जस्टिस चंद्रचूड़ ने दी जानकारीजस्टिस चंद्रचूड़ ने पुष्टि की है कि 6 जज H1N1 वायरस से पीड़ित हैं. उन्होंने चीफ जस्टिस से सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाले व्यक्तियों के टीकाकरण के लिए निर्देश जारी करने को कहा. बाद में चीफ जस्टिस ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एससीबीए अध्यक्ष के साथ बैठक बुलाई. जब इंसाफ नहीं होगा तो ऐसी ही बीमारी से तड़प आएंगे हमारे देश के जज अच्छा हुआ, वैसे भी कोनसा काम करते थे। बेचारी निर्भया आज भी न्याय का इंतजार कर रही है। निर्भया_के_दोषियों_को_फाँसी_दो kam se kam topi pehnane wale kuch to kam ho

Justice Deepak Gupta: लोकतंत्र में सरकार का विरोध गलत नहीं: जस्टिस दीपक गुप्ता - justice deepak gupta says dissent is not wrong democracy | Navbharat TimesIndia News: सुप्रीम कोर्ट के न्यायादीश दीपक गुप्ता ने लोकतंत्र में आलोचना के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने सरकार के कदम के विरोध को भी अधिकार बताया है। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि जब लगे कि सरकार का कोई कदम गलत है तो नागरिकों को उसका विरोध करने का अधिकार है। Morning walk naa jaiyo. इतने दंगे होने के बाद याद आई इनको। लेकिन सर दंगा करने नहीं

दिल्ली: 7 लोगों की हुई मौत, CAA पर हिंसा की सबसे DISTURBING फोटो - trending clicks AajTakनागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध और समर्थन को लेकर सोमवार को दिल्ली में हिंसा भड़क उठी. उत्तरी पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में Ye disturbing ha Or jo puri dekhi me ho raha ha vo kya ha,,, jo kisi photo or video me nhi ha,,, Log darr k saye me jee rhe hain 😡😡 इसको दंगा बोलता हैं हिंसक झड़प नहीं दिल्ली में दंगाइयों ने पीटते और घरों में तोडफ़ोड़ करते वक्त General ,OBC, SC ST में कोई भेदभाव नहीं किया।

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दंगल: CAA पर संग्राम से 'जख्मी' दिल्ली, जिम्मेदार कौन?नागरिकता कानून संशोधन (CAA) को लेकर शुरू हुए बवाल से उत्तर पूर्वी दिल्ली में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सोमवार से जारी हिंसा में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है. मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में आज (मंगलवार) भी पत्थरबाजी हुई. दिल्ली हिंसा में अबतक मरने वाले 9 लोगों में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल भी शामिल हैं. दंगल में आज इसी पर चर्चा होगी कि CAA पर हिंसा की आग का कौन है जिम्मेदार? ashutosh83B sambitswaraj sardanarohit ayhi to chahetaihe vampanthi liberandu desh ka nam internatoional me badnam ho wo kardikhaya ashutosh83B sambitswaraj sardanarohit ये आशुतोष चूतिया किस एंगल से राजनीतिक विश्लेषक लगता है ..जो इसे हर डिबेट में विश्लेषक के तौर पर बैठा देते हो ashutosh83B sambitswaraj sardanarohit रजाई_मीडिया को अंतरराष्ट्रीय मीडिया से इतना डर क्यों लगता है मीडिया तो अपना काम करेगा ना।



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