दिल्ली दंगे: क्या सरकारें वाकई सबक लेंगी?

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संदर्भ : बहुसंख्यक समुदाय के पूर्वाग्रहों को पोषित करने पर धार्मिक विभाजन को गहरा होने से रोकना असंभव है #Opinion #Columnist #DelhiRiot2020 @sardesairajdeep

Opinion, Columnist

28.2.2020

संदर्भ : बहुसंख्यक समुदाय के पूर्वाग्रहों को पोषित करने पर धार्मिक विभाजन को गहरा होने से रोकना असंभव है Opinion Columnist DelhiRiot2020 sardesairajdeep

बहुसंख्यक समुदाय के पूर्वाग्रहों को पोषित करने पर धार्मिक विभाजन को गहरा होने से रोकना असंभव है | Delhi Riots: Will Governments Really Take Lessons? यदि ऐसा होता तो वह शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता निकालते, उन्हें एंटी नेशनल नहीं करार देते। यदि सच में ऐसा होता तो वह समझते कि मुस्लिम विरोधी घृणा हिंदुत्व वोट बैंक तो दिला सकती है पर समाज का उस हद तक ध्रुवीकरण कर देगी जहां से लौटना असंभव है।(यह लेखक के अपने विचार हैं।)

राजदीप सरदेसाई Feb 28, 2020, 02:50 AM IST यह सोशल मीडिया पर भड़काऊ शोर-शराबे का दौर है। दिल्ली में कपिल मिश्रा जैसे एक मामूली राजनेता ने उत्तेजक और भड़काऊ टिप्पणियों के जरिये खबरों में बने रहने का हुनर सीख लिया है। मिश्रा जो किसी वक्त आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री हुआ करते थे, फिलहाल भाजपा के साथ हैं। उन पर आरोप है उस आग को भड़काने का जिसने देश की राजधानी को अपने आगोश में ले रखा है। उन्होंने सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को धमकी दी थी कि या तो वे प्रदर्शन बंद कर दें या खामियाजा भुगतें। यह धमकी उन्होंने एक सीनियर पुलिस अफसर के पास खड़े होकर दी थी, जो हैरानी वाली बात है। यह राजनेता और पुलिस की मिलीभगत का खुलासा करता है और बेहद परेशान करने वाला है। याद कीजिए ये वही कपिल मिश्रा है, जिन्होंने दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान वोट बटोरने की साजिश में सांप्रदायिक टिप्पणी करते हुए चुनावों को भारत बनाम पाकिस्तान की जंग करार दिया था। उस वक्त चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन अब दिल्ली में हिंसा के मद्देनजर उनके संदिग्ध व्यवहार की जांच की जानी चाहिए। मिश्रा मुसीबत खड़ी करने वाले अकेले नहीं। पिछले हफ्ते मजलिस ए एतिहाद अल मुसलमीन के मुंबई के एक स्थानीय नेता ने सीएए विरोधी प्रदर्शन के मद्देनजर चेतावनी दी थी कि कैसे उनके 15 करोड़ बाकी 100 करोड़ पर भारी पड़ेंगे। ऐसे आग लगाने वाले बयानों ने जमीनी स्तर पर सांप्रदायिक रिश्तों में जहर भरने का काम किया है। इसके चलते जो ज्वालामुखी फूटा है, उससे दिल्ली दंगों में करीब तीन दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा घायल हैं। यह साफ है कि ये दंगे होने के इंतजार में थे, उस एक महीने की घृणित बयानबाजी के बाद जिसने समुदायों में डर, नाराजगी और गुस्सा भर दिया। जब शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को गद्दार यानी एंटी नेशनल कहा जाता है, जब सरकार का मंत्री और उन्हें उकसाने वाले कहते हैं कि उन्हें गोली मार दी जानी चाहिए तो वह नफरत फूट पड़ने के बीज बोने जैसा है। जब एक प्रोपेगंडा मशीन बहुतायत मीडिया की सहायता से बहुसंख्यक समुदाय के घटिया पूर्वाग्रहों को पोषित करती है तो जमीनी स्तर पर धार्मिक विभाजन को गहरा होने से रोकना असंभव है। देखा जाए तो नफरत का लावा विस्फोट के इंतजार में उबल रहा था। पिछले रविवार को सीएए के समर्थक और विरोधियों के बीच हुआ संघर्ष आग भड़काने के लिए एक ट्रिगर भर था। सरकार को इस संभावित खतरे का अंदाजा नहीं था ये और ज्यादा हैरानी वाली बात है। सरकारी तंत्र को शायद जान-बूझकर या फिर किसी और वजह से सोते हुए पकड़ा गया है। यह तब होना, जब एक हाईप्रोफाइल अमेरिकी राष्ट्रपति आए हुए थे और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। निश्चित ही नरेंद्र मोदी सरकार जो आखिरी बात चाहेगी वह यह कि उसके तड़क-भड़क वाले सेरेमोनियल समारोह को सड़कों पर धार्मिक हिंसा से ढंक दिया जाए। ट्रंप और मोदी जब हैदराबाद हाउस के सुुविधाजनक माहौल में धार्मिक स्वतंत्रता पर बात कर रहे थे, तब नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के मोहल्ले धार्मिक नफरत की आग में जलने लगे थे। दो बड़ी आदमकद राजनीतिक हस्तियों की राजधानी में मौजूदगी का वीवीआईपी नशा और सड़कों पर गुस्से एवं उन्माद के बीच विरोधाभास से ज्यादा भड़कीला कुछ नहीं हो सकता। यही वजह है कि स्थिति पर काबू पाने में सरकारी मशीनरी की असफलता की गहन जांच होनी चाहिए। यह प्रशासनिक नियम पुस्तक का सबसे पुराना कायदा है कि किसी भी दंगे को बिना किसी प्रशासनिक अक्षमता या पेचीदगी के 48 घंटे से ज्यादा उबलने नहीं दिया जाए। पहले दिन सड़कों पर जारी हिंसा पर काबू पाने के लिए दिल्ली पुलिस की मौजूदगी बेहद कम, कमजोर और बिना तैयारी की थी। दूसरे दिन इस बात को साबित करने के लिए काफी वीडियो और सबूत हैं जो बताते हैं कि पुलिस ने मजबूती के साथ एक्शन लेने की जगह शर्मनाक तरीके से एक समुदाय विशेष का पक्ष लिया। पुलिस फोर्स का यूं सांप्रदायिक होना नया नहीं है। हर बड़े दंगे में बेेखौफ और बिना पक्ष लिए कानून व्यवस्था लागू करवाने को लेकर पुलिस की भूमिका संदिग्ध ही रही है, 1984 में दिल्ली दंगों से लेकर आज तक। इन दिनों पुलिस पूरी तरह सत्तारूढ़ दल के साथ ही है। तबादलों और पोस्टिंग का पूरा सिस्टम ही राजनीति की सनक और पसंद से तय होता है। यही वजह है कि पुलिस हेडक्वार्टर और गृह मंत्रालय को कुछ कठिन सवालों का जवाब देना होगा। हिंसा के पहले दिन ही पर्याप्त पुलिस बल क्यों नहीं पहुंचा? किसने पुलिस को यह अनुमति दी कि वह दंगों के दूसरे दिन एक तरफा होकर काम करे? अक्षमता और पेचीदगी का यह खतरनाक मिश्रण यूं ही निर्विरोध नहीं चल सकता। तथ्य यह है कि नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में एक समुदाय द्वारा चलाए कुछ सीएए विरोधी प्रदर्शन हथियारबंद अपराधी गैंग के साथ मिलकर हिंंसक हो गए। और इसे स्थानीय संगठनों को जवाबी कार्रवाई की अनुमति देने के लिए पर्याप्त कारण समझा गया। नतीजा, आम हिंदू और मुसलमान पड़ोसी अब बंट चुके हैं, डरे हुए हैं, उन्हें जिंदगियों और संपत्तियों का नुकसान हुआ है। चांद बाग के एक पीड़ित ने मुझे कहा भी, नेता आग शुरू करते हैं और आम आदमी जल जाता है। असली चिंता यह है कि नॉर्थ ईस्ट दिल्ली सिर्फ एक ट्रेलर हो सकता है जो ज्यादा समय नहीं लेगा ऐसी ही हिंसा बाकी इलाकों में फैलाने के लिए। कम ही उम्मीद है कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने इससे सबक लिया हो या वह धार्मिक बंटवारे को मिटाना चाहते हों। यदि ऐसा होता तो वह कपिल मिश्रा पर कार्रवाई करते, न कि उनके भड़काऊ भाषणों को दोहराते। यदि ऐसा होता तो वह शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता निकालते, उन्हें एंटी नेशनल नहीं करार देते। यदि सच में ऐसा होता तो वह समझते कि मुस्लिम विरोधी घृणा हिंदुत्व वोट बैंक तो दिला सकती है पर समाज का उस हद तक ध्रुवीकरण कर देगी जहां से लौटना असंभव है।(यह लेखक के अपने विचार हैं।) और पढो: Dainik Bhaskar

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sardesairajdeep Selective narrative , sirf hindu hi गुनेहगार दिखाई देते है आप को sardesairajdeep sardesairajdeep पत्रकार है मुझे तो लगता... निष्पक्षता नहीं पत्रकार nahi sardesairajdeep Who is responsible for this, people like Swara bhaskar sardesairajdeep जब तक आपके जैसे दलाल वरिष्ठ पत्रकारों का प्रॉपेजेंडा प्रबल रहेगा तब तक तो असम्भव सा लगता है।

sardesairajdeep Abe gadhe ye sab gyan tu bjp ke alava sabko de. All parties other than BJP works on vote bank politics sardesairajdeep You can never straighten dog’s tail. sardesairajdeep तो क्या बहुसंख्यक हमेशा पीड़ित रहे? आप जैसे दोगले मीडिया और पत्रकार तो यही चाहते हैं। sardesairajdeep Dainik Bhaskar & Rajdeep are professional brothers. Dono Congressi Bhand jo Thahre🤣🤣🤣 On a serious note, stopped smoking Bhaskar recently. Appeal: pls bycottDainikBhaskar both print and digital versions

sardesairajdeep Viewers sardesairajdeep वरिष्ठ नही दंगा पत्रकार

'ऐसा तो तो 80 के दशक की बी ग्रेड फिल्मों में होता था'Delhi Riots: दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस एस मुरलीधर ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल्ली में दूसरा '1984' नहीं होने देंगे। इससे पहले उन्होंने दिल्ली पुलिस को बीजेपी नेताओं के वीडियो दिखाते हुए फटकार भी लगाई थी। आधी रात को जस्टिस मुलिधर् का दिल्ली हाईकोर्ट से बाहर ट्रांसफर कर लोकतंत्र को मोदी में मजाक बना दिया। जस्टित मुरलीधर आज दिल्ली पुलिस पर सुनवाई करने वाले थे। आज लोकतंत्र की हत्या हुई साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि 2020 3 दिन के दिल्ली दंगे 2002 गुजरात दंगे की तर्ज पर प्रयोजित थे।

sardesairajdeep Boycott dainik bhaskar maine apne paper wale se kh diya 1st date se ye nhi dalna ye sirf ek trfa dikhata hai sardesairajdeep आदरणीय दैनिक भास्कर बहुत दिन से मैं ये देख रहा हु की पहले आप का अखबार निष्पक्ष हुवा करता था किंतु अब यह लगता है कि आप का अखबार अब तुस्टीकरण कर रहा है और हिन्दू विरोधी या हिन्दू धर्म को गाली देने वाले लोगो को प्राथमिकता दे रहा है ,अतः मैं आज से आप का अखबार मंगवाना बन्द कर रहाहु

sardesairajdeep बहुसंख्यक समाज किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं है। उसकी आशंकाएं, भय व असुरक्षा इतिहास पोषित है जिसकी जड़ों को जेहादी तत्व व उसके बौद्धिक समर्थक सिंचित कर रहे हैं. sardesairajdeep sardesairajdeep 1947 क्या था अल्पसंख्यक के पूर्वाग्रहों को पोषित करने का परिणाम था। कश्मीर इसका जिबन्त उदाहरण है। पत्रकारिता के दुराग्रह से पीड़ित रिपोर्टिंग का परिणाम यही होता है। और शाहीन बाग़ जैसे षड्यंत्र को छुपाने और पर्दा डालने का निष्फल प्रयास है। राजदीप की पत्रकारिता 000000

sardesairajdeep इसको कौन पत्रकार मानता है ? जनता से लेकर इंटरव्यू देने वाले भी इसकी फजीहत कर देते है !! sardesairajdeep Please stop entertaining journalists like Rajdeep Sardesai and chetan bhagat sardesairajdeep chetan_bhagat sardesairajdeep सलोसे अल्पसंख्यकों को पाल पोशके बड़ा किया... भारतीय संविधानसे अलग अपने मुताबिक़ चलने दिया सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके मत लेनेके लिए और खोखली धरमनिरपेक्षता के लिए... ज़ाहिर है इसका अतिरेक होगा तो बहुसंख्यक का पूर्वाग्रह एक न एक दिन बाहार आना हाई था... इतना हल्लाबोल क्यों...

sardesairajdeep रजदीप्पा दिमाग मत लगाओ, केन्सर और जिहाद का रोग का एक ही उपाय है पैदा ही मत होने दो।इस नस्ल को खत्म करना ही मात्र उपाय है।जानकार बनिये आराम से रहिये।इन जेहादियों का इस धरती पर किसी से भाई चारा है अगर जाकारी हो तो बडा़ सा कालम लिखो कि ये जिहादी इस इस देश में शान्ति से रह रहे है। sardesairajdeep आज देश मे हिंदुओं की जो हालात है उसके लिए सरदेसाई, वरखा, सागरिका घोष,रविश कुमार जैसे पत्रकारों का बहुत बड़ा योगदान है। और उनको सहायता करते कुछ tv चैनल्स और पत्र पत्रिकाएं।

DNA ANALYSIS: दिल्ली के लोग दंगों से बच भी जाए तो प्रदूषण मार डालेगा!दिल्ली के लोगों को मुफ्त बिजली और पानी के साथ साथ मुफ्त दंगे और मुफ्त प्रदूषण भी मिल रहा है. और स्थिति ये हो गई है कि दिल्ली के लोग अगर दंगों से बच भी जाए तो प्रदूषण उन्हें मार डालेगा. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एक बार फिर दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई है. sudhirchaudhary It's Kejriwal problems to solve issue! Neither he was resign from cm again go for election sudhirchaudhary भ्रष्टाचार जो सब को तिल तिल मार रहाहै उसका क्या sudhirchaudhary कुल मिलाकर मरना तय है।😂😂👍

sardesairajdeep राजदीप आप केवल lallantop रंगीन कुर्ता दिखावे के लिए पहनो।छी sardesairajdeep Rajdeep jeisa bhadwa,Suar,Jehadi patrakar mene nhi dekhe sardesairajdeep Corrected 🔥 sardesairajdeep Ye vairst oterkar nahi ye bhutiya patrkar ha sardesairajdeep ट्विटर पर जिस प्रकार 50 पार पत्रकारों के पोस्ट को देखता हूँ तो अपने आप से घिन हो जाती है कि कैसे कैसे दोगले लोगों की बातों में आकर हमने अपनों को पराया और पराये को अपना समझ लिया होगा।

sardesairajdeep ये राजदीप जैसे भड़काने वालो को लात मार के इस देश से निकालना चाहिए. sardesairajdeep Sir AGER DANGE NAHI KARAYENGI TO BANEGI KAISE SARKAR .. sardesairajdeep Sir thora ispe v bat lijiye NTPC2019 RRB NTPC anniversary 2019.. sardesairajdeep boycottdainikbhaskar sardesairajdeep sardesairajdeep जी इस Article का टाइटल ही बता रहा है, कि कौन पुरवाग्रह से ग्रसित और पौषित भी है, Thanks for clearing again doubts about you.

Delhi Violence: हर तीन में एक को लगी गोली, मौके से पुलिस को मिले 350 खोखेDelhi Violence CAA Protest Maujpur, Gokulpuri, Bhajanpura, Jaffrabad, Chand Bagh Updates: गुरुवार को हिंसा की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 हो गई। इसमें अस्पताल के अधिकारियों ने 29 शवों की पहचान की।

sardesairajdeep What was started by Nehru and Gandhi is difficult to reverse when the journey was same way for 70 years. sardesairajdeep sardesairajdeep वरिष्ठ देशद्रोही और टुकड़े टुकड़े गैंग का सरगना sardesairajdeep That means you know Hindi as well. sardesairajdeep भास्कर जी कभी कश्मीरी पंडितों के लिए आवाज़ नहीं निकलती जो तीस वर्षों से इंसाफ मांग रहे है

sardesairajdeep दैनिक भास्कर ,हम यह अखबार कभी नही खरीदेंगे और न ही किसी परिचित को खरीदने देंगे क्योकि राजदीप जैसे कुंठित,पूर्वाग्रही पत्रकारों को तुम सपोर्ट करते हो। sardesairajdeep Itana sab kuchh huwa Delhi me ab to antar atma ki awaj suno akhir to jana hi hai.. sardesairajdeep Band karo ye bakwaas. Tum jaise patrkaaro ke hath bhi un logo ke khoon se range hain.

sardesairajdeep आपको भी देश हित एवं पत्रकारिता समझाना असंभव है sardesairajdeep sardesairajdeep सरदेसाई जो इतिहास से सबक नहीं लेता उससे बड़ा बेवकूफ इस दुनिया में कोई नहीं । तुम कितना भी हिन्दू मुस्लिम कर पर जिनके घर इन दंगो में उजड़े उनके परिवार वालों की बददुआ तेरा पीछा नहीं छोड़ेगी

CAA, NRC और NPR को, उनके आपसी कनेक्शन को BBC Chatbot से समझेंदेश भर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर बहस बहुत है लेकिन पेचीदा मामले में बारे स्पष्ट जानकारी मिलना आसान नहीं है change your name yar... bbc to bc Hey BBC your chatbot is giving wrong information. Please rectify it. It's telling after CAA implementation 135 crore Indians will be thrown out of India. Bbc pe likhne wale Tera bhai abhi hua nhi ki tu padosi se link batane lag gya hai .

sardesairajdeep kanishtt,, patrakaar,,,, sardesairajdeep हमारे पुर्वाग्रह अबे पत्तलकार दोने ही चाटेगा या फिर हकीकत भी समझेगा या फिर हमेशा की तरह मालकिन के ऐजेडें पुरा करेगा आईएसआईएस से किसको पुर्वाग्रह थे sardesairajdeep Your role as a journalist is really praiseworthy. sardesairajdeep दल्ला sardesairajdeep

sardesairajdeep सब कुछ अल्पसंख्यक समुदाय ने किया फिर भी इल्जाम लगाना हिन्दुओं पर ही । sardesairajdeep यह तारीख खून से लिखी ग ई है. ईसे भूल पाना आसान नही होगा sardesairajdeep आम जनता जब रास्ते रोके जाने से परेशानी में रो रही थी तब सभी को सिर्फ एक वर्ग के अधिकारों की वकालत करते देखा जा रहा था, आखिर तो आम जन जो इतने दिनों से परेशानी जेल रहे थे अपना गुस्सा निकलेंगे । जब रास्ता रोकने वाले और उनके समर्थक जहर उगल रहे थे तब तो आप जैसे महानुभाव नही जागे ।

sardesairajdeep यही तो समस्या है कि बहुसंख्यकों ने कभी अपनी संख्या का एहसास कराने की कोशिश नहीं की। अन्यथा ना तो ऐसे दंगे होते ना ऐसे समाचार पत्र और ना ही ऐसे घटिया पत्रकार। इन्हें इनकी औकात बताएं और इनको पढ़ना और सुनना छोड़ें । sardesairajdeep मैं नवंबर 2018 से मंगाना बन्द कर दिया। बायकाट दैनिक भास्कर

sardesairajdeep To kya second largest majority kapurvagrah poshan karne ka!!?

'एक थप्पड़ से टूटकर बिखरती महिला', थिएटर्स में फिल्म को पब्लिक से मिल रहे ऐसे रिएक्शनThappad Movie Review, Rating, Box Office Collection LIVE Updates: फैंस इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। वहीं घरेलू महिलाएं इस फिल्म को खुद से जोड़ कर देख पा रही हैं, ऐसे में वह इस फिल्म को देखने के लिए एक्साइटेड नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर बोलती- 'इस फिल्म को देखने के लिए मैं उत्सुक हूं। एक वक्त था जब मेरी भी ऐसी कहानी थी।'

sardesairajdeep This journalist Sold Some journalist want celebrity status So they sold themselves sardesairajdeep पूर्वाग्रह से बहुसंख्यक नही अल्पसंख्यक ग्रसित है। तकरीबन हर मुस्लिम मोदी को ही 2002 का गुनाहगार मानता है। ये ही कारण है की जब से मोदी प्रधानमंत्री बने है उन्हें अराजकता फैलाने का मौका चाहिए ।

sardesairajdeep Aisa buddhiman aur kahan. Ye aadmi khud purvagrah se grasit hai. Kya apko koi dusra commentator nahi mila ? Sharm karo Danik Bhaskar. sardesairajdeep Kya aap sabak loge ya keep on instigating people....shame sardesairajdeep कल से दैनिक भास्कर मंगवाना बन्द....... मुझे ये पता नहीं था ये वरिष्ठ दलाल भी दैनिक भास्कर में ही काम करते है।

sardesairajdeep Midiya against India sardesairajdeep दलाली काफ़ी घहराईं तक घुस गयी है सोच रहा हु कल से देनिक भास्कर मँगवाना बंद कर दु sardesairajdeep बरिष्ट प‌‌त्रकार नहीं बरिष्ट दलाल sardesairajdeep Rajdeep sir itne young kaise ho gye sardesairajdeep तुम्हारे जैसे लिखे हुए पत्रकार यही काम करेंगे तुम लोगों के तो लोग कपड़े पढ़ते हुए ही अच्छे लगते हैं

40 दिन से लापता हार्दिक पटेल को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोकहार्दिक पटेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. इसके साथ ही 6 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है. mewatisanjoo आज कांग्रेस नहीं कहेगी हमें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है mewatisanjoo Phir jail jayega mewatisanjoo यही सब से तो नेता लोग के डर नही है कानून का

sardesairajdeep अबे वो वरिष्ठ दलाल है sardesairajdeep सूजी है 😜 sardesairajdeep 2/2 जितना छाती पीट पीट के आप कपिल शर्मा की दोषी साबिते करने में लगे वही आक्रोश ताहिर हुसैन और अमानातुल्ला की दोषी साबित में नहीं दिखता कहीं। sardesairajdeep सूजी है sardesairajdeep sardesairajdeep आपके अपनी रिपोर्ट्स में कितनी भी निष्पक्षता दर्शाने की कोशिश करे पर आपका एक तरफा एजेंडा कि सच्चाई आम आदमी समझता है। 1/2.

sardesairajdeep गद्दार पत्रकारिता sardesairajdeep इन पूर्वाग्रहों को किन्होंने बौद्धिक देकर पोषित किया It सेल में सोशल मीडिया से प्रोपेगैंडा फैलाया भड़काउ भाषण दिए वही जिम्मेदार है समाज मे फैले इस ज़हर के लिए ओर दोनो ओर से हुआ है sardesairajdeep sardesairajdeep सर कभी अल्पसंख्यकों के पूर्वाग्रह के बारे में भी लिख दिया करो। बहुत चाव से इंतजार है।

sardesairajdeep Media kee Rozi Roti Boti ka Sawal hai!! Koi Apne Pait Per Laat Marega? sardesairajdeep ग़लत छप गया हैं वरिष्ठ दलाल सही शब्द हैं

sardesairajdeep Ye to sala dalla hai... Iska to bat he mat karo sardesairajdeep Isne khud kaha sabak liya he ye pahele bhi dalla thaa aaj bhi he sardesairajdeep Madharchod hai tu, tere or rabish Kumar ke chalte hinduo ka कत्तलेआम हुआ, madharchod hai, behan chod, beti chot, bahu chod, maa chod hai❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

sardesairajdeep It appears, media mafias are getting lot of funding for abusing majority by one sided reporting. By the way, how much u get Rajdeep ? Ur funding needs to be probably agencies along with ndtv sardesairajdeep Madharchod hai tu, tere or rabish Kumar ke chalte hinduo ka कत्तलेआम हुआ, madharchod hai, behan chod, beti chot, bahu chod, maa chod hai❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

sardesairajdeep Swara Bhaskar’s sister concern!! sardesairajdeep Madharchod hai tu, tere or rabish Kumar ke chalte hinduo ka कत्तलेआम हुआ, madharchod hai, behan chod, beti chot, bahu chod, maa chod hai❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤ sardesairajdeep Besharm patrakar. Jay chand shyad ese hi hote hoge



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