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दादा गुरु के संकल्प की सिद्धि के साक्षी बनेंगे योगी आदित्यनाथ

राममंदिर आंदोलन में प्रारंभ से ही भागीदार रही गोरक्षपीठ मंदिर निर्माण शुरू होने के क्षण की भी न सिर्फ साक्षी बल्कि

05-08-2020 07:10:00

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राममंदिर आंदोलन में प्रारंभ से ही भागीदार रही गोरक्षपीठ मंदिर निर्माण शुरू होने के क्षण की भी न सिर्फ साक्षी बल्कि

राममंदिर मुद्दे से जुड़ा ऐसा कोई महत्वपूर्ण घटनाक्रम अभी तक नहीं रहा है जिसमें गोरक्षपीठ का प्रतिनिधि सबसे पहली पंक्ति में खड़ा न रहा हो। वह चाहे मंदिर में मूर्तियों के प्राकट्य उत्सव का क्षण हो या रथयात्रा निकालने से लेकर आंदोलन के अन्य महत्वपूर्ण पड़ाव का। ढांचा टूटने का क्षण हो या शिलादान का। हर मौके पर यह पीठ उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखी है।

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दिग्विजय नाथअतीत के पन्नों में यह बात मोटे अक्षरों में दर्ज है कि 22-23 दिसंबर की रात ढांचे में मूर्तियों के प्राकट्य उत्सव के समय पांच साधुओं की अगुवाई दिग्विजय नाथ ही कर रहे थे। वह उस समय गोरक्षपीठ के महंत थे। उन्होंने राम मंदिर को लेकर देश भर में जनजागरण करने का काम किया। साथ ही पूरी दृढ़ता के साथ अयोध्या के संतों के साथ खड़े रहे। महंत दिग्विजयनाथ के बाद गोरक्ष पीठ की विरासत महंत अवेद्यनाथ को मिली। उन्होंने भी अयोध्या की विरासत और श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ के काम को आगे बढ़ाने का काम किया। मंदिर मुद्दे पर जनजागरण रथयात्राओं से लेकर संत सम्मेलनों, कारसेवा और 6 दिसंबर 1992 को ढांचा ध्वंस के समय वह अग्रिम मोर्चे पर ही डटे दिखे।

अवेद्यनाथ व परमहंस ने मिलकर इस तरह चलाया मंदिर अभियानमहंत अवेद्यनाथ ने दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्र परमहंस के साथ मिलकर 1984 में देश के सभी पंथों के शैव-वैष्णव आदि धर्माचार्यों को एक मंच पर लाकर श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन किया। महंत अवेद्यनाथ अध्यक्ष चुने गए। महंत के नेतृत्व में 7 अक्तूबर 1984 को अयोध्या से लखनऊ के लिए धर्म यात्रा निकाली गई। लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ, जिसमें बताया जाता है कि तीन-चार लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। वर्ष 1986 में जब फैजाबाद के जिला जज ने ताला खोलने का आदेश दिया तब भी महंत अवेद्यनाथ और परमहंस वहां मौजूद थे।

दिल्ली के सम्मेलन में भी भागीदारीदिल्ली में 22 सितंबर 1989 को महंत अवेद्यनाथ की अध्यक्षता में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ, जिसमें 9 नवंबर 1989 को जन्मभूमि पर शिलान्यास करने की घोषणा की गई। अनुसूचित जाति के कामेश्वर चौपाल से शिलान्यास कराकर महंत अवेद्यनाथ व महंत परमहंस ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को सामाजिक समरसता से जोड़ा। शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण के लिए 30 अक्तूबर 1990 को कारसेवा की घोषणा की गई । प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवा पर प्रतिबंध लगा दिया व अयोध्या की सीमाएं सील करा दीं। भीषण रक्तपात हुआ। इसके बाद 23 जुलाई 1992 को महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व मे संतों और विहिप का एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मिला। पर, कोई नतीजा नहीं निकला। तब 6 दिसंबर 1992 को फिर कारसेवा की घोषणा की गई। जिस दिन ढांचा गिरा, उस दिन भी महंत अवेद्यनाथ अयोध्या में कारसेवकों के साथ मौजूद थे।

योगी भी पीछे नहींमहंत अवेद्यनाथ ने 1994 में योगी आदित्यनाथ को गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया। योगी भी शुरू से ही हिंदुत्व की राजनीति पर चले। उन्होंने भी दादा गुरु महंत दिग्विजयनाथ और गुरु महंत अवेद्यनाथ की तर्ज पर राममंदिर आंदोलन में भूमिका निभाई। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने जिस तरह अयोध्या के विकास से लेकर सरोकारों के विस्तार पर काम किया, उससे उनकी भी अयोध्या के प्रति पर आस्था प्रमाणित होती है। संयोग ही है कि जिस स्थान पर 70 साल पहले उनके दादा गुरु दिग्विजय नाथ प्रभु राम की मूर्ति प्रतिष्ठा के साक्षी व भागीदार बने थे। अब जब सारे विवाद खत्म होने के बाद प्रभु राम के जन्म धाम पर विशाल मंदिर बनने जा रहा है तो उस क्षण के साक्षी व भागीदार योगी आदित्यनाथ बन रहे हैं

भागीदार बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों मंदिर निर्माण की शुरुआत के ऐतिहासिक मौके पर योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते शिष्टाचार का हिस्सा होगी। पर, वह उस समय अपने दादा गुरु दिग्विजय नाथ के संकल्प और गुरु महंत अवेद्यनाथ के स्वप्न के साकार होने के साक्षी बनने का इतिहास भी रचेंगे।

विज्ञापनराममंदिर मुद्दे से जुड़ा ऐसा कोई महत्वपूर्ण घटनाक्रम अभी तक नहीं रहा है जिसमें गोरक्षपीठ का प्रतिनिधि सबसे पहली पंक्ति में खड़ा न रहा हो। वह चाहे मंदिर में मूर्तियों के प्राकट्य उत्सव का क्षण हो या रथयात्रा निकालने से लेकर आंदोलन के अन्य महत्वपूर्ण पड़ाव का। ढांचा टूटने का क्षण हो या शिलादान का। हर मौके पर यह पीठ उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखी है।

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दिग्विजय नाथअतीत के पन्नों में यह बात मोटे अक्षरों में दर्ज है कि 22-23 दिसंबर की रात ढांचे में मूर्तियों के प्राकट्य उत्सव के समय पांच साधुओं की अगुवाई दिग्विजय नाथ ही कर रहे थे। वह उस समय गोरक्षपीठ के महंत थे। उन्होंने राम मंदिर को लेकर देश भर में जनजागरण करने का काम किया। साथ ही पूरी दृढ़ता के साथ अयोध्या के संतों के साथ खड़े रहे। महंत दिग्विजयनाथ के बाद गोरक्ष पीठ की विरासत महंत अवेद्यनाथ को मिली। उन्होंने भी अयोध्या की विरासत और श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ के काम को आगे बढ़ाने का काम किया। मंदिर मुद्दे पर जनजागरण रथयात्राओं से लेकर संत सम्मेलनों, कारसेवा और 6 दिसंबर 1992 को ढांचा ध्वंस के समय वह अग्रिम मोर्चे पर ही डटे दिखे।

अवेद्यनाथ व परमहंस ने मिलकर इस तरह चलाया मंदिर अभियानमहंत अवेद्यनाथ ने दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्र परमहंस के साथ मिलकर 1984 में देश के सभी पंथों के शैव-वैष्णव आदि धर्माचार्यों को एक मंच पर लाकर श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन किया। महंत अवेद्यनाथ अध्यक्ष चुने गए। महंत के नेतृत्व में 7 अक्तूबर 1984 को अयोध्या से लखनऊ के लिए धर्म यात्रा निकाली गई। लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ, जिसमें बताया जाता है कि तीन-चार लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। वर्ष 1986 में जब फैजाबाद के जिला जज ने ताला खोलने का आदेश दिया तब भी महंत अवेद्यनाथ और परमहंस वहां मौजूद थे।

दिल्ली के सम्मेलन में भी भागीदारीदिल्ली में 22 सितंबर 1989 को महंत अवेद्यनाथ की अध्यक्षता में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ, जिसमें 9 नवंबर 1989 को जन्मभूमि पर शिलान्यास करने की घोषणा की गई। अनुसूचित जाति के कामेश्वर चौपाल से शिलान्यास कराकर महंत अवेद्यनाथ व महंत परमहंस ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को सामाजिक समरसता से जोड़ा। शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण के लिए 30 अक्तूबर 1990 को कारसेवा की घोषणा की गई । प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवा पर प्रतिबंध लगा दिया व अयोध्या की सीमाएं सील करा दीं। भीषण रक्तपात हुआ। इसके बाद 23 जुलाई 1992 को महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व मे संतों और विहिप का एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मिला। पर, कोई नतीजा नहीं निकला। तब 6 दिसंबर 1992 को फिर कारसेवा की घोषणा की गई। जिस दिन ढांचा गिरा, उस दिन भी महंत अवेद्यनाथ अयोध्या में कारसेवकों के साथ मौजूद थे।

योगी भी पीछे नहीं और पढो: Amar Ujala »

Hathras Gangrape Case: कितने हैवान, कितनी निर्भया और कब तक? देखें खबरदार

पहले गैंगरेप किया. फिर गर्दन तोड़ी और बोल न सके इसलिए जीभ काटी. एक बेटी पर इतने ज़ुल्म हुए कि उसकी सांस की डोर ही टूट गई. ये हाथरस का निर्भया कांड है, जिसने पूरे देश को दहलाया है और आक्रोशित किया है. इंसान की खाल में छुपे हैवान आखिर कब तक देश की बेटियों के साथ हैवानियत करते रहेंगे? करीब 8 साल पहले निर्भया कांड के बाद देश कुछ समय के लिए जागा था. ऐसा लगा था कि अब कभी दोबारा ऐसा नहीं होगा. लेकिन ये उम्मीद बार बार टूटती रही. इसलिए आज इस खबर और इस मुद्दे की गहराई में जाना ज़रूरी है. हाथरस की लड़ाई भी हमारी है. आजतक सबके लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ता आया है और आज भी ऐसा ही होगा. हाथरस की निर्भया को इंसाफ दिलाना होगा. बात सुशांत सिंह राजपूत केस की भी होगी. साथ ही हम दिखाएंगे कि पराली के धुएं से कैसे छुटकारा मिलेगा. देखिए खबरदार.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच करवाने की बिहार सरकार ने की सिफारिशअभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला हर दिन नया मोड़ लेता जा रहा है। अभिनेता की मौत के मामले में मुंबई और बिहार Ek popular star ki CBI enquiry jisko politics media sabhi ka support hai jab uski enquiry me itni badi problem as Rahi h..to ek Aam admi ki kya haisiyat bechare ki..yahi sochkar Gareeb khoon k ghoot pikar chup baith jata h Cbi जाँच से ही सत्य उजागर होगा सी बी आई जांच होनी चाहिए दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी नहीं बढ़ी सोने की मांग, आयात में 24% की कमीGold rates today: मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सजेंच (MCX) पर वायदा कारोबार में सोने की कीमत 53,820 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई। यही नहीं चांदी के वायदा कारोबार में भी 0.18 पर्सेंट की तेजी देखने को मिली है।

पुनरोद्धार की राह पर भारत, अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कृषि क्षेत्र के अहम भूमिका: रिपोर्टपुनरोद्धार की राह पर भारत, अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कृषि क्षेत्र के अहम भूमिका: रिपोर्ट Agriculture agricultural news Coronavirus economy India Farmers गधे का मूत

अयोध्या: भूमि पूजन की तैयारी, मेहमानों के लिए है ये खास सुरक्षा के इंतजामश्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि 5 अगस्त को भूमि पूजन कार्यक्रम में 175 मेहमानों को न्यौता दिया गया है. इसमें नेपाल तक के साधु संत शामिल हैं. भूमि पूजन का निमंत्रण कार्ड भी खास है. इसमें सिक्योरिटी कोड लगाया गया है. हर एक कार्ड पर एक नंबर है उसी के आधार पर पुलिस गेस्ट को प्रवेश देगी. 5 अगस्त को किसी भी वाहन को शहर के भीतर प्रवेश नहीं मिलेगा. मेहमानों को सुबह 10.30 बजे तक प्रवेश सुनिश्चित करना होगा. भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक चलेगा. JaiShriRam Rakcha bandhan ka tyohar hai Berojgari ki bahar hai Yuwa depression ka shikar Ab to aatmahatya ko bhi taiyar hai Congratulations 🎊 निश्चित ही राम मंदिर बनवाये पर राम राज्य मे कोई भूखा नहीं सोया था कोई गरीबी और बेरोज़गारी से त्रस्त नहीं था युवाओं को बेरोज़गार रख कर सोने चांदी लगा के अरबो का मंदिर बना के राम क्या खुश हो जाएंगे राम राज्य स्थापित हो जायेगाकभी नहीं BJP4India PMOIndia PiyushGoyal AmitShah

राममय हुई राम की नगरी अयोध्या, मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तैयारियां पूरीगौरी गणेश के पूजन के साथ ही अनुष्ठान की शुरुआत भी हो चुकी है. अयोध्या में दीपावली जैसा नजारा है. रंग-बिरंगी रोशनी से नहाई अयोध्या में लोग दीपोत्सव मना रहे हैं. Nice 👍💕 विश्व स्तरीय शिलान्यास विश्व स्तरीय सनातन विश्व विजेता राम! और पोप जैसे ट्रम्प जैसे राष्ट्रपति 4 शंकराचार्य गण न बुला स्थानीय जमावड़ा ! शिवशिव!!

झारखंड: गढ़वा में रक्षाबंधन के दिन रेप, 14 और 8 साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्मझारखंड के गढ़वा जिले में रक्षाबंधन के दिन दो नाबालिग लड़कियों के साथ रेप का मामला सामने आया है. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार को जेल भेज दिया. लेकिन गढ़वा में बढ़ते दुष्कर्म के मामले से प्रशासन की नींद उड़ी हुई है. उत्तर प्रदेश वाली भी दिखा दिया करो।। Aise Dard ko fansi ki Saja Hona chahie फ़िर से जेल में गंदगी डाल रहे हैं । इन जैसो का एक ही सज़ा हैं । सजाए मौत ,,,,