तुर्की के साथ बढ़े विवाद के बीच फ़्रांस में चरमपंथियों पर कार्रवाई तेज़ - BBC News हिंदी

तुर्की के साथ बढ़े विवाद के बीच फ़्रांस में चरमपंथियों पर कार्रवाई तेज़

27-10-2020 17:10:00

तुर्की के साथ बढ़े विवाद के बीच फ़्रांस में चरमपंथियों पर कार्रवाई तेज़

फ़्रांस की कार्रवाई ने धर्म और राजनीति की सीमा के सवाल पर देश के भीतर और बाहर विवादों को फिर हवा दे दी और साथ ही इसे भी कि सत्ता में बैठे लोग इन मुद्दों का कैसे इस्तेमाल करते हैं.

बड़े पैमाने पर निगरानीजेरोम फोरके एक राजनीतिक विश्लेषक हैं और IFOP पोलिंग एजेंसी के डायरेक्टर भी. उनका मानना है कि यह हमला (सैमुअल पैटी पर) बिल्कुल अलग था. जिस तरह से एक टीचर को इतनी क्रूरता से निशाना बनाया गया है, वह इसे पहले के हमलों से अलग कर देता है. यही वजह है कि सरकार के अंदर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने के मामले में तेज़ी का रुख़ दिखा है.

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जेरोम ने कहा, "अब हम सिर्फ़ संगठित जिहादी नेटवर्कों का सामना नहीं कर रहे हैं. हमारा मुक़ाबला अब ऐसे अलग-थलग युवा आतंकवादियों से है, जो अपने ही देश के हैं और जिन्हें चरमपंथी जुनून से भर दिया गया है."वह कहते हैं, "सरकार का मानना है कि सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था को दुरुस्त बना कर इसका मुक़ाबला नहीं किया जा सकता है. सरकार को सोशल नेटवर्क और एसोसिएशनों को क़ाबू में रखना होगा क्योंकि यह त्रासद घटना बताती है कि किस तरह एक पूरा नेटवर्क लोगों के बीच हेट स्पीच फैलाने में लगा हुआ है. दरअसल सिस्टम में बदलाव लाने की ज़रूरत है."

वे बताते हैं कि दो साल पहले IFOP ने जो सर्वे किया था, उसके मुताबिक़ लगभग एक तिहाई शिक्षकों ने 'ख़ुद को सेंसर' कर रखा था ताकि सेक्यूलरिज्म के सवाल पर होने वाले संघर्षों से बच सकें.जेरोम का कहना है कि सरकार ने फ़्रांसीसी गणराज्य के क़ानूनों और देश की सुरक्षा को एक विचारधारा से मिल रही चुनौती के ख़िलाफ़ क़दम उठा कर बिल्कुल सही किया है.

लेकिन फ़्रांस के नेशनल सेंटर फ़ॉर साइंटिफ़िक रिसर्च के समाजशास्त्री लॉरेन मुचेली कहते हैं कि राष्ट्रपति मैक्रों ने राजनीतिक वजहों से 'ओवर रिएक्ट' किया है.फ़्रांस में 2022 में राष्ट्रपति का चुनाव है इसलिए मैक्रों ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया कर रहे हैं.

वह कहते हैं, "मैक्रों आग में घी डालने का काम कर रहे हैं. अपनी कार्रवाई से वह यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि दक्षिण और धुर दक्षिणपंथी पार्टियों की तरह ही वह भी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने में ज़्यादा पीछे नहीं हैं. उनका सबसे बड़ा मक़सद 2022 में दोबारा राष्ट्रपति चुनाव जीतना है. इसलिए वह दक्षिणपंथियों के प्रभाव क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं. 19वीं सदी की समाप्ति के बाद से ही दक्षिणपंथी पार्टियों के मुद्दे में कोई बदलाव नहीं आया है. वे सिर्फ़ आप्रवासी और देश की सुरक्षा को मुद्दा बनाते आए हैं."

पिछले सप्ताह हुए एक सर्वे के मुताबिक़ धुर दक्षिणपंथी नेता मेरिन ली पेन 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ सबसे भरोसेमंद नेता बन कर उभरी हैं. मैक्रों इस सर्वे में चार प्वाइंट पीछे हैं. हो सकता है जब 18 महीने बाद राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ शुरू हो तो दोनों आमने-सामने हों.

सिक्योरिटी का मामला मैक्रों की दुखती रग माना जाता है. विदेश में अपनी ताक़तवर इमेज और मज़बूत आर्थिक सुधारों के बावजूद वह इस मामले में पिछड़े नज़र आते हैं. लेकिन मैरिन ली पेन इस्लाम की शांतिपूर्ण सार्वजनिक अभिव्यक्ति को भी फ़्रांस की राष्ट्रीय पहचान के लिए ख़तरा मानती हैं.

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इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,फ़्रांस में इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ मुस्लिमों का प्रदर्शनसांस्कृतिक तनावअपने अब तक के शासन के दौरान मैक्रों ने देश पर मंडरा रहे सुरक्षा ख़तरों और धर्म निरपेक्षता के बीच फ़र्क़ करने में बड़ी सावधानी से काम लिया है. लंबे समय से वह हेड स्कार्फ़, बुर्किनी स्विमसूट और स्कूलों में हलाल भोजन से जुड़े सवालों को टालते आए हैं. लेकिन फ़्रांस में धार्मिक अभिव्यक्ति के इर्द-गिर्द जो राजनीतिक हो-हल्ला मचाया जा रहा है वह कभी-कभी लग्ज़री जैसा लगता है.

सितंबर में मैक्रों की ला रिपब्लिका एन मार्च (LREM) पार्टी की एक सांसद एन-क्रिस्टिन लांग नेशनल असेंबली से वॉकआउट कर गई थीं. दरअसल उन्हें सिर पर इस्लामी स्कार्फ़ पहनी एक महिला की ओर से पेश किए जा रहे बयान को सुनने के लिए कहा जा रहा था. लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया और असेंबली से बाहर निकल गईं.

इमेज स्रोत,Getty Imagesउन्होंने कहा, "उन्हें राजनीति के दिल नेशनल असेंबली में किसी का इस तरह हिजाब पहन कर आना बिल्कुल मंज़ूर नहीं. हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते."टीचर और मेयर जैसे लोकसेवकों को कहा गया है कि वे अपने धार्मिक विश्वास का खुला प्रदर्शन न करें. लेकिन आम लोगों के लिए क़ानूनी तौर पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. सार्वजनिक भवनों में भी उनके लिए ऐसा करना ज़रूरी नहीं है.

इन हालातों की वजह से देश में कई बार विवाद उठ खड़े हुए हैं. अक्सर ये सवाल उठाए गए हैं कि क्या पेरेंट्स का बच्चों के स्कूल में स्कार्फ़ पहन कर जाना ठीक है. क्या समुद्र तटों पर महिलाओं को बुर्किनी स्विमसूट पहनना चाहिए. दक्षिणपंथी पार्टियां अक्सर सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाती रही हैं. वहीं वामपंथी पार्टियों का कहना है कि देश में इस्लामोफ़ोबिया पैदा किया जा रहा है.

एक ख़ास वर्ग के लोगों को मोहम्मद साहब का कार्टून दिखाने के आरोप में सैमुअल पैटी की हत्या के बाद यह राजनीतिक विवाद चरम पर पहुँच गया है.इमेज स्रोत,Reuters/Gettyइमेज कैप्शन,तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन (बाएं) और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों (दाएं)अंतरराष्ट्रीय पहलू

कथित चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़दम उठा कर राष्ट्रपति मैक्रों अपने घर में समर्थकों का दिल जीत पाए हों या नहीं लेकिन देश के बाहर उनके आलोचकों को मौक़ा मिल रहा है.लीबिया, बांग्लादेश और ग़ज़ा पट्टी में फ़्रांस सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए और उनमें फ़्रांसीसी चीज़ों के बहिष्कार की अपील की गई. इसके साथ ही तुर्की के साथ फ़्रांस का वाक युद्ध भी तेज़ हो गया है.

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इन बहिष्कारों का समर्थन किया और जब पिछले सप्ताह मैक्रों ने फ़्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का बचाव किया तो उन्होंने कहा कि फ़्रांसीसी राष्ट्रपति का दिमाग़ ख़राब हो गया है. फ़्रांस ने तुर्की से अपने राजदूत को बुला लिया है.

इमेज स्रोत,Getty Imagesलेकिन तमाम जटिल रिश्तों की तरह ही फ़्रांस और तुर्की के विवादित रिश्तों का एक लंबा इतिहास है. मैक्रों के पास तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन के ख़िलाफ़ शिकायतों का एक बड़ा पुलिंदा है. सीरिया में कुर्दिश मिलिशिया के ख़िलाफ़ तुर्की के अभियान पर फ़्रांस के अंदर एक नाराज़गी है. इसके अलावा पूर्वी भूमध्यसागर में तेल की खोज के सवाल पर उसका तुर्की से झगड़ा हो चुका है. लीबिया को हथियार सप्लाई से प्रतिबंध हटाने को लेकर भी दोनों के बीच विवाद है.

और अब एक दिल दहला देने वाली हत्या और इस पर फ़्रांस की प्रतिक्रिया ने धर्म और राजनीति की सीमा के सवाल पर देश के भीतर और बाहर विवादों को फिर हवा दे दी और साथ ही इसे भी कि सत्ता में बैठे लोग इन मुद्दों का कैसे इस्तेमाल करते हैं. और पढो: BBC News Hindi »

Coronavirus: आने वाली है कोरोना वैक्सीन, क्या है देश का प्लान?

कोरोना संक्रमण की रफ्तार और पलटवार पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है. भारत जैसे बड़ी आबादी वाली देश में ये वायरस और भी मुश्किल पैदा कर रहा है. इन्हीं हालात पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी कल फिर से एक बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सााथ बड़ी बैठक करने वाले हैं, बड़ी बात ये है कि वैक्सीन आने से पहले, पीएम कल ही पीएम मोदी वैक्सीन के वितरण और टीकाकरण के मेगा प्लान पर राज्यों के साथ चर्चा करने वाले हैं. देखिए देशतक, चित्रा त्रिपाठी के साथ.

अब तक ठोस कार्रवाई हो कि नहीं तब तक वह लोग सुधरेंगे नहीं Good job France. Throw out these terrorists.👍 Good work by France भारतीय आतंकवाद गिरोह भी शैतान फ्रांस की सपोर्ट मे ऐक ट्रेंड चला रहा है इसके भी बुरे दिन इंशा अल्लाह शीघ्र ही आयेंगे फ्रांस_माफी_मांग इस्लाम दुनिया में तबतक रहेगा जब तक दुनिया रहेगी इनसे बड़े राजा महा राजा आगाय उनसे नी कुछ हू वाँ इनसे भी कुछ नहीं होगा

Kill the Muslim world wide because they are islamic terrorists बलात्कारियों के समथ॔न में खङे होने वाले अगर फ्रांस के समथ॔न में खङे हो गए, तो इसमें नई बात क्या है। ये लोग तो पैदा ही हुए हें, गंदगी फैलाने के लिए। भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी 21वी सदी में होगा विश्व में इस्लाम ------? Achha hay. Humlog bhi France ke sath hay.

फ्रांस सारी दुनिया को एक नए war की ओर ले जा रहा Macron the devil धर्म में हिंसा होना ही नहीं चाहिए। धर्म तो मनुष्य को शांति प्रेम दया करूणा मानवता ये सब देती हैं। इसलिए धर्म से जुड़े रहे ठेकेदारों से नहीं। France is doing well. jin deson ko lagta hai china galat kar raha wo inase sabak le le चरमपंथी किसी भी धर्म के हों इनके खिलाफ़ सख्त एक्शन जरूरी और वाज़िब है👍

Ye wahi turkey hain jo baaki muslim mulk k logo ko france k product ko boycott karne ko bol rha hain.. wahi doosri taraf turkey k PM Erdogan ki wife made in france hand bag ka hi sauk rakhti hain..waise turkey me election hone wale hain... कट्टरवाद की जगह धरती पर नहीं है फ्रांस जो कर रहा है वह बिल्कुल सही है और भारत की सरकार को फ्रांस के साथ खड़ा होना चाहिए

Macron The Radical Islamic Hunter. 🙏🙏🙏 इस्लाम का खात्मा करने की जरूरत है बायकाट फ्रांस करने वालों फट्टुओं दम है तो पहले फ्रांस से निकलो भिखारियों IndiaWithFrance हर देश ये चाहता है कि उसकी धरती पर रहने वाला हर व्यक्ति उसके देश का कानून माने बाद में अपना धर्म में भी ऐसा ही मानता हूं सबसे पहले वो मिट्टी है जिस पर आप रह रहे हो उस मिट्टी का कानून सबसे ऊपर रखना चाहिए जो ऐसा ना करे सीधे गांड़ लेे लात मारो ऑर भगा दो झोपडी वाले को

WeStandWithFrance फ्रांस को अगर खुद को बचना है तो चरमपंथियों को देखते ही गोली मारने के आदेश देने चाहिए सभी विदेशी नागरिकों से शपथ करवानी चाहिए कि वे अपने धर्म से पहले फ्रांस का कानून मानेंगे कोई फ्रांस के संविधान से पहले अपना धर्म मानता ही तो सीधे गांड़ में लात मारकर भगा देना चाहिए चाहे जो भी हो Kill these radical Islamic terrorists....

इस्लामोफोबिया फ़्रांस में बढ़ रहा है फ्रांस बहुत बढ़िया कर रहा है👍👍 EmmanuelMacron move on👍 IndiaWithFrance 👍 IndiaStandsWithFrance 👍👍

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