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तालिबान को मलाला का खतः लड़कियों के स्कूल तुरंत खोले जाएं | DW | 20.10.2021

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने तालिबान से अफगानिस्तान में लड़कियों को तुरंत स्कूल लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है.

20-10-2021 08:20:00

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने तालिबान से अफगानिस्तान में लड़कियों को तुरंत स्कूल लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है. Malala Taliban Afghanistan

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने तालिबान से अफगानिस्तान में लड़कियों को तुरंत स्कूल लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है.

तालिबान ने दावा किया है कि वे सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस्लामी कानून की व्याख्या के तहत छात्रों को सख्ती से अलग करने के बाद लड़कियों को स्कूल लौटने की अनुमति देंगे. अधिकतर लोगों को तालिबान के इस आश्वासन पर संदेह है.तालिबान को खुला पत्रनोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और कई अफगान महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने एक खुले पत्र में लिखा,"तालिबान अधिकारियों के लिए...लड़कियों की शिक्षा पर वास्तविक प्रतिबंध को हटा दें और लड़कियों के माध्यमिक विद्यालयों को तुरंत फिर से खोलें."

Omicron की महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में दहशत, 9 नए केस के साथ देश में हुए कुल 21 संक्रमित महाराष्‍ट्र में ओमिक्रॉन के 7 नए मामले आए सामने, भारत में अब तक कुल 12 मरीज दिल्‍ली में कोरोना के मामलों में दर्ज की गई तेजी, पिछले 24 घंटे में सामने आए 63 नए मरीज

उन्होंने मुस्लिम देशों के नेताओं से तालिबान शासकों को यह स्पष्ट करने का भी आह्वान किया कि"लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना धार्मिक रूप से उचित नहीं है."खत पर हस्ताक्षर करने वालों में शहजाद अकबर भी शामिल थे, जो अमेरिका समर्थित पूर्व अशरफ गनी सरकार में अफगान मानवाधिकार आयोग के प्रमुख थे. तालिबान सरकार से अपील करने वालों का कहना है,"दुनिया में इस समय अफगानिस्तान अकेला ऐसा देश है जहां लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध है.''

अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियममहिलाओं के लिए नए नियमअफगानिस्तान के नए उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने कहा है कि महिलाएं पढ़ाई कर पाएंगी लेकिन उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा.अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियमपढ़ाई की इजाजत headtopics.com

महिलाओं को यूनिवर्सिटी में पढ़ने की इजाजत होगी. हक्कानी ने कहा है कि जैसा देश आज है, उसी के आधार पर नए अफगानिस्तान का निर्माण किया जाएगा ना कि 20 साल पहले के तालिबानी शासन के आधार पर.अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियमलड़कों से अलगमहिला छात्रों को लड़कों से अलग पढ़ाया जाएगा. उन्हें इस्लामिक कानून के आधार पर कपड़े पहनने होंगे यानी सिर से पांव तक खुद को ढककर रखना होगा.

अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियमपुरुष शिक्षक नहींहक्कानी ने कहा कि छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी जहां तक संभव होगा शिक्षिकाओं को ही दी जाएगी. उन्होंने कहा कि शुक्र है देश में काफी महिला शिक्षक हैं.अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियमअलग-अलग बैठना होगा

जहां महिलाएं उपलब्ध नहीं होंगी, वहां पुरुष शिक्षक भी पढ़ा सकेंगे लेकिन विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को अलग-अलग बैठना होगा और पर्दे में रहना होगा.अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए नए नियमकक्षाओं में पर्देपुरुष और महिला छात्राओं के बीच में पर्दे लगाए जाएंगे या फिर स्ट्रीमिंग के जरिए भी पढ़ाई कराई जा सकती है.

रिपोर्ट: विवेक कुमारजी20 देशों के नेताओं से अपीलखत पर हस्ताक्षर करने वालों ने जी20 नेताओं से अफगान बच्चों की शिक्षा परियोजना के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराने की अपील की है. इस पत्र के साथ एक याचिका भी दाखिल की गई है जिस पर सोमवार तक 6,40,000 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके थे. headtopics.com

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शिक्षा में सक्रिय पाकिस्तानी छात्रा मलाला यूसुफजई को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने 2012 में स्वात घाटी में गोली मारकर घायल कर दिया था, जब वह स्कूल बस से घर लौट रही थी.मलाला अब 24 साल की हो गई हैं और खासतौर पर लड़कियों को शिक्षित करने में सक्रिय हैं. इस बीच अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने मीडिया से कहा,"जहां तक ​​मुझे पता है स्कूल और विश्वविद्यालय जल्द ही खोले जाएंगे और लड़कियां और महिलाएं स्कूल जा सकेंगी और शिक्षण सेवाएं प्रदान कर सकेंगी. इजाजत दी जाएगी."

तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि अभी लड़कियों को स्कूल जाने से रोका जा रहा है क्योंकि अभी पर्यावरण सुरक्षित नहीं है.एए/वीके (एएफपी)तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीबुर्के में जिंदगीअभी तक महिलाओं के लिए बुर्का पहनना अनिवार्य नहीं है, लेकिन कई महिलाएं कार्रवाई के डर से ऐसा करती हैं. इस तस्वीर में दो महिलाएं अपने बच्चों के साथ बाजार में पुराने कपड़े खरीद रही हैं. देश छोड़कर भागे हजारों लोग अपने पुराने कपड़े पीछे छोड़ गए हैं, जो अब ऐसे बाजारों में बिक रहे हैं.

तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीगलियों और बाजारों में तालिबानी लड़ाकेपुराने शहर के बाजारों में चहल-पहल है, लेकिन सड़कों पर तालिबान लड़ाकों का भी दबदबा है. वे गलियों में सब कुछ नियंत्रित करते हैं और उनके विचारों या नियमों के खिलाफ कुछ होने पर तुरंत दखल देते हैं.

तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीदाढ़ी बनाने पर रोकतालिबान ने नाइयों को दाढ़ी काटने और शेव करने से मना किया है. यह आदेश अभी हाल ही में हेलमंद प्रांत में लागू किया गया है. यह अभी साफ नहीं है कि इसे देश भर में लागू किया जाएगा या नहीं. 1996 से 2001 तक पिछले तालिबान शासन के दौरान पुरुषों की दाढ़ी काटने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था. headtopics.com

तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीमहिलाओं के चेहरे मिटाए जा रहेब्यूटी पार्लर के बाहर तस्वीरें हों या विज्ञापन तालिबान महिलाओं की ऐसी तस्वीरों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करता है. ऐसी तस्वीरें हटा दी गईं या फिर उन्हें छुपा दिया गया.तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगी

लड़कियों को अपनी शिक्षा का डरतालिबान ने लड़कियों को प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने की इजाजत दी है, लेकिन लड़कियों ने अभी तक माध्यमिक विद्यालयों में जाना शुरू नहीं किया है. यूनिवर्सिटी में लड़के और लड़कियों को अलग-अलग बैठने को कहा गया है.तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगी

नगालैंड में 13 ग्रामीणों की मौत के बाद तनाव, प्रदर्शनकारियों ने कैंप पर बोला धावा, 10 बड़ी बातें अमित शाह का गहलोत पर बड़ा हमला, राजस्थान में लॉ एंड ऑर्डर नहीं, 'लो और ऑर्डर करो' सरकार वैक्सीन की दोनों डोज नहीं तो मॉल-थियेटर में एंट्री नहीं, Omicron बढ़ने के बाद बेंगलुरु में नई Covid Guidelines

क्रिकेट का खेलक्रिकेट खेलने के लिए काबुल के चमन-ए-होजरी पार्क में युवकों का एक समूह इकट्ठा हुआ है. जबकि महिलाओं को अब कोई खेल खेलने की इजाजत नहीं है. क्रिकेट अफगानिस्तान में सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है.तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीबढ़ती बेरोजगारी

अफगानिस्तान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. विदेशी सहायता रुकने से वित्त संकट खड़ा हो गया है. इस तस्वीर में ये दिहाड़ी मजदूर बेकार बैठे हैं.तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीनमाज भी जरूरीजुमे की नमाज के लिए लोग इकट्ठा हुए हैं. मुसलमानों के लिए शुक्रवार का दिन अहम होता है और जुमे की नमाज का भी खास महत्व होता है. इस तस्वीर में एक लड़की भी दिख रही है जो जूते पॉलिश कर रोजी-रोटी कमाती है.

तालिबान राज में कुछ ऐसी है आम जिंदगीआम नागरिक परेशान, तालिबान खुशअफगान नागरिक एक अजीब संघर्ष में जिंदगी बिता रहे हैं, लेकिन तालिबान अक्सर इसका आनंद लेते दिखते हैं. इस तस्वीर में तालिबान के लड़ाके स्पीडबोट की सवारी का मजा ले रहे हैं. और पढो: DW Hindi »

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जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं, उत्तर प्रदेश का रण धारदार होता जा रहा है, सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने दल को बढ़ाने में लगे हुए हैं, गठबंधनों का दौर चल रहा है. इसी कड़ी में आज कांग्रेस की बागी नेता अदिति सिंह आज बीजेपी में शामिल हुईं तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने अखिलेश यादव से मुलाकात की. साथ ही कृष्णा पटेल वाली अपना दल पार्टी ने भी समाजवादी का दामन थाम लिया. यूं समझिए कि गठबंधन वाली राजनीति बहुत तेजी से विस्तारित हो गई है, ताकि पार्टियां अपने विरोधियों को मात दे सकें. देखिए शंखनाद का ये एपिसोड.

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रामायण आधारित प्रतियोगिता का आयोजन करेगी एमपी सरकार, विजेताओं को अयोध्या की हवाई यात्रामध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा रामायण के अयोध्या कांड पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में हर ज़िले से आठ लोगों का चयन किया जाएगा. पिछले महीने सरकार ने स्नातक पाठ्यक्रमों के कला संकाय के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को दर्शनशास्त्र के तहत एक वैकल्पिक विषय के रूप में रामचरितमानस को पढ़ाए जाने की घोषणा की थी.

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