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मनोज सिन्हा अमित शाह मुलाकात कश्मीर, Manoj Sinha

जम्मू-कश्मीर: डर कहें या मजबूरी, 'अब्दुल्ला-महबूबा' ने तो मोदी की राह पर चलने का मन बना लिया!

जम्मू-कश्मीर: डर कहें या मजबूरी, 'अब्दुल्ला-महबूबा' ने तो मोदी की राह पर चलने का मन बना लिया!

14-06-2021 16:44:00

जम्मू-कश्मीर: डर कहें या मजबूरी, 'अब्दुल्ला-महबूबा' ने तो मोदी की राह पर चलने का मन बना लिया!

जम्मू-कश्मीर में सियासत की सरगर्मी जोर पकड़ने लगी है। सात माह तक चुप बैठने के बाद 'गुपकार' समझौते में शामिल नेता अब बोल

हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है...जम्मू-कश्मीर में परीसीमन प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके लिए जल्द ही वहां के सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई जाएगी। अभी तक केंद्र की आलोचना करने वाले 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी' जैसे दल अब परीसीमन प्रक्रिया में शामिल होने की बात कर रहे हैं। पीएजीडी के अध्यक्ष डा. फारूक ने कहा, जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ तो कुछ शर्तों पर हुआ था। उनमें अनुच्छेद 370 भी एक था। केंद्र सरकार को इस पर दोबारा से विचार करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर मसले पर इंसानियत और जम्हूरियत का वादा किया था, लेकिन 2019 में जो हुआ वह जम्हूरियत नहीं थी।

विजय माल्या के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की अदालत का बड़ा फ़ैसला - BBC Hindi पेगासस से जासूसी की लिस्ट में और नाम बढ़े: रिपोर्ट में दावा- ED ऑफिसर, BSF के पूर्व DG और केजरीवाल के चीफ एडवाइजर की भी जासूसी हुई असम-मिजोरम बॉर्डर पर फायरिंग: जमीन विवाद में दोनों राज्यों की पुलिस और नागरिक भिड़े, आंसू गैस और लाठियां चलीं; असम के CM बोले-हमारे 6 जवान मारे गए

डॉ. अब्दुल्ला ने अपने बयान में एक बार फिर पाकिस्तान का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा, हम 'पाकिस्तानी' नहीं हैं। हम भारतीय नागरिक हैं। हम भारत में एक पार्टी हैं और जब हम अपनी बात करते हैं तो हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है। खुदा का वास्ता है हम पर पाकिस्तान का लेबल मत लगाइए। पीएजीडी के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था, दिग्विजय सिंह ने कश्मीरियों की भावनाओं को समझकर ही यह बयान दिया है। बता दें कि सिंह ने अपने बयान में कहा था, अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अनुच्छेद 370 के हटाए जाने को दोबारा से देखेगी।

महबूबा मुफ्ती की जुबान पर भी 'पाकिस्तान' का नाम आ गया...कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान आने के बाद जब आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हुआ तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी मैदान में कूद पड़ीं। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'शुक्र है कि अंबेडकर जी आज जिंदा नहीं हैं वरना भाजपा उन्हें भी पाकिस्तान का समर्थक बताकर उनकी बदनामी करती'। इससे पहले कि भाजपा उनके बारे में कोई बयान जारी करते, उन्होंने खुद ही 'पाकिस्तान' का नाम ले दिया। पिछले सप्ताह भाजपा ज्वाइन करने वाले कांग्रेसी जितिन प्रसाद ने दिग्विजय सिंह के वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा, 'वे अपने पाकिस्तान समर्थित विचारों के लिए जाने जाते हैं, इस तरह से वह एक दिन पाकिस्तान के विभाजन के लिए इंदिरा जी की भी निंदा कर सकते हैं। headtopics.com

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के अनुसार, 'गुपकार' समझौते में शामिल नेताओं की पोल खुल गई है। उन्हें अपना राजनीतिक करियर चौपट नजर आ रहा है। ये वही नेता हैं, जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर भारत की छवि खराब करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अब इनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, इसलिए ये चुपके से परीसीमन प्रक्रिया में भाग लेने की बात कह रहे हैं। इन्हीं नेताओं ने गत सप्ताह यह अफवाह उड़ा दी थी कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। जम्मू को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा, इन नेताओं की कोरी अफवाहों को सच मानकर पाकिस्तान ने भी बयान जारी करने में देर नहीं लगाई। यहां के लोग यह बात अच्छे से समझ चुके हैं कि पाकिस्तान के हितैषी कौन हैं। घाटी में इतने लम्बे समय से आतंकवाद खत्म क्यों नहीं हो पा रहा है।

विस्तार रहे हैं। ये उनका डर कहें या मजबूरी, मगर अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चलने का मन बना रहे हैं। 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी', जम्मू-कश्मीर की परीसीमन प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि वे कह रहे हैं कि केंद्र को कश्मीरियों का दिल जीतना है तो उन्हें वह सब कुछ लौटाना होगा जो पांच अगसत 2019 को कश्मीरियों से छीना गया है। उनकी जुबान से जो बयान निकल रहे हैं, उनमें 'पाकिस्तान' का नाम आ ही जाता है। जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा एवं राजनीतिक मामलों के विश्लेषक और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं, अब पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) वाले दलों के पास दूसरा विकल्प भी तो नहीं है। वे चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा मिल जाए। यही वजह है कि अब वे सभी नेता एकाएक 'गुपकार' बैठक में प्रकट हो गए हैं। नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा ने तो राजौरी क्षेत्र की नेकां इकाई के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी कर ली है।

विज्ञापनहम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है...जम्मू-कश्मीर में परीसीमन प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके लिए जल्द ही वहां के सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई जाएगी। अभी तक केंद्र की आलोचना करने वाले 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी' जैसे दल अब परीसीमन प्रक्रिया में शामिल होने की बात कर रहे हैं। पीएजीडी के अध्यक्ष डा. फारूक ने कहा, जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ तो कुछ शर्तों पर हुआ था। उनमें अनुच्छेद 370 भी एक था। केंद्र सरकार को इस पर दोबारा से विचार करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर मसले पर इंसानियत और जम्हूरियत का वादा किया था, लेकिन 2019 में जो हुआ वह जम्हूरियत नहीं थी।

डॉ. अब्दुल्ला ने अपने बयान में एक बार फिर पाकिस्तान का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा, हम 'पाकिस्तानी' नहीं हैं। हम भारतीय नागरिक हैं। हम भारत में एक पार्टी हैं और जब हम अपनी बात करते हैं तो हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है। खुदा का वास्ता है हम पर पाकिस्तान का लेबल मत लगाइए। पीएजीडी के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था, दिग्विजय सिंह ने कश्मीरियों की भावनाओं को समझकर ही यह बयान दिया है। बता दें कि सिंह ने अपने बयान में कहा था, अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अनुच्छेद 370 के हटाए जाने को दोबारा से देखेगी। headtopics.com

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महबूबा मुफ्ती की जुबान पर भी 'पाकिस्तान' का नाम आ गया...कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान आने के बाद जब आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हुआ तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी मैदान में कूद पड़ीं। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'शुक्र है कि अंबेडकर जी आज जिंदा नहीं हैं वरना भाजपा उन्हें भी पाकिस्तान का समर्थक बताकर उनकी बदनामी करती'। इससे पहले कि भाजपा उनके बारे में कोई बयान जारी करते, उन्होंने खुद ही 'पाकिस्तान' का नाम ले दिया। पिछले सप्ताह भाजपा ज्वाइन करने वाले कांग्रेसी जितिन प्रसाद ने दिग्विजय सिंह के वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा, 'वे अपने पाकिस्तान समर्थित विचारों के लिए जाने जाते हैं, इस तरह से वह एक दिन पाकिस्तान के विभाजन के लिए इंदिरा जी की भी निंदा कर सकते हैं।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के अनुसार, 'गुपकार' समझौते में शामिल नेताओं की पोल खुल गई है। उन्हें अपना राजनीतिक करियर चौपट नजर आ रहा है। ये वही नेता हैं, जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर भारत की छवि खराब करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अब इनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, इसलिए ये चुपके से परीसीमन प्रक्रिया में भाग लेने की बात कह रहे हैं। इन्हीं नेताओं ने गत सप्ताह यह अफवाह उड़ा दी थी कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। जम्मू को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा, इन नेताओं की कोरी अफवाहों को सच मानकर पाकिस्तान ने भी बयान जारी करने में देर नहीं लगाई। यहां के लोग यह बात अच्छे से समझ चुके हैं कि पाकिस्तान के हितैषी कौन हैं। घाटी में इतने लम्बे समय से आतंकवाद खत्म क्यों नहीं हो पा रहा है।

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करगिल विजय के 22 साल: हिमस्खलन का खतरा, माइनस 30° सेल्सियस तक तापमान, मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं...LoC पर ऐसे हालात में देश की हिफाजत कर रहे जवान

कश्मीर में गुरेज से लेकर लद्दाख में करगिल तक LoC पर भारतीय सेना कठिन हालात में चौबीसों घंटे पहरा दे रही है। सेना यहां किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए तैयार है। खराब मौसम में भी ये सैनिक इन चौकियों को नहीं छोड़ते हैं ताकि करगिल जैसा युद्ध दोबारा न हो। करगिल विजय को आज 22 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर आज हम गुरेज की कहानी आपके सामने रख रहे हैं। सेना की शौर्य से जुड़ी ऐसी ही कहानियां हम आपके सामन... | Indian army guarding, borders of Jammu Kashmir, Gurez and Kargil, Ladakh news, weather conditions

डर या मजबूरी नहीं है।बल्कि F_Abdullah01 OmarAbdullah MehboobaMufti JKPAGD को कश्मीरी नागरिकों की सोच समझ में आने लगी है कि उन्हें भारतीय नागरिक के रुप में चैन से जीना पसंद है ,कि पाकिस्तान उन्हें चैन से रहने नहीं देगा। OfficeOfLGJandK manojsinha_ pzfahad AmitShah JPNadda

जम्मू-कश्मीर: घायल जवानों से मिले डीजीपी, आतंकी मुदासिर पंडित और फयाज सोपोर हमले के मास्टरमाइंडजम्मू-कश्मीर: घायल जवानों से मिले डीजीपी, आतंकी मुदासिर पंडित और फयाज सोपोर हमले के मास्टरमाइंड JammuAndKashmir

जम्मू-कश्मीर में होंगे चुनाव? केंद्र सरकार राजनीतिक दलों से शुरू कर सकती है बात: सूत्रउधर, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बहाल करने में मदद करने के लिए गठित सात-पक्षीय गठबंधन गुप्कर एलायंस या PAGD ने बातचीत में शामिल होने के संकेत दिए हैं. नेशनल कांफ्रेंस ने कहा है कि वह परिसीमन प्रक्रिया में शामिल हो सकती है. UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 UPSC_PostponeESE2021 آج وہ کشمير ہے محکوم و مجبور و فقير کل جسے اہل نظر کہتے تھے ايران صغير Swagat

कश्मीर में फिर घातक स्टील बुलेट का इस्तेमाल, वर्ष 2016 में पहली बार इस आतंकी संगठन ने किया था इसका इस्तेमालसोपोर में शनिवार को हुए हमले में आतंकियों ने फिर स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया है। कश्मीर में आतंकी कई बार इसका इस्तेमाल कर चुके हैं। इस बुलेट को बेहद घातक माना जाता है।जैश-ए-मोहम्मद ने अगस्त 2016 में पुलवामा में सुरक्षाबलों के एक शिविर पर हमले में किया था। Bankers ne PrivatisationNoSolution PublicWithPBSs trend kiya. Ye news kyun nahi dikhaate hai? Kisi ne mana kiya hai kya

मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ: वैक्सीनेशन में निजी अस्पताल पिछड़े, कश्मीर पर दिग्विजय के बयान पर विवाद और G-7 समिट में मोदी ने दिया वन अर्थ-वन हेल्थ का मंत्रनमस्कार!\nचीन के OBOR के खिलाफ अमेरिका ने कौन सा बड़ा दांव खेला? दवाओं और वैक्सीन पर क्या हैं कैबिनेट के फैसले और भगोड़े कारोबारी चौकसी पर क्या है डोमिनिका की कोर्ट का फैसला? आज सुबह हम ऐसी ही खास खबरें आपके लिए लेकर आए हैं। तो चलिए शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ… | Dainik Bhaskar (दैनिक भास्कर) Morning Headlines; Here are today's top stories for you PM Modi addresses G7, Digvijaya singh on Article-370 in kashmir, Corona Vaccine Private Hospital Dose Status and More On Bhaskar.com.

JK: सोपोर में हुए आतंकी हमले पर क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती, देखेंसोपोर हमले पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महूबूबा मुफ्ती का बयान आया है. महबूबा ने कहा कि दिल्ली की बंदूक से आतंक का मसला नहीं सुलझेगा, ना ही जवानों की बंदूकों से मसला सुलझाया जा सकता है. तो क्या महबूबा मुफ्ती को दहशतगर्दी और जवानों के जवाब में कोई फर्क नहीं लगता? दिल्ली की बंदूक से उनका क्या मतलब है? देखें ये वीडियो.

J-K: म‍िल‍िए हेल्थ वर्कर इस्मा कादरी से, 10 हजार लोगों को लगा चुकी हैं वैक्सीनजम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन जोरों-शोरों से चल रहा है. अभी तक जम्मू-कश्मीर में कुल 36,39,172 लोगों ने टीकाकरण करवा लिया है. इनमें 18-44 आयु वर्ग के लोग भी शामिल है. तेजी से चल रहे वैक्सीनेशन अभियान में हेल्थ केयर वर्करों का बहुत बड़ा योगदान है. ऐसी ही एक हेल्थ केयर वर्कर अनंतनाग जिले की इस्मा कादरी हैं, जिन्होंने अभी तक लगभग 10 हजार लोगों को वैक्सीन लगाई है. देखिए जम्मू-कश्मीर से आजतक संवाददाता अशरफ वाणी की ये रिपोर्ट.