चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के बाद क्या राजनीतिक दल भी आएंगे RTI के अंदर?

चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के बाद क्या राजनीतिक दल भी आएंगे RTI के अंदर?

15.11.2019

चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के बाद क्या राजनीतिक दल भी आएंगे RTI के अंदर?

भारत के मुख्य न्यायाधीश का दफ़्तर अब आरटीआई क़ानून के अंतर्गत होगा, लेकिन तमाम राजनीतिक दल कब इसके दायरे में आएंगे.

Getty Images पीआईओ और सीआईसी के बीच मामला तीनों ही मामलों में सर्वोच्च अदालत के जनसूचना अधिकारी (पीआईओ) ने जानकारी देने से इनकार कर दिया था, लेकिन केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने पीआईओ के फ़ैसले के ख़िलाफ़ निर्णय लिया और उन्हें जानकारी साझा करने का निर्देश दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पीआईओ ने पहले दो मामलों में सीआईसी के निर्देश के ख़िलाफ़ सीधा सुप्रीम कोर्ट में अपील की. वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति की घोषणा से जुड़े मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. इस मामले को चुनौती देने का आधार यह बनाया गया कि जजों की संपत्ति से जुड़ी सूचना सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में नहीं होती, यह जानकारी चीफ़ जस्टिस के दफ़्तर के अंतर्गत आती है, जो आरटीआई क़ानून से बाहर है. इस पर हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि बाकी सरकारी दफ़्तरों की तरह चीफ़ जस्टिस का दफ़्तर भी लोक-प्राधिकरण के तहत आता है, जिसे आरटीआई क़ानून के अंतर्गत आना चाहिए. हाईकोर्ट के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट के पीआईओ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इमेज कॉपीरइट क्या राजनीतिक दल भी आएंगे आरटीआई के दायरे में ? सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने तीन अलग-अलग मामलों पर एक मिला-जुला फ़ैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में माना है कि सीजीआई का दफ़्तर सुप्रीम कोर्ट से अलग नहीं है. अब क्योंकि सुप्रीम कोर्ट लोक प्राधिकरण के तहत आता है तो इसलिए सीजीआई का दफ़्तर भी उसमें शामिल है और यही वजह है कि वह भी आरटीआई के अंतर्गत आएगा. अब इस फ़ैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी कोई भी जानकारी यह बोलकर इनकार नहीं की जाएगी कि वह सीजीआई के दफ़्तर के अंतर्गत आती है और सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में शामिल नहीं है. यह फ़ैसला उन संस्थानों के लिए भी एक संकेत होना चाहिए जो आरटीआई क़ानून के तहत लोगों के प्रति जवाबदेही से बचना चाहते हैं. इस फ़ैसले से उस मांग को भी बल मिलेगा जिसमें राजनीतिक पार्टियों को भी आरटीआई के तहत लाने की बात कही जाती है. साल 2013 में सीआईसी ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए देश की छह प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई क़ानून के तहत जनता के प्रति जवाबदेह बताया था. राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई से बाहर रहने का बहुत फ़ायदा मिलता है. इसके ज़रिए उन्हें टैक्स में छूट मिलती है, सस्ती दरों पर ज़मीन मिलती इतना ही नहीं ये राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में शामिल वादों को पूरा करने के बदले लोगों से बड़ी मात्रा में फ़ंड भी जुटाते हैं. और पढो: BBC News Hindi

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आना ही चाहिये. 👍👌☝️ ये तो बहुत ज़रूरी है, सारी गन्दगी की जड़ को खतम करना चाहिए। अगर राजनैतिक दल जो वर्तमान मे भ्रष्टाचार की जड है आरटीआई के दायरे में नहीं है तो फिर कैसे देश से भ्रष्टाचार हटाने की बात सम्भव है फिर तो हम केवल भ्रष्टाचार हटाने के सपने में सोये या खोये हुये हैं|वैसे भी आरटीआई लोगों को एक नयी कचहरी में दौड लगाने का नया प्लेटफार्म बनाया गया है|

No rules for recently goverment Bikul aana chahiye जरूर होने चाहिए। सबसे पहले अगर देश के लिए कुछ जरूरी है तो वो है नेताओं का जवाबदेह होना ।क्योंकि वोट लेकर जनता को ठेंगा दिखा देता है ।इसलिए सबसे पहला काम यही होना चाहिए कि सभी नेताओं एवं उनके दफ्तरों को RTI के दायरे में लाया जाए । साहेब के रहते तो भूल जाओ।😀😀😀😀😀

All is Right बीबीसी भी आएगा।

चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के बाद क्या राजनीतिक दल भी आएंगे RTI के अंदर?सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फ़ैसला सुनाया है कि भारत के मुख्य न्यायधीश का दफ़्तर अब सूचना के अधिकार क़ानून के तहत लोगों के प्रति जवाबदेह होगा।

They should come और RTI आयेगा सरकार के अंदर में सारा game चेंज होगा 🤣😂 जरूर राजनैतिक दलों को भी आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए। What about PMO ? BhootSantosh First let the political parties come under Income Tax act along with social workers RSS. सराहनीय कार्य अगर सरकार परिदर्शता और भ्रटाचार मुक्त समाज की इक्छुक है तो कथनी और करनी मे फ़र्क़ नही करे गी। मोदी है तो मुमकिन है।

Need must लोकतंत्र में जब न्याय व्यवस्था के कार्यालय को RTI के दायरे में लाया गया है तो राजनीतिक पार्टियों को खुद RTI के दायरे में आने का एलान कर देना चाहिये। Aana to chahiye

SC के फैसले के बाद बोले धनोआ- राजनीतिक कारणों के लिए पैदा किया गया राफेल विवादराफेल विमान सौदे में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि अच्छा है कि ये विवाद खत्म हो गया. जो सरकार से सवाल करे उसे पत्रकार कहते हैं जो विपक्ष से सवाल करे उसे दलाली कहते है dalle dalle हमारे देश में केवल विवाद ही उत्पन्न किया जाता है। लेकिन पप्पू को कौन समझाएगा ?

अरे ना बाबा सारी चोरी खुल जायेगी सब आयेंगे पर परिवर्तन रक्त क्रांति से होगा! युवा लहू माँ भारती को भाता है! तैयार हो असली स्वाधीनता हेतु? अंतिम सांस तक संघर्ष है! मेरे पूर्वजों ने पहले मुल्लाओं फिर गौरों को मारा, मैं और मेरे बेटे गुजरात की गंदी नाली के गद्दार कीड़ों को नेस्तनाबूद कर देंगे! Kahi esa na ho ki RTI Pmo ke ander aa jae

Seems impossible ! राजनीतिक दल आए या न आए पर मोदी जरूर आना चाहिए। 😂 क्यों नही आने चाहियें । Pehle talwar to pakad नामुमकिन Chief justice ko to dekh lo pehle Mr order order se lakri ka hatoda Le ke talwar hath me de do Phir change dekhna Talwars should be fully sharp and one sided To judge babu apni jameen ki registration black me karana bhul jayega Samajh me a jayega Raja kon hote Hain Lamb

आने चाहिये लेकिन कोई आगे आकर प्रयास करेगा , तब ना.

राफेल: पूर्व वायुसेनाध्यक्ष धनोआ बोले- राजनीतिक फायदे के लिए मामले को उठाना गलतउन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के मामलों को उठाना और अपने सशस्त्र बलों के हित को पीछे सदा बीजेपी की सरकार नहीं रहेगी सरकारें तो आती जाती है

आना भी चाहिए THE BEST DIIGAN आने तो चाहिए! जीस दीन संबिघान पर ए धारा लाया जाएगा कि भारत मे जीतने धर्म के जीतना पारसेनट लोग हे उसको देश के हर संस्था पर उतना हक होगा ताभी देश का बिस्वास बाड़ेगा बरना जीस तरहा से अबिसबास का खाइ बड़ रहा हे ए और गहरा होता जायेगा। एक बार जब बिस्वास खो जाते हे उसे बिस्वास दिलाना मूशकिल होता हे।

It should be come under RTI voluntarily आर टि आइ के अन्दर आने से किय़ा होगा जब देश के संस्था पर उग्र हिन्दू संगठन का कब्जा हो जो लोग संबिघान का धज्जियाँ उड़ाते हे कोर्ट गलत फेसला लेता हे मूसलिम को आतंकी करार दिया जाता हे झूठा मूकदमा लागाया जाता हे मब लिनचिंग करके मारा जाता हे फिर कानून हो इया ना हो इससे मूसलिम का किया

बिलकुल आने चाहिए Those days are tooooo faaaar.Pol parties are private ownership( companies )entities,hiding and not transparency is the norm. All is passe in the name of democratic voice - corporate nexus,money filtered from govt deals receipt for individual donations... इनको तो RTI के दायरे में लाना बेहद जरुरी है राजनीतिक दलों को ।

reallucky0 क्या BBC भी आएगा RTI के अंदर 😂😂😂😂

अगले साल भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे ब्राजील के राष्ट्रपति बोलसोनारोमोदी 11वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आये हुए हैं. मोदी ने इस शिखर सम्मेलन के इतर बोलसोनारो के साथ मुलाकात की. यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आतंकवाद निरोधक सहयोग के लिए तंत्र बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा और दुनिया की पांच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करेगा. There are lot of similarities

Bilkul aana chahia. Kion ke asal hukumran to yehi hain. आने चाहियें

मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चौतरफा स्वागतमुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चौतरफा स्वागत SupremeCourt CJIoffice RTIact सुप्रीमकोर्ट सीजेआईऑफिस आरटीआईएक्ट मुख्यन्यायाधीशकार्यालय StopIsraeliTerror

राफेल पर SC के फैसले से क्या हमेशा के लिए खत्म हो गए डील पर सवाल?सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले की जांच के लिए दायर की गई रिव्यू पिटिशन को खारिज कर दिया है. इसी के साथ राफेल डील को कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है. ऐसे में अब राफेल डील पर हमेशा के लिए सवाल उठाने की गुंजाइश भी खत्म हो गई है. जबकि, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. RahulRaFAIL List of individuals who come out looking spiteful, venomous and disgraced post the Rafale verdict: - Rahul Gandhi - Arun Shourie - Yashwant Sinha - Prashant Bhushan - N Ram - Lobby of Arms Brokers - Lutyens media on Congress’s roll Only their motivation differs. RahulRaFAIL वो तो मिलना ही था ये मोदी जी है पप्पू नही जो बैंक बैलेंस बढ़ाते है😆😆😆



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