चीन को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन के सहयोगी गठबंधन 'फ़ाइव आइज़' में दरार के संकेत - BBC News हिंदी

चीन को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन के सहयोगी गठबंधन 'फ़ाइव आइज़' में दरार के संकेत

09-05-2021 14:25:00

चीन को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन के सहयोगी गठबंधन 'फ़ाइव आइज़' में दरार के संकेत

फ़ाइव आइज़ नाम के इस गठबंधन में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. न्यूजीलैंड ने चीन की आलोचना करने से साफ़ इनकार कर दिया है

चीन सेनहीं चाहतान्यूज़ीलैंडहैरानी की बात है कि मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर ख़ुद पर गर्व करने वाले न्यूज़ीलैंड ने चीन की निंदा करने की मुहिम में शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया है.न्यूज़ीलैंड की विदेश मंत्री ननइया महुता ने कहा कि चीन पर इस तरह दबाव बनाने के लिए गठबंधन की भूमिका बढ़ाने को लेकर न्यूज़ीलैंड 'असहज महसूस' करता है.

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वैसे, न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने सोमवार को कहा था कि चीन के साथ मतभेदों को दूर करना काफ़ी कठिन है. इस बयान के बाद लगता है न्यूज़ीलैंड, चीन से अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाह रहा है.उधर चीन का सरकारी मीडिया ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच पैदा हुई इस खटास को काफी महत्व दे रहा है.

चीन, न्यूज़ीलैंड का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है. न्यूज़ीलैंड अपने क़रीब 30 फ़ीसदी उत्पादों के निर्यात के लिए चीन पर निर्भर है. इनमें से ज़्यादातर डेयरी उत्पाद हैं. ऐसा ही हाल ऑस्ट्रेलिया का भी है. लेकिन चीन की नीतियों पर इन दोनों पड़ोसी और सहयोगी देशों का रुख़ साफ़ तौर पर अलग है. headtopics.com

ऑस्ट्रेलिया की केंद्र सरकार ने अपने विक्टोरिया राज्य में प्रस्तावित 'वन बेल्ट एंड वन रोड' योजना के तहत होने वाले निवेश को हाल में रोक दिया है. वहीं पिछले एक साल के दौरान, चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर कई तरह के कारोबारी प्रतिबंध लगाए हैं.दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के और ख़राब हो जाने से ऑस्ट्रेलिया को झटका लगा है. चीन को भेजी जाने वाली शराब में पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में 2021 की इस अवधि में कथित तौर पर 96 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई. अब यह घटकर केवल 12 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया है, जबकि 2020 में इस दौरान 32.5 करोड़ का सामान वहां भेजा गया था. दूसरी ओर, न्यूज़ीलैंड से चीन के कारोबारी रिश्ते अब तक के सबसे बढ़िया स्तर तक पहुंच गए हैं.

इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,चीन का सरकारी मीडिया ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पैदा हुई इस खटास को काफी महत्व दे रहा हैगठबंधन से न्यूजीलैंड कोफ़ायदायहां सवाल उठता है कि न्यूज़ीलैंड को खुफ़िया सूचनाएं साझा करने से फ़ाइव आइज़ के बाकी देशों को बदले में क्या मिला. इसका जवाब होगा कि 'बहुत कम' मिला.

पिछले साल अधिकारियों ने माना था कि चूंकि दुनिया के तमाम मसलों पर 'फ़ाइव आइज़' के विचार लगभग एक जैसे हैं, लिहाज़ा चीन के मसले पर भी यही बात लागू होगी. मई 2020 में इस गठबंधन ने अपनी भूमिका को महज सुरक्षा और खुफ़िया जानकारी साझा करने तक सीमित न रखने का फ़ैसला लिया. संस्था ने तय किया कि अब वह मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी काम करेगी.

गठबंधन ने पिछले साल नवंबर में चीन की सरकार के हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंत्र को दबाने की कोशिशों की खुलकर आलोचना की. उस समय चीन ने हॉन्ग कॉन्ग में चुने गए प्रतिनिधियों को अयोग्य घोषित करने वाले नए क़ानूनों को पेश किया था.इस आलोचना के जवाब में चीन के एक सरकारी प्रवक्ता ने गुस्से में अपनी प्रतिक्रिया दी और फ़ाइव आईज़ का मज़ाक भी उड़ाया. उन्होंने यह भी कहा कि चीन की संप्रभुता को नुक़सान पहुंचाने वाले पाएंगे कि 'उनकी आंखें' बाहर निकल गई हैं. headtopics.com

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वीडियो कैप्शन,कोरोना में चीन की भारत को मदद से क्या सुधरेंगे रिश्ते?चीन की धमकी के बाद आई समस्याइस प्रकरण के छह महीने बाद, चीन के मसले पर न्यूज़ीलैंड की सरकार ने अपनी पार्टी लाइन से अलग फ़ैसला लिया है. इसका मतलब है कि पिछले साल 'फ़ाइव आइज़' की भूमिका में किया गया विस्तार, फिलहाल थम गया है.

इस चलते कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह गठबंधन अब मुश्किलों में फंस गया है. हालांकि ऐसे दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.असल में न्यूज़ीलैंड फ़ाइव आइज़ गठबंधन नहीं छोड़ रहा है. वह केवल इस गठबंधन के पहले और आज की भूमिकाओं के बीच के अंतर को बताने की कोशिश कर रहा है. पहले इस संस्था का मक़सद केवल खुफ़िया सूचनाओं को साझा करना ही था.

हालांकि न्यूज़ीलैंड के खुफ़िया जगत के कई लोगों को गठबंधन के सहयोगियों के बीच की तक़रार के खुलेआम हो जाने से निश्चित तौर पर शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी. अब तक गठबंधन के भीतर साझा की गई अधिकांश खुफ़िया जानकारी वॉशिंगटन से आती है. इसके बाद सबसे बड़ा योगदान ब्रिटेन का रहता है. उसकी संस्थाएं जीसीएचक्यू, एमआई6 और एमआई5 का इसमें अहम योगदान होता है. हालांकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया इस मामले में काफी कम योगदान देता है.

वहीं न्यूज़ीलैंड की बात करें तो उसका योगदान बहुत थोड़ा है. 2017 की एक खुफ़िया समीक्षा में पाया गया कि गठबंधन के देशों के बीच साझा की जाने वाली सूचनाओं के 99 हिस्से में न्यूज़ीलैंड का योगदान केवल एक का होता है. ज़ाहिर-सी बात है कि यदि न्यूज़ीलैंड ने यह गठबंधन छोड़ दिया तो उसे बहुत कुछ खोना पड़ेगा. headtopics.com

आख़िर में ये सवाल कि क्या यह गठबंधन अपने आप को एक एकीकृत कूटनीतिक या राजनीतिक दबाव समूह में बदल पाएगा?आज की दशा देखकर तो ऐसा होना कठिन लगता है. तो क्या खुफ़िया सूचनाएं साझा करने के लिए बनी इस संस्था का अस्तित्व अब ख़तरे में है? नहीं, यह स्थिति अभी नहीं है.

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