Groundreport, Covid 19, Remdesevir, Blackmarketing, Delhi News, Corona İn Delhi, Remdesivir İnjection, Black Marketing, Exclusive, दिल्ली समाचार, Delhi News İn Hindi, Latest Delhi News İn Hindi, Delhi Hindi Samachar

Groundreport, Covid 19

ग्राउंड रिपोर्ट : कम उत्पादन नहीं, सरकारी तंत्र की लापरवाही से बढ़ी रेमडेसिविर की कालाबाजारी

कोरोना वायरस की वजह से रेमडेसिविर इंजेक्शन को अब हर कोई जानने लगा है।

03-05-2021 02:39:00

ग्राउंड रिपोर्ट : कम उत्पादन नहीं, सरकारी तंत्र की लापरवाही से बढ़ी रेमडेसिविर की कालाबाजारी GroundReport covid19 Remdesevir Blackmarketing ArvindKejriwal

कोरोना वायरस की वजह से रेमडेसिविर इंजेक्शन को अब हर कोई जानने लगा है।

दरअसल देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन के उत्पादन की कमी नहीं है। हर महीने 38 लाख से ज्यादा इंजेक्शन बनते आ रहे हैं। अब तो सरकारों ने भी इसे अपने नियंत्रण में ले लिया है लेकिन इसके बाद भी तीमारदारों को यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। पड़ताल के दौरान हालात ऐसे मिले कि अस्पताल से एक पर्ची तीमारदार को यह कहकर दी जाती है कि मरीज की हालत गंभीर है, इस इंजेक्शन की जल्द से जल्द जुगाड़ कर लो।

डॉ. मनमोहन सिंह की चेतावनी: पूर्व PM बोले- देश की इकोनॉमी के लिए 1991 से भी मुश्किल वक्त आ रहा; ये खुश होने का नहीं, विचार करने का समय अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का भारत दौरा अगले हफ़्ते, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात: आज की बड़ी ख़बरें - BBC Hindi आज का इतिहास: मनमोहन सिंह के बजट ने बदल दी देश की अर्थव्यवस्था की दिशा, उदारीकरण के साथ खत्म हुआ था लाइसेंस राज

इसके बाद तीमारदार चारों तरफ धक्के खाता है और मदद मांगता है लेकिन उसे इंजेक्शन नहीं मिलता। यह स्थिति तब है जब सरकार ने इंजेक्शन को नियंत्रण में लेते हुए नियम बनाया है कि एक अस्पताल से संबंधित जिला प्रशासन के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग पहुंचेगी और फिर वहां से वितरक के पास एक पत्र जाएगा जिसके आधार पर इंजेक्शन दिया जाएगा लेकिन अस्पताल और प्रशासन किसी को अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं है।

इंजेक्शन की कमी आज भी नहींरेमडेसिविर का उत्पादन प्रति माह 38 लाख हो रहा था जो कि इसी महीने में 45 लाख पार कर चुका है। पहले देश की आठ कंपनी जाइडस कैडिला, सिपला, हैक्ट्रो इत्यादि इंजेक्शन बना रही थीं अब 21 और कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है। इससे पता चलता है कि देश में इंजेक्शन उत्पादन की कमी बिलकुल भी नहीं है। headtopics.com

10 फीसदी से ज्यादा मांग मतलब प्रैक्टिस गलतनीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल का कहना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन आमतौर पर दो से तीन फीसदी मरीजों में ही दिया जा सकता है। वर्तमान माहौल देखें तो एक जिले में कुल सक्रिय मरीजों के 10 फीसदी तक को इंजेक्शन दे सकते हैं। अगर इससे अधिक मांग हो रही है तो इसका मतलब उक्त जिले या राज्य में गलत प्रैक्टिस को बढ़ावा मिल रहा है।

मौत से नहीं रोक पाएगा रेमडेसिविरआईसीएमआर के पूर्व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आर गंगाखेड़कर ने कहा कि पिछले वर्ष अप्रैल माह में ही कोरोना वायरस के उपचार में रेमडेसिविर को लेकर चीन ने सबसे पहले अध्ययन किया था। इससे पहले तक दक्षिण अफ्रीका में इबोला के लिए इस्तेमाल हुआ लेकिन चीन के बाद अमेरिका और अन्य देशों में अध्ययन हुआ। सभी जगह परिणाम यही आया कि इस इंजेक्शन से किसी मरीज की मौत को नहीं रोका जा सकता।

प्राइवेट अस्पतालों में मांग सबसे ज्यादा क्यों?दिल्ली और एनसीआर में इंजेक्शन के लिए घूम रहे ज्यादातर तीमारदारों के मरीज यहां के प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। यहां के डॉक्टर आईसीयू में हाई प्रेशर पर मौजूद मरीज या फिर वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज पर खुलेआम परीक्षण कर रहे हैं। एक ही मरीज के लिए टोसिलिजुमैब, प्लाज्मा, रेमडेसिविर, डेक्थामेथासोन, फेविपिराविर (फेवि फ्लू) जैसी सभी दवाएं तक दे रहे हैं। जबकि यह उन्हें भी पता है कि इनमें से एक भी दवा अब तक असरदार साबित नहीं हुई है। इसकी पुष्टि एम्स के निदेशक भी कर चुके हैं।

तीमारदारों को भी जागरूक होने की जरूरतदिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल में रेमडेसिविर इंजेक्शन है तो और भी उसके समान असर वाली दवाएं हैं। सभी का अब तक ठोस असर पता नहीं चला है लेकिन अगर हमारे पास कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो हम उसके वैकल्पिक दवाओं को दे सकते हैं। जरूरी नहीं है कि तीमारदार रेमडेसिविर या टोसिलिजुमैब के लिए इधर उधर भटकता रहे। headtopics.com

IND vs SL: भारत ने 2-1 से जीती वन-डे सीरीज, आखिरी मैच में श्रीलंका ने तीन विकेट से हराया अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच योगी सरकार ने टीवी विज्ञापनों पर ख़र्चे 160 करोड़ रुपये टोक्यो ओलिंपिक LIVE: हॉकी में भारत ने न्यूजीलैंड को 3-2 से हराया, दीपिका-प्रवीण की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में; पहला गोल्ड चीन के नाम

. 21 अप्रैल से 9 मई के बीच दिल्ली को 1,50,900, यूपी को 336200 और हरियाणा को 84800 इंजेक्शन मिले हैं।. यह सभी इंजेक्शन मूल्य और बिक्री नियंत्रण के दायरे में हैं।. हर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और सीएमओ को इंजेक्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

. राष्ट्रीय दवा विक्रेता संघ के कैलाश गुप्ता के अनुसार हर दिन 500 से 600 लोग रेमडेसिविर के लिए दिल्ली एनसीआर में चक्कर लगा रहे हैं लोग।जरूरत कम फिर भी मांग पूरी नहींस्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 33 में से केवल तीन लाख सक्रिय मरीजों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन मिलना चाहिए। दिल्ली एनसीआर की बात करें तो यहां आंकड़ा 20 से 25 हजार ही होना चाहिए। यह कोविड उपचार प्रोटोकॉल कहता है। एक मरीज को कम से कम छह डोज की आवश्यकता होती है। इसलिए वर्तमान में अधिकतम 18 लाख डोज पर्याप्त हैं लेकिन 45 लाख का उत्पादन होने के बाद भी कमी खत्म नहीं हो रही। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में अभी 96 हजार सक्रिय मामले हैं इनमें से अधिकतम 10 हजार मरीजों के लिए 60 हजार इंजेक्शन की मांग होनी चाहिए।

विस्तार हालात यह हैं कि मरीजों के परिजन इंजेक्शन के लिए अस्पताल की पर्ची लेकर कभी दिल्ली तो कभी नोएडा-गाजियाबाद यहां तक कि मुंबई और हैदराबाद तक चक्कर लगा रहे हैं। वहीं कालाबाजारी इस कदर बढ़ चुकी है कि एक इंजेक्शन 30 से 50 हजार रुपये तक की कीमत में मिल रहा है। दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहरों में लगभग एक जैसा हाल है। अमर उजाला ने जमीनी स्तर पर जाकर इस मारामारी के पीछे कारणों का पता लगाया तो हकीकत कुछ और ही सामने आई।

विज्ञापनदरअसल देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन के उत्पादन की कमी नहीं है। हर महीने 38 लाख से ज्यादा इंजेक्शन बनते आ रहे हैं। अब तो सरकारों ने भी इसे अपने नियंत्रण में ले लिया है लेकिन इसके बाद भी तीमारदारों को यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। पड़ताल के दौरान हालात ऐसे मिले कि अस्पताल से एक पर्ची तीमारदार को यह कहकर दी जाती है कि मरीज की हालत गंभीर है, इस इंजेक्शन की जल्द से जल्द जुगाड़ कर लो। headtopics.com

इसके बाद तीमारदार चारों तरफ धक्के खाता है और मदद मांगता है लेकिन उसे इंजेक्शन नहीं मिलता। यह स्थिति तब है जब सरकार ने इंजेक्शन को नियंत्रण में लेते हुए नियम बनाया है कि एक अस्पताल से संबंधित जिला प्रशासन के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग पहुंचेगी और फिर वहां से वितरक के पास एक पत्र जाएगा जिसके आधार पर इंजेक्शन दिया जाएगा लेकिन अस्पताल और प्रशासन किसी को अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं है।

इंजेक्शन की कमी आज भी नहींरेमडेसिविर का उत्पादन प्रति माह 38 लाख हो रहा था जो कि इसी महीने में 45 लाख पार कर चुका है। पहले देश की आठ कंपनी जाइडस कैडिला, सिपला, हैक्ट्रो इत्यादि इंजेक्शन बना रही थीं अब 21 और कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है। इससे पता चलता है कि देश में इंजेक्शन उत्पादन की कमी बिलकुल भी नहीं है।

कोरोना देश में: बीते दिन 39496 केस आए, 35124 ठीक हुए और 541 मौतें; पिछले 23 दिनों में इलाज करा रहे मरीजों के आंकड़े में 1.14 लाख की कमी आज का जीवन मंत्र: खाने-पीने की चीजों में और सुख-सुविधाओं में मन लगा रहता है तो शांति नहीं मिलती है मेडिकल साइंस में आस्था का मेल: ऑपरेशन से पहले डॉक्टर ने लड़की से कहा- हनुमान चालीसा पढ़ो, बिना बेहोश किए 3 घंटे चली सर्जरी

10 फीसदी से ज्यादा मांग मतलब प्रैक्टिस गलतनीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल का कहना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन आमतौर पर दो से तीन फीसदी मरीजों में ही दिया जा सकता है। वर्तमान माहौल देखें तो एक जिले में कुल सक्रिय मरीजों के 10 फीसदी तक को इंजेक्शन दे सकते हैं। अगर इससे अधिक मांग हो रही है तो इसका मतलब उक्त जिले या राज्य में गलत प्रैक्टिस को बढ़ावा मिल रहा है।

मौत से नहीं रोक पाएगा रेमडेसिविरआईसीएमआर के पूर्व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आर गंगाखेड़कर ने कहा कि पिछले वर्ष अप्रैल माह में ही कोरोना वायरस के उपचार में रेमडेसिविर को लेकर चीन ने सबसे पहले अध्ययन किया था। इससे पहले तक दक्षिण अफ्रीका में इबोला के लिए इस्तेमाल हुआ लेकिन चीन के बाद अमेरिका और अन्य देशों में अध्ययन हुआ। सभी जगह परिणाम यही आया कि इस इंजेक्शन से किसी मरीज की मौत को नहीं रोका जा सकता।

प्राइवेट अस्पतालों में मांग सबसे ज्यादा क्यों?दिल्ली और एनसीआर में इंजेक्शन के लिए घूम रहे ज्यादातर तीमारदारों के मरीज यहां के प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। यहां के डॉक्टर आईसीयू में हाई प्रेशर पर मौजूद मरीज या फिर वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज पर खुलेआम परीक्षण कर रहे हैं। एक ही मरीज के लिए टोसिलिजुमैब, प्लाज्मा, रेमडेसिविर, डेक्थामेथासोन, फेविपिराविर (फेवि फ्लू) जैसी सभी दवाएं तक दे रहे हैं। जबकि यह उन्हें भी पता है कि इनमें से एक भी दवा अब तक असरदार साबित नहीं हुई है। इसकी पुष्टि एम्स के निदेशक भी कर चुके हैं।

तीमारदारों को भी जागरूक होने की जरूरतदिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल में रेमडेसिविर इंजेक्शन है तो और भी उसके समान असर वाली दवाएं हैं। सभी का अब तक ठोस असर पता नहीं चला है लेकिन अगर हमारे पास कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो हम उसके वैकल्पिक दवाओं को दे सकते हैं। जरूरी नहीं है कि तीमारदार रेमडेसिविर या टोसिलिजुमैब के लिए इधर उधर भटकता रहे।

सरकारी आंकड़ों में कहां है कमी?. 21 अप्रैल से 9 मई के बीच दिल्ली को 1,50,900, यूपी को 336200 और हरियाणा को 84800 इंजेक्शन मिले हैं।. यह सभी इंजेक्शन मूल्य और बिक्री नियंत्रण के दायरे में हैं।. हर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और सीएमओ को इंजेक्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

. राष्ट्रीय दवा विक्रेता संघ के कैलाश गुप्ता के अनुसार हर दिन 500 से 600 लोग रेमडेसिविर के लिए दिल्ली एनसीआर में चक्कर लगा रहे हैं लोग।जरूरत कम फिर भी मांग पूरी नहींस्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 33 में से केवल तीन लाख सक्रिय मरीजों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन मिलना चाहिए। दिल्ली एनसीआर की बात करें तो यहां आंकड़ा 20 से 25 हजार ही होना चाहिए। यह कोविड उपचार प्रोटोकॉल कहता है। एक मरीज को कम से कम छह डोज की आवश्यकता होती है। इसलिए वर्तमान में अधिकतम 18 लाख डोज पर्याप्त हैं लेकिन 45 लाख का उत्पादन होने के बाद भी कमी खत्म नहीं हो रही। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में अभी 96 हजार सक्रिय मामले हैं इनमें से अधिकतम 10 हजार मरीजों के लिए 60 हजार इंजेक्शन की मांग होनी चाहिए।

विज्ञापनसरकारी आंकड़ों में कहां है कमी?विज्ञापनआपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?हांखबर की भाषा और शीर्षक से आप संतुष्ट हैं?हांखबर के प्रस्तुतिकरण से आप संतुष्ट हैं?

हांखबर में और अधिक सुधार की आवश्यकता है? और पढो: Amar Ujala »

आज की पॉजिटिव खबर: राजस्थान के दो युवाओं ने 6 महीने पहले मिट्टी से बने बर्तन और होम डेकोरेशन आइटम्स बेचने शुरू किए, अब हर महीने 1 लाख का बिजनेस

मिट्टी के बर्तन बेहद खास होते हैं। पर्यावरण और हेल्थ के लिहाज से इनका इस्तेमाल फायदेमंद होता है। आजकल इनकी डिमांड भी बढ़ी है, लेकिन असल दिक्कत इनकी मार्केटिंग को लेकर है। यह न तो कस्टमर्स को आसानी से मिल पाते हैं और न ही इन्हें बनाने वाले कारीगरों को मार्केटिंग के लिए सही प्लेटफॉर्म मिल पाता है। | Abhinav and Megha of Rajasthan started selling pottery made of clay 6 months ago, now a business of one lakh rupees every month

ArvindKejriwal सरकार लापरवाह ना होती तो इतनी जरुरत ही नहीं पड़ती

अमेरिका से आई रेमडेसिविर की 25600 डोज, कोरोना मरीजों के लिए राहत की खबरकोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है. अमेरिका से 25 हजार 600 रेमडेसिविर की डोज आज भारत पहुंची है. विदेश मंत्रालय द्वारा इस मदद के लिए अमेरिकी दवा कंपनी का आभार व्य​क्त किया है.

नकली इंजेक्शन: नमक व ग्लूकोज से बना लिए 1200 रेमडेसिविर, गुजरात से मप्र में लाकर बेचेनकली इंजेक्शन: नमक व ग्लूकोज से बना लिए 1200 रेमडेसिविर, गुजरात से मप्र में लाकर बेचे LadengeCoronaSe Coronavirus Covid19 CoronaVaccine OxygenCrisis OxygenShortage PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI ऐसे लोगों को तुरंत फाँसी दे PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI इनलोगों पर तो हत्या का केस होना चाहिए aur उसी अनुसार सजा भी मिलनी चाहिए! PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI Shame shame

यूपी: महराजगंज में बरातियों से भरी कार की ट्रक से टक्कर, चार की मौत, चार घायलयूपी: महराजगंज में बरातियों से भरी कार का ट्रक से टक्कर, चार की मौत, चार घायल UttarPradesh Maharajganj CarTruckAccident Allah raham farmaye Bkl बरातियों से भरी मतलब 50?

यूपी: महराजगंज में बारातियों से भरी कार की ट्रक से टक्कर, 5 की मौत, कई घायलहादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस हादसे में कुल पांच लोगो की मौत हो गई. बाकी के बचे तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है.

दिल्ली की सीमा से प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिकासुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है जिसमें कोरोना महामारी को देखते हुए दिल्ली और दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन और धरना दे रहे लोगों को हटाए जाने की मांग की गई है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी जो अब गुरुवार तक टल गई है। अभी हटे नही क्या योगेन्द्र और टिकैत तो वेक्सीन लगाकर भग लिये होंगे।। किसानो को इन दोनो से ठग लिया।। जय जवान जय किसान