क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से नुक़सान की भरपाई करवा सकती है?

क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से नुक़सान की भरपाई करवा सकती है?

02-01-2020 06:13:00

क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से नुक़सान की भरपाई करवा सकती है?

अदालतें कह चुकी हैं कि नुक़सान के पैसे प्रदर्शनकारियों से वसूले जाएं लेकिन सरकारें इन निर्देशों की व्याख्या अपने-अपने तरीक़े से करती हैं.

नुक़सानकी भरपाई का आदेशउसी तरह हरियाणा के पंचकूला में अगस्त 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम को एक अदालत ने बलात्कार के आरोपों का दोषी पाते हुए उनकी गिरफ़्तारी के आदेश दिए लेकिन, जब पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने डेरा पहुंची तो उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा मचाया. पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में तब 40 लोग मारे गए थे.

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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बड़े पैमाने पर हुए संपत्ति के नुक़सान का संज्ञान लेते हुए सरकार को आदेश दिया कि हिंसा में हुई क्षति की भरपाई प्रदर्शनकारियों से की जाए. नुकसान के पैसे उन्हीं से वसूले जाएँ.हरियाणा सरकार ने नुक़सान की भरपाई के लिए डेरा की संपत्ति की कुर्की ज़ब्ती कर इस रक़म को वसूला. मतलब ये कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी आरोपी से कोई रक़म न वसूली गई और ना ही कोई नोटिस भेजा गया.

जयपुर में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ कहते हैं,"पिछले 13 साल में आरक्षण को लेकर गुर्जर समुदाय के लोग कई बार सड़कों पर आए, रास्ते जाम किए गए. इसमें सबसे ज़्यादा क्षति रेलवे को वहन करनी पड़ी, उसे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ."राजस्थान पुलिस के अनुसार, किसी मामले में नुकसान की प्रदर्शनकारियों से वसूली की कोई जानकारी नहीं है.

उस वक्त आंदोलन के दौरान हालात संभालने में लगे रहे एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से कहा,"आन्दोलन से कैसे निबटा जाए, यह उस वक्त की सरकार पर निर्भर करता है.इमेज कॉपीरइटSamiratmaj Mishra / BBCकोर्ट ने क़ानून बनाने की सुझाव भी दियागुर्जर आंदोलन के शुरुआती दौर में लंबे समय तक उनके प्रवक्ता रहे डॉ रूप सिंह कहते है,"शुरुआत में हुकूमत इसे क़ानून-व्यवस्था की समस्या समझ कर हालात से निबटती रही. पर यह दरअसल ग़रीबी, बेरोज़गारी और असमानता से पैदा हुई समस्या थी."

राज्य में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआइडी) बीएल सोनी कहते हैं कि आंदोलन के सम्बन्ध में कुल 781 मुक़दमे दर्ज किए गए थे जिनमें से तीन सौ के क़रीब वापस भी ले लिए गए थे. लेकिन गंभीर प्रकृति के मामलों को वापस नहीं लिया गया.वे कहते हैं कि नुक़सान की वसूली का कोई मामला सामने नहीं आया. इन सब प्रदर्शनों के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं.

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में संपत्ति के नुक़सान की भरपाई प्रदर्शनकारियों से करने के सरकार के फ़ैसले की अलग-अलग तरीक़े से व्याख्या की जा रही है.वैसे तो प्रदर्शनकारियों से भरपाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट और देश के विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों ने अलग अलग निर्देश दिए हैं, अदालतों ने केंद्र सरकार को इस सम्बन्ध में क़ानून बनाने का सुझाव भी दिया है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2007 में सेवानिवृत जज के टी थामस और वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन की अलग-अलग समिति बनाई थीं जिसने हिंसक प्रदर्शनों के दौरान होने वाले नुक़सान की भरपाई को लेकर कई सुझाव भी दिए थे.इमेज कॉपीरइटGetty Imagesसरकार के फ़ैसले की व्याख्या अलग-अलग

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क़ानून के कुछ जानकार मानते हैं कि सरकार अगर इस तरह की कार्रवाई करती है तो उसे अदालत की देख रेख में होना चाहिए यानी कोई सेवानिवृत जज की निगरानी में जिसे सरकार 'क्लेम कमिश्नर' के तौर पर नियुक्त करे.वरिष्ठ अधिवक्ता विराग गुप्ता कहते हैं कि ये ज़रूरी नहीं है.

उनका कहना है कि सरकारें अदालतों के निर्देशों की व्याख्या अपने अपने तरीक़े से करती हैं. लेकिन इसका कहीं से ये मतलब नहीं है कि जो संपत्ति ज़ब्त कर हर्ज़ाना वसूलने की कार्रवाई की जा रही है वो ग़लत है.उनका कहना है कि अगर दूसरे राज्यों में हुए प्रदर्शन के बाद वहां की राज्य सरकारों ने प्रदर्शनकारियों से हर्ज़ाना नहीं वसूला, इसका मतलब ये नहीं है कि उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही हो. उनका कहना है कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को इसमें कार्रवाई के लिए क़ानून ने अलग-अलग अधिकार दिए हैं.

इमेज कॉपीरइटSamiratmaj Mishra / BBCपुलिस से नुक़सान की भरपाई कौन करेगा?उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रह चुके प्रकाश सिंह का कहना है कि यूपी में नुक़सान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकारियों से जुर्माना वसूलने का जो आदेश दिया है वो सबके लिए सबक़ लेने वाली बात है. प्रकाश सिंह को जाट आंदोलन के बाद जांच का ज़िम्मा दिया गया था औरअपनी रिपोर्ट में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हर्ज़ाना वसूल करने की बात कही थी जिसे सरकार ने नहीं माना.

वे कहते हैं कि सरकार ने जब इस सम्बन्ध में कोई ठोस क़ानून नहीं बनाया तो राज्य सरकारों के लिए समय समय पर उच्च न्यायालयों या सुप्रीम कोर्ट के निर्देश काफ़ी हैं.वहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी और मानव अधिकार कार्यकर्ता हर्ष मांदर कहते हैं कि ये कार्रवाई एकतरफा है जबकि क़ानून के सामने सभी को अपना पक्ष रखने और ख़ुद को निर्दोष साबित करने का मौक़ा मिलना चाहिए.

इसके अलावा उनको लगता है कि उत्तर प्रदेश में जो कुछ सरकार ने किया वो नागरिकों की समानता के हिसाब से नहीं है. मंदर कहते हैं कि सरकार का व्यवहार पारदर्शी और बराबरी वाला होना चाहिए.वे कहते हैं कि कश्मीर में अगर विरोध प्रदर्शन होता है तो उसको अलग तरीके से देखा जाए और दूसरे प्रांतों में समाज के अलग अलग तबक़ों के प्रदर्शनों को अलग तरीके से देखा जाना और उनसे निपटना भी ग़लत है.

वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर खामोश है कि जिन लोगों की संपत्ति का नुक़सान सरकारी अमले या पुलिस ने किया है उसकी भरपाई कैसे होगी? और पढो: BBC News Hindi »

ऐसा पूरे देश में एक सामान रूप से लागू होना चाहिए ।साथ ही अगर पुलिस के लोग अगर नुक्सान के जिम्मेदार है तो उनसे भी वसूली होनी चाहिए । आखिर नुकसान तो नुक्सान ही है । In dangai ko public property jalane ka right hai, govt ko bharpai ka right nahi hai. Why? 75 के करीब मासूमों की जानें भी गई है(UP+state) जरा उनसे कहो उन का भी नुकसान हुआ है उसका भी भरपाई कर दे

Cort kya gap shap ke liye bna h Yes if they have will power Bilkul kara sakta ha Bilkul karva sakti hai aur sakti se vasulna bhi chahiye... हौसला होना चाहिए। Iski bhar paye BJP wale karenge q ki Jaha aag jani huwa hain sab aag jani BJP wale ne karwaya hain पब्लिक प्रापर्टी के नुक्सान की भरपाई पुलिस से कैसे करेंगे, मोदी जी

क्यों नहीं करवाना चाहिए जरूर करवाना चाहिए और जो भी पार्टी और व्यक्ति समिति इन दलों का समर्थन करें उससे भी वसूली करनी चाहिए Lage raho जो भी सरकारी संपत्ति में आगजनी करे उससे अवश्य ही पूरी बसूली की जानी चाहिए। तभी जिन रोडवेज की बसों को आग लगाई गई है उनके स्थान पर नई बसें आ सकेंगीं। यदि नई बसें नहीं आईं तो गरीबों को ही नुकसान होगा क्योंकि रोडवेज की बसों में गरीब लोग ही सफर करते हैं। नईं बस में गरीब सफर करेंगे।

Vandals must pay the price. Anti India media बिलकुल भरवा सकती है ये कानून है कयी सालों से ।लेकिन नेताओं में ही हिम्मत नहीं होती अभी तो दंगाइयों से ही भरपाई हो रही है अगली बार बीबीसी जैसे दंगा भड़काने वालों से भी वसूली होगी। भरपाई तो होगी चाहे पिछवाड़ा लाल करना पड़े Yes क्यो नही, तोड़ो तुम भरे हम सरकार चाहे तो हलख में हाथ डाल के सब निकाल लेे...

जब caa का सम्बंध देश के नागरिको से है ही नही,तो किस आतंकी साजिश के तहत तोङ फोङ की गई, आतंकी नुकसान की भरपाई करेंगे या पाकिस्तान जायेंगे ये उन्हें तय करना है । बी बी सी न्यूज़ ये तय नहीं कर सकती । बीबीसी से भी करवा लो... बहुत दर्द हो रहा है इनको नही तो क्या तुम मीडिया वाले करेंगें? पवित्र स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने वाली इंदिरा जी की ईसाई पौत्री पूछ रही हैं, जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस क्यों भेजी ?

Karwana hi padega, paise nhi jai to ek ek kidney bech do नुकसान की भरपाई करवाना ही चाहिए, क्योंकि जब कीमत चुका नहीं सकते तो करते ही क्यों हो तोड़फोड़ रकम की वसूली केवल यूपी ही नहीं हर उस राज्य में हो जहाँ जहाँ हुए प्रदर्शन bbc walo unpadh jahil logon kya sarkar itna sare bekasur log mar gaye unki bharpayi kara sakti hai? jo log mar gaye unki zindagi wapis la sakti hai kisine apni aankh gawa Kisi ne apni zindagi gawa di kisi ne apne bhai ko kho diya kisi ne apne bache ko kho diya...

કયો નહી ? Police judiciary nhi hoti ज़रूर कर सकती है। yes Bilkul 100%.... Saale humare Tax ki paise se bana hua saman jalayenge to bharpai to karna hi padega... Love u Yogi ji. बिल्कुल नही.... पर बीबीसी के पाकिस्तानी दल्लो सरकार आतंकवादी दंगाइयों से तो जरूर कर सकती है... हरियाणा सरकार ने इसलिए नहीं प्रदर्शनकारियों से भरपाई की थी क्योंकि उन्हें वोट मिलना था यही राजस्थान का हाल था जबकि यूपी में मामला विपरीत है योगी सरकार को लग रहा है कि यह हमारे मतदाता नहीं है इसलिए संपत्ति की भरपाई उड़ते करवाना ही उनकी उच्च प्राथमिकता है

Bhakt bbc ko bekau kahe rahe hain jabke ek do channel chodd ke sare bhakton ke Pappa ke hain Choron ki sarkaar hai gareebon se hi wasulegi na khud nuksaab karegi gareebon se wasulegi BBC NEWS आपही दंगाई यो का नुकसान भरपाई भ रदो। Bas tu v ek baar shamil ho ja..phir govt tujhe v Teri aauka Bata degi.. 100 % .

तो तू देदे bbc बिल्कुल करवा सकती है क्योंकि सरकार ही लुटेरी है, तो लूटने का काम बखुबी जानती है सरकार। Kyo nhi kr sakti hai, possible hai hai ki sarkar ur karmchari imandari se, ur sakti se pesh aaye. Yesa karne se ek misal v kayam hogi, ur agli dafa koe v yesa krse se pahle 10 bar sochega. Dhanaywad लेकिन वो सारे तो खाकी पहने हुए हैं फिर सज़ा किसको ओर कैसे

Kyo nhi उपद्रवियों को प्रदर्शनकारी तो मत बोल । Ek hota hai policewala aur ek hota hai gunda ... hum kehlate hai policewala gunda सरकार की कौन सरकार , सब संभव है हां,, अगर प्रदर्शनकारी 'धर्मविशेष' से है तो नही तो आरक्षण के कई बडेआंदोलन के प्रदर्शन,,पदमावत फिल्म के खिलाफ आंदोलन,, मंदिर आंदोलन पर हुए प्रदर्शन पर अभी तक कोई वसूली नही हुई!!

पुलिस वालों ने गुंडों के साथ मिल कर किया है Yes क्यों तेरे को क्या लगता है... ऐसे ही छोड़ देगी..// योगी आदित्यनाथ है....// नाम तो सुना ही होगा........ मारेगा कम,लेकिन घसीटेगा ज्यादा..….../ 👊👊👊👊👊😡😠😡👊👊 सरकार शीघ्रता से उन उपद्रवियों से भरपाई कराये जिन्होंने देश की संपत्ति को जलाया है कोई सक हैं बिकाऊ मीडिया

Yes 100% नहीं करवा सकती क्योंकि व्यवस्था के लिए सरकार जिम्मेदार हैं और अनहोनी के लिए प्रशाशन!

CAA हिंसा: PFI पर बैन लगाने की तैयारी, UP के DGP ने केंद्र से की सिफारिशabhishek6164 पूर्ण बहुमत से दो बार चुनी गई सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है जहां हारे हुए लोगों का बहुमत है नहीं तो चुन-चुन कर जिहादियों को पाकिस्तान और बांग्लादेश फेक दिया जाता abhishek6164 Good move ,,,,, abhishek6164 तत्काल नियंत्रण में कार्यवाही हों

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