कोरोना वायरस: एक लड़ाई जो पर्दे के पीछे लड़ी जा रही है

कोरोना वायरस की एक लड़ाई जो पर्दे के पीछे लड़ी जा रही है

3/24/2020

कोरोना वायरस की एक लड़ाई जो पर्दे के पीछे लड़ी जा रही है

वैश्विक महामारी के वक्त में एक जंग चीन और अमरीका के बीच छिड़ गई है. इस जंग में दोनों देशों का बहुत कुछ दांव पर है.

इकोनॉमी में चीन का होगा दबदबा! यह महामारी ऐसे वक्त पर फैली है जब अमरीका और चीन के रिश्ते पहले से ही एक बुरे दौर से गुज़र रहे थे. आंशिक रूप से हुई एक ट्रेड डील दोनों देशों के बीच चल रहे कारोबारी तनाव को कुछ कम करने में शायद ही कामयाब हुई है. चीन और अमरीका दोनों एक बार फिर से हथियारों की होड़ में जुट गए हैं. दोनों देश भविष्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में किसी टकराव के लिए खुद को तैयार करने में जुटे हैं. चीन कम से कम इस क्षेत्र में खुद को एक सैन्य सुपरपावर साबित करने में सफल रहा है. और अब चीन को लगता है कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में एक बड़ी भूमिका निभाने का उसका वक्त आ गया है. इस माहौल में यूएस-चीन के रिश्ते कहीं ज्यादा जटिल हो गए हैं. इस संकट के वक्त में इस महामारी से निबटने और इससे निबटने के बाद की दुनिया के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगा. जब इस वायरस पर जीत हासिल कर ली जाएगी तब चीन का आर्थिक रूप से दोबारा उभार एक बिखरी हुई ग्लोबल इकनॉमी को फिर से खड़ा करने में अहम साबित होगा. इमेज कॉपीरइट चीन की मदद लेना ज़रूरी फिलहाल, चीन की मदद कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बेहद ज़रूरी है. मेडिकल डेटा और अनुभवों को लगातार साझा किए जाने की ज़रूरत है. चीन मेडिकल इक्विपमेंट और मास्क और प्रोटेक्टिव सूट्स जैसे डिस्पोजेबल आइटम का एक बड़ा मैन्युफैक्चरर है. संक्रमित मरीज़ों का इलाज करने वाली टीमों और इस वायरस से निबटने में काम करने वाले दूसरे लोगों के लिए ये चीजें अहम हैं. बड़े पैमाने पर दुनिया को इन चीजों की सप्लाई की जरूरत है. कई लिहाज़ से चीन दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग वर्कशॉप है. चीन के अलावा कुछ ही देशों के पास ऐसी ताकत है कि वे अपने यहां उत्पादन को रातों-रात कई गुना बढ़ा सकें. चीन इस मौके को भुना रहा है. दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप के आलोचकों का कहना है कि वे इस मौके पर चूक गए हैं. ट्रंप प्रशासन शुरुआत में इस संकट की गंभीरता को पहचानने में नाकाम रहा. वह 'अमरीका सबसे पहले' के नारे को आगे बढ़ाने के एक और मौके के तौर पर इसका इस्तेमाल नहीं कर पाया. इमेज कॉपीरइट Getty Images कौन बनेगा ग्लोबल लीडर? अब दांव पर ज्यादा बड़ी चीज लगी है और वह है - ग्लोबल लीडरशिप. एशिया मामलों के दो एक्सपर्ट, कर्ट एम कैंपबेल जो कि ओबामा प्रशासन के वक्त पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के विदेश उपमंत्री रहे, और रश दोषी ने फॉरेन अफेयर्स में अपने हालिया आर्टिकल में लिखा है, 'गुज़रे सात दशकों में एक ग्लोबल पावर के तौर पर अमरीका का दर्जा केवल पूंजी और ताकत पर खड़ा नहीं हुआ, बल्कि यह अमरीका के घरेलू गवर्नेंस की वैधानिकता, दुनियाभर में सार्वजनिक चीजों के प्रावधानों, और संकट के वक्त तेजी से काम करने और सहयोग करने की इच्छा के आधार पर भी आधारित था.' इनका कहना है कि कोरोना वायरस की महामारी, 'अमरीकी लीडरशिप के इन तीनों तत्वों को परख रही है. अब तक वॉशिंगटन इस टेस्ट में नाकाम रहा है. दूसरी ओर, जब वाशिंगटन फिसल रहा है, बीजिंग तेजी से इस मौके और अमरीकी गलतियों का फायदा उठा रहा है. महामारी के वक्त रेस्पॉन्स में बनी रिक्त स्थिति में वह खुद को ग्लोबल लीडर साबित करना चाहता है.' इमेज कॉपीरइट Getty Images प्रोपेगैंडा वॉर में आगे निकला चीन मौका परस्त होना आसान है. कई लोग शायद यह सोचकर आश्चर्यचकित हो रहे होंगे कि ऐसे ख़राब वक्त में चीन अपने फ़ायदे की कैसे सोच सकता है. कैंपबेल और दोषी इसे 'चुत्पा' की संज्ञा देते हैं, क्योंकि चीन में ही इस वायरस की शुरुआत दिखाई दे रही है. वुहान में विकसित हुए इस संकट में बीजिंग का शुरुआती रेस्पॉन्स गोपनीय तरीके का था. हालांकि, उसके बाद से चीन ने अपने विशाल संसाधनों को असरदार और प्रभावित करने वाले तरीके से इसमें झोंक दिया. प्रेस फ्रीडम ऑर्गनाइजेशन पीईएन अमरीका की सीईओ सुज़ेन नोसेल ने फॉरेन पॉलिसी वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा है, 'चीन को इस बात का डर था कि शुरुआती तौर पर इस संकट को नकारने और कुप्रबंधन से सामाजिक अव्यवस्था और आक्रोश पैदा हो सकता है. ऐसे में बीजिंग ने अब बड़े पैमाने पर आक्रामक तरीके से घरेलू और ग्लोबल प्रोपेगैंडा कैंपेन शुरू दिया. इस जरिए से चीन ने बीमारी को लेकर अपनी सख्त अप्रोच को छिपाने, ग्लोबल लेवल पर इस बीमारी के फैलने में अपनी भूमिका को दबाने, और पश्चिमी देशों और खासतौर पर अमरीका के ख़िलाफ़ अपनी एक बढ़िया इमेज गढ़नी शुरू कर दी.' इमेज कॉपीरइट Getty Images क्या वैश्विक समीकरण बदलेंगे? कई पश्चिमी टिप्पणीकार चीन को एक ज्यादा तानाशाही वाला और ज्यादा राष्ट्रवादी देश बनता देख रहे हैं. इन्हें डर है कि महामारी के असर से ये ट्रेंड और तेजी से बढ़ सकते हैं. लेकिन, वॉशिंगटन के ग्लोबल लीडर के दर्जे पर इस महामारी का असर कहीं ज्यादा हो सकता है. अमरीका के सहयोगी इस पर नजर रखे हैं. वे खुलेआम भले ही ट्रंप प्रशासन की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन इनमें से कई चीन के साथ अमरीका के व्यवहार को लेकर स्पष्ट तौर पर पसंद नहीं करते हैं. इनमें चाइनीज टेक्नोलॉजी (हुआवेई विवाद) और ईरान और दूसरे क्षेत्रीय मसले शामिल हैं. चीन इस महामारी के वक्त अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर रहा है. वह भविष्य के रिश्तों के लिए नए मानक तय कर रहा है. इनमें से एक शायद यह होगा कि चीन तेजी से दुनिया के लिए एक आवश्यक ताकत बन गया है. कोरोना वायरस से लड़ाई के दौरान अपने पड़ोसियों- जापान और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले गठजोड़ और यूरोपीय यूनियन को हेल्थ इक्विपमेंट्स भेजने को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है. प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा कोरोना के वैक्सीन की तैयारी क्या अमरीका के लिए यह 'स्वेज़ मोमेंट' साबित होगा? कैंपबेल और दोषी ने अपने फॉरेन अफेयर्स को लिखे आर्टिकल में इसकी तुलना ब्रिटेन के पतन से की है. उन्होंने कहा है कि स्वेज़ कैनाल पर कब्जे की 1956 में ब्रिटेन की नाकाम कोशिश ब्रिटेन की ताकत के खत्म होने का अहम पड़ाव थी और इसने युनाइटेड किंगडम का एक ग्लोबल पावर के तौर पर दर्जा ख़त्म कर दिया. वे लिखते हैं,"आज अमरीकी सरकार को समझना चाहिए कि अगर अमरीका इस वक्त की जरूरत को पूरा करने में नाकाम रहता है तो कोरोना वायरस अमरीका के लिए एक स्वेज़ की घटना साबित हो सकती है.' और पढो: BBC News Hindi

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लड़ाई के बारे में सोचोगे कभी नहीं जीत पाओगे जमीन आसमान के मालिक से झुक के मदद मांगे इंशा अल्लाह हमारी मदद जरूर करेंगे क्योंकि अल्लाह ताला हम से 70 माओ से ज्यादा मोहब्बत करते हैं उनके सामने झुके हम और सजदा करें BBC का लुब्रांडू करण तो बहुत पहले ही हो गया था..... 😂😂😂😂😜😜😜 अब आप समझिए कि कैसे वामपंथी मीडिया चीन के साथ खड़ी है । ये लड़ाई असल मे वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच है ।

वो अपना घर-परिवार छोड़कर रात-दिन हमारी सेवा कर लिए मुस्तैद हैं क्या हम उनके इस एक आग्रह को नही मान सकते? घर में रहें, सुरक्षित रहें। कोरोना हारेगा, भारत जीतेगा। ये सच है चीन ने बाजी मार ली है। अमेरिका और उसके अन्य बड़बोले साथियों की तरह चीन नही है। चीन काम करता है और सपोर्ट भी Bbc Fake news agarwalth चीन में जा के कर BC पैल देगा चिन के बामपंथी सरकार chinesvirus

चीन पूरी दुनिया को बर्बाद करने के बाद अपना हुकूमत पूरे विश्व में करना चाहते हैं।सभी देशों की अर्थव्यवस्था का कमर तोड़ कर अपना माल संपूर्ण दुनिया में बेचकर सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था खड़ी करना चाहते हैं। चीन की तारीफ के लिए पैसा तो अच्छा मिलता होगा तुम्हे ? कभी इस बात पर भी न्यूज बनाओ की चीन का ये जैविक हथियार का टेस्ट फैल हो गया या कामयाब ? 'कोहनी पर टिके लोग, टुकड़ों पर बिके लोग'

तू bc बीच में आ कर पूरा मूड खराब कर देता है

नोएडा के तीन पुलिसकर्मियों में CoronaVirus के लक्षण, सभी आइसोलेशन में भेजे गएनोएडा में तीन पुलिसकर्मियों में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण मिले हैं. एक सब इंस्टपेक्टर और दो कांस्टेबल्स में कोरोना के लक्षण दिखने के बाद उन्हें आइसोलेट कर​ दिया गया है. आपको बता दें कि कोरोना वायरस का संक्रमण देश के 75 और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में अपने पैर पसार चुका है. noidapolice myogiadityanath भगवान दोनों को सही सलामत रखे 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 noidapolice myogiadityanath noidapolice myogiadityanath जल्द ठीक हो जाये प्रभु से प्रार्थना 🙏🙏

Wives' scarfs? सार्स की महामारी से .....कोरोना तक । अचानक से चीन के बाद ही क्यों दुनिया चपेट में आया ? अमेरिका से आने जाने वाले ईरानी -ईटालियन कम चीनी ज्यादा थे । मेने पहले ही कहा था मेरा ट्विट मौजूद है इस वायरस से अमेरिका और चीन दोनो खत्म होंगे। इन दोनों के वजह से दुनिया का यह हाल हो रहा है। वायरस तो यह दोनों में से एक ने ही लाया होगा।

यह BBC वाले एक न० के रांड है। Should fight once again Like Trade war

कोरोना वायरसः भोपाल में लॉकडाउन के उल्लंघन में 14 के खिलाफ मामला दर्जमध्य प्रदेश में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो कोरोना वायरस के खतरे को नजरअंदाज कर अभी भी लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं. राजधानी भोपाल में लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले ऐसे ही 14 लोगों के खिलाफ सोमवार को मामला दर्ज किया गया है. ReporterRavish सुपौल पिपरा महेशपुर 852109 में नॉक डाउन का पालन नहीं हो रहा है सर ReporterRavish जो प्यार से न समझे उसे प्रशासन अपने हिसाब से समझाये ReporterRavish hopefully we avoid the corona virus

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भारत में कोरोना: दिल्ली में कर्फ्यू, जानिए देश के अन्य राज्यों में क्या हालIndia News: देशभर में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। देश में अब तक 503 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 97 कोरोना के मामले पाए गए हैं। इसके बाद केरल में 95 केस की पुष्टि हुई है।

क्या वाकई इस किताब में है कोरोना वायरस COVID 19 का इलाज...जानिए क्या है सच...कोरोना वायरस ने दुनियाभर में हाहाकार मचा रखा है। देश में भी इस खतरनाक संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस की दवा मिल गई है। किताब के एक पन्ने की तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस नई बीमारी नहीं है और यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ाए जाने वाली 'जन्तु विज्ञान' की किताब में कोरोना वायरस का जिक्र किया जा चुका है। इस किताब में कोरोना वायरस के लक्षण, उसके फैलने के तरीके और उपचार के बारे में भी बताया गया है।



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