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कोरोना से मौतों पर फिर विवाद: 7 गुना मौतों का दावा करने वाली विदेशी मीडिया रिपोर्ट को केंद्र ने खारिज किया, कहा- आंकड़े भरोसे के लायक नहीं

कोरोना से मौतों पर फिर विवाद: 7 गुना मौतों का दावा करने वाली विदेशी मीडिया रिपोर्ट को केंद्र ने खारिज किया, कहा- आंकड़े भरोसे के लायक नहीं #CoronaPandemic @MoHFW_INDIA

13-06-2021 07:47:00

कोरोना से मौतों पर फिर विवाद: 7 गुना मौतों का दावा करने वाली विदेशी मीडिया रिपोर्ट को केंद्र ने खारिज किया, कहा- आंकड़े भरोसे के लायक नहीं CoronaPandemic MoHFW_INDIA

केंद्र सरकार ने उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया है, जिसमें कोरोना से हुई असल मौतों को सरकारी आंकड़ों से 5 से 7 गुना ज्यादा बताया गया था। सरकार ने रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों को गलत बताया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बिना नाम लिए उस रिपोर्ट की निंदा की है। | Centre Refuses Report That Claims India Covid Deaths 7 Times More , 7 गुना मौतों का दावा करने वाली विदेशी मीडिया रिपोर्ट को केंद्र ने खारिज किया, कहा- आंकड़े भरोसे के लायक नहीं

कोरोना से मौतों पर फिर विवाद:7 गुना मौतों का दावा करने वाली विदेशी मीडिया रिपोर्ट को केंद्र ने खारिज किया, कहा- आंकड़े भरोसे के लायक नहींनई दिल्ली37 मिनट पहलेकॉपी लिंककेंद्र सरकार ने उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया है, जिसमें कोरोना से हुई असल मौतों को सरकारी आंकड़ों से 5 से 7 गुना ज्यादा बताया गया था। सरकार ने रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों को गलत बताया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बिना नाम लिए उस रिपोर्ट की निंदा की है।

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने द इकॉनॉमिस्ट में छपे आर्टिकल को काल्पनिक और भ्रम फैलाने वाला बताया है। मंत्रालय ने कहा है कि रिपोर्ट में जिस तरह से महामारी के आंकड़ों का आकलन किया गया है, उसका कोई आधार नहीं है। किसी भी देश में इस तरह से आंकड़ों का अध्ययन नहीं किया जाता।

4 पॉइंट में केंद्र की सफाई1.रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि रिसर्च किस प्रणाली से की गई थी। जबकि इस तरह की इंटरनेट रिसर्च के लिए रिसर्च गेट और पबमेड की सहायता ली जाती है।2.रिपोर्ट में तेलंगाना के बीमा क्लेम को भी आधार बनाया गया है। इससे भी पता चलता है कि स्टडी का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। headtopics.com

3.चुनावी रिजल्ट को लेकर सर्वे करने वाली सी-वोटर और प्रश्नम जैसी एजेंसियों के डेटा का भी इस्तेमाल किया गया है। जबकि इन एजेंसियों को पब्लिक हेल्थ से जुड़े रिसर्च का कोई अनुभव नहीं है। कई बार उनके दावे रिजल्ट से अलग भी रहे हैं।4.रिपोर्ट में खुद कहा गया है कि जो अनुमान लगाए गए हैं, स्थानीय सरकारी डेटा, कुछ कंपनियों के रिकॉर्ड और मरने वाले लोगों के रिकॉर्ड से लिए गए हैं। जिन्हें विश्वसनीय नहीं माना जा सकता है।

ICMR और WHO की गाइडलाइन का पालन कर रही सरकारस्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार कोरोना के डेटा को लेकर पूरी पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) अपना रही है। कोरोना से होने वाली मौतों में गड़बड़ी से बचने के लिए उन गाइडलाइंस का पालन किया जा रहा है, जो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मई 2020 में जारी की थीं। मौतों का सही रिकॉर्ड रखने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी किए गए ICD-10 कोड का पालन किया जा रहा है।

आंकड़ों की स्टडी करता है केंद्रकेंद्र सरकार पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोना का सही डेटा जारी करने के लिए कह चुकी है। केंद्र सरकार की टीमें भी इस पर काम कर रही हैं। राज्यों से आने वाले डेटा का रोजाना जिलेवार अध्ययन किया जाता है। जिन राज्यों से लगातार मौत के आंकड़े काफी कम आ रहे थे, उन्हें जिलेवार फिर से इसकी जांच करने के लिए कहा गया था। केंद्र सरकार ने बिहार सरकार को कोरोना से सभी जिलों में हुई मौतों पर एक रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है।

केंद्र ने आगे कहा है कि महामारी के दौरान रिकॉर्ड की गई मौतों में हमेशा अंतर रहता है। इस पर अच्छी तरह से रिसर्च आमतौर पर बाद में ही की जाती है, जब महामारी खत्म हो चुकी होती है तो हमारे पास विश्वसनीय डेटा मौजूद रहता है।मैगजीन ने 19 सप्ताह के डेटा को बनाया आधार headtopics.com

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ब्रिटेन की मैगजीन द इकोनॉमिस्ट ने दावा किया था कि भारत में कोरोना से जितनी मौतें सरकारी आंकड़ों में दिखाई गई हैं, असल में मौतें उससे 5 से 7 गुना ज्यादा हुई हैं। शनिवार को मैगजीन ने एक आर्टिकल पब्लिश किया था। इसमें वर्जिनिया की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लेफलर की रिसर्च को आधार बनाया गया था।

रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में 2021 में महामारी के पहले 19 सप्ताह के दौरान प्रति 1 लाख लोगों में से 131 से लेकर 181 लोगों की मौत हुई है। ये डेटा 6 राज्यों में हुई रिसर्च के आधार पर जारी किया गया था। यदि इसे पूरे देश में लागू किया जाए तो 2021 में 19 सप्ताह के अंदर ही 17 लाख से लेकर 24 लाख लोगों की मौत हुई है।

MP में पिछले महीने 1.6 लाख मौतें, पिछले साल के मुकाबले 4 गुना ज्यादाइससे पहले शनिवार को सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के डेटा से खुलासा हुआ था कि मध्य प्रदेश में इस साल मई में 1.6 लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। पहली बार सरकारी डेटा में दर्ज इन मौतों का हिसाब मिला था। सीआरएस के सरकारी डेटा के मुताबिक इस साल मई में मौतों का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 4 गुना ज्यादा है।

इस साल जनवरी से मई के बीच पिछले साल की तुलना में 1.9 लाख ज्यादा मौतें हुई हैं। राज्य में मई 2019 में 31 हजार और 2020 में 34 हजार जानें गईं थीं। हालांकि देशभर में लॉकडाउन के चलते मौतों की संख्या अप्रैल 2020 में घटी थी, लेकिन उसी साल मई में संख्या बढ़ने लगी। headtopics.com

इस साल मार्च में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा और अप्रैल तक महीनेभर में दर्ज हो रही मौतों की संख्या दोगुनी हो गई। मई में तो छह महीने के बराबर मौतें दर्ज हुई हैं। हालांकि ये जरूरी नहीं कि ये सभी मौतें कोविड से ही हुई हों। और पढो: Dainik Bhaskar »

वारदात: Dhanbad के जज की मौत के पीछे का असली सच! देखें

धनबाद में जज उत्तम आनंद की मौत के पीछे अब भी कई सवाल घूम रहे हैं. ये मौत वाकई एक हादसा था या हत्या? इस वीडियो में तस्वीर दिखा रही है कि एक शख्स सड़क के बिल्कुल बायीं ओर जॉगिंग कर रहा है. तभी अचानक पीछे से एक टेंपो आता है और जॉगिंग कर रहे शख्स को धक्का मार कर आगे बढ़ जाता है. पहली नज़र में यही गुमान होता है कि सड़क हादसे का एक मामला है. मगर इससे पहले कि आप किसी नतीजे पर पहुंचे, इसी सीसीटीवी तस्वीर की हर फ्रेम को अब गौर से देखिएगा. इसलिए कि इसी तस्वीर का जो बारीक पहलू है उसके बाद पूरा केस ही पलट जाएगा. इस केस की फॉरेंसिक जांच भी हो रही है. इस मामले में आज रांची हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने झारखंड के डीजीपी और धनबाद के एसएसपी से जवाब तलब किया है. इस मामले में चीफ जस्टिस की बेंच ने डीजीपी से कहा कि अगर पुलिस जांच करने में विफल रहती है तो यह मामला सीबीआई को जा सकता है. देखें वारदात का ये एपिसोड.

MoHFW_INDIA आंकड़े तो सिर्फ 7 गुणा होना भी भरोसे के लायक नही है

कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की सटीक रिपोर्ट दी जानी चाहिए: मद्रास हाईकोर्टमद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि देशभर से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों के आंकड़ों को ठीक से दर्ज नहीं किया जा रहा है. अदालत ने कहा कि यह वास्तव में महामारी के पैमाने को समझने के प्रयास को बाधित कर सकता है और परिवारों को उस राहत की मांग करने से भी वंचित सकता है, जिसके वे हक़दार हैं. चिल्लाता रहे कोर्ट कौन इसकी सुन रहा है Its About More Than 25 Lakhs.

कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े छिपाने और कम केस रिपोर्ट का आरोप! सरकार ने उठाया ये कदमकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमित रूप से जिलेवार कोरोना केसों और मौतों की दैनिक आधार पर निगरानी के लिए एक मजबूत रिपोर्टिंग तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया (ashokasinghal2 , Milan_reports )

कोरोना से हुई मौतों का ऑडिट करें अस्पताल और राज्य, ताकि पारदर्शिता आए : AIIMS प्रमुखदिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के प्रमुख डॉक्टर रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria) ने कहा है कि अस्पतालों और राज्यों को कोरोनावायरस (Coronavirus Deaths) से हुई मौतों का ऑडिट करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता आए. Are kon करेगा jo chori kiya hai wahi ko bol rahe hai ki chor ko khojo.. What about your AIIMS hospital If re-assessed, will these figures come true?

कोरोना की दूसरी लहर पर मौतों के गलत आंकड़ों पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- बिना तथ्यों के फैलाई गई गलत जानकारीकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ने एक लेख में अनुमान लगाया कि भारत को अधिकारिक कोरोना की मौतों की तुलना में शायद 5 से 7 गुना अधिक मौतों का सामना करना पड़ा है। दैनिक भास्कर व गुजरात से निकलने वाले न्यूज़ अखबारों की रिपोर्ट गलत है क्या भास्कर में आज भी छपा है कि मोते ज्यादा हुई है

Coronavirus: कोरोना से मौतों की संख्या सात गुना ज्यादा होने का दावा सरकार ने नकारा, गिनाए ये कारणcoronavirus कोरोना से मौतों की संख्या सात गुना ज्यादा होने का दावा सरकार ने नकारा, गिनाए ये कारण COVID19 MoHFW_INDIA MoHFW_INDIA सरकार और भी जवाबदेही को सिरे से नकार रही है । कोई महंगाई नही है ऑक्सीजन की कमी कमी नहीं थी वैक्सिंग की कभी कमी नहीं थी रोजगार की कमी नहीं है कही कोई कमी नहीं है कमी मात्र देश को जनता में है

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