कोरोना वायरस: मध्य प्रदेश के मज़दूरों का दर्द- कुछ भी खाकर भूख मार लेंगे लेकिन बच्चों का क्या

मज़दूरों का दर्द- कुछ भी खाकर भूख मार लेंगे लेकिन बच्चों का क्या

30-03-2020 17:58:00

मज़दूरों का दर्द- कुछ भी खाकर भूख मार लेंगे लेकिन बच्चों का क्या

कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 21 दिनों के लॉकडाउन ने बड़े शहरों में काम करने वाले मजदूरों के लिए आफत खड़ी कर दी है.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटS NiaziImage caption24 साल के अजय कोल रीवा ज़िले के सेमरिया तहसलील के बभनी गांव के रहने वाले हैंकोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए 21 दिन के लॉकडाउन की वजह से हर बड़े शहरों से मज़दूरों का पलायन हो रहा है.मध्य प्रदेश जैसे राज्य से हज़ारों की तादाद में ग़रीब मज़दूर हर साल काम की तलाश में मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करते है.

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लेकिन लॉकडाउन की वजह से जहां हज़ारों मज़दूर पैदल ही अपने घरों की तरफ चल पड़े है तो कई को ठेकेदारों ने हालात को भांप कर पहले ही जगह छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया.ऐसे ही मुंबई से लौटे एक मज़दूर से बीबीसी ने बात की.24 साल के अजय कोल रीवा ज़िले के सेमरिया तहसलील के बभनी गांव के रहने वाले हैं. अजय कोल के परिवार में माता, पत्नी और 2 साल का एक बेटा है. हर साल कम से कम 5-6 महीने के लिए इन्हें परिवार चलाने के लिए अपना गांव छोड़ना पड़ता है.

इमेज कॉपीरइटGetty Images300 रुपये रोज़ानाअजय मुंबई के करीब इग्तपुरी में एक ठेकेदार के पास मकान बनाने के काम में मज़दूरी करते है. उन्होंने बताया,"मैं चूना गारा का काम मुंबई में करता हूं. गांव में काम नहीं रहता है तो हमें बाहर जाना पड़ता है. हमें वहां पर 300 रुपये रोज़ाना मिलता है."

गांव में काम मिलना बंद हो जाता है तो मजबूरी में इन्हें अपने परिवार को छोड़ना पड़ता है. हालांकि अजय अपनी कमाई में से 6000 हज़ार रुपये हर माह बचा लेते है. अजय वहां पर 1500 रुपये की झोपड़ी में किराये से रहते है और बचे रुपयों को अपने घर पर भेजते हैं.अजय का कहना है कि मुंबई के हालात लगातार बिगड़ने लगे थे तो उनके ठेकेदार ने उन्हें 21 तारीख़ को ही वहां से जाने के लिए बोल दिया था जिसकी वजह से वो वहां से ट्रेन से निकल गए और अपने गांव पहुंच गए.

इसके कुछ दिनों बाद सरकार ने परिवहन के सभी माध्यमों को रोक दिया जिसकी वजह से हज़ारो की तादाद में मज़दूर सड़कों पर चल रहे हैं ताकि अपने घर पहुंच सकें.प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाकोरोना और लॉकडाउन के दौर में मदद करने वाले हाथमजबूर कर दिया...अजय की पत्नी अपाहिज है और कोई काम नहीं कर सकती है. मां जरूर गांव में फसल काटने जैसे कामों में जाती है जिसके लिए उसे 200 रुपये दिन का मिलता है.

अजय जब अपने गांव में होता है तो छोटे मोटे काम करके परिवार को चलाना पड़ता है. उसका दावा है कि वह कभी चाय बेचता है तो कभी कुछ और काम करता है लेकिन उससे घर चलना आसान नहीं होता है इसलिए बड़े शहरों का रुख करना उसके जैसे मज़दूरों के लिए ज़िदंगी की हक़ीक़त है.

इस साल अजय जनवरी माह में मुंबई गया था लेकिन हालात ने उसे जल्दी वापस आने के लिए मजबूर कर दिया. उससे जब पूछा गया कि आगे क्या होगा तो उसने कहा,"कुछ भी नहीं पता. अब क्या होगा हमारा. हमारा जीवन कैसे चलेगा."जिस तरह से इनके हालात इन मज़दूरों को गांव छोड़ने पर मजबूर करते है उसी तरह से इस बार कोरोना ने इन लोगों को वो जगह छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है जहां से यह लोग अपने परिवार को चलाते हैं.

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प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाक्या लॉकडाउन से हार जाएगा कोरोनावायरस?मध्य प्रदेश का हालमध्य प्रदेश में इस बार बंपर फसल हुई है और खेतों में खड़ी है. लेकिन जिस तरह से मजदूर बड़े शहरों को छोड़ कर गांव का रुख कर रहे है तो यह कहा जा सकता है कि इन सभी को गांव में काम मिलना इतना आसान न होगा. वहीं सरकार की सख्ती की वजह से भी किसानों को गांव में कटाई शुरू करने में दिक्क़ते आ रही हैं.

वहीं जो लोग प्रदेश के दूरदराज़ इलाक़ों के गांव में पहले से रह रहे हैं उनकी अपनी अलग मजबूरी है. पिछले पांच दिन से सब कुछ बंद है, जहां मजदूरी करने जाते थे वे सभी काम बंद हैं. क्रेशर जहां काफी लोगों को मजदूरी मिल जाती थी वह भी बंद है . सारे के सारे ट्रैक्टर खड़े हो गए हैं, जो अधिकतर परिवारों के रोजी के साधन थे.

अब कहीं काम नहीं मिल रहा है. अगर जंगल से लकड़ी- झिरका बीन कर शहर लेकर जाते हैं तो वहां भी पहुंचना संभव नहीं है. लोग डरे हुए हैं, कोई किसी के नजदीक नहीं आना चाहता. शहर के लोग शहर में, गांव के लोग गांव में, सब अपने-अपने घरों में बंद हैं.इमेज कॉपीरइटS Niazi

घर में चूल्हा जलता था...जिनके यहां खाने-पीने की व्यवस्था पहले से है या जिनको सरकार द्वारा कोटा (पीडीएस दुकान) से तीन माह के लिए गल्ला मिल गया है उनका तो ठीक है. लेकिन जिन परिवारों की स्थिति रोज कमाने खाने की थी, जिनके घरों में मजदूरी करके लौटने के बाद शाम और सुबह का चूल्हा जलता था.

ऐसे परिवारों के लिए तो यह परिस्थिति एक बड़े संकट के रूप में आप खड़ी हो गई हैं. उमरिया जिले की ग्राम पंचायत अमडी के भर्री टोला की सुनीता बैगा चिंतित है. उसे नहीं पता कि आने वाले वक़्त में उसके घर का चूल्हा कैसे जलेगा. सुनीता बैगा के पति गोहरा बैगा मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं.

उनके पांच बेटे हैं पांचों प्रतिदिन ट्रैक्टर ट्राली में मजदूरी करते है. सुनीता कहती हैं,"दिन भर काम करने के बाद, जब शाम को ये सब अपनी मजदूरी लेकर घर आते थे, तब उनके घर में चूल्हा जलता था. अभी पांच दिन तक तो किसी तरह से चला है लेकिन आगे क्या होगा कुछ पाता नहीं है."

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प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाकोरोना वायरस ने ऐसे बदला दुनिया कोघर में राशन नहीं है...52 घरों वाले इस मोहल्ले में 76 परिवार हैं. इनमें से केवल तीन परिवार यादव है बाकी सभी परिवार बैगा अनुसूचित जनजाति के हैं.भर्री टोला के लोग बताते हैं कि किसी के भी घर में राशन नहीं है. लोग अभी तक इधर-उधर से मांग कर चला रहे थे. लेकिन आगे यह चल पाना मुमकिन नहीं है क्योंकि अब किसी के भी पास इतना नहीं है कि वह दूसरों की मदद कर सकें.

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प्रत्येक देश की परिस्थितियों में अंतर है भारत में गरीबी है बेरोजगारी है जनसंख्या सघन है बसाहट में छोटे छोटे घरों में अनेक लोग रह रहे हैं ऐसे लाकडाऊन के परिणाम क्या होगें? हमें देश काल परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए समाज की रक्षा प्रणाली चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद योग आजमाना चाहिए पूरे भारत में फसलों से भरे खेती तैयार हैं कोई भी भूखा नहीं रहेगा. एक सप्ताह के बाद अनाज ही अनाज होगा.

1. pura indian lak doun kare (p. m. ) ke dekh rekh me 2 . pure state ko lak doun kare (c.m.o. ) ke dekh rekh me 3 . distik leavel se lak doun kare ( d. m. , sansad , vidhayk ) ke dekh rekh me 4.pure block ko ( block parmuk) 5.grem sabh lak doun ( pradhan) yesa kare... vineeta0202 बहुजनों- ग़रीबों के तथाकथित “विकास “ का दर्द-भुखमरी-असहनीय पीड़ा-भेदभाव-असहनशीलता अब पूरा विश्व देख रहा है । दुनियाँ को सबसे बड़ा लोकतंत्र घिनौनी साज़िशों का शिकार हो चुका है ।

आखिर में आपके रिपोर्टर ने इनके लिए क्या प्रबन्ध किया यह लिख दिया करो बीबीसी. BBC Teri apni fati padi hai dusaro ko salah de raha hai kutto ki mout saare Mar rahe hai apni khabar bataane me beizzati ho rahi hai Kya. गरीब मजदूरों की सुरक्षा एवं उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखने की जिम्मेदारी केवल सरकार पर न डालें अपितु हर व्यक्ति की जवाबदारी है। कोई भी व्यक्ति रास्ते में दिखे तो उनको खाने की व्यवस्था जरूर करें ।

Bjp sarkar so rahi hai kya Majdooro ko waha ki sarkar dekh legi tum apne katuwa bhaiyon ko dekho nizamuddin me फ़ंड मजदूरो के खाते में जाना चाहिए सही कहा narendramodi इनका दर्द कौन समझेगा जो रात में भाषण देते हो इन गम्भीर हालातों में अगर सरकार से कोई व्यक्ति छूट भी गया हो, तो क्या तुम किसी भूखे को खाना नहीं खिला सकते। बजाय विश्व में प्रचार करने के।COVID2019 21daylockdown CoronaLockdown FightAgainstCoronavirus

शिव राज और महाराज। बीबीसी वाला तुम लोग सिर्फ बीजेपी का एरिया में क्या नहीं हो रहा है वही दिखाता है क्या UP...MP....GUJRAAT....BIHAR..... KARNATAKA...यहां BBCके ड्रोन निगरानी में 24×7 तैनात किसी भी प्रकार की अनदेखी नही होगी । बाकि राज्य कोरोना से जंग जीतकर बैठे है Shelter me jao bhai ALLAH HU AKBAR KABIRA

MPmeena62089812 Why the political parties can not fund from there political reserve funds for at least 50%? why only janta coronavirusindia BJP4India RSSorg INCIndia AamAadmiParty BJP4Goa DonateKaroNaIndia coronavirus PMCaresFund प्रधान मंत्री राहत कोष का पैसा और ये सब समान जनता तक सही ढंग से मिलेगी भी या केवल जुमला है- बड़े शहरों से अपने गांव की ओर मजदूरों का पलायन अभी तक नहीं हुआ है कम

इस दुनिया में सबसे बड़ा अभिशाप है गरीबी और भूख संकट के समय तो गरीबी और भूख काल का ग्रास लगती है जो सरकार को और नेताओं को सिर्फ आंकड़ेबाजी पूरी करने में ही दिखती है कोरोना_को_हराना_है कोरोना_हारेगा_देश_जीतेगा CoronavirusLockdown COVID2019india CoronaOutbreak 4 दिन से बच्चे थे भूके खुद को लगाई फांसी मेरठ

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कोरोना वायरस से फ्रांस के पूर्व मंत्री पैट्रिक डेविडजियन का निधनCorona virus hai ye ya yamraaj ki aadhi adhuri koi list ....he ishbaar kuch to karpa karo ....hum inshano per ...... बेहद दुःखद खबर है गुरूबाणी में दर्ज है ' तित्थै जाति न जोर है तित्थै जीउ निवै ' भगवान् की ताकत के आगे कोई जाति यां जोर नहीं चलता , न ही अकल काम करती है,' सहस सिआणप लक्ख होऐ त ईक्क न चल्लै नालि ' यह अब सिद्ध हो रहा है अब कुदरत और मानवता में संतुलिन बनाने का बक्त आ गया है सर कोरोनावायरस बीमारी से लड़ने के लिए गुरु सियाग सिद्ध योग कारगर साबित हो सकता है, यह एक अनोखा योग है जिसमें अपने आप योगिक क्रियाएं होती है जो कि मनुष्य के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है इसलिए आप भी इस वेबसाइट को विजिट कीजिए तथा लोगों को भी अवगत कराएं

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