कोरोना त्रासदी पर मोदी सरकार की ये ग़लतियाँ बहुत ही भारी पड़ीं - BBC News हिंदी

कोरोना त्रासदी पर मोदी सरकार की ये ग़लतियाँ बहुत ही भारी पड़ीं

06-05-2021 10:04:00

कोरोना त्रासदी पर मोदी सरकार की ये ग़लतियाँ बहुत ही भारी पड़ीं

मोदी सरकार को कोरोना की दूसरी लहर से निपटने का पूरा मौक़ा मिला लेकिन कई गलतियां हुईं और लापरवाही बरती गई. अब जब दूसरी लहर की ही तबाही जारी है तो तीसरी की भविष्यणावी कर दी गई है.

समाप्तहालाँकि बीबीसी से बात करने वाले कई डॉक्टरों ने कहा है कि वे केवल उन रोगियों को ऑक्सीजन दे रहे हैं, जिन्हें इसकी सख़्त जरूरत है.लेकिन ऐसा करने पर भी ऑक्सीजन कम पड़ रही है. हालाँकि जानकारों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी, उन कई समस्याओं में से एक है, जिनसे पता चलता है कि केंद्र और राज्य दोनों कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थे.

PM उज्जवला योजना पर महंगाई की मार? कबाड़ में बिक रहे हैं सिलेंडर, लोग दोबारा नहीं भरवा रहे गैस आइआइटी रुड़की ने पराली से बनाई एक ऐसी बैटरी, जो कम लागत पर चलेगी ज्यादा; प्लांट भी लगेगा मेघालय के गवर्नर का बड़ा दावा: सत्यपाल मलिक बोले- अंबानी और RSS से जुड़ी डील में घपला था, मुझे 150-150 करोड़ की पेशकश हुई थी

इसलिए वे दूसरी लहर से हो रहे नुक़सान को रोकने या कम करने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने में विफल रहे.हालांकि इस बारे में बार-बार कई चेतावनी जारी की गई थी. नवंबर में, स्वास्थ्य मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने कहा था कि देश में ऑक्सीजन की सप्लाई और सरकारी अस्पतालों में बेड दोनों अपर्याप्त हैं. इसके बाद फ़रवरी में, बीबीसी को कई जानकारों ने बताया था कि उन्हें निकट भविष्य में 'कोविड सूनामी' का डर सता रहा है.

इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने 8 मार्च को कोरोना महामारी के खत्म होने की घोषणा तक कर दीमार्च की शुरुआत में, सरकार के बनाए वैज्ञानिकों के एक विशेषज्ञ समूह ने कोरोना वायरस के कहीं अधिक संक्रामक वैरियंट को लेकर अधिकारियों को चेताया था. एक वैज्ञानिक ने बीबीसी को बताया कि इस बारे में रोकथाम के कोई अहम उपाय न करने पर चेतावनी दी गई थी. सरकार ने इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है. headtopics.com

इसके बावजूद, 8 मार्च को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने कोरोना महामारी के ख़त्म होने की घोषणा कर दी. ऐसे में सवाल उठता है कि आखि़र सरकार से कहां पर 'चूक' हो गई?आखि़र चूक कहां हुई?जनवरी और फ़रवरी में, कोरोना के रोजाना के मामलों की संख्या घटकर 20,000 से भी नीचे पहुंच गई थी. इससे पहले सितंबर में रोज 90 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना को हरा देने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद लोगों के मिलने-जुलने के सभी जगहों को खोल दिया गया.

इस तरह ऊपर से भरमाने वाले ऐसे संदेश मिलने के बाद लोग जल्द ही कोविड प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल को भूल से गए.हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने को कहा, पर वे खुद पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों की रैलियों को संबोधित कर रहे थे. इन विशालकाय रैलियों में जुटी हजारों की भीड़ में से ज्यादातर के चेहरे पर से मास्क नदारद थे. इसके अलावा, उत्तराखंड के हरिद्वार में लाखों की भीड़ जुटाने वाले कुंभ मेले को भी सरकार ने मंज़ूरी दी.

इमेज स्रोत,Reutersइमेज कैप्शन,सरकार ने हरिद्वार में लाखों की भीड़ जुटाने वाले कुंभ मेले को मंजूरी दीपब्लिक पॉलिसी और हेल्थ सिस्टम के जानकार डॉ. चंद्रकांत लहरिया इस बारे में कहते हैं, ''प्रधानमंत्री ने जो कहा और किया, उसमें कोई मेल नहीं था.''

वहीं जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील ने बताया, ''सरकार दूसरी लहर को भांप नहीं पाई और बहुत जल्दी इसके ख़त्म होने का जश्न मनाना शुरू कर दिया.''इन सभी बातों के अलावा, इस तबाही ने कई और चीज़ों को सामने ला दिया है. इस आपदा ने अच्छे से बता दिया कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य का ढांचा कितना कमज़ोर है और दशकों से इसकी कितनी उपेक्षा की गई है. headtopics.com

Birthday Special: इस फिल्म के लिए प्रभास ने बढ़ाया 30 किलो वजन, ठुकरा दिया था 200 करोड़ का ऑफर Bihar: कांग्रेस में शामिल होने के बाद पहली बार गृहराज्‍य पहुंचे कन्‍हैया,दो सीटों पर उपचुनाव में करेंगे प्रचार वरिष्ठ नेता प्रदीप माझी ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा: बीजद में जाने को लेकर अटकलें तेज

अस्पतालों के बाहर बिना इलाज के दम तोड़ने वाले लोगों को देखकर केवल दिल नहीं नहीं दहल रहे हैं. ये नजारे बता रहे हैं कि हेल्थ सेक्टर के बुनियादी ढांचे की असलियत आखि़र क्या है.एक जानकार ने बीबीसी को बताया कि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य का ढांचा हमेशा से टूटा हुआ था. बस अंतर यह है कि अमीर और मध्य वर्ग को इसका पता अभी चल रहा है. जो लोग सक्षम थे, वे अपने और परिवार के इलाज के लिए हमेशा निजी अस्पतालों पर निर्भर थे. वहीं ग़रीब लोग डॉक्टर से दिखाने के लिए जूझ रहे थे.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी सरकार की हाल की योजनाओं जैसे स्वास्थ्य बीमा और ग़रीबों के लिए सस्ती दवा, भी लोगों को बहुत मदद नहीं मिल पा रही है. वह इसलिए कि मेडिकल स्टाफ या अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए बीते दशकों में बहुत कम प्रयास हुआ है.निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को मिलाकर देखें तो पिछले छह सालों में भारत का स्वास्थ्य पर खर्च जीडीपी का लगभग 3.6 फ़ीसदी रहा है. 2018 में यह ब्रिक्स के सभी पांच देशों में सबसे कम है. सबसे अधिक ब्राजील ने 9.2 फीसद, जबकि दक्षिण अफ्रीका ने 8.1 फीसद, रूस ने 5.3 फ़ीसद और चीन ने 5 फ़ीसदी खर्च किया.

यदि विकसित देशों की बात करें तो वे स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का कहीं ज्यादा हिस्सा खर्च करते हैं. 2018 में, अमेरिका ने इस सेक्टर पर 16.9 फ़ीसदी जबकि जर्मनी ने 11.2 फ़ीसदी खर्च किया था. भारत से कहीं छोटे देशों जैसे श्रीलंका और थाईलैंड ने भी हेल्थ सेक्टर पर कहीं ज्यादा खर्च किया है. श्रीलंका ने अपनी जीडीपी का 3.79 फीसदी इस मामले में खर्च किया, जबकि थाईलैंड ने 3.76 फीसदी.

चिंता की एक बात यह भी है कि भारत में हर 10,000 लोगों पर 10 से कम डॉक्टर हैं. कुछ राज्यों में तो यह आंकड़ा पांच से भी कम है.इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,भारत में हर 10,000 लोगों पर 10 से कम डॉक्टर हैं. कुछ राज्यों में तो यह आंकड़ा पांच से भी कम है headtopics.com

कोरोना से लड़ने की तैयारीपिछले साल सरकार ने कोरोना की आने वाली लहर से लड़ने के लिए कई 'सशक्त समितियों' को बनाया गया था. इसलिए विशेषज्ञ ऑक्सीजन, बेड और दवाओं की कमी को लेकर हैरान हैं.महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य सचिव महेश जगाड़े ने बीबीसी को बताया, ''देश में जब पहली लहर आई थी, तभी उन्हें सबसे खराब मानकर दूसरी लहर के लिए तैयार हो जाना चाहिए था. उन्हें ऑक्सीजन और रेमेडेसिविर जैसी दवाओं का भंडार बनाने का फैसला कर लेना था और फिर इसके लिए अपनी विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए था.''

अधिकारियों का कहना है कि मांग में आई उछाल को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाई जा रही है, लेकिन असल समस्या इसकी ढुलाई है. जानकारों की राय है कि इस समस्या को बहुत पहले दूर कर लेना चाहिए था. लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण कई रोगियों की मौत हो जाने के बाद सरकार एक राज्य से दूसरे राज्य में ऑक्सीजन ले जाने के लिए विशेष रेलगाड़ियाँ चला रही है और उद्योगों में ऑक्सीजन के उपयोग को रोक दिया गया है.

बिहार में सोनिया का लालू यादव को बड़ा झटका: महागठबंधन टूटा, आरजेडी से अलग हुई कांग्रेस की राह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- मानवता का सम्मान बचाने के लिए भारत ने लड़ा था 1971 का युद्ध जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद-370 हटने के बाद कल पहली बार कश्मीर दौरे पर आएंगे अमित शाह, अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात

इस बारे में डॉ. लहरिया बताते हैं, ''इसका नतीजा यह हुआ है कि हताश लोग अपने परिजनों की जान बचाने के लिए ब्लैक मार्केट से हज़ारों रुपए खर्च कर और घंटों कतार में खड़े होकर ऑक्सीजन सिलिंडर हासिल कर रहे हैं. वहीं रेमेडेसिविर और टोसिलिजुमाब जैसी दवाओं को ख़रीदने में सक्षम लोग, इसके लिए भारी भुगतान करने को मजबूर हैं.

इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,हताश लोग अपने परिजनों की जान बचाने के लिए हजारों खर्च कर ऑक्सीजन सिलेंडर हासिल कर रहे हैंरेमेडेसिविर बनाने वाली एक दवा कंपनी के एक अधिकारी ने बताया है कि जनवरी और फ़रवरी में इसकी मांग बिल्कुल ख़त्म हो गई थी. उन्होंने कहा, ''यदि सरकार ने इस बारे में कोई आदेश दिया होता, तो हम इसका बड़ा भंडार तैयार कर लेते तब इसकी कोई कमी नहीं हो पाती.'' उनके अनुसार, उत्पादन में वृद्धि की गई है, लेकिन यह मांग से काफ़ी कम है.

इसके विपरीत, देश के दक्षिणी राज्य केरल ने संक्रमण बढ़ने का अनुमान लगाकर योजना बनाई. राज्य के कोविड कार्यबल के एक सदस्य डॉ. ए. फतहुद्दीन ने बताया कि राज्य में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है क्योंकि पिछले साल अक्टूबर में इस बारे में आवश्यक क़दम उठाए गए थे.वे कहते हैं, ''हमने पहले से ही पर्याप्त मात्रा में रेमेडेसिविर और टोसिलिजुमाब जैसी दवाओं की ख़रीद कर ली थी. हमारे पास अगले कई हफ्तों में संक्रमण की किसी भी संभावित वृद्धि से निपटने की अच्छी योजना है.''

केरल की तैयारी से सीख लेने के बारे में महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य सचिव जगाड़े ने कहा कि अन्य राज्यों को भी इस आपदा से निपटने की ऐसी ही तैयारी करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा, ''सीख का मतलब होता है कि किसी और ने इसे किया है और आप इसे अभी कर सकते हैं. हालांकि इसका यह भी मतलब होता है कि इसमें समय लगेगा.''

हालांकि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने का समय निकलता जा रहा है क्योंकि दूसरी लहर अब उन गाँवों में फैल रही है, जहाँ संक्रमण में होने वाली उछाल से निपटने की जरूरी सुविधाएं नहीं हैं.कोरोना रोकने के उपायकोरोना वायरस के और अधिक संक्रामक और जानलेवा साबित होने वाले नए वैरिएंट की पहचान के लिए 'जीनोम सिक्वेंसिंग' एक अहम क़दम है. पिछले साल इंडियन सार्स सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्शिया (आईएनएसएसीओजी) का गठन किया गया था. इसके तहत देश के 10 प्रयोगशालाओं को शामिल किया गया था.

लेकिन शुरू में इस समूह को निवेश पाने में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. वायरोलॉजिस्ट डॉ. जमील ने का कहना है कि भारत ने काफ़ी देर से वायरस के म्यूटेशन को गंभीरता से लेना शुरू किया. उनके अनुसार, फ़रवरी 2021 के मध्य से सिक्वेंसिंग का काम सही से शुरू हो पाया.उन्होंने बताया, ''भारत इस समय सभी नमूनों के केवल एक फ़ीसदी की सिक्वेंसिंग कर रहा है. इसकी तुलना में, ब्रिटेन महामारी के चरम के दिनों में 5-6 फ़ीसदी नमूनों की सिक्वेंसिंग कर रहा था. लेकिन इसकी क्षमता आप रातोरात नहीं बढ़ा सकते.''

इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,ऐसा लगता है कि सरकार ने टीकाकरण अभियान चलाने के लिए वैक्सीन के इंतजाम की पर्याप्त योजना नहीं बनाईवैक्सीन-भारत की सबसे बड़ी आशादिल्ली में एक बड़े निजी अस्पताल चलाने वाले परिवार की एक महिला ने बीबीसी को बताया, ''पब्लिक हेल्थ के जानकार आपको बताएंगे कि पहले से ध्वस्त पब्लिक हेल्थ सिस्टम को महज़ कुछ महीनों में मज़बूत करने का कोई व्यावहारिक तरीक़ा नहीं है.''

''कोविड से निपटने का सबसे अच्छा और प्रभावी विकल्प लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण करना था ताकि अधिकांश को अस्पताल की आवश्यकता नहीं होती और अस्पतालों पर हद से ज़्यादा बोझ नहीं पड़ता.''डॉ. लहरिया कहते हैं, ''शुरू में भारत जुलाई 2021 तक 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करना चाहता था, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने टीकाकरण अभियान चलाने के लिए वैक्सीन के इंतज़ाम की पर्याप्त योजना नहीं बनाई.''

वे कहते हैं, ''सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि बिना वैक्सीन की सप्लाई तय किए हुए सरकार ने सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण अभियान को शुरू कर दिया.''देश की 140 करोड़ की आबादी में से अब तक महज 2.6 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन की दोनों खुराक लगाई गई है जबकि करीब 12.5 करोड़ लोगों को एक खुराक मिल सकी है. भारत में वैक्सीन की करोड़ों खुराकों का ऑर्डर दिया हुआ है लेकिन इसकी मांग से यह बहुत कम है.

केंद्र की सरकार को 45 साल से ऊपर के सभी 44 करोड़ लोगों के टीकाकरण के लिए 61.5 करोड़ खुराक की आवश्यकता है. वहीं 18 से 44 साल के 62.2 करोड़ लोगों के लिए 120 करो़ड़ खुराकों की जरूरत है.इस बीच सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वादों पर फिर से विचार करते हुए वैक्सीन निर्यात के सभी सौदों को रद्द कर दिया है.

सरकार ने वैक्सीन बनाने के लिए बायोलॉजिकल ई और सरकारी संस्था हैफकेन इंस्टिट्यूट जैसी दूसरी कंपनियों को भी शामिल किया है. इसने उत्पादन बढ़ाने के लिए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को भी 61 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता दी है. यह कंपनी ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन बनाती है.

इस बारे में डॉ. लहरिया ने बताया कि यह निवेश पहले मिल जाना चाहिए था, तब कई क़ीमती जानों को बचाया जा सकता था. उन्होंने कहा, ''टीकाकरण अभियान को तेज़ करने के लिए पर्याप्त टीके हासिल करने में कई महीने लगेंगे. इस दौरान, लाखों लोगों को कोरोना होने का ख़तरा बना रहेगा.''

जानकारों का कहना है कि यह विडंबना ही है कि भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है. फिर भी हमें टीकों और दवाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है.डॉ. लहरिया के अनुसार, ये सारी चीज़ें केंद्र और राज्य सरकारें दोनों के लिए अलार्म का काम करना चाहिए. उन्हें हेल्थ सेक्टर में बहुत अधिक निवेश करना होगा, क्योंकि यह कोई आख़िरी महामारी नहीं होगी.

वे कहते हैं, ''भविष्य में आने वाली कोई महामारी किसी भी मॉडल के अनुमान से पहले आ सकती है.'' और पढो: BBC News Hindi »

India Today Conclave 2021: Taj Palace Hotel, New Delhi on 8th and 9th October

India Today Conclave 2021 - Check out the full details and schedule of India Today Conclave event to be held at Taj Palace Hotel, New Delhi on 8th and 9th October 2021.

PMOIndia हां Pfizer को ठेका नही मिल रहा तो गान तो जल रही होगी Ham bharat ke logon ko bacha lijye modi ji apna istefa de kar Sixth reason for defeat of BJP in W Bengal is PM Modi is surrounded by wrong and cleaver advisors who is looking for their future after him. Modi sarkar ne accha to kuch bhi nahi kiya abhi tak ... bas line me kludge raho. - vaccine ke liye -hospital beds ke liye -marne ke baad bhi line hi Naseeb hai.

Galti to hamari hai covid ko bhul gye na mask na duri phir to bimari hai jaroori RSS AND BJP PATHOLOGICAL LIARS Modi KO GIFT YE KAVITA. CentralVista

'आलोचना दबाने की मोदी की गलतियां अक्षम्य, सरकार को मानना होगा कोरोना रोकने में हुई गलतियां'Coronavirus Lockdown in India LIVE Updates: DRDO द्वारा विकसित कोरोना रोधी दवा को मरीजों के लिए आपात इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई है। इस दावा को पानी में घोलकर पिया जा सकता है। महोदय ऐ यूपी है यहां पर बिना जांच किए भष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर आवाज को दबाने के लिए फर्जी केस लिख दिया जाता है।🙏🇮🇳🙏 SaharanpurDm साहब न्याय नहीं दिला सकते तो मुझे इच्छा मृत्यु देने की कृपा करें

सब चीजो के दाम बढ रहे है पेट्रोल, सरसो के तेल के दाम इस Lockdownमे लोगो की जेब में पैसा नही है रोजगार नही है मोदी ने कभी महनत की कमाई से कुछ खरीदा होता तो पता चलता की महंगाई क्या होती है,लोग भूख से मर रहे है,कहना बहुत आसान है घर में रहो जब देश नही चला पा रहे हों तो इस्तीफा दो जब देश में कोरोना बेकाबू था ...हर प्रदेश में रेमेडिसीवर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की बहुत कमी थी .शमशान में वेटिंग लग रही थी ... ऐसे हालातो में नासमझ प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देश के हालात सुधारने में नहीं बल्कि चुनाव प्रचार में लगे हुए थे , बर्बाद करने पर तुले थे

DrSJaishankar is international shame for India just as his boss PMOIndia . washingtonpost nytimes POTUS POTUS44 VP TIME cnni BBCWorld guardian Telegraph MEAIndia ndtv IndiaToday ANI PTI_News ZeeNews rashtrapatibhvn BJP4India Har har modi ghar ghar Rogi Health is a state subject yet the leftist media continues to blame Modi for there mess.

और करो 5g टेस्टिंग, जिस देश का राजा ही आदमखोर हो, वंहा रामराज्य की कल्पना करना सबसे बड़ी मूर्खता है. LambaAlka Yeah mam mujeh dreamgirlhema Lagi LambaAlka खुद के गिरेबाँ में झाँकता नहीं है , ये शहंशाह किसी को आँकता नहीं है। उजाले में रहने की आदत है इसको, अँधेरे की तरफ ताकता नहीं है। गलतियां चाहे कितनी भी हो जाये खुद से, ये खुद को कभी डाँटता नहीं है। ' अनंत ' आत्ममुग्धता एक रोग की तरह है।

कांग्रेस का आरोप: मोदी सरकार की असंवेदनशीलता का परिणाम है कोरोना की दूसरी लहरकांग्रेस का आरोप: मोदी सरकार की असंवेदनशीलता का परिणाम है कोरोना की दूसरी लहर LadengeCoronaSe Coronavirus Covid19 CoronaVaccine OxygenCrisis OxygenShortage PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI INCIndia PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI INCIndia PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI INCIndia बिल्कुल सही बात है PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI INCIndia Murda bole kafan faade...

mohdriz62992900 नेताओ को बंगाल में अपने 10-15 लोगों के मरने का दुःख है। लेकिन आम जनता लाखों की संख्या में जान दे रही है, उनके लिये न PM, न HM, न Ndda कोई नहीं। क्योंकि आम जनता केवल वोटबैंक है, और उनके कार्यकर्ता वोटबैंक लुटेरे। कृपया थोड़ा तो सोचिये 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 1मई से 18-44आयु काVaccination होगा किन्तूVaccineही उप्लब्ध न है। कुछ राज्य में तो सुरू भी न हो पाया है।इस महामारी ने विदेशों को मदद की डन्का बजाने वालो को ही अव मुहताज बना दिया है।सब प्रबंधक चुनावों में व्यस्त थे तैयारी न हो पाई।चुनाव खत्म अब लॉकडाउन झेलें।जय हिंद।

राज्य सरकार को बाप बना के बैठा हैं। LambaAlka What about States not controlling migrants, who are super spreaders? भारत की सत्ता पर मोदी का काबिज़ होना ही भारत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है Stop your anti Modi and anti India propaganda ... you have no credibility left😡😡👎👎👎

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट - BBC Hindiसुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर सही तरीक़े से तैयारी की गई, तो भारत कोरोना की तीसरी लहर से निपट सकता है. साहब ने पिछली बार corona में जितने दिए जलवाए थे आज उतनी ही चिता जल रही हैं यही होता है मूर्ख वक्तई को राजा बनाने पर तैयारी देख लीजिए । वैक्सीन कहा है ? सरकार को बरखास्त कर यह जिम्मेदारी सेना को क्यों नहीं सौप दी जाए? MPArunYadav troll_ziddi ShilpiSinghINC

kab milegi aazadi...? BBC means India virodh. दिल्ली में जो धरना दिया गया उससे संक्रमण नहीं फैला क्या? बक़वास bbc Stop5gTesting स्टेट गवर्नमेंट की भी कोई जिम्मेदारी होगी दुर्योधन की आत्मा बहुत खुस होगी नरक में उसे कोई चिढ़ा नही रहा होगा की भारतवर्ष का सबसे बेवकूफ राजा वही है आज मै देश के उन लोगों को चुनौती देता हूं जो देशमें लॉकडाउन लगाने की बात करते हैं।वे लोग पहले दो दिन भूखे रह कर दिखावें सिर्फ पानीपी कर रहे।48 घंटे CCTV की निगरानी में रहे लॉक डाउन लगाने की बात भूल जायेंगे इन देशद्रोही लोगों ने विदेशी के हाथो मे देश को बेच दिया है

श्मशान में लाशों की लाइन लगी है, मां से बच्चे बिछड रहे हैं, सुहाग उजड रहे हैं, परिवार बिखर रहे हैं ऎसे समय में भी कुछ लोग सरकार के बचाव में उतर आते हैं, इतनी लाशें देखकर भी ऐसे लोगों का दिल नहीं पसीजता है? लगता है अंधभक्ती में उनकी आत्मा मर चुकी है और हैवान बन गये हैं। गिरगिट की तरह रंग बदलना कोई साहेब से सीखे, पांचों राज्यों के चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर से वृद्धि! मतलब अब वसूली शुरू 🤔🤔

सोनिया गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना, बोलीं कोरोना संकट से निपटने में मोदी सरकार नाकामआज यानी 7 मई 2021 को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई। कांग्रेस संसदीय दल की यह बैठक अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट से निपटने में मोदी सरकार नाकाम रही है। इसलिए वह सब जगह जीत रही है। इसमें गलत नही कहा कुछ बिल्कुल।

Mamta Banerjee aur TMC par energy waste karne se corona tackle nahin hoga. मोदी एक संत हैं और संत कभी ग़लत नहीं हो सकते कर्म जलो बंगाल भी जाकर आओ what the state government doing in this situation? Is state government is powerless? Is the state health department comes under state gov. or central? ask this question to all state CM .

अब भी बहोत सरकार के वाह वाही मैं लगे हुए है भक्त।।। BTW did you wrote anything on BengalViolence HinduGenocideBengal ? Oh no some of your Repoter may be 2BHK aspirants in Kolkata for their loyal service to CruelMamata Chor h kya be, फिर भी 2024 मे तो दादा ही होगे। या तो बाबा। छाती पीटना शुरु करदो। Maharashtra ruled by Congress + Shivsena + NCP Delhi: by AAP Kerala By: Communists Chatishgarh: Congress Rajasthan: Congress 8/10 worst WuhanVirus impacted states are ruled by opposition but for you Modi is responsible for everything!!! Even the infertility of liberals !

जिस सरकार की उपज ही गलत बिचारधारा (कट्टरपंथ) से हुई हैं उसकी तो सारी योजनाए गलत होंगी ही ना और हो भी रही हैं! बिना नोट छापे नोटबंदी,बिना पोर्टल बनाये जीएसटी,बिना तैयारी का समय दिए लॉक डाउन,बिना कोरोना से जीते, जीत का ढिंढोरा, अब बिना वैक्सीन वैक्सीनेशन ड्राइव घोषित & a Lot

भारत में कोरोना चरम पर, लेकिन मोदी सरकार आलोचनाओं का दमन करने में व्यस्त: लांसेट जर्नलअंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लांसेट ने अपने संपादकीय में मोदी सरकार की आलोचना करते हुए लिखा है कि बार-बार चेतावनी देने के बाद भी सरकार लापरवाह बनी रही और भारत को कोरोना विजयी घोषित कर दिया. जर्नल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आगामी अगस्त तक भारत में करीब 10 लाख कोरोना मौतें हो सकती हैं.

BBC mtlb hindutav Or modi virodh Ab sarkaar ko wo karna caahiye jo aaj tak kisi sarkaar ne nahi kiya janta ke kalyaan ka taandav Look at the situation where the population is only 17 lakhs .