कोरोना वायरस: इंदौर में मरीज़ों की संख्या तेजी से आगे क्यों बढ़ रही है?

कोरोना वायरस: इंदौर में मरीज़ों की संख्या तेजी से आगे क्यों बढ़ रही है?

25-04-2020 17:30:00

कोरोना वायरस: इंदौर में मरीज़ों की संख्या तेजी से आगे क्यों बढ़ रही है?

कोरोना वायरस की वजह से मुंबई के बाद मध्य प्रदेश का इंदौर शहर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. लेकिन वहां असल में क्या चल रहा है?

11: 16 IST को अपडेट किया गयाकम्युनिटी ट्रांसमिशन?जब उनसे पूछा गया कि क्या यह माना जा सकता है कि इंदौर जैसे शहर में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरु हो गया है तो उन्होंने कहा कि इसको अभी तक डॉक्यूमेंट नही किया गया है.वहीं मेडिकल एथिक्स पर काम करने वाले डाक्टर अनंत भान का मानना है कि इंदौर की स्थिति को ज्यादा से ज्यादा लॉकडाउन का पालन कराने और टेस्ट कराकर पॉजिटिव मरीज़ों को चिह्नित करने से ही काबू में किया जा सकता है.

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डॉ. अनंत भान ने बताया,"ज़रुरत इस बात की है कि टेस्ट की तादाद लगातार बढ़ायी जाए और कोरोना पॉजिटिव लोगों को पहचाना जा सके."उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी दिक़्क़त इंदौर के मामले में जो आ रही है वो टेस्ट रिपोर्ट आने में देरी है.उन्होंने कहा,"इसकी वजह से देखने में आ रहा है कि जब तक रिपोर्ट आती है तब तक ये लोग कई मामलों में संक्रमण दूसरे लोगों में फैला चुके होते हैं."

प्रदेश में 23 अप्रैल की स्थिति में 8526 मरीज़ों की रिपोर्ट आना बाक़ी है.इमेज कॉपीरइटरिपोर्ट में देरीऔरकोरोना वायरसमध्यप्रदेश से दिल्ली और पड्डुचेरी सैंपल जहाज़ से भेजे जा रहे है.इस क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इससे स्थिति पर काबू पाना आसान नही होगा. जहां इसमें पैसा भी ज्यादा लगेगा वही देरी भी होगी.

वही इंदौर में अब सिर्फ एक दिन की टेस्ट किट जांच के लिये बची है. इसके बाद जांच को मैन्युअल सिस्टम से करना पड़ेगा जिसमें सिर्फ 125- 150 सैंपल की ही जांच हो पायेंगी.इंदौर के कमिश्नर ने मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें टेस्ट किट उपलब्ध कराई जायें.डॉ. अनंत भान का यह भी कहना है कि टेस्ट के नतीज़ों के लिये बार बार दिल्ली सैंपल भेजने के बजाय उसे भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में ही ज्यादा से ज्यादा किया जाए तो नतीजे बेहतर होगें.

वहीं, जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक अमूल्य निधि का कहना है कि सरकार ने शुरुआती दौर में थोड़ी बहुत व्यवस्थित योजना बनाई थी लेकिन वह प्लान बदल के नया प्लान लाया गया जिसकी वजह से स्थिति काफी बदली है.वहीं उनका यह भी आरोप है कि सरकार बुलेटिन के आकड़ों में भी अंतर पैदा कर रही है.

इमेज कॉपीरइटSHuraih Niyazi/BBCआंकड़ों में अंतरउन्होंने कहा,"सरकार ने 5 अप्रैल 2020 से विदेश से आये लोगों (जिन्हें क्वारंटीन या आइसोलेशन में रखा गया था) की जानकारी देना बंद कर दिया है. साथ ही जो राज्य का बुलेटिन है उसमें से बहुत सारी जानकारी सारे अनियमित और अधूरी है."

अमूल्य निधि ने बताया,"स्वास्थ्य बुलेटिन में 18-19 अप्रैल को कई सारे ज़िलों के पॉजिटिव केसों के आकड़ें कम हो गये जो की भ्रम पैदा करने के साथ ही आकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल पैदा करते है. यह आंकड़े देश और वैश्विक स्तर पर साथ ही साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन और अनुसंधान के लिए जरूरी हैं. सरकार को समीक्षा करनी चाहिए कि आखिर बुलेटिन में ऐसा क्यों और किसने किया? जानकारी गलत देना या छुपाना भी जन विरोधी हैं."

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अगर इंदौर आई केंद्रीय टीम को देखा जाये तो उस टीम ने इंदौर में हुये प्रयासों और ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों की सराहना की है.लेकिन इंदौर की स्थिति कई सवाल पैदा कर रही है जैसे इंदौर में मरीज की मृत्यु के बाद टेस्ट रिजल्ट आना, 2-3 दिन या अस्पताल में दाखिल होने के बाद उसी दिन दम तोड़ना, ज्यादा मृत्यु दर और कई इलाको में गैर- कोरोना पीड़ित मृत लोगों की संख्या बहुत अधिक होना.

22 अप्रैल को जारी आकड़ें को देखे तो अकेले इंदौर में ही 2000 से अधिक सैंपल की रिजल्ट आना बाक़ी थी.इमेज कॉपीरइटSHuraih Niyazi/BBCभरोसा बढ़ाए जाने की ज़रूरतहालांकि सामाजिक कार्यक्रता मानते है कि ज़रुरत इस बात की है कि सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए जिससे उनमें विश्वास बढ़ाया जाए.

वहीं सामाजिक कार्यक्रता इस बात पर आवाज़ उठा रहे है कि इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में ज्यादातर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल है.उन्होंने सवाल उठाये हैं कि मरीज सरकारी अस्पताल में कम क्यों है जब कि सरकारी स्वास्थ्य विभाग का अमला 16-18 घंटे कम कर रहे है. ये निर्णय कैसे लिया जा रहा है कि कौन मरीज किस अस्पताल में जायेगा, नियोजन कैसे हो रहे है.

इन लोगों का कहना है कि सरकार को निजी क्षेत्र के बजाय सरकार अस्पतालों को प्राथमिकता देनी चाहिये ताकि वह इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकें जो आगे भी काम आयेंगा. लेकिन प्रायवेट अस्पतालों पर निर्भरता से सरकारी पैसे का ही नुक़सान होगा.सरकार ने आइसोलेंशन सेंटर और क्वारेंटीन सेंटर की जानकारी भी सार्वजनिक नही की है. इससे लोगों को उन सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं और कमियों के बारे में भी पता चलेगा.

वहीं यह लोग यह भी चाहते है कि सरकार इस बात की तैयारी शुरु करें कि पूरे इंदौर संभाग में लॉकडाउन के बाद किस तरह से खोला जायेंगा.उसके लिये एक निश्चित प्लान सरकार को तैयार करना चाहिये.वहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मानना है कि इंदौर शहर में कोरोना पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा.

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You know horse trading it involves a lot amount of money so after buying horse the money which is spent needs to be earned back and once that is done we can see to covid relief क्योंकि MP सरकार निकम्मी हैं। Because Most of Jamati are hiding in Indore. Despite of lots of request by Government, most of them are living without give any information. They have informed only when the Symptoms are seen. We need inform to Government/Police when we see any symptoms related to Covid_19 .

Allah ki Meharbani Pata nahi tum news wale hi batoo क्यों कि इंदौर में मुल्ले ज्यादा हैं और वो सरकार के द्वारा लगाए गए लौक डाउन का और सोसल डिस्टन्सिंग का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं ज्यादा केस आ रहे मतलब तंत्र सही काम कर रहाUP,बिहार,गुजरात की तरह झूठ का सहारा लेकर नागरिको का विश्वास और जान दोनों दांव पर तो न लगा रहा सिस्टम,इस समय अधिकतर लोग डेटा मैनेज करने में लगे जो मानवता के लिए नुकसान देह है, इस चक्कर मे मरने वाले भी data में नही आएंगे और डरने वाले भी..

EPIDEMIC CAN NOT CROSS FLOOR थोड़ा ईमानदार हे data sharing में वेसे अब नेता लोगों ने समझा दिया ईमानदार अफ़सरों को की ज़्यादा उड़ो मत हमारा रेकोर्ड ख़राब हो जाएगा भई ... CORRECTION: 23 मार्च की जगह 23 एप्रिल होना चाहिए बीबीसी आप कृपया यूके का ध्यान रखें, लोग घर, अस्पताल, सड़कों, पार्कों पर बिना रुके मर रहे हैं। ब्रिटेन में डॉक्टर बिना सुरक्षा उपकरण, मेडिसिन ऑक्सीजन की कमी के हैं

इदोर मे iitt जैसाकुच प्लान बनाया है सरकार ने लेकीन उसपर काम करने से जादा टेलीविजन पर अँड ही जादा दीख रहे है खैर जो प्लान बनाकर काम कर रहे है वही बलकी उसे जादा काम महाराष्ट्र सरकार शुरु से कर रही हे और ओभी बीना टेलीविजन अँड के सिर्फ इंदौर ही नहीं मुम्बई और अहमदाबाद में भी बढ़ रही है क्योंकि सारा पैसा सरकार को खरीदने के बाद उसकी भरपाई में खर्च हो रहा होगा

इन्दौर वाले थाली बजाने और मशाल लेकर सड़को पर हुड़दंग करते रहे यह उसी का परिणाम है। कोरोना वायरस: इंदौर में मरीज़ों की संख्या ज्यादा तेजी से बढ़ रही है? सरकारी तंत्र फेल है। I think you have to give answers as a journalist Kattue hai isliye.

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