कोरोना: लॉकडाउन पर असमंजस में मोदी, जान बचाएँ या अर्थव्यवस्था? - BBC News हिंदी

लॉकडाउन पर असमंजस में मोदी, जान बचाएँ या अर्थव्यवस्था?

5 घंटो पहले

लॉकडाउन पर असमंजस में मोदी, जान बचाएँ या अर्थव्यवस्था?

कई राज्यों ने लॉकडाउन लागू किया है जबकि पीएम मोदी ने अपने पिछले संदेश में कहा था कि लॉकडाउन से देश को बचाना है, ऐसा क्यों?

इमेज कैप्शन,राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन को 10 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया हैडॉक्टरों और नर्सों की पुकारभारत सरकार पर सबसे बड़ा दबाव उन लाखों डॉक्टरों और फ्रंटलाइन स्टाफ़ का है जो देश के हज़ारों अस्पतालों में दिन-रात काम कर रहे हैं लेकिन अपनी आँखों के सामने ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मरीज़ों को दम तोड़ते देख रहे हैं.

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अस्पतालों में आईसीयू बेड, वेंटिलेटर और दूसरे स्वास्थ्य यंत्रों की सख्त कमी को देखते हुए वो चाहते हैं कि केंद्र सरकार कुछ हफ़्तों के लिए देशभर में लॉकडाउन लगाए ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके और उन्हें कुछ राहत मिले.एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि देश में पिछले साल की तरह इस बार भी पूर्ण लॉकडाउन या आक्रामक लॉकडाउन लगाने की ज़रूरत है

भारत में 10 से अधिक राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शहरों में या तो क्षेत्रीय लॉकडाउन लागू हैं या फिर रात का कर्फ्यू लगाया गया है.वीडियो कैप्शन,आंखों के सामने दम तोड़ते मरीज़ और मेडिकल स्टाफ़ की लाचारीकुछ जगहों पर सप्ताहांत कर्फ्यू और लॉकडाउन लग गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले हफ़्ते मुख्यमंत्रियों की एक वर्चुअल बैठक में आग्रह किया था कि वो लॉकडाउन को आख़िरी क़दम मानें. headtopics.com

हालाँकि महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कोरोना पॉज़िटिव मामलों में थोड़ी कमी आई है और देशभर में औसतन हर रोज़ आने वाले चार लाख संक्रमण के मामले अब तीन लाख 57 हज़ार पर आ गए हैं.यह भी पढ़ें:भारत में कोविड वैक्सीन के लिए बेसब्री और लंबा इंतज़ार

कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में कोई ख़ास गिरावट नहीं आई है, और संक्रमण नई जगहों पर फैल रहा है. सबसे ज़्यादा चिंता उन ग्रामीण इलाकों को लेकर है जहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ शहरों की तरह नहीं हैं.डॉक्टर गुलेरिया के अनुसार वायरस की दूसरी लहर जिस तेज़ी से देशभर में फैल रही है उसे रोकने की तैयारी हमारी नहीं है और उनके विचार में राज्यों के लॉकडाउन या प्रतिबंध कामयाब साबित नहीं हो रहे हैं, इसलिए संक्रमण के चक्र को तोड़ने का राष्ट्रव्यापी संपूर्ण लॉकडाउन ही एकमात्र रास्ता है.

जान और जहान का असमंजसइमेज स्रोत,Getty Imagesभारत सरकार की दुविधा ये है कि पहले जान बचाएं या अर्थव्यवस्था, लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है जिसके कारण और भी जानें जा सकती हैं और बेरोज़गारी चरम पर पहुंच सकती है.देश में टीकाकरण का कार्यक्रम चल तो रहा है लेकिन सवा अरब से अधिक आबादी वाले देश में सभी लोगों को टीका लगाने का काम न तो आसान होगा, और न ही जल्दी से उसे पूरा किया जा सकता है.

पिछले साल 24 मार्च की शाम को प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन लगाते समय कहा था कि जान है तो जहान है. लेकिन इस बार जबकि दूसरी लहर जानलेवा और भीषण है, प्रधानमंत्री लॉकडाउन से क्यों कतरा रहे हैं?सरकारी अधिकारी कहते हैं कि "प्रधानमंत्री फिलहाल क्षेत्रीय और टार्गेटेड लॉकडाउन और कंटेनमेंट ज़ोन बनाए जाने के पक्ष में हैं." headtopics.com

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पिछले साल देश भर में अचानक से लगाए गए लॉकडाउन से भारत की अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो गई थी. एक तिमाही में विकास दर -23.9 प्रतिशत पहुँच गई थी, ऐसी भयंकर गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था में पहले कभी नहीं देखी गई थी.बहुत बड़ी तादाद में मज़दूरों के पलायन से देश भर में अफरा-तफरी फैल गई थी और एक अंदाज़े के मुताबिक़, 12 करोड़ मज़दूर एक झटके में बेरोज़गार हो गए थे. इनमे से कई लोग अब भी अपने गाँवों से उन जगहों पर वापस नहीं लौटे हैं जहाँ वो काम करते थे.

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एक न‍िर्भीक और बेबाक आवाज का अंत, अलविदा रोहित सरदाना

टेलिविज़न के सबसे बेखौफ़ एंकर रोहित सरदाना का आज (शुक्रवार) को हार्ट अटैक से निधन हो गया. उनकी पत्रकारिता के स्टाइल हर कोई फैन था. रोहित कुछ दिनों पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे. लेकिन उससे वो निकल रहे थे और सक्रिय थे. नोएडा के मैट्रो अस्पताल में रोहित का इलाज चल रहा था. देखें वीडियो.