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कोरोना महामारी: छोटे बच्चों के सीखने और समझने की क्षमता पर पड़ा असर

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के भाषा विकास विभाग की विशेषज्ञ डॉ. कैथरीन डेविस का कहना है कि छोटे बच्चे खासतौर पर

27-07-2021 03:17:00

कोरोना महामारी: छोटे बच्चों के सीखने और समझने की क्षमता पर पड़ा असर Coronavirus Childrens Covid19 mansukhmandviya MoHFW_INDIA

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के भाषा विकास विभाग की विशेषज्ञ डॉ. कैथरीन डेविस का कहना है कि छोटे बच्चे खासतौर पर

प्रो. कैथरीन डेविस बताती हैं कि हाल ही में हुए एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि महामारी के बीच सप्ताह में एक भी दिन जिन बच्चों ने प्ले स्कूल ऑनलाइन अटेंड किया या किसी ने उन्हें प्रशिक्षित किया उन्होंने औसतन 24 या इससे अधिक शब्दों को जाना और समझा।विशेषज्ञों का कहना है कि जिन परिवारों ने बच्चों को समझाने और सिखाने पर जोर नहीं दिया उनमें बोलने, समझने और शब्दों को पहचानने में दिक्कत देखी गई। ऐसे में बच्चों के बेहतर लालन पोषण के साथ कहानी और गाना सुनाने के साथ रोचक कार्यक्रम दिखाने से भी उनके भीतर शब्द अंकुरित होते हैं और वे अपनी भावनाओं को उन शब्दों के जरिए व्यक्त करते हैं।

अमेरिका-ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया के रक्षा समझौते से क्यों है यूरोप में नाराज़गी? - BBC Hindi सोनू सूद के मुंबई वाले घर पर लगातार तीसरे दिन पहुंचे इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी हिटलर के लोग जब आर्य जाति की जड़ें ढूँढ़ने भारत के रास्ते तिब्बत पहुंचे - BBC News हिंदी

सोचने-समझने की क्षमता होती मजबूतविशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चे जब चलना-फिरना शुरू करते हैं। अपने भाव को व्यक्त करने की कोशिश करते हैं। ये वही वक्त होता है जब उनके भीतर सोचने-समझने की कला विकसित होती है।बच्चे जैसे-जैसे चीजों को समझते हैं उनकी सोचने और समझने की क्षमता मजबूत होती है। इस दौरान उनके मस्तिष्क में एक क्त्रिस्या होती है और अपने स्तर से वे अपना भला-बुरा भी समझते हैं। यही कारण है कि वो नन्हीं उम्र में भी किसी स्थिति से बचाव के लिए वे पूरी कोशिश करते हैं

विस्तारकोरोना महामारी के कारण छोटे बच्चों का जीवन अधिक संघर्षपूर्ण हो गया है। जो महामारी के दौर में चलने-बोलने के साथ पढ़ना-लिखना सिख रहे हैं, उन्हें अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।विज्ञापनप्रो. कैथरीन डेविस बताती हैं कि हाल ही में हुए एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि महामारी के बीच सप्ताह में एक भी दिन जिन बच्चों ने प्ले स्कूल ऑनलाइन अटेंड किया या किसी ने उन्हें प्रशिक्षित किया उन्होंने औसतन 24 या इससे अधिक शब्दों को जाना और समझा। headtopics.com

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन परिवारों ने बच्चों को समझाने और सिखाने पर जोर नहीं दिया उनमें बोलने, समझने और शब्दों को पहचानने में दिक्कत देखी गई। ऐसे में बच्चों के बेहतर लालन पोषण के साथ कहानी और गाना सुनाने के साथ रोचक कार्यक्रम दिखाने से भी उनके भीतर शब्द अंकुरित होते हैं और वे अपनी भावनाओं को उन शब्दों के जरिए व्यक्त करते हैं।

सोचने-समझने की क्षमता होती मजबूतविशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चे जब चलना-फिरना शुरू करते हैं। अपने भाव को व्यक्त करने की कोशिश करते हैं। ये वही वक्त होता है जब उनके भीतर सोचने-समझने की कला विकसित होती है।बच्चे जैसे-जैसे चीजों को समझते हैं उनकी सोचने और समझने की क्षमता मजबूत होती है। इस दौरान उनके मस्तिष्क में एक क्त्रिस्या होती है और अपने स्तर से वे अपना भला-बुरा भी समझते हैं। यही कारण है कि वो नन्हीं उम्र में भी किसी स्थिति से बचाव के लिए वे पूरी कोशिश करते हैं

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एज-गैप का फंडा: पार्टनर्स के बीच उम्र का फर्क सेक्शुअल रिलेशनशिप को कैसे बिगाड़ता है, जानें एक्सपर्ट की राय

जिन कपल्स के बीच 5 साल का एज-गैप है, उनके अलग होने की संभावना 18%,पुरुष आमतौर पर उम्र में अपने से छोटी महिलाओं को पसंद करते हैं, और महिलाएं खुद से उम्र में बड़े पुरुषों को। | पुरुष आमतौर पर उम्र में अपने से छोटी महिलाओं को पसंद करते हैं, और महिलाएं खुद से उम्र में बड़े पुरुषों को।

भारत की जीत के छक्के पर नजर, इनके पास T20 वर्ल्ड कप की दावेदारी का मौकाटीम के लिए हार्दिक पंड्या की बल्लेबाजी फॉर्म भी चिंता का विषय है जो श्रीलंका के खिलाफ अब तक प्रभावित करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने ठीक-ठाक गेंदबाजी की है, लेकिन वह पीठ की सर्जरी से पहले की तरह गेंदबाजी करने में नाकाम रहे हैं।

IPL 2021: पंजाब के रडार पर होगा राजस्थान, टॉप-4 में जगह बनाने पर रहेगी नजरपंजाब किंग्स आईपीएल के बाकी हिस्से में दुबई में तीन, शारजाह में दो और अबुधाबी में एक मैच खेलेगी। उसे शाम 7:30 बजे से 4 मैच खेलने हैं। वह अपने आखिरी दो लीग मुकाबले दोपहर 3:30 बजे से खेलेगी। पंजाब किंग्स ने इस सीजन अब तक तीन मैच जीते हैं।

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शिवसेना ने पूछा - पेगासस के जरिए जासूसी कराने पर भारी राशि किसने खर्च की?शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार को पूछा कि पेगासस द्वारा नेताओं और पत्रकारों की कथित जासूसी का वित्तपोषण किसने किया. उन्होंने इसकी तुलना हिरोशिमा परमाणु बम हमले से करते हुए कहा कि जापान के इस शहर पर हमले से लोगों की मौतें हुईं तो वहीं इजराइली सॉफ़्टवेयर की जासूसी से ‘स्वतंत्रता की मौत’ हुई. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में राउत ने लिखा, ‘‘ आधुनिक प्रौद्योगिकी हमें गुलामी की तरह वापस लेकर गई है.’’ उन्होंने कहा कि पेगासस मामला ‘हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले से अलग नहीं है.’’ राउत ने दावा किया, ‘‘हिरोशिमा में लोगों की मौत हुई जबकि पेगासस मामले से स्वतंत्रता की मौत हुई.’’ Sir संतुष्टि आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, के वाराणसी स्तिथ हेड आफिस पर 3 साल पूर्व लिए गए एड्मिसन के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा प्रशाषन, छात्रों का हेड आफिस पर धरना, प्रबंधक और प्रशाषन नही कर रहे समाधान। Par pesa to desh ki Janta ka barbad ho Raha he...... Mahangaai bhugat Kar Tex de rahs he desh.....🙏🙏 महाराष्ट्र मे बाढ पिढीतो की सहायता कौन करेगा ? वहां तो इनकी ही सरकार है.

'गांव-गांव श्मशान घाट बनवाएंगे', Nitish के मंत्री के बयान पर बवालबिहार में शमशान को लेकर सियासी शोर तेज हो रहा है. सरकार और विपक्ष इस मसले पर आमने सामने है. दरअसल, बिहार सरकार में मंत्री सम्राट चौधरी ने बयान दिया है कि हम हर गांव में श्मशान बनाएंगे. नीतीश के मंत्री ने आगे कहा कि लोग कब्रिस्तान बनाते हैं और श्मशान भूल जाते हैं. लेकिन हम 85 प्रतिशत आबादी को भूल जाएं, ये हो नहीं सकता. वहीं इस बयान पर विपक्ष हमला करने से नहीं चूका. आरजेडी विधायक मुकेश रौशन ने कहा कि जहां अस्पताल की जरूरत है, वहां सरकार श्मसान बनाने की कोशिश कर रही है. आरजेडी विधायक ने कहा कि हम बिहार में श्मशान नहीं बनाने देंगे. देखिए ये वीडियो. Mukhiya ji maalamaal ho jayenge बहुत खूब भाई और कुछ हो न हो पर ये सोच तो सब काम ठीक कर देगी। जिंदगी भर पेट खाना,रहने के लिए जगह और बिमारी के लिए अस्पताल और पढ़ाई के लिए स्कूल बनाने की जरूरत नहीं। मरने पर सही जगह वाह।

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