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कोरोना के साये में कारोबार, हालात के हिसाब से फैसले लेने की जरूरत

आसार कम हैं कि निजी कारखाने फिर से चल सकेंगे। उन्हें फिर से चलाने के लिए कामगार चाहिए और वे अपने गांव चले गए हैं या रास्ते में ठहरे हुए हैं।

26-04-2020 05:21:00

कोरोना के साये में कारोबार, हालात के हिसाब से फैसले लेने की जरूरत CoronaLockdown CoronavirusCrisis Congress PMOIndia HMOIndia narendramodi Sanjaygupta0702

आसार कम हैं कि निजी कारखाने फिर से चल सकेंगे। उन्हें फिर से चलाने के लिए कामगार चाहिए और वे अपने गांव चले गए हैं या रास्ते में ठहरे हुए हैं।

कोरोना के कहर से बचने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का एक माह पूरा होने के साथ ही केंद्र सरकार ने प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में गत दिवस शॉपिंग मॉल्स, बाजार, मार्केटिंग कांप्लेक्स को छोड़कर अन्य दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई। इसके पहले संक्रमण मुक्त इलाकों में सीमित कारोबारी गतिविधियों की अनुमति दी गई थी। इन फैसलों पर सियासी नुक्ताचीनी करने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि यह आपदा इतनी बड़ी है कि कोई भी उसकी विकरालता का अनुमान नहीं लगा सकता। ऐसे विकट समय उचित यही है कि हालात के हिसाब से फैसले लिए जाएं और उनमें जरूरी फेर-बदल किए जाएं।

ट्रंप ने चीन को लेकर की दो बड़ी घोषणाएं, WHO से अमरीका को किया अलग मोदी को टक्कर देना छह साल बाद भी इस क़दर मुश्किल क्यों जीडीपी के ताज़ा आंकड़े लॉकडाउन के असर की सिर्फ़ झांकी भर हैं?

विपक्षी दल  राजनीति करने से बचेंविपक्षी दल इन फैसलों को लेकर अनावश्यक राजनीति करने से बचें तो बेहतर, क्योंकि वे सहयोग करने के नाम पर कुल मिलाकर भ्रम ही फैला रहे हैं। उन्हें इसका अहसास होना चाहिए कि भारत में अन्य देशों के मुकाबले कोरोना का प्रकोप कहीं कम है और ऐसा लॉकडाउन पर सही तरह से अमल के कारण ही संभव हो पाया है। इसे संभव करने में सबसे बड़ी भूमिका है डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ सफाईकर्मियों की। दुर्भाग्य से उन्हें हमलों और अभद्रता का शिकार होना पड़ा। उन्हें इस सबसे बचाने के लिए ही महामारी अधिनियम में संशोधन के बाद राज्यों को यह देखना होगा कि वैसी घटनाएं न होने पाएं जैसी इंदौर, मुरादाबाद के साथ अन्य कई शहरों में हुईं।

यह भी पढ़ेंदेश में कोरोना के मरीज तो बढ़ रहे हैं, लेकिन रफ्तार में कमी आईहालांकि देश में कोरोना के मरीज अभी भी बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या दोगुना होने की रफ्तार में कमी आई है और संक्रमण से मुक्त होने वाले जिलों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन इसी के साथ प्रशासनिक राजधानी दिल्ली और वित्तीय राजधानी मुंबई के साथ-साथ कई बड़े शहरों में संक्रमण नियंत्रित होता नहीं दिखता। इसके चलते यह संदेह हो रहा कि इन शहरों में कहीं लॉकडाउन बढ़ाना न पड़े। यह आशा की जानी चाहिए कि दिल्ली, मुंबई समेत अन्य शहरों में जल्द ही कोरोना का संक्रमण थमता हुआ दिखेगा। इसके लिए हरसंभव प्रयास भी किए जाने चाहिए, क्योंकि बड़े शहर विकास के वाहक होते हैं।

यह भी पढ़ेंकोरोना वायरस ने दुनिया की चूलें हिलाकर रख दीकोरोना वायरस ने दुनिया की चूलें हिलाकर रख दी हैं। समृद्ध और ताकतवर देश उसके सामने असहाय से हैं। पूरा विश्व आर्थिक मंदी की चपेट में है और आर्थिक गतिविधियां शुरू करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कोरोना वायरस से उपजी महामारी कोविड-19 से सबसे अधिक अमेरिका और यूरोप के देश पीड़ित हैं। सबसे अधिक लोगों की मौत इन्हीं देशों में हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महामारी के प्रकोप को अमेरिका पर हमले की संज्ञा देते हुए चीन की घेरेबंदी तेज कर दी है। कुछ अन्य देश भी कोरोना के कहर के लिए चीन को जिम्मेदार बता रहे हैं।

यह भी पढ़ेंआखिर वुहान में कोरोना वायरस का प्रसार क्यों और कैसे हुआ?चीन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के साथ ही यह प्रचारित कर रहा है कि उसके यहां स्थितियां अब सामान्य हो चुकी हैं और जिस वुहान शहर से कोरोना वायरस फैला वहां भी हालात नियंत्रित हैं, लेकिन उसके किसी दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि वहां संक्रमण फिर से फैलने की खबरें आ रही हैं। चीन के इसी रवैये के चलते यह पता लगाने की मांग तेज हो रही है कि आखिर वुहान में कोरोना वायरस का प्रसार क्यों और कैसे हुआ? यह वन्य जीवों से मानव शरीर में आया अथवा किसी प्रयोगशाला से? इन सवालों का जवाब सामने आना ही चाहिए ताकि यह अंदेशा दूर हो कि कहीं यह वायरस किसी जैविक हमले का हिस्सा तो नहीं? जैविक हमलों के लिए डर्टी बम तैयार करना एक हकीकत है। ट्रंप का बयान इसी ओर संकेत कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने तो साफ-साफ कहा है कि चीन ने जरूरी जानकारी दुनिया से छिपाने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का जो काम किया उसकी उसे कीमत चुकानी पड़ेगी।

यह भी पढ़ेंकारोबारियों को नहीं सूझ रहा कि वे आधी क्षमता से उद्यम कैसे चलाएंचूंकि भारत अधिक आबादी वाला विकासशील देश है और यहां एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और जो रोज कमाने-खाने वाले हैं इसलिए पश्चिमी देशों के मुकाबले उसे कहीं अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनसे तभी उबरा जा सकता है जब कारोबारी गतिविधियां फिर शुरू हो सकें। सरकार इसके उपाय कर रही है, लेकिन कारोबारी आशंकित हैं कि उन्हें कच्चा माल कैसे मिलेगा और उनके उत्पादों की मांग कब और कैसे बढ़ेगी? सरकार ने जो दिशानिर्देश जारी किए हैं उनका पालन करते हुए उद्योग-व्यापार शुरू करना आसान नहीं। वैसे भी कारोबारियों को यह नहीं सूझ रहा कि वे आधी क्षमता से अपने उद्यम कैसे चलाएं? उनके सामने और भी कई दुविधा हैं। इन्हें जल्द दूर किया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ेंशारीरिक दूरी संक्रमण से बचाव का उपाय अवश्य है, लेकिन भूल हो सकती हैहालांकि केंद्र ने इसे लेकर तो स्पष्टीकरण जारी कर दिया कि किसी कारखाना परिसर में कोरोना का संक्रमण पाए जाने पर उसके मालिक पर कार्रवाई तभी होगी जब उसकी लापरवाही पाई जाएगी, लेकिन आखिर यह कैसे तय होगा कि लापरवाही बरती गई अथवा अनजाने में भूल हुई? एक तो यह नहीं माना चाहिए कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद भी काम पर जाएगा और दूसरे इसकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि कई लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखते ही नहीं। नि:संदेह शारीरिक दूरी संक्रमण से बचाव का एक उपाय अवश्य है, लेकिन सतर्कता के बावजूद किसी से भी भूल हो सकती है।

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यह भी पढ़ेंआसार कम हैं कि निजी क्षेत्र के बंद कारखाने फिर से चल सकेंगेफिलहाल आसार कम हैं कि निजी क्षेत्र के बंद कारखाने फिर से चल सकेंगे। उन्हें फिर से चलाने के लिए कामगार चाहिए और वे या तो अपने गांव चले गए हैं या फिर बीच रास्ते में ठहरे हुए हैं। जब कारोबारी गतिविधियां शुरू करने की तैयारी हो रही है तब केंद्र और राज्यों को इस पर कोई फैसला करना होगा कि कामगारों को उनके गांव जाने की व्यवस्था की जाए या फिर उन्हें कार्यस्थलों में पहुंचाने की?

यह भी पढ़ेंकारोबारी भी केंद्र सरकार से पैकेज की प्रतीक्षा कर रहे हैं   और पढो: Dainik jagran »

Shobhana111 PMOIndia HMOIndia narendramodi Sanjaygupta0702 दैनिक जागरण अब विश्वसनीय नहीं रहा वो क्या है ...कि अब आधे अखबार बिक कर छपते हैं। अब उसी में गिनती दैनिक जागरण की भी हो रही है। PMOIndia HMOIndia narendramodi Sanjaygupta0702 आंकलन सर्वेक्षण से सम्भव! संक्रमण की ताज़ा स्थित जांच से सम्भव! इलाज SocialDistancing से सम्भव! जो जांच हुई उसका स्तर विश्वसनीय नहीं! rapidtestkits ICMR के मानकों के अनुरूप नहीं! एक साथ MediaVirus और Corona से लड़ कर कोरोना_को_हराना_है। narendramodi PMOIndia

PMOIndia HMOIndia narendramodi Sanjaygupta0702 एकदम सही बात क्योंकि जिंदगी तो चलते रहनी है लेकिन स्थिति दयनीय हो जाएगी तो बहुत मुश्किल होगी,मुझे लगता है बहोत से लोग इस डर में आत्महत्या न कर ले सरकार पहले से ही अर्थव्यवस्था के मामले में icu में है अब तो बहाना भी मिल जाएगा।जनता मरे तो मरे। kalpeshravals PMOIndia HMOIndia narendramodi Sanjaygupta0702 गोदी मीडिया भाड़_जागरण

यूपी के एटा में दर्दनाक घटना, घर में मिले परिवार के 5 लोगों के शव

कोरोना वायरस: आख़िर मरीज़ों के पेट के बल लेटने के मायने क्या हैं?इंटेंसिव केयर यूनिट में अत्याधुनिक वेंटिलेटरों पर पेट के बल लेटे हुए मरीज़ दिखाई देते हैं. तुम जैसी एन्टी हिन्दू चेनल को कोई मायने नही रखती सो जाएं आप ताली, और थाली बजाओ सीधा हो जाएगा Bikat samasya h logo ke samne pahle se environment minister aur unko team ne kabhi biomass microorganism bact virus ki bate nahi ki 74se niyam h kabhi gambhirta se nahi liya m o e f aur c p c b ne yahi log jimedar h

रोहित बोले- वर्ल्ड कप के बाद से धोनी के बारे में कुछ नहीं सुना, वो 'अंडरग्राउंड'भारत के सीमित ओवरों के उप कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि उन्होंने पिछले साल विश्व कप के बाद से ही महेंद्र सिंह धोनी के बारे में कुछ नहीं सुना है और उन्हें नहीं पता कि उनके साथ क्या हो रहा है. पंखे बेच तो रहा है WAKE UP 😴⏰ 😱☠️👻👻

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