कोरोना दौर में शेयर बाजार में क्यों कूद रहे हैं नौसिखिए निवेशक?

कोरोना दौर में शेयर बाजार में क्यों कूद रहे हैं नौसिखिए निवेशक?

06-08-2020 23:53:00

कोरोना दौर में शेयर बाजार में क्यों कूद रहे हैं नौसिखिए निवेशक?

बहुत से लोग बाज़ार में निवेश करके जल्द पैसा कमाना चाहते हैं, लेकिन इसके ख़तरे क्या हैं?

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटKELLY MILLSमहामारी के दौरान बिना किसी नौकरी के घर पर बैठी केली मिल्स ने शुरुआती दिनों में वीडियो गेम्स खेलकर अपना टाइम पास किया. बाद में उन्होंने सोचा कि क्यों न असली गेम यानी स्टॉक मार्केट में हाथ आजमाया जाए.वे बताती हैं,"मैंने सोचा कि अगर मैं इन फालतू के कामों में इतना दिमाग लगा रही हूं तो निश्चित तौर पर मुझे स्टॉक मार्केट को समझने के लिए वक्त देना चाहिए."

आज तक @aajtak Hathras Gangrape पर बोले Sachin Pilot- सबूतों को मिटाने की कोशिश हुई बाबरी मस्जिद को गिराना एक षड्यंत्र था, मेरी जाँच बिलकुल सही थी: जस्टिस लिब्राहन - BBC News हिंदी

जल्द ही लुसियाना की 34 साल की केली रेडिट पर कंपनियों के बारे में होने वाली बातचीत को ट्रैक करने लगीं. साथ ही वे एग्जिक्यूटिव कॉन्फ्रेंस कॉल्स को सुनने लगीं और शेयर प्राइसेज को ट्रैक करने लगीं.वे कहतीं हैं,"मैं बोर हो गई थी. यह मेरे पैसे कमाने के लिए नहीं था. मैं केवल अपना टाइम पास करना चाहती थी."

मिल्स की तरह से हालिया महीनों में अमरीका में लाखों नए निवेशकों ने शेयर मार्केट में एंट्री की है. मार्च में शेयरों की कीमतों में अचानक आई तेज गिरावट, ब्रोकरेज फर्मों के बेहद कम या जीरो फीस ऑफर करने और सरकार की तरफ से महामारी के भत्ते मिलने से लोग स्टॉक मार्केट की ओर शिफ्ट हुए हैं.

इस साल के शुरुआती तीन महीनों में चार्ल्स श्वाब, टीडी अमेरीट्रेड, ईट्रेड और रॉबिनहुड जैसे ऑनलाइन ब्रोकर्स के यहां 45 लाख नए खाते बने हैं. इनमें से कई अकाउंट्स मार्च में मार्केट को लेकर पैदा डर के चरम के वक्त खुले हैं.कोलोराडो में रहने वाले एरिक सदरलैंड सेल्स में काम करते हैं. एरिक ने रॉबिनहुड में अपना अकाउंट खुलवाया है. मार्च के बाद से अब तक वे करीब 1,300 डॉलर शेयरों में निवेश कर चुके हैं.

वे कहते हैं,"जब भी मार्केट क्रैश होता है तो यह खरीदारी का एक मौका होता है. ऐसा नहीं है कि मार्केट वापसी नहीं करेगा, तो फिर मैं इसमें पैसा क्यों न लगाऊं."वॉल स्ट्रीट की चिंताएंइमेज कॉपीरइटERIC SUTHERLANDदूसरे फैक्टरों के साथ ही नए निवेशकों की मांग के चलते भी मार्केट में तेजी देखी जा रही है. हालांकि, अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि रिकवरी धीमे और एकसमान नहीं होगी.

अमरीका में नास्डैक इंडेक्स जून में नई ऊंचाई पर पहुंच गया और यह लगातार ऊपर जा रहा है.एसएंडपी 500 महामारी के पहले के रिकॉर्ड से महज 5 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा है. दूसरी ओर, डाओ जोंस तकरीबन 10 फीसदी नीचे बना हुआ है.हालांकि, कुछ निवेशक पेनी स्टॉक्स (सस्ते शेयरों) में पैसा लगाने को तरजीह दे रहे हैं, लेकिन कई निवेशक एमेजॉन और एयरलाइंस जैसे नामचीन शेयरों में पैसा लगा रहे हैं. डेटाट्रेक रिसर्च के को-फाउंडर निक कोलास कहते हैं कि इसकी वजह यह है कि निवेशकों को लग रहा है कि जब भी रिकवरी होगी ये स्टॉक्स सबसे तेजी से वापसी करेंगे.

वे कहते हैं,"नए निवेशकों की टाइमिंग जबरदस्त है, इसे चाहे आप उनकी किस्मत बोलें या स्किल कहें. उन्होंने शेयरों में तब पैसा लगाया है जब वे सबसे निचले स्तर पर मौजूद थे, जब चीजें बेहद खराब दिखाई दे रही थीं. अब इनके दाम तेजी से चढ़ना शुरू हो गए हैं."

यूपीः हाथरस, बलरामपुर के बाद भदोही में दलित लड़की से दरिंदगी, सिर कुचलकर हत्या हाथरस नहीं जा पाए राहुल और प्रियंका गांधी, एक्सप्रेस-वे से ही लौटना पड़ा वापस IAS बनने का सपना लेकिन फीस जमा करने के नहीं पैसे, सोनू ने ऐसे की मदद

लेकिन, फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद मार्केट में आई तेजी के मुकाबले इस बार शेयरों ने ज्यादा तेज रफ्तार से वापसी की है और इसने नए-नवेले निवेशकों के उठाए जा रहे जोखिम को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं.फाइनेंशियल मीडिया में इन निवेशकों की मौजूदगी की तुलना 1990 के दशक में तथाकथित डे ट्रेडिंग (एक ही दिन में शेयर को खरीदना और उसे बेच देना) में आए उछाल से की जा रही है. इसे आज डॉटकॉम के बुलबुले के फूटने की चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.

अरबपति हेज फंड निवेशक लियोन कूपरमैन ने जून में एक इंटरव्यू में कहा था,"ये बेवकूफी वाले काम कर रहे हैं और मेरी राय में इनको अंत में नुकसान उठाने पड़ेंगे."इमेज कॉपीरइटTOM PRISCOTTलेकिन, मिल्स जैसे लोगों के लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है क्योंकि ये लोग महामारी के दौर में बस अपना टाइम पास करने के लिए स्टॉक ट्रेडिंग कर रहे हैं.

ये चेतावनी उन लोगों के लिए ज्यादा चिंता वाली है जिन्होंने भारी पूंजी इसमें लगाई है और जिन्हें सबकुछ गंवाना पड़ सकता है.पिछले महीने 20 साल के एक निवेशक की उम्मीदों को इतना बड़ा झटका लगा कि उसने आत्महत्या कर ली. ये निवेशक रॉबिनहुड ब्रोकर के जरिए ट्रेडिंग करता था.

इस मामले ने तूल पकड़ लिया और इसी हफ्ते रॉबिनहुड को कहना पड़ा कि वह यूके में अपने लॉन्च को अनिश्चितकाल के लिए टाल रहा है.'मुझे कोई आइडिया नहीं था'नौसिखिए निवेशकों के मार्केट में कूदने का मामला केवल यूएस तक सीमित नहीं है. 28 साल के टॉम प्रिसकॉट यूके के हैं और फिलहाल स्पेन की राजधानी मैड्रिड में एक अमरीकी सॉफ्टेवयर कंपनी में काम करते हैं.

वे कहते हैं,"मैं अपने फ्लैट में कैद हो गया था. मैं अपनी आमदनी बढ़ाने के बारे में सोच रहा था. मेरे कुछ दोस्तों ने बताया कि शेयरों के दाम अभी बेहद कम चल रहे हैं."इमेज कॉपीरइटGetty Imagesउन्होंने घंटों ट्रेडिंग सीखने के ट्यूटोरियल्स पर लगाए, लेकिन जब उन्होंने पैसे लगाए तो चंद मिनटों में ही अपने हाथ जला बैठे.

वे बताते हैं,"मैंने 100 यूरो से शुरुआत की थी. मैं शेयरों के भाव ऊपर-नीचे होने के टिकर चलते देखकर काफी उत्साहित था."उन्होंने 16 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर तेल में पैसा लगाया था. उन्हें लग रहा था कि कीमतें हर हालत में ऊपर जाएंगी. लेकिन, तकरीबन तत्काल दाम गिरकर 14 डॉलर पर आ गया.

रवि किशन की Y प्लस सुरक्षा पर यूजर्स बोले- आपको मिल गई पर महिलाओं का क्या? राहुल का मार्च हाथरस पर इंसाफ के लिए है? रोहित सरदाना के साथ देखें दंगल मोदी सरकार के लिए एक साथ 4 अच्छी खबरें, पटरी पर लौटने लगी इकोनॉमी!

वे कहते हैं,"मेरे पास इस नुकसान की भरपाई करने के लिए पैसा नहीं था. ऐसे में मेरी पोजिशन खत्म हो गई. मुझे पता ही नहीं चला कि आखिर हुआ क्या.""मुझे लगा कि मैं बैरल खरीद रहा हूं, लेकिन ऐसा नहीं था. मैं उधार ले रहा था. मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार इतनी तेजी से 100 यूरो गंवाए थे."

'मूर्ख नहीं हूं'इमेज कॉपीरइटKelly Millsमिल्स कहती हैं कि वे मौजूदा ट्रेडिंग गतिविधि कयासबाजी से बढ़कर है.मिसाल के तौर पर, एक ड्रोन स्टॉक को वे फॉलो कर रही थीं. तभी कंपनी के फाउंडर की बेटी का एक वीडियो सामने आया जिससे यह लगा कि उनकी कंपनी का समझौता एमेजॉन के साथ हो गया है और शेयर तेजी से ऊपर चला गया. लेकिन, बाद में खबर आई कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है, और फिर शेयर नीचे आ गया.

लेकिन, मिल्स गिरावट आने से पहले ही अपनी होल्डिंग को बेच चुकी थीं. उन्होंने इस स्टॉक में 5 डॉलर लगाए थे. इस निवेश पर उन्होंने करीब 100 डॉलर कमा लिए थे.वे कहती हैं,"मैं मूर्ख नहीं हूं. मैं यह मानकर चल रही थी कि मुझे यह पैसा वापस नहीं मिलेगा और अगर मुझे कुछ कमाई हो गई या बिना नुकसान के भी मैं इससे निकल गई तो कोई बुरी बात नहीं होगी.

और पढो: BBC News Hindi »

राहुल का मार्च हाथरस पर इंसाफ के लिए है? रोहित सरदाना के साथ देखें दंगल

हाथरस की बेटी के नाम पर आज राजनीति का शक्ति प्रदर्शन हुआ. कांग्रेस सांसद और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली से हाथरस की ओर निकले थे लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें वहां जाने नहीं दिया. पुलिस के साथ कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की जमकर झड़प हुई है, तो इस बीच हाथरस के जवाब में बीजेपी की ओर से राजस्थान के बारां में नाबालिग बहनों के साथ हुए गैंगरेप का मामला उछाला जा रहा है. तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दलील है कि दोनों मामलों की तुलना नहीं कर सकते. देखें दंगल.

People are following the rules of share market: 'Invest in share market when recession in market' Thinking of milking profit in the current uncertain market. But mostly are losing instead.

वुहान में कोरोना से ठीक हुए 90 फीसद मरीजों के फेफड़ों में खराबी’बीमारी से ठीक हुए लोग छह मिनट की अवधि में 400 मीटर ही चल सके जबकि स्वस्थ लोग इस दौरान 500 मीटर की दूरी तय कर सकते हैं

अहमदाबाद में कोरोना हॉस्पिटल में आग लगी, 8 मरीज़ों की मौतगुजरात के अहमदाबाद शहर में कोरोना मरीज़ों के लिए निर्धारित एक अस्पताल में आग लगने की एक घटना में 8 मरीज़ों की मौत हो गई है. EMERGENCY से भी बदतर LOCKDOWN. ..20 लाख करोड का जुमला पैकेज...फैलता हुआ कोरोना...गिरती हुई GDP....एतिहासिक बेरोजगारी...तडपते हुए गरीब मजदूर और किसान,,,चरमराती हुई ECONOMY....और..मन की बात ... मोदी जी आधुनिक भारत के भस्मासुर बन चुके है..... वैसे मीड़िया के अनुसार आज से नया युग भी शुरू हुआ है। विनम्र श्रद्धांजलि🙏

क्यों सवालों के घेरे में है कोरोना रोकने में तेलंगाना की ‘सफलता’?तेलंगाना में जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में नए केस की संख्या राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ी, लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह तक यह थमती दिखाई देने लगी. 2 अगस्त तक तेलंगाना में हर 23 दिनों में केस दोगुने हो रहे थे, जो 21 दिनों के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा था. दल्लो जहां का चड़ रहा वहां का दिखाया? यूपी में फर्जी case nikal ke farji recovery ho rahi 2 din me....dalle nhi बोलेगें...kyuki paisa milega

वुहान में ठीक हुए कोरोना मरीजों में 90% के फेफड़े खराबः रिपोर्ट - Coronavirus AajTakचीन के वुहान शहर में जितने भी मरीज कोरोना वायरस से ठीक हुए उनमें से ज्यादातर के फेफड़े बुरी हालत में हैं. यही नहीं रिकवर हुए Euthanasia ends suffering. Bharat ka b kuch bata do godimedia आजतक अरे भैया कहाँ चाईना का घुंघुना बीज रहे हो। बड़ा हड्डी खोर चेनेल है भाई

श्रीलंका : कोरोना के बावजूद आम चुनाव में जमकर हुआ मतदान, जीत सकते हैं राजपक्षेश्रीलंका : कोरोना के बावजूद आम चुनाव में जमकर हुआ मतदान, जीत सकते हैं राजपक्षे SriLankaElections2020 Coronavirus MahindaRajapaksa कोई जीते क्या मतलब, हां......जीतने वाला ओली जैसा नहीं होना चाहिए, जो केवल चीन के गोद में बैठ कर भारत से खेले ? ये उनकी ईमादारी है, यहां तो भाजपा गंदी मानसिकता वाली पार्टी । चुनाव को ही कोरोना के नाम पर हज़म करना चाहती है जो कि इसकी ये मंशा कभी पूरी नही होगी ।

सितंबर के आखिर तक अमेरिका में कोरोना से हो सकती हैं दो लाख मौतें: मेटलाइफमेटलाइफ ने बृहस्पतिवार को आशंका जताई है कि यहां सितंबर के आखिरी तक मृतकों की संख्या बढ़कर दो लाख से अधिक हो जाएगी।