कोरोना वायरस के ज़ख़्म को छुपा रहा है चीन? दिलचस्प हैं ये तथ्य

ALERT- कोरोना वायरस के ज़ख़्म को छुपा रहा है चीन? दिलचस्प हैं ये तथ्य

08-04-2020 09:51:00

ALERT- कोरोना वायरस के ज़ख़्म को छुपा रहा है चीन? दिलचस्प हैं ये तथ्य

दुनिया के सामने कोई भी आधिकारिक आँकड़ा रखने के मामले में चीन काफ़ी बदनाम रहा है.

11: 20 IST को अपडेट किया गयाप्रांतीय स्तर के कुछ अधिकारियों को ग़लत जीडीपी आँकड़े फाइल करने के आरोप में सार्वजनिक तौर पर सज़ा दी गई.कुछ अनुमानों के मुताबिक़ चीन की असल आर्थिक विकास दर उसके तय किए गए लक्ष्य की आधी है. बीते सालों में कुछ स्वतंत्र विश्लेषणों में प्रांतीय स्तर पर जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर दावा किया गया कि आधिकारिक आँकड़ों की तुलना में चीन की जीडीपी बेहद कम है.

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अगर चीन अपनी विकास दर को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रह सकता है तो यह कहना मुश्किल नहीं होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी वो ऐसा ही बर्ताव कर सकता है.इमेज कॉपीरइटछुपानेकी कोशिशहाल ही में हूबे प्रांत, जहां से कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुई, के शीर्ष कम्युनिस्ट पार्टी नेता यिंग यॉन्ग ने अधिकारियों से कहा कि वो चूक और छिपाव को रोकें.

हम जानते हैं कि दिसंबर 2019 में हूबे प्रांत के वुहान शहर से कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने की शुरुआत हुई. लेकिन यह कोई रहस्य नहीं है कि चीन ने वाक़ई अपने अस्तित्व, इसकी सीमा और शुरुआती अवस्था में इसकी गंभीरता को छुपाया.वुहान के मेयर काफ़ी पहले यह मान चुके हैं कि जनवरी की शुरुआत में जब यहां संक्रमण के क़रीब 100 मामले थे और 23 जनवरी को जब पूरे शहर में लॉकडाउन की घोषणा की गई थी, इस बीच ज़रूरी एक्शन में कमी रह गई.

चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को 31 दिसंबर को कोरोना वायरस की जानकारी दी. लेकिन हम यह भी जानते हैं कि लगभग उसी वक़्त एक डॉक्टर जिन्होंने अपने सहकर्मियों को सार्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण को लेकर आगाह किया था उनसे पुलिस ने पूछताछ भी की थी.डॉ. ली वेनलियांग और दूसरे लोगों को चुप करा दिया गया. कुछ दिनों बाद डॉ. ली की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई.

कुछ सप्ताह पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग वुहान पहुंचे. कोरोना संक्रमण फैलने के बाद से यह उनका पहला दौरा था. हूबे प्रांत को छोड़कर चीन में कहीं भी संक्रमण के नए मामले नहीं थे.प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाकोरोना: किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं स्वास्थ्यकर्मी

हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के प्रोफ़ेसर बेन काउलिंग के मुताबिक़, उस वक़्त जो आँकड़े दिए गए थे वो स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित थे.लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें 'रिपोर्ट्स' शब्द ही काफ़ी अहम है.जिस वक़्त राष्ट्रपति शी जिनपिंग हूबे का दौरा करने वाले थे, जापान की न्यूज़ एजेंसी क्योडो न्यूज़ ने एक डॉक्टर के हवाले ले लिखा कि उन्हें अधिकारियों ने सख़्त निर्देश दिए हैं कि संक्रमण के जो भी नए मामले आ रहे हैं उन्हें आधिकारिक आँकड़ों से अलग रखा जाए.

ब्लूमबर्ग की कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अमरीकी सरकार में ये बात थोड़ी और आगे बढ़ गई.रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट हाउस को सौंपी गई आधिकारिक ख़ुफिया रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि चीन की ओर से जारी आंकड़े जानबूझकर कम बताए गए हैं और ये आँकड़े फ़र्ज़ी हैं.

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अब सवाल उठता है कि महामारी को दबाने का मक़सद क्या है? दरअसल, ये अलग-अलग हो सकते हैं- दूसरे जन स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए इसे जनता से छुपाना, किसी तरह की अफ़रातफ़री रोकना या शायद इस उम्मीद में आँकड़े दबाना कि ये मामला बढ़ेगा नहीं और पूरी तरह इसका पता भी किसी को नहीं चल पाएगा.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाकोरोनावायरस: ग्रीस में शरणार्थी शिविरों में कैसे रह रहे हैं लोगसंक्रमण केआँकड़ोंपर सवालचीन ने जो आँकड़े रिपोर्ट किए हैं उन्हें वास्तविक और वैध मान भी लिया जाए लेकिन अतीत में जिस तरह चीन ने लगातार आँकड़ों में हेरफेर किए हैं उससे इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

जनवरी से मार्च की शुरुआत तक नेशनल हेल्थ कमिशन ने कोविड-19 को लेकर सात अलग-अलग परिभाषाएं जारी की गईं.प्रो. काउलिंग कहते हैं कि शुरुआती जांच में सिर्फ़ गंभीर निमोनिया वाले उन मामलों पर ही विशेष ध्यान दिया गया जिनका जुड़ाव वुहान से था, जहां कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत हुई.

वो अनुमान लगाते हैं कि कोरोना संक्रमण के लिए बाद में जो परिभाषाएं दी गईं अगर वो पहले लागू की जातीं तो चीन में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 232000 के आसपास होती, यानी मौजूदा आँकड़ों से तीन गुना ज़्यादा.उन्होंने कहा, ''हमें लगता है कि शुरुआती दौर में संक्रमण के मामलों को ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया गया. फिर ऐसे भी मामले आते हैं जिनमें कोई लक्षण नज़र नहीं आते.''

बीते सप्ताह तक चीन ने ऐसे मामलों को अपनी लिस्ट में शामिल नहीं किया जबकि उनमें कोरोना संक्रमण की पुष्टि भी हुई.प्रो. काउलिंग ने कहा कि जापान में डायमंड प्रिंसेस क्रूज़ जहाज में सवार जिन लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया उनमें से क़रीब 20 फ़ीसदी में किसी तरह के लक्षण नहीं दिखे थे.

इमेज कॉपीरइटGetty Imagesराष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके आसपास के लोगों ने पहले से ही अपनी प्रतिष्ठा और चीन की स्थिति को सुधारने की कोशिशें शुरू कर दी हैं.बीते सप्ताह चीन की राजनीति के दूसरे प्रमुख नेता माने जाने वाले ली केकियांग ने कहा, ''सभी इलाक़ों को खुली और पारदर्शी सूचना पर ज़ोर देना चाहिए.''

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डॉ. ली और उनके साथ के दूसरे लोग जिन्हें शुरुआत में सज़ा दी गई थी और उनकी मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई, उन्हें बाद में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय शहीद घोषित किया गया.वुहान में लॉकडाउन के कुछ हफ़्ते बाद सरकारी मीडिया ने दावा किया कि राष्ट्रपति जिनपिंग ने जनवरी के पहले सप्ताह में ख़ुद बैठकें ली हैं. हालांकि इस बारे में पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

चीन ने इटली जैसे सबसे अधिक प्रभावित देश को मेडिकल सहायता और दवाइयां भेजीं तो साथ ही सर्बिया जैसे ज़रूरतमंद सहयोगी की भी मदद की.चीनी सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस के इलाज को लेकर वैक्सीन की टेस्टिंग के लिए ह्यूमन ट्रायल का पहला चरण कुछ ही हफ़्तों में पूरा कर लिया गया है.

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It is a Chinese virus which was spreaded with oblique motive.I exposed Corruption in CBI India.In2019 February I intimated public servant involvement angle in Pulwama attack.Covid19 was spreaded with an eye on U.S election. पूर्ण रूप से सत्य Bhai Chinese fact na khulne de rahe 😐 आपके न्यूज चैनल को अब पता चला है क्या china के बारे मैं , तब से कहां सो रहे थे आप लोग

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