कोरोना वायरस: आर्थिक के साथ-साथ जलवायु संकट की भी होगी चुनौती

कोरोना वायरस: आर्थिक के साथ-साथ जलवायु संकट की भी होगी चुनौती

27-04-2020 18:41:00

कोरोना वायरस: आर्थिक के साथ-साथ जलवायु संकट की भी होगी चुनौती

संक्रमण और लॉकडाउन के बाद हर किसी की नज़र अर्थव्यवस्था को संभालने पर होगी लेकिन इसमें जलवायु संकट का मसला जोड़ना जरूरी है.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटGetty Imagesकोविड-19 से उपजे आर्थिक संकट के हल के साथ ही जलवायु परिवर्तन से लड़ने के तरीकों को जोड़ना भी ज़रूरी है. आने वाले हफ्ते में ब्रिटेन दूसरे देशों की सरकारों से यह कहने वाली है.क़रीब 30 देशों के पर्यावरण मंत्री दो दिन चलने वाली ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में जुटेंगे. इस कॉन्फ्रेंस में ग्रीन हाउस गैस में कटौती को लेकर चर्चा होनी है.

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इस सम्मेलन को पीट्सबर्ग क्लाइमेट डायलॉग नाम दिया गया है. यह सम्मेलन इस बात पर केंद्रित होगा कि कोरोना वायरस महामारी के समाप्त होने के बाद ग्रीन इकॉनोमिक रिकवरी को कैसे व्यवस्थित किया जाए.इसके साथ ही इस ऑनलाइन सम्मेलन में COP26 के मुद्दे पर भी चर्चा होगी. कोरोना वायरस महामारी के कारण नवंबर महीने में ग्लासगो में होने वाले COP26 को फिलहाल टाल दिया गया है. जिसके लिए अभी कोई आगामी तारीख़ तय नहीं की गई है.

COP26 में कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते पर चर्चा होनी थी.ब्रिटेन के क्लाइमेट सेक्रेटरी और COP26 के अध्यक्ष आलोक शर्मा ने बताया,"मैं क्लाइमेट को लेकर किए जा रहे महत्वाकांक्षी प्रयासों के प्रति पूरी तरह से समर्पित हूं ताकि हम पेरिस समझौते को पूरा कर सकें. (धरती के तापमान को 2 डिग्री सेंटीग्रेड से कम रखना)"

उन्होंने कहा,"पूरी दुनिया को मिलकर काम करने की ज़रूरत है और यह कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए भी है ताकि एक स्वस्थ पर्यावरण के साथ और लचीले तरीक़े से इससे उबर सकें जहां कोई भी पिछड़ा हुआ नहीं हो."उन्होंने कहा कि पीट्सबर्ग क्लाइमेट डायलॉग में जब हम सभी एक साथ जुटेंगे तो इस बात पर चर्चा करेंगे कि जो सपने हम देख रहे हैं उन्हें हक़ीकत में कैसे अंजाम दिया जाए.

इस अनौपचारिक कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी ब्रिटेन और जर्मनी कर रहे हैं.कई विकसित और विकासशील देश भी इसमें शामिल होंगे. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश भी इसमें हिस्सा लेंगे. सिविल सोसायटी और उद्योग जगत के भी कुछ लोग इसमें भाग लेंगे. पिछले सप्ताह महासचिव गुटरेश ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन कोरोना वायरस से कहीं अधिक गहरी समस्या है.

हालांकि कुछ कैंपेन समूहों ने इस मीटिंग को लेकर संदेह जताया है. कार्बन उत्सर्जन को लेकर जब से पेरिस समझौता है, यह ग़ौर करने वाली बात है कि कार्बन डाईआक्साइड का स्तर बढ़ा ही है- हालांकि यहां इस बात का ज़िक्र करना अहम है कि कोरोना वायरस के कारण दुनिया के अधिकांश देशों में लॉकडाउन है जिसकी वजह से पार्यावरण कुछ साफ़ ज़रूर हुआ है और कई जगहों पर प्रदूषण में कमी आई है.

इमेज कॉपीरइटGetty Imagesचैरिटी संस्था केयर ने इस बात को लेकर चेतावनी जारी की है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए विकसित देशों की तरफ़ से विकासशील देशों को जो वित्तीय सहायता दी जानी थी उसमें साल 2018 में कमी आयी है.चैरिटी संस्था केयर के स्वेन हार्मेलिंग के मुताबिक़, अगर सरकारें अपने आर्थिक प्रोत्साहन और सहायता को जारी रखने में विफल होती है तो जलवायु संकट से पैदा हुई आर्थिक, सामाजिक और इकॉलॉजिक समस्याएं हमारे ग्रह को और बड़े संकट में डाल देगा.

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यूरोपीय संघ पहले से ही इसके प्रति काफी गंभीर है. कमीशन के ग्रीन डील चीफ़ फ्रांस टिमरमांस के मुताबिक़, कोविड 19 महामारी के समाप्त होने के बाद एक भी डॉलर जो हम ख़र्च करेंगे वो पर्यावरण और डिजीटल बदलाव से जुड़ा होगा.उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा,"यूरोपीय ग्रीन डील, विकास की रणनीति और जीत की रणनीति है,"

उन्होंने लिखा, "यह कोई लक्ज़री नहीं है जिसे कोई और आपदा आने पर हम भुला दें. यह यूरोप के भविष्य के लिए ज़रूरी है."इस बीच चीन अपने मौजूदा विकास के पथ पर ही बढ़ता दिख रहा है और दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वो जीवाश्म ईंधन से जुड़े फर्म्स की भलाई के लिए आगे बढ़कर काम करेंगे.

यहां तक की यूरोप में भी सभी इस मत के पक्ष में नहीं दिखते.इमेज कॉपीरइटGetty Imagesजर्मनी के सीडीयू पार्टी के मार्कस पाइपर ने फ़ोकस नाम की एक मैगज़ीन को दिए साक्षात्कार में कहा कि स्वच्छ प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए यूरोपीय संघ की व्यापक योजना अब संभव नहीं होगी.

उन्होंने कहा, ग्रीन डील किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक शीर्ष चुनौती थी. और अब कोरोना महामारी के बाद आर्थिक दृष्टि के मद्देनज़र कहीं से व्यवहारिक नज़र नहीं आती.लेकिन ब्रिटेन के क्लाइमेट इकोनॉमिस्ट लॉर्ड स्टर्न ने बीबीसी से कहा, मौजूदा समय में प्राथमिकता कोरोना वायरस से निपटना है- लेकिन हमें भविष्य को भी बेहतर बनाने के लिए भी सोचना है.

उन्होंने कहा, टिमरमांस सही हैं और ट्रंप ग़लत. हमें सिर्फ़ उन फ़र्म्स को सहयोग देना चाहिए जो पर्यावरण के संकट से निपटने में मदद करने वाली है. और पढो: BBC News Hindi »

Yes lockdown ko aage badaya jaye हर साल पर्यावरण दिवस में 10 दिन का लॉक डाउन समग्र विश्व मे होना चाहिए जलवायु संकट से इपटने के लिए कुछ हद तक सफलता मिल सकती है देश के मीडिया बंधुओं से एक निवेदन है कि छोटे दुकानदारों के दो माह के किराए को माफ कर देने का आदेश अगर सरकार, मकान मालिकों को जारी कर देती तो बड़ी कृपा होती.. लोकडौन में घर का खर्च चलाना मुश्किल है, तो किराया कहाँ से दे👏👏👏👏

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