कोरोनिल: योग गुरु रामदेव की ‘कोरोना की दवाई’ का सच

कोरोनिल: योग गुरु रामदेव की पतंजलि की ‘कोरोना की दवाई’ का सच

02-07-2020 05:21:00

कोरोनिल: योग गुरु रामदेव की पतंजलि की ‘कोरोना की दवाई’ का सच

योग गुरू रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद कंपनी ने ऐसी दवाएँ बनाने का दावा किया था जिनसे कोरोना से होने वाली बीमारी ठीक भी हो जाती है और जिन्हें नहीं है उन्हें भी बचा लेती है. उसके दावों पर सवाल उठे, वो कुछ बातों से पलट भी चुकी है.

कौन-कौन से हैं सवालपहला ये कि इस दावे का क्या प्रमाण है कि कोरोना के जिन मरीज़ों को पतंजलि की आयुर्वेदिक औषधियाँ दी गईं उन सभी औषधियों की मात्रा हर लिहाज़ से बराबर थी.जानकारों के मुताबिक़ जब भी किसी दवा का क्लीनिकल ट्रायल होता है तो उसमें दवा की मात्रा में परिवर्तन नहीं किया जा सकता.

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मिसाल के तौर पर अगर किसी मरीज़ पर पैरासिटामॉल का ट्रायल बुख़ार उतारने के लिए हो रहा है तो सभी डोज़ एक सी होनी चाहिए, चाहे दवा में इसकी मात्रा 10 एमजी, 12 एमजी या 15 एमजी हो. फिर पता चलता है कि आख़िर बुखार किस डोज़ के लगातार लेने पर कम हुआ.चूँकि पतंजलि का कहना है कि उनकी औषधि आयुर्वेदिक है तो इन औषधियों का फ़ॉर्म्युलेशन भी बराबर मात्रा में होना चाहिए.

इसी से जुड़ा दूसरा सवाल है कि क्या कोविड-19 के 95 मरीज़ों पर किए गए ट्रायल के आधार पर ये घोषणा करना सही था कि ये 'कोरोना का इलाज है' और आनन-फ़ानन में ही 130 करोड़ से ज़्यादा आबादी वाले देश में इसे लॉंच भी कर दिया गया.इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के पूर्व प्रमुख एनआरके गांगुली के मुताबिक़,"क्लीनिकल ट्रायल एक लंबी प्रक्रिया होती है और इस पर न सिर्फ़ दवाइयों के भविष्य का बल्कि उन मरीज़ों का भी भविष्य टिका होता है जिन पर ह्यूमन ट्रायल होते हैं."

ये भी पढ़ें:माली का वो इमाम जिसने हिला रखी है देश की सत्ता, कोरोना से भी नहीं डरपतंजलि रिसर्च सेंटर से अभी तक इस बात का जवाब नहीं मिल सका है कि सिर्फ़ 25 दिन के भीतर और सिर्फ़ 95 कोरोना मरीज़ों पर किए गए ट्रायल के आधार पर 'कोरोनिल टैबलेट' और 'श्वासारि वटी' नाम की दो दवाओं को कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का 'आयुर्वेदिक इलाज' बताकर लॉन्च क्यों किया गया.

जबकि पतंजलि ने सीटीआरआई (CTRI) वेबसाइट पर रजिस्टर किए गए अपने फ़ॉर्म (CTRI/2020/05/025273) में लिख कर दिया था कि क्लीनिकल ट्रायल की अवधि दो महीने की होगी.तीसरा सवाल उन हालातों पर हैं जिन पर कोरोना के मरीज़ों पर ट्रायल किए गए. पतंजलि का कहना है कि सभी 95 ट्रायल जयपुर के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की देख रेख में हुए.

आईसीएमआर की सीटीआरआई (CTRI) वेबसाइट पर रजिस्टर करते समय पतंजलि आयुर्वेद ने कहा था वह अपने क्लीनिकल ट्रायल में कोरोना के 'मॉडरेटली सिम्पटोमैटिक' मरीज़ों को शामिल करेंगे, लेकिन ये नहीं किया गया.'कोरोनिल' दवा के ट्रायल से जुड़े एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न लिए जाने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी को बताया कि"ट्रायल में शामिल किए गए मरीज़ों की उम्र 35-45 थी और ज़्यादातर एसिम्पटोमैटिक (बिना लक्षण वाले) थे या उनमें बेहद हल्के सिम्प्टम थे."

इमेज कॉपीरइटMONEY SHARMAपतंजलि ने ट्रायल के बारे में क्यों नहीं बताया?ग़ौर करने वाली एक और बात ये भी है कि इस ट्रायल में उन मरीज़ों को शामिल नहीं किया गया जिन्हें डायबिटीज़ या ब्लडप्रेशर की शिकायत रही है.ये अहम इसलिए है क्योंकि डब्लूएचओ समेत दुनिया के बड़े मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों या इनमें से एक से ग्रसित लोगों के लिए कोरोना ज़्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

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जवाब इसका भी नहीं मिल सका है कि जिन मरीज़ों पर पतंजलि के क्लीनिकल ट्रायल हुए वो पहले से कौन सी दवाएँ ले रहे थे क्योंकि कोरोना संक्रमित मरीज़ों के इलाज के लिए आईसीएमआर ने दवाओं की सूची जारी कर रखी है.ड्रग विशेषज्ञों का सवाल है कि अगर मरीज़ पहले से कोई ऐलोपैथिक दवा ले रहे थे तो फिर आयुर्वेदिक दवा के बाद किसका कितना असर हुआ ये कैसे नापा जा सकेगा.

जाने-माने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट दिनेश ठाकुर ने भी पतंजलि के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा,"इतने कम मरीज़ों के ट्रायल के आधार पर आप कोरोना के इलाज का दावा कैसे कर सकते हैं".आख़िर में सबसे अहम सवाल ये उठता है कि अगर पतंजलि रिसर्च इंस्टीच्यूट ने सीटीआरआई (CTRI) वेबसाइट पर मई महीने में रजिस्टर कर दिया था और कोरोना के मरीज़ों पर क्लीनिकल ट्रायल जारी थे तो फिर डीजीसीआई (DGCI) और आईसीएमआर (ICMR) को इस बात की जानकारी क्यों नहीं मिली कि किन मरीज़ों पर ट्रायल हुए.

भारत में कोरोना संक्रमण के सभी मामलों की लिस्ट न सिर्फ़ आईसीएमआर बल्कि राज्य के कोविड-19 नोडल अफ़सर, ज़िला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास होती है.हालाँकि पतंजलि की 'कोरोना किट' के मार्केट में लॉन्च होते ही आयुष मंत्रालय हरकत में आ गया था लेकिन इस बात पर सवाल उठने लाज़मी हैं कि आख़िर इस ट्रायल के नतीजों को लेकर पब्लिक में आने के पहले पतंजलि ने मंत्रालय की रज़ामंदी क्यों नहीं ली.

रहा सवाल किसी ऐसी दवा के ट्रायल का जो सीधे मार्केट में पहुँच सकती है तो ऐसे फ़ैसले लेने वाली संस्थानों से जुड़े लोगों को लगता है कि,"नियम-क़ानून अपनी जगह व्यवस्थित हैं और आगे भी रहेंगे".आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक वीएम कटोच ने बताया,"सीटीआरआई में ड्रग ट्रायल के लिए रजिस्टर कराने का मक़सद एक ही है, सभी प्रोटोकॉल फ़ॉलो करिए. भारत की ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ़ इंडिया यानी डीजीसीआई (DGCI) ने इसे बाध्य किया है तो ऐसा सम्भव नहीं है कि कोई इसको लाँघ सके".

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COVIDー19 ,, बाबा अपने,23,जून के ब्यान से पलटी मार गया... CheaterBabaRamdev Fraud baba this type of fraud person should be behind the bar Sarkari chor. कोरोनील दवा को सरकार से अनुमति मिल गई। पतंजलि की कोरोनील में ऋषि, 500 वैज्ञानिक,100 MD आयुर्वेदिक डॉ, 200 करोड़ का आयुर्वेद रिसर्ज सेंटर, आयुर्वेदिक संहिता, लाखों वर्ष पुराने आयुर्वेद का विश्वास है पतंजलि केवल ईंट पत्थरो की इमारत नहीं, एक वैचारिक आंदोलन है, स्वाभिमान का।

EMERGENCY से भी बदतर LOCKDOWN. ..20 लाख करोड का जुमला पैकेज...फैलता हुआ कोरोना...गिरती हुई GDP....एतिहासिक बेरोजगारी...तडपते हुए गरीब मजदूर और किसान,,,चरमराती हुई ECONOMY....और..मन की बात ... मोदी जी आधुनिक भारत के भस्मासुर बन चुके है..... भगवान वस्त्र पहन कर लोग समझते हैं कि किसी को भी बेकूफ बनाया जा सकता है। ये कोई चुनाव नहीं है बल्कि यह ज़िन्दगी की बात है।

फ़्रॉडिया बाबा। Bhaarat kya ittna gaya-guzra ho gaya k hume kisi scientists par bharosa karne k bajaaye aise chindhi-chor so called sadhu lootaru par depend rehna padega ? Businessman baba babaramdev अब तो आ गयी ना दवाई मल्टीनैशनल दवा कंपनियों के दलालों 7 दिन में जब 100% ठीक हो ही जायेगा तो क्यों न 7 दिन बाद हर पाबंदी को हटा दिया जाए वैसे भी कमाने लायक तो किसी को छोड़ा नही

Kuch Jyada Fake Raha Tha. मोदी काल से पहले रामदेव ३५ रू लीटर पेट्रोल का दावा किया था,३०० रू में गैस। अब कोरोना का दवाई का! जाहिल,गवार हैं। अंधभक्त नंबर वन। Bhagwa pehanta hu isliye kuchh log nafrat krte h... -baba ramdev इरादा इनका स्वाभाविक था कि जल्दी से ज्यादा पैसे बना लें। पर करोना वायरस पर कुछ भी तो असर नहीं करता। अगर कुछ आयुर्वेद में है जो हमारी सम्पूर्ण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए तो उसका इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है। शायद लोगों ने अब तक खरीदना शुरू भी कर दिया होगा! TweetNitinS

When Coronil effect of the virus. Then BBC will be quite from India. जो भी हो बाबा मैं डेरिंग बहुत हैं । Fraud baba तुम्हारे साथ हो वही रहा है, जो तुमने तय करा है। जब तुम्हारी ज़िन्दगी की कहानी तुम्हें ही लिखनी है, तो कोई सुंदर कहानी लिखो न! ऊपरवाला बुरी कहानी तो लिखता ही नहीं, वो अच्छी कहानी भी नहीं लिखता! कलम उसने तुम्हें ही दे दी है। लिखो अब जो चाहो!

Tumari maaa ka ghosla टी आर पी के सिवाय कुछ नहीं !!! BABAS BEFOOLING INDIANS SOME WITH GOBAR GOMOOTRA SOME HAWA HAWAI ..HOW LONG yogrishiramdev Ye ayurvedic hai koi side effects nahi. Vaccine increase your Immunity to defend. It also increase immunity to defend with prevent. क्यों बासी खबरें परोस रहे हो... क्या BBC के दिन अब इतने बुरे हो गए हें क्या?

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