कोरोना वायरस के कारण हुए चार लॉकडाउन से क्या हासिल हुआ?

कोरोना वायरस के कारण हुए चार लॉकडाउन से क्या हासिल हुआ?

28-05-2020 16:57:00

कोरोना वायरस के कारण हुए चार लॉकडाउन से क्या हासिल हुआ?

कोरोना मामलों में भारत टॉप 10 देशों में शामिल हो गया है. आरोप लग रहे हैं कि 'हिंदुस्तान में लॉकडाउन फ़ेल हो गया है.'

पूरा इंटरैक्टिव देखने के लिए अपने ब्राउज़र को अपग्रेड करेंगोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियांआंकड़े कब अपडेट किए गए28 मई 2020, 1:27 अपराह्न IST

आज तक @aajtak रेलवे ही तय करेगा निजी ट्रेनों का किराया, 2023 से पटरी पर दौड़ेंगी: रेलवे बोर्ड निजीकरण पर दिग्विजय का वार- ‘हमने चलाए गरीब रथ-ये चलाएंगे अमीर रथ, वाह मोदी जी वाह!’

'सकारात्मक नहीं नकारात्मक कामयाबी'क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर से वायरोलॉजी के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर टी जैकब जॉन मानते हैं कि आप ये नहीं कह सकते कि ये लॉकडाउन पूरी तरह से फ़ेल हो गया है, क्योंकि जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस लॉकडाउन की आर्थिक क़ीमत चुकानी होगी,"ये ज़रूर हुआ - चाहे कुछ और हुआ हो या ना हुआ हो."

"लॉकडाउन से तीन नतीजे मिलने की बात कही जा रही थी. उम्मीद थी कि इससे महामारी स्लो डाउन हो जाएगी. साथ ही लॉकडाउन के बाद के वक़्त के लिए तैयारी कर ली जाएगी. तीसरी बात कही गई थी कि लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को नुक़सान भी हो सकता है."डॉक्टर जैकब जॉन मानते हैं कि"लॉकडाउन जिस एक चीज़ में पूरी तरह कामयाब रहा है वो है सिर्फ़ अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचाने में."

साथ ही डॉक्टर जैकब जॉन कहते हैं कि,"इस बात के कोई सबूत नहीं मिलते कि भारत में संक्रमण फैलने की स्पीड कम हुई है. भारत में हर रोज़ संक्रमण के मामले पिछले दिन से ज़्यादा होते हैं और ये तेज़ी से बढ़ रहे हैं."इमेज कॉपीरइटBISHWARANJAN MISHRAलेकिन क्या घटी मृत्यु दर

मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल जब प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए तो उन्होंने लॉकडाउन की कई उपलब्धियां गिनाईं.उन्होंने दावा किया कि लॉकडाउन की वजह से भारत ने दूसरे देशों के मुक़ाबले हालात को बहुत बेहतर तरीक़े से संभाला. इससे रिकवरी रेट बढ़ा, मृत्यु दर या मौतों की संख्या बहुत कम हो गई.

लव अग्रवाल ने बताया कि मार्च में जो रिकवरी रेट क़रीब 7.1 प्रतिशत था,"वो दूसरा लॉकडाउन शुरू होने के वक़्त बढ़कर 11.42 हो गया था. वहीं तीसरा लॉकडाउन शुरू करने के समय पर बढ़कर 26.95 प्रतिशत हुआ और आज हम देख रहे हैं कि फ़ील्ड में कोशिशें करने की वजह से वो लॉकडाउन के इस मौजूदा वक़्त में बढ़कर 41.61 प्रतिशत हो चुका है."

साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया कि भारत में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों में मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम यानी क़रीब 2.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि दुनियाभर में मृत्यु दर औसतन 6.4 प्रतिशत है.स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन सब उपलब्धियों का मुख्य कारण लॉकडाउन को बताया - उन्होंने कहा कि इस दौरान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया, लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सका, साथ ही कंटेनमेंट के क़दमों के ज़रिए चेन ऑफ़ ट्रांसमिशन को कमज़ोर किया जा सका.

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लेकिन आगे की तैयारी क्या है?लेकिन डॉ जैकब जॉन सरकार के इन दावों पर सवाल उठाते हैं. वो कहते हैं कि सरकार दावे तो कर रही है लेकिन आंकड़े पेश नहीं कर रही कि उन्होंने कितने बेड तैयार कर लिए हैं, कितने वेंटिलेटर तैयार कर लिए हैं.वो कहते हैं कि मुंबई से अब भी बेड कम पड़ने की ख़बरे आ रही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में बेड हैं तो स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है.

"सरकार को बताना चाहिए कि इसके लिए उनकी क्या तैयारी है? सरकार कह रही है कि लॉकडाउन में प्लानिंग की, पर क्या प्लानिंग की है? एक नागरिक के तौर पर हमें इसमें से कोई जानकारी नहीं दी गई है."इमेज कॉपीरइटJITENDRA RATREउनका ये भी कहना है कि लॉकडाउन ने मामलों को उस तरह स्लो डाउन नहीं किया, जिस तरह हम चाहते थे.

जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि अगर दुनिया में प्रति लाख आबादी पर 69.9 केस रिपोर्ट हुए हैं, तो भारत में ये क़रीब महज़ 10.7 केस प्रति लाख रिपोर्ट हुए हैं.हालांकि, डॉक्टर जैकब जॉन कहते हैं कि मामले इसलिए कम दिख रहे हैं, क्योंकि पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो रही है.

उनका कहना है कि भारत की महज़ एक फ़ीसदी आबादी का टेस्ट हुआ है, इसलिए कोई नहीं जानता कि 99 फ़ीसदी आबादी में क्या चल रहा है, वहां हो रही मौतों को भी नहीं गिना जा रहा, क्योंकि मौतों की गिनती भी इसी एक फ़ीसदी आबादी में से की जा रही है.'मृत्यु दर कम नहीं, बल्कि बहुत ज़्यादा'

इमेज कॉपीरइटGetty Imagesडॉक्टर जैकब जॉन दावा करते हैं कि"भारत सरकार के दावों से उलट भारत की असल केस फ़ेटेलिटी 17.8% है, जो दुनिया में कहीं ज़्यादा है. वहीं भारत की इंफ़ेक्शन फ़ेटेलिटी भी 3.6 प्रतिशत है."डॉक्टर जैकब जॉन का कहना है कि केंद्र सरकार केवल फ़ेटेलिटी बताती है, वो ये नहीं बताती कि ये इंफ़ेक्शन फ़ेटेलिटी रेट है या केस फ़ेटेलिटी रेट है,"ये दोनों ही अलग हैं और केस फ़ेटेलिटी बहुत ही चिंताजनक स्तर पर है."

ये मृत्यु दर उन्होंने किस आधार पर निकाली है? इस पर डॉ जैकब जॉन ने बताया, मृत्यु दर दो तरह से देखी जाती है. एक इंफ़ेक्शन फ़ेटेलिटी, दूसरी केस फ़ेटेलिटी.मान लीजिए 1000 लोगों को इंफ़ेक्शन हुआ, तो उनमें से जितने लोगों की मौत होगी, वो इंफ़ेक्शन फ़ेटेलिटी होगी.

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कृपया ब्राउज़र अपग्रेड करेंकोरोना वायरस ट्रांसलेटरइन सभी शब्दों का क्या मतलब है?मुुख्य कहानी पर जाएंएंटीबॉडीज टेस्टऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.

बिना लक्षण वालेऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.कोरोना वायरसवायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.

कोविड-19कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.संक्रमण की तेज़ी को रोकनाट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.

फ़्लूइंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमताएक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.लड़ने में सक्षमऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.

वायरस के असर करने की अवधिकिसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधिलॉकडाउनआवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."

शुरुआतकिसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.महामारीकिसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.एकांतवासकिसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.सार्स

सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.सेल्फ-आइसोलेशनघर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.सामाजिक दूरीअन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.

आपातकालीन स्थितिकिसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."

लक्षणसंक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."टीकाऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."

वेंटीलेटरऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.विषाणुएक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.

मुख्य कहानी नीचे जारी हैट्रांसलेटरइन सभी शब्दों का क्या मतलब है?केस फ़ेटेलिटी मतलब - 1000 लोगों को इंफ़ेक्शन होता है तो उनमें से 800 ख़ुद ही ठीक हो जाते हैं. बचे हुए 200 को बीमारी होती है. तो उन 200 लोगों में से जितने लोगों की मौत होगी वो केस फ़ेटेलिटी मानी जाएगी.

भारत में कोरोना मृत्यु दर को समझाते हुए डॉक्टर जैकब जॉन कहते हैं,"कल इंफ़ेक्ट होने वाला कोई शख़्स आज नहीं मरेगा. पहले 7 से 10 दिन का इनक्यूबेशन पीरियड होता है. फिर लक्षण आते हैं. फिर व्यक्ति बहुत बीमार हो जाता है. उसके बाद उनकी मौत हो जाती है. इस सब में 3 से 4 हफ्ते का वक़्त लगता है."

"इसलिए इंफ़ेक्शन फ़ेटेलिटी और केस फ़ेटेलिटी निकालने के लिए चार या तीन हफ़्ते पहले के संक्रमित मामलों की संख्या को लिया जाता है और उन्हें आज की मौतों की संख्या से कैलकुलेट करके मृत्यु दर का प्रतिशत निकाला जाता है."इमेज कॉपीरइटSAM PANTHAKYडॉक्टर जैकब जॉन दावा करते हैं कि भारत की असल मृत्यु दर बेहद चिंताजनक और दुनिया में दूसरे देशों के मुकाबले कहीं ज़्यादा है. वो कहते हैं कि भारत की मृत्यु दर बहुत कम होनी चाहिए थी, क्योंकि यहां 80 प्रतिशत आबादी 50 साल से कम उम्र की है.

वो दावा करते हैं कि अमरीका जैसे देश में एक लाख से ज़्यादा मौतों का आंकड़ा इसलिए दिखता है, क्योंकि वो लोग सारी आबादी में हुई मौतों को गिन रहे हैं, जबकि भारत महज़ अपनी एक फ़ीसदी आबादी का टेस्ट कर उनमें ही हुई मौतों को गिन रहा है, बाकी 99 प्रतिशत आबादी में क्या चल रहा है, किसी को नहीं पता.

वो कहते हैं कि भारत सरकार इसलिए कहीं ना कहीं इस बात से लगातार इनकार कर रही है कि देश में कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है.डॉक्टर जैकब जॉन मानते हैं कि लॉकडाउन से की गई दो सकारात्मक उम्मीदें - कि महामारी धीमी हो जाए और हमें प्लानिंग के लिए वक़्त मिल जाए, दोनों ही नहीं हो पाया.

"एक देश के तौर पर हमने महामारी से निपटने में अच्छा काम नहीं किया, लेकिन हम कर सकते थे. क्योंकि भारत विकासशील देशों का लीडर है, हमारे पास स्किल है, नॉलेज है, टेलेंट है, इंटेलेक्चुअल पावर है, ख़ुद को ऑर्गेनाइज़ करने की एबिलिटी है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं किया गया."

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कुछ भी हासिल नही हुआ कहते है मौत कम हुई है लाकडाऊन मे अन लौक मे कसर पूरी होगी लगता है CAA and Lockdown are not secular to please 100 percent people of the world with contrasting views but they are bitter medicines of treatment. कुछ नहीं। और ज्यादा परेशानी हासिल हुई है। Corona hasil hua... Kuch Nahi Corona ke case bade.

ZeeNews se pooch lo poora vishleshan de denge, aur wo bhi +ve wala zeenewssepoocho Ghnta😜 Mrj badhta gya jyo jyo dawa ki. अरबों रुपये की कमाई हो गई. मुसलमानों के खिलाफ तीन कानून बना दिया. सी ए ए खिलाफ हुए लोगों को जेल भेज रहे हैं। केयर फंड महाराष्ट्र की सरकार गिराने के लिए काम आएगा। बाकी आप समझदार है

Ghareeb Mazdoor ki Maut.....yehi To Chahataa hai mera Desh..... Bc news band nahi hua aur kya hua? BBC ko ban kro Koi fayda nhi hua h gareeb pareshaan h 1.50 lakh corona case hasil huaa विकसित हो के तुम्हारा देश क्या हासिल किया ? जो नागरिक लुढ़कने खिलौने के समान धूर्त है बीबीसी Bad arrangements lead to a lot of suffering and human death heartbroken. Pandemic spread from airport to big cities later transfer to country side. Number of cases systematically increased as lockdown period extended. Understand Chronology of GujaratModel GujaratModelExposed

ठुल्लू ये मिला 45000 मौत की जगह 4500 मौत। 🔔 Baba ji ka .......... B BC Bhag... 0 बटे सन्नाटा Ye hua चार बार masterstroke देखने को मिला. Jeene ke naye tareke ki training ... or politics ka kaala chasma.... India ke honhar nurses ki kabiliyat dekne ko Mila Ab baas vaccine Ka intezar hein Baba ji ka ghanta Baba ji ka thullu.

Vhi hassil hua h jisse Abhi tk rest of world praises the way India deal with COVID19 🔔 tum office se tweet kar pa rahe ho nahi toh Boris johnson jaise hospital me hote Nafrat If you dont understand something please keep silence why do some people want covid19 to go in big explosion to destabilize india.Antinationalism is in rise

Iaund 1.5 लाख पोजिटिव अंधी और बाहरी सरकार ने पूरे देश वासियों की ज़िंदगी को मुसीबत के हाथों बेच दिया। एक फ़ायदा हुआ सरकार ने PM Carefund के नाम पर बहुत पैसा कमाया। What UK achieved in without lockdown, we not get western media मौत का तांडव नहीं हुआ क्या यह काफी नहीं डॉ. जैकब अगर मौते़ ज्यादा होती तो श्मसान,कब्रगाह या ग्रेभियार्ड में भीङ होती,है ऐसा कोई आँकङा आपके पास?दूसरा करोना के लक्षण शुरु में सर्दी,खाँसी,बुखार जैसे लगते हैं.तो जिनकी जाँच नहीं हुई वो तो कैमिस्ट से पारासिटामोल जैसी दवाई लेंगे और ज्यादा बिकेगी,पर क्या ऐसा आँकङा है,आपके पास?

Bahut कुछ हासिल हुआ,अन्य देसो की अपेक्षा भारत अच्छा ही है। Less death than United Kingdom that's what we got after four lockdown. तब विकाशील भारत तब अमेरिका- चीन संक्रमण स्पीड का रिकार्ड नही तोड़ सका पर अब लगता है हटने के तोड़ेगा । खरबपति दोस्तों के कर्जे माफ हो गए, और क्या करने की जरूरत है.. बाबा जी ठुल्लू..

Why are you ask always nonsense questions.? Dub maro salo. Ghanta... Corona ne jaisa chaha eaisa hua....None of the parties helped poor people... 400 se 150000 lakh case corona ke ho gays aur garib janta sadakh pe Police ko bahvisye ke liye teyaar ker liya हाँ, एक लाभ मोदी जी की सरकार को जरूर हुआ, पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था का ठीकरा फोड़ने के लिये कोरोना की वजह से लगाये गये लॉकडाउन से उपजी परिस्थिति का बहाना मिल गया.

भारत का हाल पश्चिमी देशों जैसा नही हुआ, आंकड़े और सच्चाई मीडिया बेहतर जानता है,बिनती है पेश करे, भारत माता की जै। Ghanta We gain 1 lakh corona positive We are now 10th position in the world in total cases We are on 4th position in total daily case Our GDP growth rate become negative All this happened due to very hardwork Of our sincere pm narendra modi ji PS: never forget effort of zee murkaz

अगर लाकडाउन न होता तो क्या हासिल होता, यह भी सापेक्ष प्रदेश प्रश्न है ् वही जो नोटबंदी से हासिल हुआ। बाबाजी का ठुल्ला ! मरीज बहुत ही कम हुए हम इस निर्णय से काफी खुश हूं चौपट अर्थव्यवस्था, प्रवासी मजदूरों की समस्या, पूंजीपतियों को मलाईदार पैकेज, और गांव गांव तक कोरोना को भ्रमण का मौका. सनातन सैट कर दिऐ! देशद्रोहियों का असली चेहरा हासिल हुआ।

Jhand बेरोज़गारी, भूख, गरीबों को पीड़ा, बेलगाम पुलिस के डंडे इसके अलावा कुछ भी नहीं lock down se jo milla h wo aap amjh nhi paa rhe 4 लॉक डॉउन से सरकार को सिर्फ तैयारी का मौका मिला। लॉक डाउन तब कामयाब होगा जब सरकार लोगो को सीधी आर्थिक सहायता प्रदान करे,कम से कम 15000 तो आम आदमी के खाते में जाना चाहीए था प्रवासी मजदूर के पलायन का कारण भी यही है। लॉक डॉउन 1 में सरकार के पास कोरोना से लडने का साधन न के बराबर था

E BBC ke Samaj me Nahi ayega kya hasil hua. Isko samajne ke liye akal chahiye Jo Nahi hai Tumhare pass. A big big big ghanta and bada wala anda पप्पू ने निर्दोष गरीब मजदूर लोगो को बहकाया और उन्हें पैदल चलने को मजबूर कर दिया। Majdur pe atyachar Berojgari aur kya hashil hoga.. जब लॉक डाउन किया गया तब कोरोना केस 500 थे और लॉक डाउन5 आते आते डेढ़ लाख से ज्यादा हो चुके हैं। 24 मार्च से लॉक डाउन के समय ये प्रवासी श्रमिक कोरोना संक्रमित नहीं थे जो इस लॉक डाउन में हो गये और अब बिभिन्न राज्यों में संक्रमित कर रहे हैं।

पहली बार प्रकृति-प्रदत्त सारे जीवनधारियों में अनुशासित जीवन जीने की वजह बनती दिखाई दि ये महामारी, जलाशयों से लेकर आकाश तक स्वच्छ प्राणवायु का आभास कराया इस महामारी ने और बेकार की व अनुपयोगी दैनिक जीवन में निरर्थक ढोई जाने वाली तथा उपयोग की जाने वाली चीजों से दूर रहना भी सिखाया । चारो लॉकडॉउन से सिर्फ हमारे गरीब श्रमिक भाइयों और बहनों की जान गई ।

यह आपके समझ से बाहर की बात है।अच्छा होगा जहाँ आप हो वहाँ के बारे में ध्यान केन्द्रित करो। पत्रकारिता के सम्बन्ध में आप शून्य हो।जरुरत है आपको उस दशमलव और शून्य की जो भारत नें पूरे विशव को दिया था । आपनें भारत से लिया नहीं इसलिये शून्य ही रह गये। Kisi v lockdown me kuchh haasil nhi hua aur hoga v nhi ,,,,,,,,..sarakaar wahi kr rhi hai jisme uska fayada ho rha hai'''’''''' jaago grahak jaago soch samajh kr vote daalo '''''''''' varna aise hi Delhi se daulatabad hote rhoge

यही के भारत विश्व मे कोरोना संक्रमित देशों मे टॉप 10 की सूची मे अपना नाम दर्ज करवाने मे सफल रहा। Babaji ka thullu. Patients bar gae aur zada लोवदा हासिल हुआ है एक मनुष्य ने भगवान से पूछा : भगवान, कोरोना के कारण मेरे जीवन से ६०दिन जो कम हो गये हैं, वो ६० दिन मेरे जीवन में जुड़ जाएंगे न? . . भगवान ने जवाब दिया : अरे मूर्ख, यही ६० दिन तो तूने जिए हैं, बाकी सारी जिंदगी तो सिर्फ भटका है।

बाबा जी का ठुल्लू। जैसी जिसकी सोच We have just postponed the disaster भुखे प्यासे और पैदल चलते मजदूरों की तबाही Bhukmari कोरोना वायरस कारण हुए 4 लौकडाउन से हासिल = जीरो बटा सन्नाटा। 0/00 Kam se kam Europe, America to nahi bana 😏 Government ki kamjor niti, bebasi, bhukhmari, aur sadko par marte majdur jo kabhi hindu hua karte they.. Aur desh ke baare mai sochti Media

बात सही लेकिन सुन बाला कोई नही कयोंकि अभी सब नेता जी को अपना घर की पडी है जनता जाये तेल लेने Rahul Gandhi ki baat man leni chahiye thi . Kisi ke kahne se koi Pappu nhi ho jata ye to apni hi soch ko dikhata hai . हासिल तो कुछ नही हुआ economy का भट्टा ज़रूर बेठ गया पात्रा Vs करोना करोना फैलत ब छुआ छूत से लेकिन पात्रा वायरस फैलत ब अज्ञानता के कुट से करोना से शरीर ठीक हो जावे है लेकिन पात्रा वायरस से मास्तिष्क बिगड़ जावे है करोना का इलाज ब संभव लेकिन पात्रा वायरस का इलाज ब असंभव तबहई तो दुनिया कहत ब सारी करोना से बोड़ पात्रा वायरस बिमारी

कोरोना अपडेटः राहुल गांधी ने कहा, 'लॉकडाउन फेल', जावड़ेकर का पलटवार - BBC Hindiराहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर का पलटवार, कहा मामले का राजनीतिकरण कर रही है कांग्रेस. इस वीडियो में बताया है कि मोरारी बापू ने राम कथा में अली मौला के प्रयोग पर सनातन धर्म के लोगो से माफी तो मांग ली है पर क्या सनातन धर्म के लोग इनको माफ कर पाएंगे। क्या मोरारी बापू जैसे लोग सनातन धर्म का अपमान करने के बाद फिर से लोगों का विश्वास जीत पाएंगे? सबकुछ लूटने के बाद ये कैसी नौटंकी? न्यायालय जगा, लेकिन बहुत देर कर दी ?

कोरोना अपडेट: लॉकडाउन पीढ़ी पर 'दशकों तक रह सकता है असर' - BBC Hindiअंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की चेतावनी, दशकों तक रहेगा युवाओं पर कोरोना का असर. चलती हुईं ट्रेन मिलीं तो 6 साल चला ली... एक बार 'शुरू' करना पडा़ तो 40 ट्रेन 'रास्ता' भटक गई गजब का मैनेजमेंट हैं !! 🤔 chinaindiaborder Dchautala We need leaders like Dushyant narendramodi अच्छा है कम से कम कुछ को पौकेट तो भरेगा न🙄

कोरोना बुलेटिन LIVE : विज्ञान और तकनीक से जीती जाएगी कोरोना से अंतिम लड़ाईकोरोना बुलेटिन LIVE : विज्ञान और तकनीक से जीती जाएगी कोरोना से अंतिम लड़ाई CoronaBulletin NITIAayog CoronaUpdate Lockdown Coronavirus drharshvardhan MoHFW_INDIA drharshvardhan MoHFW_INDIA तो फिर लोग गौमूत्र से इलाज बन्द कर दे

मुंबई और दिल्ली में कोरोना का प्रचंड वार, बदतर हो रहे हालात!देश में कोरोना के मामले 1 लाख 52 हजार के पार पहुंच गए हैं. मई महीना खत्म होना वाला है. जून में कोरोना के चरम पर होने की आशंका जताई गई है. रोजोना जिस तरह केस बढ़ रहे हैं वो इस आशंका को सच साबित करते दिख रहे हैं. सबसे बडी चुनौती मुंबई और दिल्ली के लिए है. देखें ये रिपोर्ट. GeneralPromotionToMPStudents ChouhanShivraj गुजरात के लिए मीडिया धृतराष्ट्र क्यों बन जाती है ? Gujarat ka bhi bta do dogli bikaau media madhrchodo...

अफगानिस्तान में परिवार करता रहा टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार और कोरोना से हो गई कई मौतेंअफगानिस्तान में परिवार करता रहा टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार और कोरोना से हो गई कई मौतें KarzaiH WHO Covid19 Coronavirus Covid19Death Afghanistan

देश तक: लॉकडाउन 5 में किन शहरों में जारी रहेगी पाबंदी?कोरोना से लड़ते देश ने अबतक चार लॉकडाउन का सामना किया. इस दौरान अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा कोरोना केस सामने आए हैं. अब खबर है कि सरकार ने लॉकडाउन-5 का मन बना लिया है. लॉकडाउन पांच दो हफ्तों का हो सकता है. देखें वीडियो. sardanarohit माननीय उत्तर प्रदेश में 10 लाख डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षुओं पर सरकार अन्याय कर रही है और हम पे कोई ध्यान तक नही दे रहा निवेदन है कि आप हमारी आवाज़ को सरकार तक पहुचाने में हमारी मदद करे। sardanarohit sardanarohit चुन चुन के मारो sardanarohit Rahul Gandhi Bolenge... ye bhi Modiji ne krwaya h 😢😢

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