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केरल हाईकोर्ट की दो टूक, लॉकडाउन में खाना बांटने की भी छूट नहीं, एडवाइजरी का पालन हर हाल में हो

केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि लॉकडाउन के दौरान घूमने की इजाजत नहीं दी जा सकती, चाहे वे खाना बांटने के

07-04-2020 03:05:00

केरल हाईकोर्ट की दो टूक, लॉकडाउन में खाना बांटने की भी छूट नहीं, एडवाइजरी का पालन हर हाल में हो Kerala HighCourt ExtendTheLockdown COVID19 CoronaVirusOutbreak lockdown CoronavirusOutbreakindia PMOIndia narendramodi MoHFW_INDIA

केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि लॉकडाउन के दौरान घूमने की इजाजत नहीं दी जा सकती, चाहे वे खाना बांटने के

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, अगर ऐसा कुछ किए जाने की जरूरत है तो याचिकाकर्ता राज्य सरकार की मदद कर सकते हैं। आपको हर हाल में सरकार की एडवाइजरी का पालन करना होगा। कोई भी स्वतंत्र तौर पर कुछ नहीं करना चाहिए, नहीं तो कल से हर रेस्टोरेंट खुल जाएगा।याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा था कि सामुदायिक रसोई लोगों को खाना उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। जब उन्होंने सरकार के साथ काम करने की इजाजत मांगी तो कोल्लम के जिला कलेक्टर ने अनुमति नहीं दी। वहीं, कलेक्टर की ओर से पेश अपर महाधिक्ता रंजीत थंपन ने बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई इजाजत नहीं मांगी गई।

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हाईकोर्ट ने बिल्लियों का खाना खरीदने की दी थी अनुमतिइससे पहले सोमवार को केरल उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान पालतू बिल्लियों के खाने का सामान खरीदने के लिये उसके मालिक को उसकी कार से बाहर जाने की अनुमति प्रदान कर दी थी। न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नाम्बियार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की पीठ ने तीन पालतू बिल्लियों के मालिक प्रकाश की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि पशुओं का आहार और चारा आवश्यक वस्तुओं के दायरे में आता है।

देश में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने देश की तमाम अदालतों को व्यापक रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये कार्यवाही को लेकर दिशानिर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने कहा, कोरोना से बचने को सामाजिक दूरी जरूरी है। ऐसे में वकीलों-वादियों का अदालतों में जमावड़ा नहीं होना चाहिए। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट 25 मार्च से सिर्फ आवश्यक मामलों की ही सुनवाई वीसी से कर रहा है।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने सोमवार को वीसी से अदालतों के कामकाज के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने विशेषाधिकार (संविधान के अनुच्छेद-142) का इस्तेमाल करते हुए कई निर्देश जारी किए।पीठ ने कहा, वीसी के जरिये सुनवाई के तौर तरीकों को स्थापित करने के लिए तमाम हाईकोर्ट के साथ संपर्क करने और सहयोग करने के लिए नेशनल इंफोरमेशन सेंटर और राज्य के अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। वरिष्ठ वकील विकास सिंह द्वारा लिखे गए एक पत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है।

वीसी गुणवत्ता पर कोई भी शिकायत सुनवाई के दौरान या उसके तुरंत बाद की जानी चाहिए। बाद में की गई शिकायत पर विचार नहीं होगा।कोई भी पीठासीन अधिकारी मामले में किसी पक्षकार के प्रवेश को प्रतिबंधित नहीं करेगा, जब तक कि किसी को कोई स्वास्थ्य समस्या न हो। अदालत कक्ष में प्रवेश को रोक सकता है कोर्ट।

बिना दोनों पक्षों की सहमति के कोई बयान दर्ज नहीं किया जा सकता। लिए ही बाहर क्यों न निकले हों। हाईकोर्ट ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें नेदुम्पना जिले के कोल्लम में जरूरतमंदों को खाना बांटने की इजाजत मांगी थी।

विज्ञापनहाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, अगर ऐसा कुछ किए जाने की जरूरत है तो याचिकाकर्ता राज्य सरकार की मदद कर सकते हैं। आपको हर हाल में सरकार की एडवाइजरी का पालन करना होगा। कोई भी स्वतंत्र तौर पर कुछ नहीं करना चाहिए, नहीं तो कल से हर रेस्टोरेंट खुल जाएगा।

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याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा था कि सामुदायिक रसोई लोगों को खाना उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। जब उन्होंने सरकार के साथ काम करने की इजाजत मांगी तो कोल्लम के जिला कलेक्टर ने अनुमति नहीं दी। वहीं, कलेक्टर की ओर से पेश अपर महाधिक्ता रंजीत थंपन ने बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई इजाजत नहीं मांगी गई।

हाईकोर्ट ने बिल्लियों का खाना खरीदने की दी थी अनुमतिइससे पहले सोमवार को केरल उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान पालतू बिल्लियों के खाने का सामान खरीदने के लिये उसके मालिक को उसकी कार से बाहर जाने की अनुमति प्रदान कर दी थी। न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नाम्बियार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की पीठ ने तीन पालतू बिल्लियों के मालिक प्रकाश की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि पशुओं का आहार और चारा आवश्यक वस्तुओं के दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा- जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करें, भीड़ न लगाएंदेश में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने देश की तमाम अदालतों को व्यापक रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये कार्यवाही को लेकर दिशानिर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने कहा, कोरोना से बचने को सामाजिक दूरी जरूरी है। ऐसे में वकीलों-वादियों का अदालतों में जमावड़ा नहीं होना चाहिए। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट 25 मार्च से सिर्फ आवश्यक मामलों की ही सुनवाई वीसी से कर रहा है।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने सोमवार को वीसी से अदालतों के कामकाज के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने विशेषाधिकार (संविधान के अनुच्छेद-142) का इस्तेमाल करते हुए कई निर्देश जारी किए।पीठ ने कहा, वीसी के जरिये सुनवाई के तौर तरीकों को स्थापित करने के लिए तमाम हाईकोर्ट के साथ संपर्क करने और सहयोग करने के लिए नेशनल इंफोरमेशन सेंटर और राज्य के अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। वरिष्ठ वकील विकास सिंह द्वारा लिखे गए एक पत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है।

दिए अहम दिशा- निर्देशवीसी गुणवत्ता पर कोई भी शिकायत सुनवाई के दौरान या उसके तुरंत बाद की जानी चाहिए। बाद में की गई शिकायत पर विचार नहीं होगा।कोई भी पीठासीन अधिकारी मामले में किसी पक्षकार के प्रवेश को प्रतिबंधित नहीं करेगा, जब तक कि किसी को कोई स्वास्थ्य समस्या न हो। अदालत कक्ष में प्रवेश को रोक सकता है कोर्ट।

बिना दोनों पक्षों की सहमति के कोई बयान दर्ज नहीं किया जा सकता।विज्ञापनसुप्रीम कोर्ट ने भी कहा- जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करें, भीड़ न लगाएं और पढो: Amar Ujala »

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PMOIndia narendramodi MoHFW_INDIA Kerala H.C. against the RSS field workers those are helping hungry people.

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केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की दी अनुमतिकेरल हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की दी अनुमति Kerala HighCourt Victim ... puri Jan kari do malum to ho darinde kon h

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लॉकडाउन पर सेलेब्रिटीज की आलोचना, दीपिका बोलीं- हमें बेवकूफ मत समझोदीपिका ने कहा कि लोगों को सेलिब्रिटीज को बेवकूफ समझना बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि एक्टर्स आजकल के हालात को नहीं सोच रहे हैं. सबसे बढी बेवकूफ ये खुद है। Loading next flop यह कहि की रियल नायिका नही है ,यह भी एक सम्मान इंसान है, इन्हें जब पैसे लुटाना हो तो विदेश याद आता है और जब मूर्ख बना कर कमाना हो तो हम भारतीय याद आते है । अब तक देश के आम लोगो ने इन्हें इनकी उसकी वजूद से वाकिफ करा दिया है । छपाक गया । शाहरुख आमिर सैफ गायब ।

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