केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बोले- हमारे श्रमिक भाई थोड़े अधीर हो गए थे

हमारे श्रमिक भाई थोड़े बेसब्र हो गए थे: केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

01-06-2020 06:24:00

हमारे श्रमिक भाई थोड़े बेसब्र हो गए थे: केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

सरकार ने ये बात आधिकारिक तौर पर मानी थी कि देश में 8 करोड़ प्रवासी मज़दूर हैं. उनमें से बड़ी संख्या में लोग कई दिनों तक दर-दर भटक रहें ताकि अपने घर पहुंच सकें.

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन28 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अब तक एक करोड़ प्रवासियों को घर पहुंचा दिया गया है और जब तक सबको घर नहीं पहुंचा दिया जाएगा प्रयास नहीं रुकेंगे. बशर्ते वो घर जाना चाहें.शीर्ष अदालत ने कहा है कि मज़दूरों के पंजीकरण, यातायात और उनके रहने खाने के इंतेजाम की प्रक्रिया में कई लापरवाहियां हुई हैं.

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राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के कुछ दिन बाद से ही कई जगहों पर मज़दूरों और प्रवासी श्रमिकों की भीड़ इकट्ठा हुई थी. कई जगह पुलिस को भीड़ को खदेड़ना पड़ा और कई जगह तो लाठीचार्ज तक करना पड़ा.प्रवासियों की भीड़ इकट्ठा होने की वजह सरकारी आदेश थे.इमेज कॉपीरइट

Getty ImagesImage caption28 मार्च को दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पर प्रवासियों की भीड़प्रवासियों का पलायनउदाहरण के तौर पर 28 मार्च को समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली की सीमा पर एक हज़ार बसें मज़दूरों को लेने भेजी हैं. इस आदेश के बाद कई हज़ार लोग बस अड्डों पर इकट्ठा हो गए लेकिन उन्हें बसे नहीं मिल सकीं. इससे जुड़ी ख़बरें बीबीसी में भी प्रकाशित हुईं थीं.

ये तब हुआ था जब केंद्र सरकारें और राज्य सरकारें इस बात पर ज़ोर दे रहीं थीं कि श्रमिक जहां हैं वहीं रहें.31 मार्च को केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 21064 राहत केंद्र बनाए गए हैं जिनमें छह लाख से अधिक मज़दूर रह रहे हैं और तेईस लाख मज़दूरों को खाना खिलाया गया है.

सरकार ने कहा कि प्रवासियों का जो पलायन हुआ था वो नियंत्रण में है.जब नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया कि सरकार ने मज़दूरों के खाते में सीधे पैसा क्यों नहीं भेजा गया और चरणबद्ध शटडाउन क्यों नहीं किया गया जिससे प्रवासियों का पलायन रुक सकता था तो उन्होंने कहा, 'ये उम्मीद रखना कि सरकार कुछ करेगी स्वभाविक ही है और केंद्र और राज्यों सरकारें उनके लिए जो कर सकती थीं किया गया है.'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाबिहार लौटे प्रवासी मज़दूर क्या शहर वापस जाएंगे?तमाम दावों के बावजूदरविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने पर मीडिया में दिए एक साक्षात्कार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि केंद्र सरकार ने कैंपों में रह रहे मज़दूरों का ध्यान रखने के लिए राज्य सरकारों को 11 हज़ार करोड़ रुपये दिए हैं.

बीबीसी को ऐसे बहुत से मज़दूर मिले हैं जो सरकारों के तमाम दावों के बावजूद पैदल ही अपने घरों की ओर जा रहे थे. उनमें से अधिकतर ने हमें बताया है कि या तो उन्हें कम राशन मिल रहा था या कुछ भी नहीं मिल रहा था. उन्हें भोजन पाने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा था. धूप में कई घंटे खड़े रहने के बाद एक वक्त का खाना मिल पा रहा था.

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मज़दूरों का कहना था कि ऐसे मुश्किल वक़्त में वो अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं.प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाप्रवासी मज़दूर आखिर शहरों में क्यों नहीं रुक रहे?राहत पैकेज से मददबीबीसी से बात करने वाले कई प्रवासी मज़दूरों का ये भी कहना था कि उन्हें सरकार की ओर से पहले लॉकडाउन के दौरान घोषित राहत पैकेज से मदद नहीं मिली है. विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी थी कि मज़दूरों को राहत पहुंचाने के लिए कैश ट्रांस्फर किया जाना चाहिए.

'जब सही वक़्त होगा कैश ट्रांस्फर पर फ़ैसला लिया जाएगा'26 मार्च को भारत सरकार ने बीस करोड़ महिलाओं के जन धन खातों में तीन महीनों के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह भेजने की घोषणा की थी. ये कैश ट्रांस्फ़र जून माह में खत्म हो रहा है.क्या इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा? तोमर ने कहा,"हमारी मार्च 26 की घोषणा कई घोषणाओं का संक्लन थी. जब लोगों को आलोचना करनी होती है तो वो कई एक बिंदू पकड़ लेते हैं.लोग अधिक पैसा मांग सकते हैं लेकिन जहां उनकी अपनी सरकारें हैं वहां वो कुछ नहीं देते. कांग्रेस उन राज्यों में पैसा क्यों नहीं दे रही है जहां उसकी सरकारे हैं.? अब तीसरी किश्त जाने ही वाली है. आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं, हम कोविड बीमारी से बाहर निकल रहे हैं, ऐसे में सरकार सही वक़्त पर परिस्थितियों को देखकर फ़ैसला लेगी."

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BBC Lol Gid dakh na punched thu kadvi मुझे एक बात समझमे नही आता कि झारखंड के मजदुर बम्बे, बंगलादेशी मजदुर झारखंड मे ये माजरा क्या है. मंत्री जी ने सही बोले है देश के संकट के समय सभी को धैर्य एवं समजदारी से काम लेना चाहिए था.. बेबक़ूफ़ो के बयान पर क्या राय दी जा सकती हे ? How much money you are spending during election for transportation of people?

दस कदम साथ चल कर दिखाओ ,सारे नेता ए,सी में बेढे बेढे सिर्फ टि्वटर अकाउंट पर टि्वट कर देते हैं बाहर निकल कर हकीकत देखो। जब पता चलेगा। In ko neta kisne banya Ye harami he kutte jaisi bat to karenge ....एक दो महीने और भूखे मर लेते.... Ha aur aap bhi adhir hi te desh ko lootne ke liya Irresponsible comment 1st lock down should be international flight on 1st february and later on stepwise domestic railway and buses with preannouncement upto 31st march. Then after 28 days all lockdown shall be lifted except international flight.without planning lockdown dangerous for people & economy

Ground reality is bit different as stated by the government. Most of the things are not up to the mark. Yeh byan tomar agar higway pe paidal chalne wale logo ke beech ja kar diya hota to iska haal bhi ABP news wale reporter jaisa hota.....kash aisa ho pata ek papi to kam hota सही ही नहीं 100/ सही कहा है

Marjate tab mantri ji सत्ता की चकाचौंध ने इन्हें मदमस्त कर दिया है। इन साहब को क्या पता कि जब जेब मे एक रुपया न हो और पेट भूखा हो, सामने कोरोना से मोत दिख जाए तो सब्र कहा रह जाता है इनका यही फंडा अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता मतलब देश बेचो और मौज करो!! ReleaseSafooraZargar ReleaseSafooraZargar ReleaseSafooraZargar ReleaseAzamsFamily ReleaseAzamsFamily ReleaseAzamsFamily ReleaseAzamsFamily

Kaun sa ganja marta hai ye nstomar वातानुकूलित कमरों में बैठकर ऐसा बयान आश्चर्य की बात नहीं!! Negative बिल्कुल रुकना चाहिए था। मेरे ख्याल से रुकते भी अगर उनका ध्यान रख कर लॉक डाउन किया जाता। अब उन्होंने सारी प्लानिंग की धज्जियां तो उड़ा ही दीं हैं, सब ताली/बर्तन फेल हो गया, पूरे देश से बगावती सुर सुनाई पड़ रहे। काश सब कुछ सोच समझ कर किए होते !

मंत्री जी,अपने साथियों के बारे में कुछ भी नहीं कहेंगे,इन्होंने लॉक डाउन का जानबूझकर उल्लंघन किया, आखिर दो शब्द उनके लिए भी। सर,बास्तव में इनके जेब आपके के समान पैसे नहीं थे,घर आप के जैसे खाने का सामान नहीं था,आप के समान social security नहीं था।महोदय आँखे बंद कर उनके जगह में अपने आप को महसूस करें तो इनकी परेशानी का एहशास होगा। अभी चुनाव में वक्त है, मिठास भरा आश्वाशन संभाल कर रखें, करबद्ध प्रणाम।

इसको कहते है मुं से हागना। Foolish as it was question of what to eat next day in absence of jobs and how to survive. यह पहला देश है जहां अपने लोग प्रवासी हो गए हैं आज 70 दिन के बाद इनको याद आया। इंतज़ार करना चाहिए था। अगर इतना ही दर्द था तो मजदूरों के बैंक खातों में ,10000 डाल देते। इंतज़ार की जरूर ना पड़ती। बैठ जाते आराम से कहा थे।

राज्य सरकारों ने अधीर कर दिया Ye samaj key vo thekeydar hi jinkey paidaish sey abhi tak ka samy gulcharroo mey bita hai ye mehnat majduri ky janey.lasho ki gandi rajniti kar key ye zindagi ki haqiqat kya janey चपुतिया समझ रहे हैं देश की जनता को Ye bayan desh heet mein hai...agar desh hi nhi rahega to mazdoor kya karenege...abhi desh ko bachana hai...Mazdooron ko nhi

I_am_Anil_Tyagi बेहद ग़ैर ज़िम्मेदाराना, घटिया, नृशंस, मजबूरी का मज़ाक। इसको नपुंसक बना दिया जाए कांग्रेस के पोस्टर, गाव मे घर के आंगन लीपने के लिये गोबर प्रयोग किया जाता है उसकी जगह यहाँ किसी ने ट्ट्टी कर दी और लोग उसको लीपने मे लगे है. घर में बैठ कर गला तक ठूँसने को मिलता है ना तो ऐसी ही बयानबाजी होती है।

शर्म कर तोमर, समय आ रहा है हिंदुस्तान का गरीब मजदूर तुमको बताएगा। भुला नहीं है एक भी मजदूर तुम लोगो की राजनीति। अगर तेरा परिवार बिना खाए पिए कई दिनों से रोड पे होता तो तू क्या करता। शर्म भी नहीं आती दोगलों को, कि क्या बोल रहे हैं, मजदूर अधीर हो गया था..... डाल दे मेरे को जेल में. kithne halke se bol rahe ho kuch tho sharam honi chaiye ye sarkar ka mantry hai ya koi gali ka launda jantha ne apko mantry banaya kis ke liye

आपकी तरह हर महीने उनको सेलरी नहीं न मिल रही थी तोमर साहेब. आपकी जैसी हिम्मत कहाँ से लाते? nstomar ने सही कहा, श्रमिकों को सड़क पर लाने के लिए प्रदेश सरकारें जिम्मेदार है सही कहा, श्रमिकों को सड़क पर लाने के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है ये लोग अलीशान जीवन जी रहे है। इस लिए इन्हे पता नही मजदूर कैसे जीवन जी रहे है।

बिल्कुल सही कहा है उन्होंने ये संघी अगर ख़ुद बच्चों समेत दो चार दिन भूखा प्यासा रेह ले तो इसे मालूम हो जाए सब्र क्या होता है शायद उन्हें भजन करना था, भूखे रहकर। Uncertainty always leads to anxiety Ye ek ahankari minister ka bayan hai jisko garib majdooron ke bhunkh pyas accident se marne ki koyi chinta nahin

मंत्री ज़ी को शर्म आनी चाहिए मजदूर को मजबूर किसने किया ये सब ऊन मजबूर गरीबों को किसी तरह गुनहगार मनाना चाहते हैं,ताकि मोदी की ऊतावली और अकुशलता को छूपाया जा सके। पर कब तक बचायान जा सके ऐसे को बचाते रहोगे! Fack news nhi felao BBC walo 🙏🏼🙏🏼 राज्य सरकारों की उदासीपन और अफवाह साथ ही भय इन सब के कारण मजदूर भाइयों में अफरातफरी मची। आज लॉक डाउन नहीं हुआ होता तो मृत्यु दर २० प्रतिशत के आस पास होता।

हमलोग जिस किसी पार्टी को देते वोट है.उनसे ऐसे बयान हमारे मताधिकार और मज़दूर देशवासियों का अपमान है. जिसकी थाली में छप्पन भोग सजा हो उसे किसी की भूख प्यास और बेबसी से क्या मतलब? मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि श्रमिकों को किसका इंतज़ार करना चाहिए था भूख प्यास से अपनी मौत का!!? biggest liar he is coward everything is exposed

जिसपर बीतती है वही जनता है। अधीर होकर भी ये कितने गंभीर हुए? खुद की नाकामी छुपाने के लिहाज से देखते हैं हम इस बयान को सर हम राजस्थान यूपी पंजाब दिल्ली उत्तराखंड एमपी के हजारों कामगार टूरिस्ट लोग पिछले 3 महीनों से श्रीलंका में फंसे हुए हैं हम सभी के लिए एक दो विमान कोलंबो टू जयपुर या दिल्ली के लिए भी तैयार किए जाएं हम बहुत ही मानसिक तनाव में हैं

Shameless statement...? Behad gairrjimmedar byaan . Majdooro ke Sarkar ko koi chinta he nhi dekhe . Gareeb ke barre me socha bhi nhi aur Lockdown kr deya . B/D tomar jab unke paas khane ko hi nahi bachega to kya voh marne ke liye intjar kare. Jab se pm and shah ne yeh bol diya hai tab se tuchhe neta bhi apna muh khol rahe hai Is ke pehle sab gayab the 🙏😷

मरने का इंतजार करना चाहिए था? अधीर हुए नहीं थे बल्कि उन्हें अधीर किया गया। केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिये कुछ केंद्र सरकार के विपक्षी दलों (जो गिद्ध की तरह मुर्दों के मांस नोचने के लिए तैयार रहते हैं) द्वारा उन श्रमिकों में भ्रम फैलाया गया, उन्हें राश्ते पे ला के उनकी दयनीय स्तिथि पे पुर जोर राजनीति की

bilkul sahi Maharashtra aur Delhi ki sarkaaro ne unke man me bhay paida kar diya tha किराया न देने पर घर खाली करवा लिया, पैसे खत्म हो गए परिवार को क्या खिलाएं ?लोटाने का कोई साधन नहीं, सरकारी खाने का इंतजाम केवल कागजों पर, रेल चली पर इतने डाक्युमेंट लगा दिया कि सप्ताह लगे,मजबूरी मे पैदल ही लोटाना पड़ा,मत्रीं कहते हैं इन्तजार , इन्हें भूख का एहसास नहीं, कैवल भाषण?

जैसे कोई सांप निकल जाने के बाद लकीर पीट कर अपनी खीझ मिटाता है 🙄 इस सरकार के सभी मंत्री अपने मानसिक संतुलन खो बैठे है central minister kehna chahte hain ki kam se kam 2 se 3 caroor majdoor mar jate tab unko pedal ya cycle wala rasta apnana chahiye the ऐसी परिस्थिति में अधीर होना लाजमी है,आप सुविधासंपन्न हैं आप दूसरों का दुःख भला क्यों समझेंगे।

सही कहा है, अधिर होने का नतीजा दिख भी रहा है संक्रमण मे बढ़ोतरी के रूप में। साब आप उनकी जगह होते तो क्या करते? अधीरता तो लाक डाऊन की घोषणा में दिखाई गई थी,आठ बजे,ऐट पी एम की घोषणा । खाने पीने की ध्यान रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की थी। राज्य सरकारों ने अपना काम नहीं किया, इसलिए मजदूरों को भागना पड़ा।

Stupid minister hai bakvas karate hai Yeh WAISA hi intezaar hota JAISE 15 lac k liye log aaj bhi intezaar kar rahe hai A normal observation. चाँद के उपर काला धब्बा है। कभी जिंदगी में गरीबी नहीं देखी है।तोमर को भी तमीज में रहना चाहिए। आप ३ दिन भूखे रह कर देखो फ़ोर वो तो बिना खाना खाए हफ़्ते निकाल दिए फिर धिर ओर अधीर के बात करते तो अच्छा रहता वैसे जिसके काँटा लगता ह पीर वही समझ सकता ह आपके लिए मुश्किल ह

his statement is ok.. Labors could have wait lil more for proper startup of railways buses etc. Sir ji. Vo bhukhe mr rhe the. Khane ko ek dana nahi or jeb me ek pesa nahi.. or aapko lgta h vo अधीर ho rhe the..What a shame!!! Sahi bole ... Narendra ji tomar .. aur rahi sahi kasar poori kar di rajya sarkaron ne...Jo sambhal nahi paaye unko ...

Khane ke liye paisa de deta to wo zarur rukte lakin bjp sarkar ne aesa nahi kiya usko usi ke hal pe chor diya marne ke liye.... Koe bhi lachar bebus jinda rahne ke liye har koshis karega jisse wo apne ko safe rakh sake... Majdur bhai log ne koe gulti nahi ki मोदी सरकार- केन्द्र से बेशक नहीं गिरी, पर जनता के दिल से गिर चुकी है।

The problems and miseries of workers were not anticipated and realised as impatience is always an outcome of uncertain and pressing situations Do din bhuke bita k dekho. Bakwas statement nstomar आप भी तो मध्यप्रदेश की सरकार बनाने के लिए बेसब्र थे। Bina Khana Paise 24 hours ke liye kisi aur city me rahe kar dikha dijiye aap🙏

साले ac में पड़े रह के देश के टैक्स के पैसे को अपनी मौज मस्ती में उड़ा के आम जनता को ज्ञान तो दोगे ही। चुनाव में तो तुम लोग बेपेदे जो हो जाते हो वक़्त तो ज़रूर बदलेगा सही कहा है क्यों कि मजदूरों की वजह से ही कोरोना का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है । और BJP को भी थोड़ा इन्तेज़ार कर लेना चाहिए था सरकार गिराने में और सम्मान सम्मेलन करने में इतनी जल्दी क्या थी MP

ये क्या समझेगा।जब पापा को नहीं पता कि क्या बोलना है। पगला गया हे Thoda means aap kehna chahte hai ki 2 months bhuke rehna tha.....right? Bhuke pyse mar rahe the chutiye Sahi bol Raha h majdur jaldi me the barna Modi ji bullet train lekar aane hi bale the. इनके साथ जो भी सत्ता में बैठे हैं, जन जन के साथ कोई भी रिश्ता निभाने में अ सफल हैं। मजदूर, आम जनता की दिक्कत यह समझते नहीं है। समस्याएं झेलने वाली जनता। रास्ते पर चल कर, रोज़ी रोटी को मोहताज करने वालों ने यह बात कही है।

ONLY WINDOW DRESSING .IN ELECTIONS THIS TYPE OF STATEMENTS WILL BE TREATED AS INHUMANE शर्म उनको मगर नही आती!! 😗 Bahut jald ye aur iski team v banker khojegi गोबर भक्तो ये क्या हग दिया तुम्हारे नेता ने ? IT Cell वालो जल्दी से साफ करो भूख और विना काम के तपती धूप में चल कर देखो पता चल जाएगा वेसब्री क्या होती है।

और मंत्री महोदय बेपीर हो गए थे। ऐसे लोगो को दौड़ा दौड़ा कर पीटो Gadho ki fauz hai bjp mai. साहब एक बार श्रमिक बन के देख लीजिए पता लग जायेगा सब कुछ nstomar Kab tak intzar Karna cahiye tha log Corona se Kam bhukhmari se Jada mare tab kat सही कह रहे है ये एक फॉरमलिटी है जनता को समझाने के लिए , मजदूरों के पास दूसरा ऑप्शन नहीं था जहा थे वहा रुकते तो पेट भरने के लिए तो कुछ होना।

हम इस बयान को सही देखते हैं BBC लेकिन तुम जिसके चमचे और जिस विचारधारा से हो सबको पता है । लंदन लूट के गया भारत को । और क्या सुनोगे ..? Narinder na de sare hi eho jihe hunde e धैर्यता, संयमता और सहनशीलता जैसे शब्द एवं आचरण केवल मजबूर मज़दूरों के लिए ही क्यों? मज़दूरों को विश्वास और आस्था नहीं रही आपके प्रति इसलिए वो अपने घर की लिए चल दिए।आप उन्हें भरोसा दिलाने में असफल हुजूर।काश! आप मज़दूरों का दर्द समझते।

Lockdown करते वक़्त अपनी अकल का इस्तेमाल करना चाइये था। श्रमिक अधीर नहीं हुए थे, अधीर प्रधान मंत्री हो गए थे। सब्र से काम उनको लेना था, श्रमिक को नहीं, श्रमिक तो ज्यादातर कम पढ़े लिखें, उनको इतना डरा दिया, अचानक उनकी रोज़ी और रोटी दोनों गयी। तुम लोग वो दर्द अनुभव नहीं कर सकते। अधीर किया किसने? Is Gyani Baba ko Thoda Humare Mazdur Bhaiyo ke Pas le jaya Jay, Sare Sawal-Jwab Humare Mazdur bhai ache se Karenge 😆😆

Ji , Mere jaise chhote logon me ye kum Paya jata hai ji inko jab abhi tak samjh nahi aaayya fir hame nhi lgta ye kuch rakhte bhi hai dimag me झोला वाले लोग बोल बोल कर झोला वालो को ही अधीर बता दिये, दिन के खाने का जुगाड़ नही हो रहा था, इसलिये घर गये मजदूर nstomar जी, सरकार के जूठ सुन सुन कर मरने की कगार पर पहुँच गये मजदूर। कितना इंतज़ार करते आप ही बता दीजिये, 4 महीने या कितना ? इस बयान से इनका मानसिक तनाव दिख रहा है।

बकवास कोरोना भारत मे दिन प्रतिदिन नए रिकॉर्ड बना रहा है और राजनीतिक अपना गाल पीट रही है कि हमने ये कर दिया और धीरे धीरे अमेरिका से संख्या में मुकाबला करने को तैयार हो रहा है भारत फिर भी भारत की नीति दुनिया मे सबसे अच्छी ये कौन सी नीति है इतना नोचा और घटिया सोच वाला केवल BJP के नेता या मंत्री ही हो सकता है

Is chutiye ko Khana mat ..aa Jayega samgh mei सही कहा गांजा का डोस इसने भी लिया साले सब गांजा पीके बोलते है बाप एक तड़ीपार २और ये ३ ईरानी४सब नमूने है साले देश के पीएम के साथी मोदी सरकार गांजा पीके आता है और बोलता है अब की बार गंजे डी सरकार Jo haram ka khata hai usko aisa hi lagta hai 2 महीने बिना तंखा के और अन्न के जरा आप रहकर देख

सही बात है बिल्कुल रुकना चाहिए था। हडबडी में लिए हुए फैसला अक्सर सही नही होते जब खाने पीने को कुछ नहीं मिलेगा और मकान मालिक घर खाली कायेगा तो आदमी अपने घर नहीं जाएगा तो क्या करेगा ? आपकी सरकार न तो मदद कर रही है और ना दूसरों को करने दे रही है लगता है इंसानियत ही खत्म हो चुकी है आपकी पार्टी में 2 time khana nahi milenga na to tereko malomm padenga ki bhook aadmi se kya kya kara sakti hain

कोरोना से डर तब तक ही है, जब तक कि आपके Account में पैसा और घर में खाने को है। पैसा और ख़ाना खत्म, समझो कि डर भी ख़त्म। ये 1 दिन भूखा रह के दिखा दे तो पता चल जाए इसको। तोमर जी से पूछिए, इनको पता है लॉक डाउन कब से लागू हुआ ? तू भूखा रहा के देख भिकरी ह तु तुझे तो बार पेट khana मिल रहा हहराम की रोटी तोड़ रहा है तू कभी मजदूरी बकर्के डेक तेरी tohad गट जाएगी

हां इंतजार करना चाहिए था कब उनकी भूख से मौत हो अधीर मतलब? डोनाल्ड सीखें मित्र से रक्तहीन कांती! क्रांति से बचें!! यहाँ चिंता नहीं यहाँ तो शासकों ने सनातन को ही गाँव कस्बों में भेजा! सनातन को ठिकाने लगाने आजादी पूर्व के औद्योगिक युग में पहुंचाने का मोदी शाह को राजकीय मौका! Inko do din bhukha paysa rakho tab inki aqal khulegi ....

Besharmi ki had par karna In dihadi mazdooron ki jagh apne ko rakh kar socho sarkar सनातन को ठिकाने लगाने आजादी पूर्व के औद्योगिक युग में पहुंचाने का मोदी शाह को राजकीय मौका! मन लगा उठाया लाभ!! Ya janata ki kafi mujburi nahe samjha sakte मेरा यह मानना था सरकार का लॉक डाउन करती तो 2 हफ्ता पहले आलासमेंट कर देते कि हम lockdown कर रहे हैं जिसको अपने अपने घर जाना है चले जाएं आज मजदूरों को प्रवासी भाइयों को यह हालत देने नहीं पड़ते यह मेरी राय है सरकार को इस तरह से बयान देना नहीं चाहिए

एकदम वाहियात ,मरता क्या नहीं करता, उन्हें खाने के लाले पड़े थे और यह कह रहे हैं कि कुछ दिन प्रतिक्षा कर लेते। अगर श्रमिकों को खाने पीने का प्रयाप्त सुविधा मिली होती तो कोई भी श्रमिक हड़बड़ी नहीं करता। अधीर तो हम 2014 मे थे। हमें भी इंतजार करना चाहिए था। AC room m Sir ko besabri dikh rhi h What a politics

और सरकार बधिर..... इतनी निकृष्ट सोच कृषि ग्रामीण विकास और पंचायती राज्य मंत्री की हो सकती है मैंने तो ऐसा कभी नहीं सोचा अरे साहब उन गरीबों की मजबूरी देखिए किसी को शौक नहीं कि साइकिल और पैदल ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय करें आप भी कभी हो सके तो बस 10 किलोमीटर पैदल चल कर देख लो मंदबुद्धि मंत्री😡 पहले क्यो नही बताया सर जी

बहोत ही गैरजिमेदारना और बेशर्मी भरा सोच है। Aram sa khaana mil rha ha minister ko too bol rha ha ...... Khud road pr padal chl kr dekha ga tab pata chala ga and vo bhi bina khana aur paani ka...... और हमारे मंत्री बहुत ज्यादा बेशरम हो गए हैं। भूख ? कब तक सब्र करें मजदूर महीनों तक सरकार ने सुध नहीं ली,तो क्या करते मजदूर?

Today I came to know that he is our labour minister. Jab aapko 4 din tak bhookha rakha jaye tab apne aap se pochna ke bebasi kia hoti hain... 😲🤔 Waah itni besabri se bina soche samjhe lockdown lagane k bad GauravPandhi PankajPuniaINC IYC vinodkapri ajitanjum ndtvindia PJkanojia Pun_Starr digvijaya_28 RahulGandhi priyankagandhi LambaAlka zoo_bear AltNews SatyaHindi abhisar_sharma cjwerleman

Kyu ki hmare Mantri besharm ho gye the

पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफ़ुद्दीन सोज़ की नज़रबंदी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायरजम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटने के बाद से पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जम्मू कश्मीर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ नज़रबंद हैं. उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया कि उनके पति को पीएसए के तहत घर में ही नज़रबंद करने की वजह आज तक नहीं बताई गई हैं.

साध्वी प्रज्ञा की तलाश में भोपाल में 'मिसिंग' पोस्टर, एम्स में करवा रहीं कैंसर का इलाजइन पोस्टरों को लेकर भाजपा ने सफाई दी है। पार्टी भाजपा प्रवक्ता ने सफाई देते हुए बतया कि वह कैंसर और आंखों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं। अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए पोस्टर में कहा गया है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से परेशान भाजपा सांसद गायब हैं। Wo to gomutra se theek kar liya tha isne🤔 गौमूत्र इस्तेमाल करो

यूपी के स्वास्थ्य मंत्री बोले, तबलीगी जमात की वजह से प्रदेश में बढ़े कोरोना के मामलेगोरखपुर न्यूज़: गोरखपुर के दौरे पर आए जय प्रताप सिंह ने कहा कि एक हफ्ते में यूपी में हर रोज 10 हजार जांच की जा सकेगी। दो दिन के भीतर एक लाख बेड के अस्‍पताल तैयार हो जाएंगे। Galat kaha इसमे झूठ भी क्या कहा ह, मंत्री जी। जो सत्य पहले से ही जगजाहिर है उसे यदि मंत्री जी बोल दिया तो क्या भूचाल आगया❓ सही कहा

लॉकडाउन के दौरान सरकार ने देश में लाखों प्रवासी श्रमिकों को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दियाAnalysis : लॉकडाउन के दौरान सरकार ने देश में लाखों प्रवासी श्रमिकों को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया Coronavirus COVIDー19 coronavirusinindia Lockdown5 MigrantLabourers SinghRPN SinghRPN 35 दिनों से हमारी गली सील है और प्रशासन भी नहीं सुन रहा है लगभग 80 परिवार फंसे पड़े हैं जिनको अपनी नौकरी पर जाना और परिवार चलाना है पर प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है प्रशासन को सिर्फ सोसायटी और सेक्टर के लोगों की चिंता है गांव की तरफ नहीं देख रहे हैं.मैं ग्राम नयाबास से० 15 गली न०-1 SinghRPN बिना बुद्धि,नशा विद्या।बुद्धिराम के पास विद्या तो नही है मगर सत्ता का नशा जरूर है।नोटबन्दी,gst, लोकडौन जैसे फैसले नशे में लिए गया लगते है।😁 SinghRPN सदियों से यही सिलसिला जारी है सिर पर पोटली हाथ में झोला ये दृश्य भारत बंटवारे में भी देखा अमीर गरीब की खाई न कभी पटी न कभी कोई पाट पायी ये अंतहीन सिलसिला है इसका कोई हल नहीं सदियों से कितने जतन हुए फिर भी ग़रीब कम नहीं mondaythoughts

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Weather Update: दिल्ली-NCR में जोरदार बारिश, जानिए आपके जिले में कबIndia News: Weather Update मौसम विभाग ने अभी केरल में मॉनसून (Monsoon) पहुंचने का ऐलान नहीं किया है। वहीं स्काइमेट के मुताबिक केरल में मॉनसून ने दस्तक दे दी है। इस बीच उत्तर भारत के राज्यों में (Rains in North India) शनिवार को बारिश का दौर चला, जो रविवार को भी जारी रहने की उम्मीद है। rgpv_spreading_corona_virus

कांग्रेस के सचिन अब क्या बीजेपी के लिए 'बल्लेबाज़ी' करेंगे? WHO ने कहा- कोरोना अभी बद से बदतर होगा, वैक्सीन और इम्युनिटी से भी निराशा नेपाल के पीएम ओली अयोध्या और राम पर अपने ही देश में घिरे राजस्थान: सचिन पायलट को कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री पद से हटाया योगी सरकार की 'ठोंको नीति' से इंसाफ़ मिलेगा या अपराध बढ़ेगा? कोरोना वायरस: रूस का दावा, उसने कोरोना की वैक्सीन का सफल परीक्षण किया - BBC Hindi कोरोना वायरस: महामारी रोकने के लिए दक्षिण अफ्रीका ने लगाई शराब पर पाबंदी - BBC Hindi कोरोना वायरस: अमरीका में एक दिन में 66,281 नए मामले, अकेले फ्लोरिडा में 15,300 पॉज़िटिव - BBC Hindi सचिन पायलट के साथ माने जा रहे तीन विधायकों का U-टर्न, कहा- 'हम कांग्रेस के सच्चे सिपाही' गूगल कंपनी भारत में करेगी 75 हज़ार करोड़ का निवेश ईरान ने भारत को दिया झटका, चार साल पहले मोदी ने किया था करार