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Farmerprotesthijacked, Three New Agricultural Laws

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के जरिये राजनीतिक दल संकीर्ण हितों को पूरा करने की फिराक में

मोदी सरकार के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह न तो किसी दबाव को स्वीकार करे और न ही ऐसे कोई संकेत दे कि वह चंद लोगों की मनमानी के आगे झुकने के लिए तैयार है।

12-12-2020 21:59:00

किसान आंदोलन के जरिये संकीर्ण हितों को पूरा करने की फिराक में राजनीतिक दल : पढ़ें दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त जी का लेख... FarmerProtestHijacked PMOIndia narendramodi AmitShah nstomar BJP4India Sanjaygupta0702

मोदी सरकार के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह न तो किसी दबाव को स्वीकार करे और न ही ऐसे कोई संकेत दे कि वह चंद लोगों की मनमानी के आगे झुकने के लिए तैयार है।

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसानों का आंदोलन अब जो रूप ले चुका है उससे यह नहीं लगता कि किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं। अब तो उनकी अगंभीरता का परिचय इससे भी मिल रहा है कि कुछ संगठन भीमा-कोरेगांव में हिंसा के साथ-साथ दिल्ली दंगों के आरोपितों के बचाव में उतर आए हैं और वह भी यह जानते हुए कि इन सब पर इतने गंभीर आरोप हैं कि अदालतों ने उन्हें जमानत देने से भी परहेज किया है। आखिर इस तरह के लोगों का समर्थन कर या समर्थन लेकर किसान संगठन क्या हासिल करना चाहते हैं और देश को क्या संदेश देना चाहते हैं? खेती-किसानी का दंगों और हिंसा के आरोपितों से क्या संबंध है? क्या लोकतंत्र और विरोध के अधिकार का यही अर्थ है?

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कृषि मंत्री ने किसानों से कहा- असामाजिक तत्वों को अपने आंदोलन का हिस्सा बनने का अवसर न देंयह उचित है कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जिद पर अड़े किसान संगठनों को यह नसीहत दी कि वे असामाजिक तत्वों को अपने आंदोलन का हिस्सा बनने का अवसर न दें, लेकिन यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि अब यह किसानों का आंदोलन मात्र नहीं रह गया है। चूंकि इसमें वे लोग हावी हो गए हैं जिनका लोकतंत्र और संवाद में विश्वास संदिग्ध है इसलिए आंदोलन की आड़ में एक अलग एजेंडे को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसकी पुष्टि इससे भी होती है कि गतिरोध दूर करने के लिए सरकार के हर प्रस्ताव को न केवल खारिज किया जा रहा है, बल्कि विरोध के नाम पर ऐसे तौर-तरीके अपनाने की धमकी दी जा रही है जो अलोकतांत्रिक और व्यवस्था भंग करने वाले हैं। ऐसे तौर-तरीके वैचारिक अतिवाद की निशानी हैं। यह अतिवाद एक चुनी हुई सरकार के शासन करने के अधिकार को भी स्वीकार नहीं कर पा रहा है। अब यह साफ है कि इस आंदोलन के जरिये राजनीतिक दल भी अपने संकीर्ण हितों को पूरा करने की फिराक में हैं और वामपंथी अतिवाद-नक्सलवाद से प्रेरित संगठन भी।

यह भी पढ़ेंपंजाब के किसानों का रुख विरोधाभासीइस आंदोलन को लेकर पंजाब के किसानों का रुख विचित्र और विरोधाभासी है। यह वह राज्य है जिसने हरित क्रांति में सबसे अधिक योगदान दिया और आज राजनीतिक उकसावे पर यहीं के किसान एक और हरित क्रांति में बाधक बन रहे हैं। पंजाब की कांग्रेस सरकार और अकाली दल ने न केवल राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को सड़कों पर उतारा, बल्कि वे उन्हें उकसा भी रहे हैं। पंजाब में कांट्रैक्ट फार्मिंग 2006 से ही लागू है। इससे यहां के किसान लाभान्वित भी हुए हैं और अब जब इसी व्यवस्था को नए कानूनों का अंग बनाया गया है तो केवल यह डर दिखाकर उसका विरोध किया जा रहा है कि कॉरपोरेट जगत किसानों की जमीन हथिया लेगा। यह हौवा तब खड़ा किया जा रहा है जब ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया जब किसी किसान की जमीन कॉरपोरेट ने हथिया ली हो। किसान एक तरफ कॉरपोरेट जगत का हौवा खड़ा कर रहे हैं और दूसरी तरफ उन आढ़तियों के हितों की चिंता करके सड़कों पर उतरे हुए हैं जो खुद भी व्यापारी ही हैं। कुछ किसान संगठन यह भी देखने-समझने से इन्कार कर रहे हैं कि वे उन लोगों के हाथों का खिलौना बनने का काम कर रहे हैं जो इस मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने पर तुले हुए हैं। headtopics.com

यह भी पढ़ेंनए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन मनमानी पर आमादानए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन और उनका साथ दे रहे लोग किस तरह मनमानी पर आमादा हैं, इसका प्रमाण कई दौर की वार्ता की नाकामी तो है ही, किसानों की अर्तािकक मांगें भी हैं। पहले उनका विरोध केवल नए कानूनों पर केंद्रित था, लेकिन अब उन्होंने प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रस्तावित कानून में पराली जलाने पर दंड के प्रावधान को वापस लेने और बिजली सब्सिडी में सुधार के खिलाफ भी जिद पकड़ ली है। किसान संगठन यह भी समझने के लिए तैयार नहीं कि मंडी कानून पर राज्य फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

यह भी पढ़ेंकृषि में पूंजी निवेश, नई तकनीक और उद्योगीकरण समय की मांगअपने देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी इस समय कृषि से जुड़ी हुई है। अगर इतनी बड़ी आबादी की आय नहीं बढ़ेगी और वह सशक्त नहीं होगी तो क्या देश का विकास संभव है? क्या कृषि में पूंजी निवेश, नई तकनीक और उद्योगीकरण समय की मांग नहीं है? क्या निजी निवेशक इस आश्वासन के बिना निवेश के लिए राजी होंगे कि वे अपने हिसाब से कृषि में उत्पादन करा सकें? किसान संगठनों को यह समझना चाहिए कि कृषि में निजी निवेश की भागीदारी मात्र दो प्रतिशत है और यह क्षेत्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक इसमें नए निवेशक नहीं आएंगे। यह स्पष्ट है कि किसान संगठनों को उकसाने और भड़काने का काम वे संगठन कर रहे हैं जो विचारधारा के स्तर पर निजी निवेश के खिलाफ हैं और यह मानते हैं कि सब कुछ सरकार के स्तर पर ही किया जाना चाहिए। मुक्त बाजार वाली अर्थव्यवस्था उन्हें स्वीकार नहीं।

यह भी पढ़ेंनए कृषि कानूनों पर संसद में बहस को लेकर विपक्षी दलों का तर्क आधारहीनविपक्षी दलों का यह तर्क आधारहीन है कि नए कृषि कानूनों पर संसद में बहस नहीं हुई। तथ्य यह है कि मानसून सत्र में जब इनसे संबंधित विधेयक संसद में लाए गए थे तब उन पर 12 घंटे बहस हुई थी। यह बात अलग है कि विपक्षी दलों की दिलचस्पी मोदी सरकार को कोसने में थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी समाप्त होने का डर दिखाने में हर विपक्षी दल आगे था। विपक्षी दलों ने यह रुख तब अपनाया जब वे अच्छी तरह जानते हैं कि एमएसपी को कानूनी रूप नहीं दिया जा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार देश भर का खाद्यान्न नहीं खरीद सकती।

यह भी पढ़ेंबहुमत वाली मोदी सरकार को संवैधानिक दायरे में फैसले करने से कोई रोक नहीं सकताकिसान आंदोलन में जैसे तत्वों की घुसपैठ हो चुकी है उसके बाद यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि कोई भी न तो एक बहुमत वाली सरकार को संवैधानिक दायरे में फैसले करने से रोक सकता है और न ही दिल्ली में एक और शाहीन बाग बनाने की इजाजत दी जा सकती है। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि जो दल अथवा संगठन भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक रूप से सामना नहीं कर पा रहे हैं वे अराजकता के सहारे अपने मंसूबे पूरे करने की कोशिश करें और ऐसा करते हुए लोकतंत्र की दुहाई भी दें। रेलवे ट्रैक रोकना, सड़कें बाधित करना और किसी प्रतिष्ठान पर तोड़फोड़ की अपील करना विरोध के लोकतांत्रिक तौर-तरीके नहीं हैं। ऐसे तौर-तरीकों को न तो जनता की सहानुभूति और समर्थन मिल सकता है और न ही सरकार की हमदर्दी। headtopics.com

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दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में उसी स्थान पर किसानों का स्मारक बनवाने का ऐलान किया है, जहां 3 अक्टूबर को हिंसा हुई थी। यह ऐलान मंगलवार को तिकुनिया में हुए अंतिम अरदास में किया गया। तिकुनिया में चार किसान और एक पत्रकार का स्मारक बनेगा। किसान आंदोलन के एक साल के भीतर यह तीसरा स्मारक होगा, जिसे बनाने का ऐलान किया गया है। | Conversation with Manjinder Sirsa, who announced the farmer memorial: Said - where the massacre took place, the saga of atrocities will be written on the stones by placing the idols of the five; One crore rupees will be spent on the memorial किसान स्मारक की घोषणा करने वाले मनजिंदर सिरसा से बातचीत : बोले- जहां कत्लेआम हुआ, वहीं पांचों की मूर्ति लगाकर पत्थरों पर लिखेंगे जुल्म की गाथा; स्मारक पर खर्च होंगे एक करोड़ रुपये

आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अर्नब को मिली आरोपपत्र को चुनौती देने की अनुमतिआत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अर्नब को मिली आरोपपत्र को चुनौती देने की अनुमति SupremeCourt BombayHighCourt Mumbai ChargeSheet ArnabGoswami

किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिए बढ़ते कदमकृषि निवेशों पर किसानों को देय अनुदान को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। किसानों के लिए बाजार को व्यापक बनाने के दृष्टिकोण से मंडी अधिनियम में संशोधन करने वाला भी उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। UPGovt up_agriculture CMOfficeUP navneetsehgal3 ShishirGoUP MrityunjayUP dchaturvedi2013 spshahibjp ये फिर चूतियों को चूतिया बनायेगा। 😂😂😂 UPGovt up_agriculture CMOfficeUP navneetsehgal3 ShishirGoUP MrityunjayUP dchaturvedi2013 spshahibjp सब जुमले है आधा सीजन समाप्त हो गया है अभी तक गन्ने का मूल्य घोषित किया है,पिछले साल पेमेंट अभी तक बाकी है,खेती के लिए ट्यूबल कनेक्शन की सामान्य योजना दो साल से बन्द कर रखी है, खेती के कनेक्शन नाम पर 1 लाख तक किसानों लूटे जा रहे है, 2 साल से इस्टीमेट जमा करके इंतजार कर रहे हैं UPGovt up_agriculture CMOfficeUP navneetsehgal3 ShishirGoUP MrityunjayUP dchaturvedi2013 spshahibjp मीडिया की और नेताओ की कितनी बढत!

Reliance Foundation की बड़ी पहल, कोविड मरीजों के लिए की 875 बेड के संचालन की घोषणाReliance Foundation ने देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने की अपनी मुहिम तेज कर दी है। फाउंडेशन मुंबई में 875 कोविड बेड्स का संचालन अपने हाथों में ले लिया है। ril_foundation Kidhar. Inka sirf ghoshna hi sunta hoon. Dekha nahi kabhi kichh kaam. reliancegroup ril_foundation अब समस्या ये है कि वे लोग यहाँ भर्ती होने आएँगे या नहीं जो इस ग्रुप का विरोध कर रहे हैं ? ril_foundation अब कहाँ मर गए वो लोग जो कल इस अम्बानी के टावर उखाड़ रहे थे।डूब मरो चुल्लू भर पानी मे

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टीकाकरण के लिए कोविशील्ड के खेपों की आपूर्ति हमारे लिए भावुक क्षण : अदार पूनावालासीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) के सीईओ अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने देश भर में 16 जनवरी से शुरू हो रहे कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए कोविशील्ड टीके (Covishield Vaccine) की आपूर्ति को मंगलवार को ‘‘गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक’’ पल करार दिया. पूनावाला जी आपने लगवाया क्या?आप और हमारे माननीय चौकीदार, उनकी सेना भी लगवाती तो कम से कम हमें भी भावुक होने का मौका मिलता। NICE DID HE GOT THIS VACCINE? SO THAT PUBLIC TOO FEEL SAFE बात तो बिल्कुल सही है पर सरकार को मात्र 200 रुपये मे उपलब्ध करवायी जाएगी और आम आदमी को 1000 रुपये में। सही मे आपदा अवसर मे बदल गया।।