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किसानों का रुख

किसानों का रुख in a new tab)

27-09-2021 22:58:00

किसानों का रुख in a new tab)

किसानों के दस घंटे के भारत बंद से साफ हो गया कि किसान अभी भी एकजुट हैं और मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटने वाले।

गौरतलब है कि तीन नए कृषि कानूनों की वापसी को लेकर चल रहे किसान आंदोलन को दस महीने हो चुके हैं। आमतौर पर ऐसे आंदोलन इतने लंबे चल नहीं पाते। दिल्ली की सीमाओं पर किसान लगातार डेरा डाल हुए हैं। कहने को सरकार और किसान संगठनों के बीच ग्यारह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन सब बेनतीजा रही। ऐसे में सवाल यही बना हुआ है कि किसानों और सरकार के बीच आखिर कब तक ऐसा गतिरोध बना रहेगा? किसानों की एकजुटता बता रही है कि वे अब आसानी से पीछे नहीं हटने वाले। संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने लंबी रणनीति की बात कह कर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि लड़ाई अब आगे चलेगी। टिकैत का यह कहना कि कानून वापस नहीं हुए तो आंदोलन दस साल तक भी चल सकता है, इस बात को पुष्ट करता है कि किसान अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी में हैं। अब साफ हो चला है कि आगामी चुनावों में इसका असर दिखना तय है। पिछले कुछ महीनों में हुई महापंचायतें भी इस बात की तस्दीक करती हैं। जाहिर है, आंदोलन का दायरा अब काफी बढ़ चुका है।

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सरकार और किसानों के बीच गतिरोध गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अगर सर्वशक्तिमान सरकारी तंत्र आंदोलनकारियों से बातचीत के जरिए संकट का समाधान नहीं खोज पा रहा है तो इसे सरकार की नाकामी ही कहा जाएगा। किसान आंदोलन को लेकर अब तक सरकार का जो रुख दिखता रहा है, वह निराश करने वाला ही है। लगता है कि सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। वैसे यह गतिरोध दोनों ही पक्षों की हठधर्मिता का भी नतीजा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। किसानों की तरफ से भी लचीले रुख की दरकार है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि दोनों ही पक्ष इसमें अपने राजनीतिक लाभ देख रहे हैं। याद किया जाना चाहिए कि दस महीने के आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों की जान गई है। सोमवार के भारत बंद में भी दिल्ली सीमा पर एक और किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। एक कृषि प्रधान देश में अगर अपनी मांगों के लिए किसानों को इतनी पीड़ा झेलनी पड़े तो इससे ज्यादा दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता। पर लगता है सरकार और किसान संगठन दोनों ही इस बात को समझ नहीं रहे हैं।

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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से आर्यन की गिरफ्तारी तक पिछले क़रीब सवा साल से दो नाम हरेक की ज़ुबान पर है- एनसीबी और एनडीपीएस. एनडीपीएस की तमाम धाराओं को लेकर भी पिछले सवा सालों में तमाम तरह की बातें हुईं. कौन-कौन सी ड्रग्स, कैसी-कैसी ड्रग्स, ड्रग्स की कितनी मात्रा, ड्रग्स की ख़रीद फ़रोख्त, ड्रग्स की स्मॉल मीडियम और कॉमर्शियल क्वांटिटी, किस और कितनी ड्रग्स में कितनी सज़ा, एनडीसीपीएस की कौन सी धारा ज़मानती, कौन सी ग़ैर जमानती और सबसे अहम व्हाट्सएप चैट की ड्रग्स केस में कितनी अहमियत? ये वो सवाल हैं, जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है. तो आज आपके सामने पेश है एनडीपीएस एक्ट की वो सारी कहानी, जिसका सच आप जानना चाहते हैं. देखिए वारदात का ये एपिसोड.

भोपाल में किसानों का भारत बंद बेअसर, दिग्विजय के धरने पर शिवराज ने कसा तंजभोपाल। नए कृषि कानून के विरोध में किसानों के भारत बंद का आज राजधानी भोपाल में कहीं कोई असर नहीं दिखाई दिया। संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आव्हान पर राजधानी के करोंद मंडी में किसानों के प्रदर्शन स्थल को पुलिस ने पहले ही बैरिकेडिंग कर छावनी में बदल दिया था। भारतीय किसान यूनियन के नेता अनिल यादव के नेतृत्व में पहुंचे चंद किसानों को पुलिस ने धरना स्थल पर ही रोक लिया। किसान नेता अनिल यादव ने कृषि कानूनों का काला कानून बनाते हुए कहा कि मोदी सरकार उद्योगपतियों के फायदे के लिए कृषि कानून लेकर आए है।

ममता बनर्जी की तारीफ करने के कुछ देर बाद गोवा कांग्रेस के दिग्गज नेता का इस्तीफादिग्गज कांग्रेस नेता और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फलेरियो जल्द ही तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने 40 साल बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. railway_groupd_examdate railway_groupd_examdate railway_groupd_examdate railway_groupd_examdate railway_groupd_examdate Ab to sirf BJP hi nahi bjp virodhi bhi chahte hain CongressMuktBharat

पाक विदेश मंत्री के लंदन पहुंचने पर गुलाम कश्मीर के लोगों का विरोध प्रदर्शनपाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को रविवार को लंदन में बलूच और सिंध प्रवासियों द्वारा एक और विरोध का सामना करना पड़ा। यह धरना प्रदर्शन संसद चौक पर आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ब्रिटेन को पाकिस्तान को धन देना बंद कर देना चाहिए। पीओके कांग्रेस शासन के तुष्टिकरण नीतियों का नतीजा है।

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किसानों का भारत बंद आज: दिल्ली-सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के दौरान एक किसान की मौत, पुलिस का दावा- दिल का दौरा पड़ने से गई जानतीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच किसानों ने आज भारत बंद बुलाया है। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली-सिंघु बॉर्डर पर एक किसान की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हुई है। | bharat band h, bharat band h updates, farmer s protest, aap, congress, support, route diversion DelhiPolice ArvindKejriwal Kaale kaarnaame baba ram dev ke Seniors citizens ke gharo par kabza Kiya baba ram dev ne pushkardhami pushkar_dhami ukcmo DmHaridwar DelhiPolice ArvindKejriwal नकली किसान DelhiPolice ArvindKejriwal

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