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Mulayam Singh Yadav, मुलायम सिंह यादव

कांशीराम और मायावती से डरते थे मुलायम? बसपा सुप्रीमो ने खुद बताई थी वजह

कांशीराम और मायावती से डरते थे मुलायम? बसपा सुप्रीमो ने खुद बताई थी वजह

20-09-2021 09:46:00

कांशीराम और मायावती से डरते थे मुलायम? बसपा सुप्रीमो ने खुद बताई थी वजह

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने साल 1993 में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। सियासी गलियारों में चर्चा थी कि मुलायम सिंह यादव बीएसपी सुप्रीमो से डरते हैं। इस पर मायावती ने कुछ ऐसा जवाब दिया था।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Photo- Indian Express)उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। इन चुनावों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। हालांकि 90 के दशक में एक समय ऐसा भी आया था जब सपा-बसपा साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरी थीं। इस चुनाव के बाद दोनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाने में भी कामयाब हुई थीं और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने थे।

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मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती पर उनके कामकाज में दखल देने के भी आरोप लगते थे। वहीं, दूसरी तरफ सियासी गलियारों में चर्चा थी कि मायावती और कांशीराम से मुलायम सिंह यादव डरते भी थे कि कहीं वो अपना समर्थन वापस न ले लें। पत्रकार रहे राजीव शुक्ला ने तब बीएसपी सुप्रीमो मायावती से एक इंटरव्यू में इस बारे में सवाल किया था। राजीव शुक्ला ने पूछा था, ‘कांशीराम जी से मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव इतना नहीं डरते हैं, जितना आपसे डरते हैं। उन्हें लगता है कि आप समर्थन वापस ले लेंगी।’

मायावती ने दिया था ऐसा जवाब:मायावती ने कहा था, ‘ऐसा नहीं है, ये लोगों कीअपनी-अपनी सोच हो सकती है। वह मुझसे और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी डरते हैं। जिन लोगों को ये लगता है कि मुख्यमंत्री सिर्फ आपसे डरते हैं, कांशीराम से नहीं। आप खुद ही देख लीजिए कि वह मेरे साथ कांशीराम से भी कितने भयभीत थे। कांशीराम जी का गुस्सा शायद सीएम साहब ने पहली बार देखा होगा। गलत बात को गलत तो हम शुरुआत से ही कहते हैं। अब उसका कोई भी नतीजा हो बहुजन समाज पार्टी हमेशा सच के साथ ही खड़ी होती है।’ headtopics.com

बता दें, समाजवादी पार्टी औरबहुजन समाज पार्टी ने साल 1993 में मिलकरचुनाव लड़ा था। 422 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में दोनों ने 420 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इन चुनावों में दोनों पार्टियों के गठबंधन को 176 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं, राम मंदिर की लहर के बीच बीजेपी ने 177 पर जीत हासिल की थी।

बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए दोनों दलों ने अन्य विजयी उम्मीदवारों को भी अपने साथ मिलाया और मुलायम सिंह यादव को सूबे की कमान सौंप दी गई थी। हालांकि ये गठबंधन लंबे समय तक नहीं चल सका था और साल 1995 में सपा से अलग होकर मायावती सीएम बन गई थीं। मायावती भी लंबे समय तक मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह सकीं। इसके बाद 21 सितंबर 1997 को बीजेपी के दिवंगत नेता कल्याण सिंह सीएम बन गए थे।

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वारदात: तेज हो गई समीर-नवाब की तकरार, क्या है स्कूल सर्टिफिकेट की सच्चाई?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के मुंबई के जोनल हेड समीर वानखेड़े के बर्थ सर्टिफिकेट और मैरिज सर्टिफिकेट के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक कथित रूप से उनके ये दो नए सर्टिफिकेट लेकर आए हैं. नवाब मलिक के मुताबिक समीर दादर के सेंट पॉल हाईस्कूल से प्राथमिक शिक्षा ली थी. इस सर्टिफिकेट में समीर वानखेड़े का नाम वानखेड़े समीर दाऊद लिखा है. यहां ये भी लिखा है कि छात्र की जाति और उपजाति तभी बताई जाए जब वो पिछड़े वर्ग, या अनुसूचचित जाति-जनजाति से आए. जबकि धर्म के कॉलम में लिखा है मुस्लिम. इसके बाद समीर वडाला के सेंट जॉसेफ हाईस्कूल में पढने गए. यहां के स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में समीर का नाम वानखेड़े समीर दाऊद लिखा है. और धर्म के कॉलम में लिखा है मुस्लिम. दरअसल नवाब मलिक समीर वानखेड़े को मुसलमान साबित करने के लिए इसलिए जुटे हैं क्योंकि अगर उनकी बात सही साबित हो गई तो समीर वानखेड़े के नौकरी खतरे में पड़ जाएगी. देखें वीडियो.

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