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कांग्रेस के निशाने पर फेसबुक | DW | 26.10.2021

कांग्रेस ने फेसबुक पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप लगाते हुए उसे 'फेकबुक' करार दिया है. कांग्रेस ने बीजेपी के प्रति फेसबुक द्वारा दिखाए जा रहे कथित पक्षपात की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है.

26-10-2021 14:25:00

कांग्रेस ने फेसबुक पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप लगाते हुए उसे 'फेकबुक' करार दिया है. कांग्रेस ने बीजेपी के प्रति फेसबुक द्वारा दिखाए जा रहे कथित पक्षपात की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है. Facebook facebook whistleblower

कांग्रेस ने फेसबुक पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप लगाते हुए उसे 'फेकबुक' करार दिया है. कांग्रेस ने बीजेपी के प्रति फेसबुक द्वारा दिखाए जा रहे कथित पक्षपात की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है.

कांग्रेस के निशाने पर फेसबुककांग्रेस ने फेसबुक पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप लगाते हुए उसे"फेकबुक" करार दिया है. कांग्रेस ने बीजेपी के प्रति फेसबुक द्वारा दिखाए जा रहे कथित पक्षपात की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है.कांग्रेस ने फेसबुक पर भारत के चुनावों को"प्रभावित" करने और लोकतंत्र को"कमजोर" करने का आरोप लगाते हुए इसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने भारत में खुद को"फेकबुक" में तब्दील कर लिया है. कांग्रेस ने अपने आरोप को दोहराया कि बीजेपी से सहानुभूति रखने वालों ने फेसबुक में"घुसपैठ" की है. उसका आरोप है कि सोशल मीडिया दिग्गज बीजेपी की"सहयोगी" की तरह काम कर रही है.

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खुलासे से भड़की कांग्रेसदरअसल कांग्रेस का हमला ऐसे वक्त में आया है जब फेसबुक के कुछ लीक हुए दस्तावेजों से पता चला है कि यह वेबसाइट भारत में नफरती संदेश, झूठी सूचनाएं और भड़काऊ सामग्री को रोकने में भेदभाव बरतती रही है. खासकर मुसलमानों के खिलाफ प्रकाशित सामग्री को लेकर कंपनी ने भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है.

समाचार एजेंसी एसोसिएटेडे प्रेस के हाथ लगे कुछ दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि भारत में आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में फेसबुक को संघर्ष करना पड़ा है. सोशल मीडिया दिग्गज के शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके मंच पर"भड़काऊ और भ्रामक मुस्लिम विरोधी सामग्री" से भरे समूह और पेज हैं. headtopics.com

हाल ही में कंपनी की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हॉगेन ने कुछ लीक दस्तावेज के जरिए फेसबुक पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा,"फेसबुक की व्हिसलब्लोअर फ्रांसिस हॉगेन ने खुलासा किया किया कि फेसबुक की टीम में हिंदी और बांग्ला के जानकार है ही नहीं, जो इन भाषाओं में पोस्ट में जा रही भड़काऊ बयान या विभाजनकारी सामग्री को फिल्टर कर निकाल सकें. इसलिए इन भाषाओं में ऐसी सामग्रियों पर कोई फैसला नहीं हो पाता है."

कांग्रेस का सरकार से सवालकांग्रेस ने सवाल किया कि भारत सरकार सोशल मीडिया सुरक्षा अनुपालन का हवाला देते हुए ट्विटर के खिलाफ बहुत सक्रिय थी लेकिन अब वह चुप क्यों है.कांग्रेस ने पिछले साल मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर जेपीसी जांच की मांग की थी कि भारत में फेसबुक की तत्कालीन शीर्ष सार्वजनिक नीति अधिकारी अंखी दास ने व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए, कम से कम चार व्यक्तियों और समूहों से जुड़े"अभद्र भाषा नियम" लागू नहीं किए थे.

2016 के बाद से ही फेसबुक अमेरिका में फर्जी खबरों को प्रोत्साहित करने में कथित भूमिका के लिए संदेह के दायरे में रही है.खेड़ा का कहना है कि भारत में केवल नौ प्रतिशत यूजर्स अंग्रेजी में हैं और फिर भी कंपनी के पास क्षेत्रीय भाषाओं की पोस्ट को फिल्टर करने की व्यवस्था नहीं है.

कांग्रेस के आरोपों पर फिलहाल फेसबुक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल बीजेपी ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहखबरों पर भरोसा कमसंस्थान ने पाया कि भारत में सिर्फ 38 प्रतिशत लोग खबरों पर भरोसा करते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर से नीचे है. पूरी दुनिया में 44 प्रतिशत लोग खबरों पर भरोसा करते हैं. फिनलैंड में खबरों पर भरोसा करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है (65 प्रतिशत) और अमेरिका में सबसे कम (29 प्रतिशत). भारत में लोग टीवी के मुकाबले अखबारों पर ज्यादा भरोसा करते हैं. headtopics.com

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अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहखोज कर खबरें देखना45 प्रतिशत लोगों को परोसी गई खबरों के मुकाबले खुद खोज कर पढ़ी गई खबरों पर ज्यादा भरोसा है. सोशल मीडिया से आई खबरों पर सिर्फ 32 प्रतिशत लोगों को भरोसा है.अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाह

इंटरनेट पसंदीदा माध्यम82 प्रतिशत लोग खबरें इंटरनेट पर देखते हैं, चाहे मीडिया वेबसाइटों पर देखें या सोशल मीडिया पर. इसके बाद नंबर आता है टीवी का (59 प्रतिशत) और फिर अखबारों का (50 प्रतिशत).अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहस्मार्टफोन सबसे आगे

खबरें ऑनलाइन देखने वाले लोगों में से 73 प्रतिशत स्मार्टफोन पर देखते हैं. 37 प्रतिशत लोग खबरें कंप्यूटर पर देखते हैं और सिर्फ 14 प्रतिशत टैबलेट पर.अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहव्हॉट्सऐप, यूट्यूब की लोकप्रियताइंटरनेट पर खबरें देखने वालों में से 53 प्रतिशत लोग व्हॉट्सऐप पर देखते हैं. इतने ही लोग यूट्यूब पर भी देखते हैं. इसके बाद नंबर आता है फेसबुक (43 प्रतिशत), इंस्टाग्राम (27 प्रतिशत), ट्विटर (19 प्रतिशत) और टेलीग्राम (18 प्रतिशत) का.

अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहसाझा भी करते हैं खबरें48 प्रतिशत लोग इंटरनेट पर पढ़ी जाने वाली खबरों को सोशल मीडिया, मैसेज या ईमेल के जरिए दूसरों से साझा भी करते हैं.अखबार, टीवी या इंटरनेट: कौन है खबरों की दुनिया का बादशाहसीमित सर्वेक्षण headtopics.com

यह ध्यान देने की जरूरत है कि ये तस्वीर मुख्य रूप से अंग्रेजी बोलने वाले और इंटरनेट पर खबरें पढ़ने वाले लोगों की है. सर्वेक्षण सामान्य रूप से ज्यादा समृद्ध युवाओं के बीच किया गया था, जिनके बीच शिक्षा का स्तर भी सामान्य से ऊंचा है. इनमें से अधिकतर शहरों में रहते हैं. इसका मतलब इसमें हिंदी और स्थानीय भाषाओं बोलने वालों और ग्रामीण इलाकों में रहने वालों की जानकारी नहीं है.

रिपोर्ट: चारु कार्तिकेय और पढो: DW Hindi »

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