कांग्रेस का बवंडर सिंधिया और सचिन तक थमेगा या सब उड़ा ले जाएगा?

कांग्रेस का बवंडर सिंधिया और सचिन पायलट तक थमेगा या सब उड़ा ले जाएगा?

15-07-2020 06:10:00

कांग्रेस का बवंडर सिंधिया और सचिन पायलट तक थमेगा या सब उड़ा ले जाएगा?

कहा जा रहा है कि हाल के दिनों में कांग्रेस ने एकमात्र बीजेपी को चुनौती देने वाला काम किया है और वो है हार्दिक पटेल को गुजरात की कमान सौंपना.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटATUL LOKE"हमारी पार्टी पीछे नहीं हुई है, बीजेपी हम से कहीं आगे निकल चुकी है''. इस तरह की एक जैसी प्रतिक्रिया ज़मीन से जुड़े कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं की थी.पार्टी में हर दिन आने वाले संकट को देखने का ये नज़रिया दिलचस्प था. अगर आप राजस्थान का ही उदाहरण लें जहाँ पार्टी इस समय एक बड़े संकट से गुज़र रही है तो पता चलेगा कि इस तर्क में सच्चाई है. यहाँ पार्टी ने 2018 में सत्तारूढ़ बीजेपी को हराया था.

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इससे पहले वाले विधान सभा चुनाव में पार्टी की बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त हुई थी. इस बात का डर है कि पार्टी राजस्थान में एक बार फिर सत्ता खो सकती है लेकिन किसी भी तरीक़े से ये नहीं कहा जा सकता कि राज्य में पार्टी पीछे हो गई है.लेकिन ये भी सच है कि पहले मध्य प्रदेश और अब राजस्थान में कांग्रेस के अंदर बग़ावत ने 135 साल पुरानी पार्टी के रैंक और फाइल में खलबली मचा दी है, इसके कार्यकर्ताओं का मनोबल कमज़ोर कर दिया है

सियासी गलियारों में चर्चा आम है कि सचिन पायलट के खेमे से बग़ावत की बू मार्च से ही आने लगी थी. लेकिन सियासी विशेषज्ञ हैरान हैं कि पार्टी का हाई कमान इसे सूंघने में नाकाम क्यों रहा और अगर सूंघा तो इसका इलाज क्यों नहीं किया.कांग्रेस पार्टी 2014 के आम चुनाव में बुरी तरह से हारने के बाद से अंदरूनी विद्रोहों का सामना करती आ रही है. इसके सामने कई चुनौतियाँ हैं. राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी चारों खाने चित नज़र आती है. आख़िर इस का इतना बुरा हाल कैसे हुआ? लोग पार्टी छोड़ कर क्यों जाना चाहते हैं?

इमेज कॉपीरइटGetty Imagesनेहरू-गांधी परिवारज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने और सचिन पायलट को लाने की कोशिशों में जुड़े बीजेपी के कुछ लोगों का कहना है कि इसकी वजह गाँधी परिवार है, ख़ास तौर से सोनिया गाँधी.उनका दावा था,"सोनिया गाँधी नहीं चाहती हैं कि बेटे राहुल गाँधी के मुक़ाबले कोई नेता ऊपर उभरे और वो बेटे के लिए एक चुनौती बने. उन्होंने बेटे को प्रोटेक्ट करने के लिए सिद्धांतों और मेरिट को क़ुर्बान कर दिया है, यहाँ तक कि बेटी(प्रियंका गाँधी) के करियर को भी आगे बढ़ने नहीं दिया."

आम धारणा ये है कि बीजेपी इन नेताओं को कांग्रेस से निकलने पर मजबूर कर रही है लेकिन बीजेपी सूत्रों के अनुसार,"हम ने इन्हें न्यौता नहीं दिया था, ये ख़ुद हमारे पास आए हैं. इसकी वजह ये है कि वो गाँधी परिवार के कारण आगे नहीं बढ़ पाएंगे और राहुल गाँधी की लीडरशीप और उनकी सियासी समझ बूझ पर उन्हें बिलकुल भरोसा नहीं रहा था. ये तो छोड़िये, हमारी पार्टी में आने के लिए कांग्रेस वालों की लाइन लगी हुई है लेकिन हम उन्हें ही अपनी पार्टी में शामिल करना चाहते हैं जिनके अंदर टैलेंट है."

मुंबई की युवा नेता भावना जैन सालों तक अमरीका में रह कर जब भारत लौटीं तो सोनिया गाँधी से प्रभावित हो कर कांग्रेस पार्टी से जुड़ गईं.वो ये नहीं मानतीं कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी से किसी को कोई समस्या है. वो कहती हैं,"गाँधी परिवार को सोशल मीडिया पर बदनाम किया जा रहा है जिसमें कुछ बिका हुआ मीडिया, सोशल मीडिया और कुछ फ़िल्म स्टार शामिल हैं. इन्हें देश द्रोही की तरह से पेश किया जाता है. ये हिटलर शाही जैसा है. ये एक बड़ा संघर्ष है जिसे हम काउंटर करने की कोशिश कर रहे हैं."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहासचिन पायलट का जहाज़ कहां जाकर उतरेगा?भावना जैन गाँधी परिवार की पार्टी के अंदर पूरी तरह से लोकप्रिय होने को 100 प्रतिशत सच मानती हैं."कार्यकर्ताओं में सोनिया जी और राहुल गाँधी के लिए निष्ठा है. जब राहुल जी अध्यक्ष चुने गए थे मैं ने ख़ुद देखा है कि सभी ने राहुल जी के नाम पर मुहर लगाई और देश के सारे राज्यों में ऐसा हुआ"

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मथुरा में पार्टी के एक युवा नेता ने कहा कि राहुल गाँधी गाँधीवादी हैं और उनकी लोकप्रियता पर किसी को शक नहीं. वो स्वीकार करते हैं कि पार्टी में कुछ सीनियर नेता ऐसे हैं जिन्होंने पिछले आम चुनाव में उनका साथ नहीं दिया. उनका कहना था कि चुनावी सियासत में शिकस्त और जीत तो होती रहती है. इससे किसी नेता के क़द का अंदाज़ा लगाना ठीक नहीं है

दक्षिणपंथी थिंक टैंक श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फ़ाउंडेशन के निदेशक डॉक्टर अनिर्बान गांगुली ने कांग्रेस की दशा पर गहरा अध्ययन किया है.वो कहते हैं कि गाँधी परिवार कांग्रेस पार्टी में गले के फंदे की तरह से बन कर रह गया है."कांग्रेस के भीतर कई लोगों को एहसास है कि परिवार पार्टी के गले में फन्दा बन गया है. इसलिए कुछ नेता बाहर निकलते हैं और कुछ लोग ये महसूस करते हैं कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है तो वो पार्टी के अंदर ही रहना पसंद करते हैं."

गाँधी परिवार के क़रीब रहे लखनऊ के अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता हैं और प्रवक्ता भी. उनके अनुसार गाँधी परिवार पार्टी की समस्या बिल्कुल नहीं है. वो यक़ीन के साथ कहते हैं कि पार्टी उनके नेतृत्व ने आगे बढ़ी है.इमेज कॉपीरइटGetty Imagesपुनर्गठन पर अब तक ध्यान नहीं

डॉक्टर अनिर्बान गांगुली के विचार में पार्टी अनिश्चितता का शिकार है."कांग्रेस पार्टी अपने आप को बदलने में नाकाम रही है. आत्मनिरीक्षण अब तक नहीं किया है"डॉक्टर गांगुली ने बीजेपी में अमित शाह के योगदान पर पिछले साल एक किताब भी लिखी है. वो आगे कहते हैं,"अमित शाह ने पार्टी का संपूर्ण पुनर्गठन किया. कांग्रेस ने राजनीतिक और वैचारिक कायाकल्प का गंभीर अभ्यास नहीं किया है."

लेकिन भावना जैन जो अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़ी रहती हैं, वो कहती हैं कि पार्टी में काफ़ी बदलाव आया है. उनके अनुसार राहुल गाँधी ने 2014 चुनाव के पहले पार्टी के ढांचे को और इसकी विचारधारा को और साफ़ करने की कोशिश की है. वो कहती हैं कि जहाँ तक संगठनात्मक क्षमता का सवाल है उनकी पार्टी से बेहतर संगठित और कोई पार्टी नहीं है. हमारी पार्टी सबसे पुरानी है और हमारी पार्टी के ढांचे को दूसरी पार्टियों ने अपनाया है."

वो ये ज़रूर मानती हैं कि सोशल मीडिया और संचार के दूसरे माध्यम में पार्टी कुछ पीछे है जिस पर काम चल रहा हैअखिलेश प्रताप सिंह भी पुनर्गठन की ज़रूरत के तर्क को नहीं मानते. वो समय-समय पर रणनीति बदलने की सलाह देते हैं. उनके अनुसार पार्टी का ढाँचा मज़बूत है और नेतृत्व सही हाथों में है."ज़रूरत केवल थोड़ी रणनीति बदलने की है".

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उनके अनुसार ये काम हो रहा है. इसका उदाहरण देते हुए वो कहते हैं कि हाल में गुजरात में युवा पटेल नेता हार्दिक पटेल को प्रदेश का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया जाना सही दिशा में एक अहम क़दम है.लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार और सियासी विश्लेषक वीरेंदर नाथ भट्ट भी हार्दिक पटेल के चयन को कांग्रेस का एक सकारात्मक क़दम मानते हैं."नरेंद्र मोदी के बाद इस समय गुजरात में सब से लोकप्रिय नेता हार्दिक पटेल हैं. उनका अध्यक्ष बनाया जाना अगले विधानसभा के चुनाव (2022) की तैयारी भी है और गुजरात में बीजेपी को चुनौती भी."

इमेज कॉपीरइटFACEBOOK/SACHINPILOTकाडर नहीं केवल कार्यकर्ताकांग्रेस की सोशल मीडिया से जुड़े एक युवा पार्टी कार्यकर्ता ने अपना नाम न देने की शर्त पर अपनी पार्टी की कमज़ोरी की वजह ये बताई,"हमारी पार्टी आंदोलन से निकल कर बनी है. हम काडर नहीं बना पाए. हमारे पास कार्यकर्ता हैं लेकिन कमिटेड काडर नहीं हैं. पार्टी व्यक्ति विशेष बन कर रह गई. बीजेपी काडर से बनी है. इसी लिए जब कल्याण सिंह और उमा भारतीय पार्टी से अलग हुए तो पार्टी को नुकसान नहीं हुआ."

उनका कहना था कि"काडर विचारधारा से बनता है जबकि वर्कर पार्टी से बनता है."अलवर के युवा कांग्रेस के नेता सी शॉन इस तर्क से सहमत हैं लेकिन वो अपनी बात यूँ रखते हैं,"हमारे पास भी काडर हैं लेकिन गड़बड़ यह है कि इनके अंदर कमिटमेंट की कमी है."

कांग्रेस पार्टी की आख़िरी इकाइयों में, यानी गाँव के स्तर पर, कार्यकर्ता सीज़नल होते हैं. साल 2018 के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी की जीत के बाद मैंने कई राज्यों का दौरा किया था. मैंने पूर्वी उत्तर प्रदेश, तमिल नाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की थी. उनका मनोबल ऊंचा था. मुझे बताया गया कि इन तीन राज्यों में चुनावी जीत के बाद पार्टी में ऐसे कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं जो पार्टी छोड़ कर चले गए थे.

महाराष्ट्र में मुझे ये भी बताया गया कि जब कोई ज़िला या राज्य स्तर का नेता पार्टी छोड़ता है तो अपने साथ पार्टी में अपने समर्थक कार्यकर्ताओं को भी साथ ले जाता है और इस इकाई को दोबारा मज़बूत बनाना आसान नहीं होता.छत्तीसगढ़ के कांग्रेस के युवा नेता प्रणव दास वैष्णव कहते हैं कि पार्टी में जोश है और काम करने वालों की कमी नहीं. लेकिन वो ये स्वीकार करते हैं कि पार्टी में अहम फैसले लेने में देरी होती है. जिससे बाद में पार्टी को दिक़्क़त होती है.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहाभारत चीन तनाव के बाद राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशानापैसा, बाहुबल और मीडियाकांग्रेस के कार्यकर्ताओं से बात करके महसूस हुआ कि इन दिनों अंग्रेज़ी अक्षर M से शुरू होने वाले तीन शब्दों से पार्टी परेशान है- money (पैसा) , muscle (ताक़त) और media (पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया). भावना जैन का कहना है,"उनके पास (बीजेपी के पास) पैसे, बाहुबल और मीडिया की शक्ति है. हम इसका मुक़ाबला कर रहे हैं लेकिन हमारे लिए ये एक बड़ा संघर्ष है."

अखिलेश प्रताप सिंह के अनुसार बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए कोई भी तरीक़ा इस्तेमाल कर सकती है."बीजेपी को हम मॉडर्न पार्टी नहीं मानते. आज की बीजेपी किसी भी स्तर पर चली जाती है. सोशल मीडिया हो या दूसरे साधनों का, बीजेपी सकारात्मक इस्तेमाल करने के बजाय नकारात्मक इस्तेमाल करती है." लेकिन वो ये स्वीकार करते हैं कि पार्टी को विपक्ष के हिसाब से"अपनी स्ट्रैटिजी बदलनी चाहिए".

भावना जैन के मुताबिक़ सोशल मीडिया पर"हम देर से" आए जिसका ख़ामियाज़ा पार्टी को उठाना पड़ रहा है."अन्ना आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया ने एक बड़ी भूमिका निभाई. पार्टी के ख़िलाफ़ एक नैरेटिव बना. हमारी पहली ग़लती ये थी कि हम ने इसे काउंटर नहीं किया. दूसरा ये कि हम सोशल मीडिया पर देर से आए. हम इस ग़लती को 2014 से सही करने में लग गए और इसमें आगे बढ़ने की कोशिश जारी है."

इमेज कॉपीरइटAFPआज की राजनीति 24x7वीरेंदर नाथ भट्ट कांग्रेस की तमाम कमज़ोरियों पर एक दो ख़ास कमियों को भारी मानते हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस के नेताओं में सुस्ती आ गई है.वो कहते हैं,"पहली ये कि अब राजनीति 24x 7 वाला काम है. राहुल गाँधी 24x 7 सियासी लीडर नहीं हैं. ऐसे में रिलवेंट बने रहना मुश्किल काम है."

वो आगे कहते हैं,"छह साल में कांग्रेस अभी तक ऑल इंडिया स्तर पर एक स्वीकृत सियासी नैरेटिव मोदी के ख़िलाफ़ विकसित नहीं कर सकी है जब भी कोई नया मुद्दा उभरता है राहुल और प्रियंका की तरफ़ से एक ट्वीट आ जाता है. अब क्या ट्वीट्स के बल पर राजनीति की दिशा तय होगी?

वरिष्ठ पत्रकार भट्ट राहुल और कांग्रेस पार्टी से चुभता सा सवाल करते हैं,"आपने देश में मोदी-विरोधी या भाजपा-विरोधी ताक़तों का साथ देने के लिए क्या किया है? योगेंद्र यादव (नेता) हमेशा से कहते रहे हैं कि कांग्रेस मोदी विरोधी ताक़तों के गठन में मुख्य बाधा है".

डॉक्टर अनिर्बान गांगुली की निगाह में कांग्रेस की नाकामियों में से एक बहुत अहम नाकामी है इसका एक असरदार विपक्षी दल बन कर उभरने में नाकाम होना. उनके अनुसार पार्टी अब भी ख़ुद को, सच्चाई से परे, सत्तारुढ़ पार्टी समझती है.अब जब सब की निगाहें राजस्थान पर टिकी हैं पार्टी के नेताओं की चुनौती ये होगी कि वो इस संकट से पार्टी को सफलतापूर्वक कैसे निकाल सकते हैं.

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दूसरी बार 10 घंटे तक चली ED की रिया चक्रवर्ती से पूछताछ, देखें रिपोर्ट

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जांच के घेरे में आई उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती से ED की पूछताछ का आज दूसरा राउंड हुआ. ED दफ्तर में रिया सुबह 11 बजे पूछताछ के लिए पहुंची थीं और ये मैराथन पूछताछ 10 घंटों तक हुई. रिया के अलावा उनके भाई शौविक और पिता इंद्रजीत से भी ED ने आज पूछताछ की है. इस बीच रिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि उनका मीडिया ट्रायल हो रहा है. हलफनामे में इस मीडिया ट्रायल को आगामी बिहार चुनाव से जोड़ा गया. हलफनामे में लिखा गया कि ऐसी खबरें हैं कि सुशांत की मौत के मामले में बिहार के मुख्यमंत्री के कहने पर पटना में FIR दर्ज हुई है. देखें वीडियो.

सब दिखेगा । आखिर में पप्पू भी जाएगा बीजेपी में Pappu fail ho gaya अकेले अकेले कहां जा रहे हो, जहां जा रहे हो अकेले अकेले Congress party needs committed cadres who would stic with party irrespective of leaders.also Rahul and Priyanka needs to struggle on on roads. चुनावी समर में छोकरा दिखाया छोकरे ने मेहनत भी बहुत किया फिर जीतने के पश्चात चाटुकार चापलूस डोकरा को बैठा दिखा यह तो खानदानी परंपरा सरदार पटेल भी 14 वोट और नेहरु को दो वोट फिर भी गांधी ने pm नेहरु को बनाया मेहनत करो ना करो पर चापलूसी में महारत हासिल होना चाहिये तभी सत्ता मिलेगी

कब तक राजा का बेटा राजा बनेगा।। अब राजा वही बनना चहिये जो असली हक़दार है।। काँग्रेस एक बड़ी पार्टी है और अब परिवारवाद से ऊपर नकलने ही पड़ेगा।। एक मजबूत विपक्ष को होना बहुत ज़रूरी है लोकतंत्र में। वरना तानशाही आ सकती है।। किसी के आने जाने से इतने बड़े समूह को क्या फर्क पड़ता है कांग्रेस जिस दिन सभी भारतीयों को एक नजर से सोचने लगेगी,उस दिन से इसके दिन अच्छे शुरु हो जायेगे।

अभी नहीं उड़ा तो फिर धीरे धीरे उड़ना ही है। उनकी अपनी करनी से ही खुद कालिदास की तरह अपनी डाल को खुदबैठ कोई काट रहा है। होल बडा हुआ है। छोटी मछलियां जल्दी से खिसक जाएगी। देश की इतनी पुरानी पार्टी जिसमें एक से बढ़कर एक नेता हुए,अगर आज आप से आप के नेता किनारा कर रहे हैं तो कुछ तो गंभीर बात होगी । सब उड़ जायेगा

ये वक्त भी बदल जायेगा,,, सत्ता का भाव और त्याग का अभाव ही हर समस्या की जड़ है। गधों के सर पर ताज रहेगा उस अस्तबल में एक भी घोड़ा नहीं बचेगा सब भाग जाएंगे Jo lalchi hoga wo jayega party chodkar जब तक राहुल गांधी बीजेपी में शामिल नहीं हो जाते ये चलता रहेगा it is the oldest party,founded with 72 members,many take oaths and went by this is congress.,it will retain it's face again .Those who swept away were opportunist and yes they have their own politics .

कुछ लोगों को बना बनाया हलवा मिलता है और वह अपने आप को नवाब समझने लगते हैं सचिन पायलट और सिंधिया की राजनीति बनी बनाई मिली शायद लालच का हलवा बचा नहीं पाए पहले भी कांग्रेसी ने पुराने राजनेताओं का आना जाना लगा है यह कोई नई बात नहीं है जिंदगी में कभी हार नहीं माननी चाहिए बस चलते जाओ। कांग्रेस पार्टी समुद्र है, और समुद्र में तुफान आते ही रहते हैं ।

बुजुर्गों को बचाओ, युवाओं को निकालो. राहुल गांधी समर्थक है, तो पहले लाथ मारो. -वर्तमान काँग्रेस नीति. SachinPailot AshokGehlot kailashlangadi1 कांग्रेस तो गई Congress is require pumpkin on immediate basis to strong their immune system तब तक उड़ेगा जब तक छोटा भीम का स्थाई पता इटली ना लिखा जाने लगे पप्पू भी चला जायेगा छोडकर एक दिन सिर्फ सोनिया और प्रियंका ही रह जायेंगे अकेले अब वह दिन दूर नहीं

कोई फर्क नहीं पड़ता, ये कांग्रेस है कितने आये और गये.INCIndia अभी तो खेल शुरू हुआ है जिंहोने सिंधिया के जाने से सबक नही लिया उनसे क्या उम्मीद कर सकते हो। जो बचा है उसे भी संभाल नही पा रही है कांग्रेस देश को अब तीसरी पार्टी की जरूरत है जो वाकई में सत्ता नही संघर्ष में विश्वास रखता हो, जिसे जनता की फिक्र हो कुर्सी की नहीं।

अब बचा ही कौन है, शशि थरूर?😂😂 Sab ura Le jayega pratham putram sneh asti aag lage basti सब उड़ेगा बस पप्पू महाराज रहेंगे yah Jaenge to nahin aaenge na aur unko mauka milega Kuchh keh nahi sakte PMCares fund mein vidhayak kharidne ke liye bohat paise hain FreedDctorKafeelKhan JusticeDoctorKafeelKhan जो मजबूत है और सेवा भाव से ईमानदारी से जुड़े हैं वो टिकेगे।

Both side blunder. Had Pilot stayed in cong he could have been cm candidate in 2023 and pm candidate in 2029. He could have rejuvenated cong and do what Sh. Vajpayee did for bjp.

राजस्‍थान कांग्रेस मुख्‍यालय से हटा सचिन पायलट का पोस्‍टर, राहुल-सोनिया को है रणनीति की भनकसोमवार को सीएम आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी सचिन पायलट नहीं पहुंचे थे, जबकि पार्टी द्वारा इस बैठक के लिए व्हिप जारी किया गया था।

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सुशांत, इरफान और ऋषि कपूर को लेकर बन रही है फिल्म!सुशांत सिंह राजपूत, ऋषि कपूर, इरफान खान, सरोज खान, कोविड 19, सिया कक्कड़, बॉलीवुड, Sushant Singh Rajput, Rishi Kapoor, Saroj Khan, Irfan Khan, Covid 19, Siya Kakkar, Bollywood

पायलट से कांग्रेस की अपील- व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा से बड़ा है राजस्थान, बैठक में शामिल होंराजस्थान के संकट पर रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा पर निशाना साधा. साथ ही उन्होंने सचिन पायलट से बैठक में आने की अपील की. sharatjpr भाजपा इतनी गिरी हुई पार्टी हैं के उनके साशन में सबकुछ गिर ही रहा है, चाहे वो अर्थव्यवस्था हो या राज्य सरकारें। लोकतंत्र_पर_कलंक_भाजपा sharatjpr कांग्रेस ने कोन सा अच्छा काम कर रखा है sharatjpr जहाँ सच हैं, वहाँ पर हम खड़े हैं, इसी खातिर आँखों में गड़े हैं जननायक अशोक गहलोत जिंदाबाद ❣️ ashokgehlot51

Rajasthan Crisis: सचिन पायलट की खामोशी के पीछे छिपा है तूफान, इसलिए डर रही कांग्रेसIndia News: Ashok Gehlot vs Sachin Pilot news: कांग्रेस और सचिन पायलट के बीच कोई समझौता होने के लिए, पायलट को यह दिखाना होगा कि वह बीजेपी के संपर्क में नहीं हैं। फिर अशोक गहलोत को पायलट पर दोबारा 'भरोसा' करने के लिए कहना भी आसान नहीं होगा। Sachin is gone Make someone outside gandhi family like ashok gahlot Congress president. This is only solution. Now public mood is against gandhi family.If Rahul is made president again congress will be eliminated and india will become Congress mukt. तुम्हे और कोई काम नही है क्या बस गणतंत्र की हत्या करवाने की शिवा कांग्रेस पार्टी के पास एक ही विकल्प है या तो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना दे या राजस्थान मे बीजेपी पार्टी की सरकार को बनने दे, जिसमे सचिन पायलट बीजीपी पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री होंगे .

राजस्थान की राजनीति में मजबूत हैं सचिन पायलट, कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकती है बगावतराजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से नजदीकी रखने वाले नेताओं का मानना है कि पार्टी में पहले से काबिज नेताओं और लंबे समय से काम कर रहे विधायकों, कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. कांग्रेस का जहाज फिर से क्रैश पायलट बिना गिरी त ठीके होइ