जम्मू कश्मीर, धारा 370, ट्रैवल एडवायजरी, पीएसए, आगरा जेल, श्रीनगर सेंट्रल जेल

जम्मू कश्मीर, धारा 370

कश्मीर से बाहर भेजे गए हैं कश्मीर के कैदी | DW | 08.10.2019

जम्मू कश्मीर का विशेषाधिकार खत्म होने के बाद गिरफ्तार हुए लोगों में से बहुतों को राज्य के बाहर की जेलों में भेज दिया गया है. इस बीच सरकार का कहना है कि 2 अगस्त को जारी ट्रैवल एडवायजरी हटाई जा रही है.

8.10.2019

जम्मू कश्मीर का विशेषाधिकार खत्म होने के बाद गिरफ्तार हुए लोगों में से बहुतों को राज्य के बाहर की जेलों में भेज दिया गया है. इस बीच सरकार का कहना है कि 2 अगस्त को जारी ट्रैवल एडवायजरी हटाई जा रही है.

जम्मू कश्मीर का विशेषाधिकार खत्म होने के बाद गिरफ्तार हुए लोगों में से बहुतों को राज्य के बाहर की जेलों में भेज दिया गया है. इस बीच सरकार का कहना है कि 2 अगस्त को जारी ट्रैवल एडवायजरी हटाई जा रही है.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि हिरासत में लिए लोगों को यहां से बाहर ले जाने की नीति जो पिछले साल लागू की गई वह 5 अगस्त के बाद तेजी से बढ़ गई है. यह उग्रवादियों को उनके नेटवर्क से दूर करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है. कैदियों को राज्य से बाहर ले जाने का काम बिना चेतावनी दिए हो रहा है. परिवार वालों का कहना है कि एक बार यह पता लग जाने के बाद कि वे कहां हैं, उन्हें उनसे संपर्क का बहुत कम मौका मिल रहा है. इन कैदियों के लिए अकसर यह साबित करना भी मुश्किल है कि वे निर्दोष हैं, खासतौर से राज्य में संचार बंद होने की वजह से.

जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह का कहना है कि पीएसए के तहत जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे तोड़ फोड़ और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ रहे थे. उन्होंने यह भी कहा,"पीएसए एक्ट के तहत हिरासत में लेने के लिए सभी प्रक्रियाओं और कानूनों का पालन किया गया है."

17 सितंबर को मलिक के पिता मोहम्मद और उसके भाई दानिश कई घंटों तक इंतजार करने के बाद आखिरकार उससे मिले. दानिश ने बताया,"वह डरा नहीं है. उसने हमसे कहा कि परिवार का ख्याल रखना." दानिश ने यह भी कहा कि उसके साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है.

रोंगा को कुछ देर के लिए एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में रखा गया और फिर कश्मीर के सेंट्रल जेल लाया गया. उनके वकील बेटे उमैर रोंगा को उनकी तलाश करने में एक हफ्ता लग गया. कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक रोंगा को"ऐसा अलगाववादी बताया गया है जिसे सुधारा नहीं जा सकता."

बंटवारे के बाद पाकिस्तानी कबायली सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया तो कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ विलय की संधि की. इस पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया.

भारत ने कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया. संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव 47 पास किया जिसमें पूरे इलाके में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई.

लेकिन प्रस्ताव के मुताबिक पाकिस्तान ने कश्मीर से सैनिक हटाने से इनकार कर दिया. और फिर कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया.

भारतीय कश्मीर में चुनाव हुए और भारत में विलय का समर्थन किया गया. भारत ने कहा, अब जनमत संग्रह का जरूरत नहीं बची. पर संयुक्त राष्ट्र और पाकिस्तान ने कहा, जनमत संग्रह तो होना चाहिए.

जनमत संग्रह समर्थक और भारत में विलय को लटका रहे कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया. जम्मू कश्मीर की नई सरकार ने भारत में कश्मीर के विलय पर मुहर लगाई.

भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर को भारत के हिस्से के तौर पर परिभाषित किया गया.

चीन ने 1962 की लड़ाई भारत को हराया और अक्साई चिन पर नियंत्रण कर लिया. इसके अगले साल पाकिस्तान ने कश्मीर का ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट वाला हिस्सा चीन को दे दिया.

कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ. लेकिन आखिर में दोनों देश अपने पुरानी पोजिशन पर लौट गए.

दोनों देशों का फिर युद्ध हुआ. पाकिस्तान हारा और 1972 में शिमला समझौता हुआ. युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा बनाया गया और बातचीत से विवाद सुलझाने पर सहमति हुई.

भारत ने सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण कर लिया, जिसे हासिल करने के लिए पाकिस्तान कई बार कोशिश की. लेकिन कामयाब न हुआ.

जम्मू कश्मीर में विवादित चुनावों के बाद राज्य में आजादी समर्थक अलगाववादी आंदोलन शुरू हुआ. भारत ने पाकिस्तान पर उग्रवाद भड़काने का आरोप लगाया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया.

गवकदल पुल पर भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 100 प्रदर्शनकारियों की मौत. घाटी से लगभग सारे हिंदू चले गए. जम्मू कश्मीर में सेना को विशेष शक्तियां देने वाले अफ्सपा कानून लगा.

घाटी में 1990 के दशक में हिंसा जारी रही. लेकिन 1999 आते आते भारत और पाकिस्तान फिर लड़ाई को मोर्चे पर डटे थे. कारगिल की लड़ाई.

भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की कोशिशें पहले संसद पर हमले और और फिर मुबई हमले समेत ऐसी कई हिंसक घटनाओं से नाकाम होती रहीं.

भारतीय सेना की गोली लगने से एक प्रदर्शनकारी की मौत पर घाटी उबल पड़ी. हफ्तों तक तनाव रहा और कम से कम 100 लोग मारे गए.

संसद पर हमले के दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को फांसी दी गई. इसके बाद भड़के प्रदर्शनों में दो लोग मारे गए. इसी साल भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मिले और तनाव को घटाने की बात हुई.

प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ गए. लेकिन उसके बाद नई दिल्ली में अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात पर भारत ने बातचीत टाल दी.

बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में आजादी के समर्थक फिर सड़कों पर आ गए. अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और गतिरोध जारी है.

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 46 जवान मारे गए. इस हमले को एक कश्मीरी युवक ने अंजाम दिया. इसके बाद परिस्थितियां बदलीं. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है.

22 जुलाई 2019 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे को लेकर मध्यस्थता करने की मांग की. लेकिन भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझेगा.

5 अगस्त 2019 को भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया. इस संशोधन के मुताबिक अनुच्छेद 370 में बदलाव किए जाएंगे. जम्मू कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. लद्दाख को भी एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. धारा 35 ए भी खत्म हो गई है.

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