कश्मीर के ताज़ा हालात पर क्या कह और कर रहे हैं बाहरी मज़दूर और नेता? - BBC News हिंदी

कश्मीर के ताज़ा हालात पर क्या कह और कर रहे हैं बाहरी मज़दूर और नेता?

19-10-2021 18:07:00

कश्मीर के ताज़ा हालात पर क्या कह और कर रहे हैं बाहरी मज़दूर और नेता?

बीते कुछ दिनों में कश्मीर में अलग-अलग जगहों पर रह रहे पाँच मज़दूरों की चरमपंथियों ने हत्या कर दी. इसके अलावा कुछ आम लोगों को भी चरमपंथियों ने निशाना बनाया है.

राजनीतिक दल क्या कहते हैं?कश्मीर की सभी पार्टियों ने आम लोगों और प्रवासी मज़दूरों को निशाना बनाने की एक स्वर में निंदा की है.पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने इन हमलों की निंदा की और सरकार पर भी निशाना साधा.उमर ने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच फ़ासलों को बढ़ाने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कश्मीर के बहुसंख्यक मुसलमानों से अपील करते हुए कहा, "हम आतंकवाद को इस बात का फ़ैसला करने की इजाज़त नहीं दे सकते कि कौन यहां रहेगा और कौन नहीं. बहुसंख्यक (मुसलमान) समाज के हम सभी लोगों की यह सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम उन लोगों के पास जाएं और उन्हें विश्वास (सुरक्षा का) दिलाएं जो आज अपनी जान को ख़तरा महसूस कर रहे हैं."

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उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा की प्राथमिक ज़िम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होती है और किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दलों को इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.उन्होंने आम लोगों से भी अपील करते हुए कहा, "जो लोग भी डर के कारण घाटी छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें मैं तहेदिल से कहना चाहता हूं कि मेहरबानी करके आप ऐसा न करें. हम आपको बाहर निकालकर इन आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वालों को उनके नापाक इरादों में कामयाब नहीं होने दे सकते. हममें से ज़्यादातर लोग नहीं चाहते हैं कि आप यहां से जाएं."

पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने भी इन चरमपंथी घटनाओं की जमकर आलोचना की और सरकार पर भी निशाना साधा.महबूबा मुफ़्ती ने इन हत्याओं के बाद कई ट्वीट किए.एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा, "जम्मू-कश्मीर प्रशासन को पहले से जानकारी थी कि अल्पसंख्यकों पर हमला हो सकता है. बावजूद इसके उन्होंने इसको नज़रअंदाज़ किया. इसके बदले प्रशासन केंद्रीय मंत्रियों की सुरक्षा में लगा था, जिन्हें सिर्फ़ इसलिए कश्मीर बुलाया गया था कि वो बीजेपी के इस दावे को और बढ़-चढ़कर पेश करें कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं." headtopics.com

एक ट्वीट में महबूबा मुफ़्ती ने पुलिस के ज़रिए कथित तौर पर क़रीब 700 लोगों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया.उनका कहना था, "700 नागरिकों को गिरफ़्तार किए जाने की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करना इस बात को दर्शाता है कि प्रशासन की मंशा ख़ुद को तमाम आरोपों से पाक-साफ़ बताना और दूसरों पर इल्ज़ाम लगाना है. भारत सरकार की दंडात्मक नीतियों के कारण सामूहिक सज़ा और पूरी आबादी का अपमान, यहां समस्याओं को सुलझाने का एकमात्र फ़ॉर्मूला बन गया है."

वहीं सीपीएम के स्टेट सेक्रेटरी और पूर्व विधायक यूसुफ़ तारिगामी ने मज़दूरों की हत्या की निंदा करते हुए कहा, "इस तरह की घटनाएं हम सबके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं. ये सब कुछ कश्मीर के हित में नहीं है. कोई भी ग्रुप जो किसी भी राजनीतिक सोच के साथ जुड़ा हो, इस बात की इजाज़त नहीं देता कि किसी ऐसे इंसान का क़त्ल किया जाए़ जो निहत्था हो, जिसके पास अपने बचाव के लिए कोई हथियार नहीं. ये लोग कश्मीर में मज़दूरी करके अपना पेट पालने आते हैं."

लेकिन बीजेपी की सोच इन सबसे अलग है. राज्य बीजेपी के अनुसार कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं और चरमपंथियों को यह बात रास नहीं आ रही.कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से भाई-चारा रहा है उसको ख़त्म करने के लिए भी ये सब कुछ किया जा रहा है.

अल्ताफ़ ठाकुर कहते हैं, अब चूँकि चरमपंथ यहाँ आख़िरी साँसें गिन रहा है, लेकिन वह दिखाना चाहते हैं कि हम अभी ज़िंदा हैं. ये कुछ दो-चार फ़ीसद लोग हैं, जो तालिबान और पाकिस्तानी सोच के हैं, वही ऐसा कर रहे हैं." और पढो: BBC News Hindi »

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राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब यहां होने वाली प्याज को ट्रेन से किसी दूसरे राज्य में भेजा गया है। पहली बार अलवर की प्याज रेल से असम भेजा गया है। पूरे प्रदेश में इससे पहले कभी भी प्याज को मालगाड़ी से ट्रांसपोर्ट नहीं किया गया। किसान रेल के जरिए किसानों की उपज को भेजने की उत्तर पश्चिम रेलवे ने यह शुरुआत की है। | उत्तर पश्चिम रेलवे के क्षेत्र में किसान रेल की अलवर से शुरूआत, 220 टन प्याज अलवर से असम भेजी

कैसे भी करके ये इस्लामीक आंतकवाद बंद हो यही कहते हैं Tumhari Maa ka Bhosa, BC आतंकवादी रोज मारे जा रहे हैं, सबका नम्बर आयेगा। जो सरकार बिहारी मजदूरों को न बचा सकी सबसे कम सुविधा के साथ जीवनयापन में समर्थ होते हैं बिहारी वह सुपर एलीट ब्राह्मणों को कश्मीर में क्या ही वापस ले जाएगी ? देश का सम्पूर्ण विनाश मोदी के हाथ ।

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कश्मीर में टारगेट किलिंग के बाद भय का माहौल, घाटी से पलायन कर रहे हैं प्रवासीजम्मू-कश्मीर में आतंकी आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. उनका मुख्य निशाना जम्मू से बाहर के रहने वाले लोग बन रहे हैं. अभी तक 11 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. उत्तरप्रदेश चुनाव तक ऐसा ही चलेगा । You have difficulty concealing your delight. केन्द्र में बीजेपी की सरकार रहती हैं तब ही क्यों कश्मीर से हिन्दुओं को भगाया जाता हैं

कश्‍मीर में बिहारियों की आपबीती: 'आतंकियों ने आधार मांगा, पता देखा और बरसा दीं गोलियां'श्रीनगर में टूरिस्‍ट रिसेप्‍शन सेंटर के बाहर बैठे मोहम्‍मद अकरम बेसब्र नजर आ रहे थे। वह किसी तरह सुबह जम्‍मू जाने वाली बस में सवार होना चाहते थे। फिर वहां से अपने राज्‍य बिहार। रात में बारिश भी अकरम के इरादे न डिगा सकी। अकरम कहते हैं, 'कश्‍मीर की सर्दी महसूस तक नहीं हुई। जिंदगी बचानी है तो जम्‍मू जाने वाली पहली बस पकड़नी है। डर ने मुझे खुले में रहने को मजबूर कर दिया।'अकरम का यह डर कश्‍मीर में पिछले कुछ दिनों के भीतर पैदा हुए हालात की वजह से है। श्रीनगर में कई बिहारी मजदूरों ने खुद को किराए के घरों में बंद कर लिया है। कुछ इलाकों में रहने वाले जगह गैर-कश्‍मीरियों को सुरक्षित जगह ले जाया गया है। बाहर से आकर काम करने वाले वेंडर्स को शाम से पहले घर पहुंच जाने की हिदायत दी गई है। यह जैसे समाजिक अशांति जो मोदी सरकार का अतिउत्साह लाया कश्मीर बंगलादेश मे उसका ऐक रूप दिख रहा भर! आगे समय भारत भर मे विकट हो सकता! और ये शैने शैने आया! शर्माजी 5 साल पहले सर्वोच्च सत्ताओ को कई बार चेता चुके! भाजपा की भागीदारी वाली सरकार में पलायन हुआ तो उसके लिए कांग्रेस ज़िम्मेदार थी। भाजपा के शासन में फिर पलायन हो रहा तो भाजपा को छोड़कर सब ज़िम्मेदार हैं। तो भाजपा का नाम ग़ैर ज़िम्मेदार रख दो भक्तों, उसे तो तुमने बस अपने पैसों पर मशरूम खाने के लिए चुना है न? मजदूरों को कश्मीरी मारपीट कर भगा रहे हैं मजदूरों को मजदूरी नहीं दी है जान बचाने के लिए कश्मीर छोड़ दिया है

कश्मीर में अगर नहीं रुके मजदूरों पर हमले, आर्थिक गतिविधियां हो सकती हैं ठपयह ठीक नहीं कि अपने साथियों की हत्याओं से डरे-सहमे मजदूरों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। यदि यह पलायन नहीं रुका तो दहशत बढ़ने के साथ ही कश्मीर की आर्थिकगतिविधियां भी ठप हो सकती हैं क्योंकि उनके बगैर घाटी का काम चलने वाला नहीं है। इन से डरने की जरूरत नहीं है मजदूरों को बल्कि आप पर जो भी उस समय हथियार है उसी से उनको मार गैरों यह खुद भागने लग जाएंगे जय हिंद जय भारत यह सब इसलिए ही करवाया जा रहा है

कश्‍मीर में हुईं आतंकी घटनाओं पर फूटा नेताओं का गुस्‍सा, संजय राऊत बोले, जवाब दे सरकारजम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी घटनाओं के खिलाफ लोगों और नेताओं का गुस्‍सा साफतौर पर दिखाई देने लगा है। राज्‍य के दो पूर्व मुख्‍यमंत्रियोंं और जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है। Choodiyan aur kangan pahen le aise neta jo sirf gaal bajane air chehra chamkane media me aate hain.

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