उमर अब्दुल्ला को किस आधार पर बंद किया गया है?

उमर अब्दुल्ला को किस आधार पर बंद किया गया है?

18.2.2020

उमर अब्दुल्ला को किस आधार पर बंद किया गया है?

हिरासत में रखे जाने की वजहों में उनका पूर्वाग्रह से ग्रस्त होना और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना शामिल है.

ये एक्सटर्नल लिंक हैं जो एक नए विंडो में खुलेंगे शेयर पैनल को बंद करें इमेज कॉपीरइट Getty Images अनुच्छेद 370 के हटाए जाने और राज्य को दो टुकड़ों में विभाजित किए जाने के बाद से कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (1978) के तहत हिरासत में रखा गया है. इन लोगों को हिरासत में रखने के लिए जो आदेश जारी किया गया है उसमें इस फ़ैसले के आधार गिनाए गए हैं, जिन्हें 'ग्राउंड फ़ॉर डिटेंशन' कहा गया है. दिलचस्प बात ये है कि इस दस्तावेज़ पर कोई तारीख़ नहीं है, बताया गया है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट पाँच फ़रवरी, 2020 को दी थी जिसके आधार पर यह आदेश जारी किया जा रहा है. ये आदेश ज़िला मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुहर के साथ जारी किए गए हैं, इसमें सबसे ऊपर यही लिखा है कि ये ग्राउंड पुलिस की जांच के बाद पाए गए हैं और उन्हें एक फ़ाइल (डॉज़िए) में दर्ज किया गया है जिसके आधार पर इन लोगों को हिरासत में रखा जा रहा है. इमेज कॉपीरइट Getty Images नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, उमर अब्दुल्ला के हिरासत में रखे जाने की नौ वजहें बताई गई हैं. तीन पन्नों पर टाइप किए गए ग्राउंड्स यानी आधार कुछ इस तरह हैं :- ज़िले की पुलिस ने ऐसी रिपोर्टें दी हैं जिनमें आशंका व्यक्त की गई है कि उमर अब्दुल्ला (दस्तावेज़ में उन्हें हर जगह सब्जेक्ट लिखा गया है) के संवेदनशील बयानों की वजह से शांति भंग हो सकती है. उनके ख़िलाफ़ सीआरपीसी की धारा 107 के तहत पहले ही कार्रवाई की गई है और उन्हें हिरासत में रखा गया है इसलिए पूरी गहराई से संबद्ध एजेंसियाँ जाँच पूरी न कर लें तब तक उन्हें हिरासत में रखा जाना चाहिए. दिलचस्प बात ये है कि धारा 107 किसी अपराध का आरोप नहीं है बल्कि इसके तहत मजिस्ट्रेट को विशेषाधिकार हासिल है कि वह जिसे पब्लिक सेफ़्टी के लिए ख़तरा माने उसे हिरासत में डाल दे. चीफ़ प्रॉसिक्युशन ऑफ़िसर ने ख़ुद हाज़िर होकर कहा है कि ऐसे किसी राजनीतिक व्यक्ति के संवेदनशील बयान की वजह से राज्य की शांति व्यवस्था और पब्लिक ऑर्डर में गड़बड़ी पैदा हो सकती है इसलिए उन्हें हिरासत में रखना उचित होगा. पुलिस ने जो डॉज़िए सौंपी है उसमें कहा गया है कि राज्य के पुनर्गठन की पूर्व संध्या पर सब्जेक्ट (उमर अब्दुल्ला) ने लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए केंद्र सरकार की पुलिस के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने वाले बयान दिए. इलाके के कार्यकर्ताओं और राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए शांति भंग होने की आशंका है इसलिए उन्हें हिरासत में रखा जाना चाहिए. इमेज कॉपीरइट Getty Images उमर अब्दुल्ला को हिरासत में रखने का पाँचवा तर्क यह दिया गया है कि वे अपने ज़िले में और कश्मीर वादी के दूसरे हिस्सों में माहौल बिगाड़ रहे हैं. उन पर खुलकर 'गंदी राजनीति' करने और अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर लोगों की भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया गया है. इसी दलील में यह भी कहा गया है कि वे फ़ेसबुक और ट्विटर के ज़रिए देश की एकता और अखंडता के खिलाफ़ लोगों को भड़का रहे हैं. उन्होंने अपने पिता के आवास पर कार्यकर्ताओं से कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 हटाया गया था तो वे जनआंदोलन छेड़ देंगे. उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र सोनावर के युवाओं से आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहें. उमर अब्दुल्ला पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के ज़रिए आम लोगों को केंद्र सरकार का विरोध करने के लिए आइडिया दिया, उन्होंने संसद से पारित आदेश के ख़िलाफ़ आम जनता में आक्रोश को बढ़ावा दिया जिससे हिंसा भड़कने की आशंका पैदा हुई. इमेज कॉपीरइट Getty Images उमर अब्दुल्ला को हिरासत में रखे जाने की एक वजह ये भी बताई गई है कि पुलिस ने अपने डॉज़िए में कहा है कि--उनके विचार पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हैं और उनकी बातों का आम जनता पर बहुत असर होता है इसलिए आशंका है कि वे एक 'इन्फ़्लुएंसर' (प्रेरक) होने के नाते स्थिति पर असर डाल सकते हैं. अंतिम पैरा में कहा गया है कि मामला बहुत नाज़ुक है, हालात बहुत संगीन है लिहाजा उन्हें ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की छूट नहीं दी जा सकती जिससे जनजीवन में गड़बड़ी पैदा हो. उमर अब्दुल्ला के मामले में क़ानूनी स्थिति क्या है. इसे समझने के लिए बीबीसी संवाददाता विभुराज ने सुप्रीम कोर्ट में मानवाधिकार के मामले देखने वाली एडवोकेट शाहरुख़ आलम से बात की. एडवोकेट शाहरुख़ आलम का नज़रिया चार अगस्त, 2019 को कश्मीर के महत्वपूर्ण नेताओं को सरकार ने प्रिवेंटिव डिटेंशन (यानी एहतियाती तौर पर हिरासत) में लिया था. इसके ठीक अगले दिन से कश्मीर में पाबंदियों का सिलसिला शुरू हो गया था. उस समय कश्मीरी नेताओं पर सीआरपीसी की धारा 107 लगाई गई थी. धारा 107 प्रशासन को किसी को एहतियाती तौर पर हिरासत में लेने का हक़ देता है. लेकिन दिलचस्प बात ये थी कि ऐसा फ़ैसला लेते समय ये दलील दी गई कि कुछ भी हो सकता है, हिंसा हो सकती है, आम जनजीवन में खलल पड़ सकता है, लोकशांति भंग हो सकती है. ये भी कहा गया कि इन नेताओं को थोड़े समय के लिए ही प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा जा रहा है. इमेज कॉपीरइट Getty Images उस समय न तो उमर अब्दुल्ला ने और न ही महबूबा मुफ़्ती ने अदालतों में इसे चुनौती दी. महबूबा मुफ़्ती की बेटी ने उस समय हेबियस कॉरपस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की रिट याचिका दायर की थी लेकिन तब कोर्ट ने उन्हें कहा कि आप अपनी मां से जाकर मिल आइए. लेकिन महबूबा को हिरासत में रखना क़ानूनी तौर पर कितना सही था या ग़लत? इस पर कोर्ट ने कुछ नहीं कहा. लेकिन उमर अब्दुल्ला ने अपने हिरासत को चुनौती नहीं दी. सीआरपीसी की धारा 107 में केवल छह महीने तक प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखे जाने का प्रावधान है. छह महीने ख़त्म होने पर लोगों को ये लग रहा था कि सरकार उन लोगों को रिहा कर देगी. जिस दिन प्रिवेंटिव डिटेंशन के छह महीने की अवधि ख़त्म हो रही थी, उस दिन सरकार ने उमर अब्दुल्ला पर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट जैसे बेरहम क़ानून के तहत मामला दर्ज़ कर लिया. सरकार के इरादों पर इसलिए भी सवाल उठते हैं कि अगर उन्हें लगा भी कि उमर अब्दुल्ला पर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए तो उन्होंने इसके लिए छह महीने इंतज़ार क्यों किया. इमेज कॉपीरइट Getty Images पीएसए लगाने के लिए उस तारीख़ का इंतज़ार क्यों किया गया जिस दिन प्रिवेंटिव डिटेंशन की एक मियाद ख़त्म हो रही थी. ऐसा इसलिए किया गया ताकि हिरासत में रखे गए उमर अब्दुल्ला के पास दूसरा कोई क़ानूनी रास्ता न बचे. पब्लिक सेफ़्टी एक्ट में ज़मानत नहीं मिलती है और बंदी बनाए गए व्यक्ति को हिरासत में रखने का आधार तो बताया जाता है कि लेकिन गिरफ़्तार व्यक्ति के पास उसे किसी अदालत में चुनौती देने का विकल्प नहीं होता. उमर अब्दुल्ला के मामले में सरकार ने पहले तो छह महीने प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा और जिस दिन वो समय ख़त्म हुआ, सरकार ने एक दूसरा आरोप लगा दिया. इससे सरकार की नियत का पता चलता है. उमर पर पीएसए के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद उनकी बहन ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस की याचिका दायर की. यहां से मामले में दूसरी पेचीदगी शुरू होती है. हैबियस कॉर्पस के मामलों में ऐसा देखा जाता रहा है कि बड़ी अदालतें इन रिट याचिकाओं पर प्राथमिकता के साथ सुनवाई करती हैं. जब कोर्ट से ये कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सरकार ने ग़लत तरीके से भंग की है तो अदालत इसे प्राथमिकता के साथ सुनती है कि ऐसा क्यों हुआ है. इमेज कॉपीरइट Getty Images लेकिन उमर के मामले में कोर्ट ने पहले ये कहा कि तीन हफ़्ते का वक़्त दिया जा रहा है. उमर अब्दुल्ला के वकील ने जब ये कहा कि हैबियस कॉर्पस के मामलों में ऐसी परंपरा नहीं रही है तो कोर्ट की तरफ़ से ये कहा गया कि वे पहले सरकार का जवाब सुनना चाहेंगे. इसके जवाब में ये दलील दी गई कि सरकार को जो कहना था, वो पहले ही कह चुकी है तब अदालत ने सरकार को जवाब देने के लिए दो हफ़्ते की मोहलत दी. अब इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख दो मार्च तय की गई है. इस तरह से हिरासत में रखने की सूरत में किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता, बात रखने की आज़ादी के बुनियादी हक़ का हनन होता है. पीएसए के तहत जब किसी को हिरासत में लिया जाता है तो इस बात की वाजिब आशंका होनी चाहिए कि वो व्यक्ति लोकशांति के लिए ख़तरा है, उससे हिंसा फैल सकती है. ये साबित किया जाने की ज़रूरत है कि ख़तरा कितना वास्तविक है. उमर अब्दुल्ला के मामले में सरकार की तरफ़ से जो दलीलें दी गई हैं, उनमें दम नहीं दिखता. जो उमर अब्दुल्ला कल तक मॉडरेट माने जाते थे, वो अचानक से कैसे पब्लिक ऑर्डर के लिए ख़तरा हो गए. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप और पढो: BBC News Hindi

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मोदी ने कहा- कोरोना से जीवन-मृत्यु की लड़ाई; लॉकडाउन से हुई परेशानी के लिए क्षमा मांगता हूं, सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाएं, इमोशनल डिस्टेंसिंग घटाएं



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लॉकडाउन के चलते बिजली भुगतान में मिली छूट, तीन माह तक बिल का भुगतान न होने पर नहीं कटेगा कनेक्शन



इलाज करने वाले डॉक्टरों की शक्ल तक नहीं देखी, वे भगवान से कम नहीं

कोरोना ने जिंदगियों पर ताला जड़ दिया, जेब खाली, गठरी में दो जोड़ी कपड़े, पैरों में छाले; टूटे मन और ठिठकी उम्मीदों के साथ गांव जा रहे लोग



क्योंकि वो मादर च--था अनपढ़ गवार था तुमसे पूछ के थोड़े जी बंद किया गया है।तुम हो कौन भाई पूछने वाले।दलाल मीडिया। आधर जो भी हो पर अच्छा किया? ये वही लोग है ना जो बोल रहे थे की 370 हाट दी तो कश्मीर को भारत से अलग कर देंगे अब करे. muhammadshaki3 Kis aadhar ? Hang this bastord Thik kiya. बोसड़ी के bbc क्योकि अलगाववादी है अब तक कश्मीर में क्या करवाता आया ये सबको पता है

छुड़वा लेता तू उसे Being Muslim only What a silly question!!!! Simple, he is posing threat to peace in the valley. He is a potential trouble maker. He needs to be kept under watch till things are normalized. Money spinner behind stone pelters and security persons deaths.

दिवालिया प्रक्रिया में जा सकती है वोडाफोन, 10 हजार लोगों की नौकरी पर मंडराया संकटवोडाफोन आइडिया लिमिटेड ने दोहराया है कि कंपनी का भारतीय बाजार में सर्वाइव करना सरकार की तरफ से मिलने वाली राहत पर निर्भर करेगा।

महबूबा से मुहब्बत करने के लिए। As per low which made by his grandfather hahah if dought read carefully.hahaha. बहोत ही घटिया सवाल है आपका.. कुछ लोगो के नज़र बाँध रहने से शांति raheti है तो ये अच्छी बात है.. भारत सरकार को किसी भी अलगाववादी नेता को गिरफ्तार करने से पूर्व BBCWorld (बिकाऊ भांड चेनल) से इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं अपनी हद में रहकर खबरों का प्रसारण करें यह भारत का आंतरिक मामला है देश मे ज़हर घोलने का प्रयास ना करे BBCNews संयुक्त राष्ट्र संघ ध्यान दे UN

Km say km tumarai jahrilai bol to nahy sunnai to nahy padh rhai BBC ko licence kyo diya gaya reporting ka india me MDUsman2019 कानून का मजाक वैसे पत्थर बाज़ी बंद हो गई है ......इसका क्या कारण है क्या कश्मीर में पत्थर बाज़ी होनी चाहिये....? BJP is not even doing 10% of what was Congress doing in their 70-80 era . So just sit back and chill

सेना में कमांड पोस्ट पर महिलाओं की तैनाती पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकाराकेंद्र सरकार ने कहा था कि भारतीय सैन्य अधिकारी महिलाओं को अपने समकक्ष स्वीकार नहीं कर पाएंगे. Kindly do not weaken the male soldiers and officers by increasing their lust.

केवल मुस्लिम नेता के कारण Anti India media ब्रिटिश सरकार के कानून के अनुसार 370हटने के बाद वो भारत मै पूर्ण रूप से मिल गया BBC walo ki bhehan ko bhagaa ke legyaa BC सरकार तो बताने से रही यह प्रश्न जनता से पूछ रहे हैं या आप भी इसके बारे में कुछ बताएंगे क्यों बंद किया गया जिस आधार पर प्रगया ठाकुर और बाबू बजरंगी जैसो को छोड़ा गया है।

इस बी बी सी वाले के दिमाग मे कुछ कीड़ा कुदबुदाता रहता है क्या...? Modi ji ki marji se इतने जाहिल हो? या फिर हरामजादों का पक्ष लेते लेते ऐसे हो गए? गधे से गाण्ड मरवा रहा था .. .. भौसड़ी का बकरीचोद 😂😂😂😂

कश्मीर पर पाकिस्तान की हां में हां मिलाने पर भारत ने तुर्की को लगाई लताड़विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक तुर्की की तरफ से बार बार पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिस तरह से खुलेआम जायज ठहराया जा रहा है हम उसे पूरी तरह से खारिज करते हैं। Government should stop all link to Turkey & Malaysia पेलो बिना कंडम के इन आसमानी किताब वालों को अतिउत्तम कदम 👌🌷 वैसे तुर्की की नीति ही है दूसरे देशों के आंतरिक विवाद/विषय पर हस्तक्षेप करना 🤣🤣🤣

मौलानाओं की बहन चोर के आरोप में। 😃😃😃😃 एक मुस्लिम होने के आधार पर आतंकवादी है इसलिए विदेशी समाचार चैनलों की एक हद है उसके आगे जाकर अपनी औकात मत भूलो। Teri ,,,,, ki Ye sala to atnkwadi hai goli maro Paap ke adhar par Sirji Desh ke Gaddaro ko Kya Kiya Jana chahiye 370 के नाम पे धोखा है बीबीसी वालों को मुल्लों को लेकर फटती क्यूं है क्यूं चाटते फिरते हैं मुल्लों की

शाहीन बाग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: पढ़िए कोर्टरूम में जिरह की प्रमुख बातेंअदालत ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त किया है जिन्हें प्रदर्शनकारियों से बात करके प्रदर्शनस्थल It’s a BIG SHAME .... How abou COMMUTING PEOPLE SUFFERING EACH DAY .... It’s a HOSTILE Activity within the Nation Capital

रंडवा होने के कारण, जा के पूछ लो Usko bandh karne se Rajy me sampurn SHANTI hai. Isi vajah se Jail me bandh kiya hai. Ye barabar hai. ek hitlar or uski oulaade itna khus ho rahi hai ki poocho mat hitlar bhi logo ko mar kar ya jail me band karke aise hi khus hota tha per kiya hitlar aaj jinda hai nhi ek din ye is hitlar ka haal bhi baisa hi hoga

पाकिस्तान से तालुक रखने के कारण। Apko bhi band Hona h kya India me videshi channel Tuje yahi nhi pta ko kis baat ki news agency h :. Band kar do Khopche me aa fir batata hu कश्मीरी हे मुसलमान हे इत्ता काफ़ी नही हे क्या -गोरखपुर मठाधीशम श्री उमर अब्दुल्ला हो या मुफ्ती महबूबा इनका कुछ और यह है कि कश्मीरियों के साथ गद्दारी करते हैं और बीजेपी के शादी के मिलकर सरकार बनाते हैं यह कुर्सी पुत्र हैं

जैसे डॉ कफील को

कर्नाटक : विधानसभा में सीएए के समर्थन में प्रस्ताव पेश करती सकती है सरकारकर्नाटक की भाजपा सरकार विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में प्रस्ताव पेश कर सकती है। CAA KarnatakaAssembly BJP4Karnataka

NSA इसका आधार ही फर्जी है । नया बनवाना पड़ेगा😎 सत्य से नफरत है उन्हें अहिंसा से नफरत है उन्हें जो उनकी खिलाफत करें हर एक इंसान से नफरत है उन्हें। जय भारत उर्दू नाम की वजह से tum besharm bbc hindi ,,pakistan ka agenda chalane waalo,,tumhare mata,pita,britein me hai waha jao bacho jao ,,bbc hindi bharat chhodo..😂😂😂

बीबीसी हिंदी दंगा फैक्ट्री है और ये लोग देश में आगजनी करने वालों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं ये लोग देशद्रोही हैं ये इसलामिक आतंकवादियों का देश बनाना चाहते है लेकिन मीडिया वालों याद रखना कि तुम्हारे बच्चे इन्ही दंगाईयो के पत्थर से मरेगे ये क्या 'उमर अब्दुल्ला' नाम होना काफी नही है गिरफ्तारी के लिए।

अपने दादा की लगायी गयी धारा का आन्न्द लेने के लिये ........पता चले कैसे पंडितो को इनकी तीन पीढियों ने नेहरू गॉधी की तीन पीढियो के साथ मिलकर तडफाया ..रेप करवाये ..जवान भाई व मॉबाप पति के सामने ..तुम्हारे चैनल के ऑकडे मनी कलक्सन के साथ बदलते रहते है क्या Lgta hai bbc ki earning band ho rhi hai ... बाप-बेटे को मौका पाकर कश्मीर सरकार पेल देती है 😜😜 थोड़ा बुढ़ापे का ख्याल रखें 😀😀

जम्मू कश्मीर के सोशल मीडिया यूजर्स पर क्यों लगा UAPA, जानें कितना सख्त है कानूनयूएपीए (UAPA) आतंकवाद और नक्सल से लड़ने के लिए बनाया गया सख्त कानून है. जम्मू कश्मीर में सोशल मीडिया (Social Media) के गलत इस्तेमाल के बाद पुलिस ने इस एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.. | knowledge News in Hindi - हिंदी न्यूज़, समाचार, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी

SECOND PRIME MINISTER BAN RAHA THA OKAT DEKA NAE KO Koe jarurat nahi addar ka , kuki kagaj ham nahi dikhayege,sidhe band karo Tere sotele abbu he is liye .... 🤪 PSA दँगा न करवाने Funding Terrorism muslim h isliye..... simple jwaab h......... जिस दिन ये लोग घोषणा कर देंगे कि धारा 370 और 35A को तलाक दे दिया है इससे मेरा कोई वास्ता नही है उस दिन रिहा हो जाएंगे।

Highly draconian and marshal law type behaviour of democratically elected Govt against thier own Citizen Kashmir is example of Hitler Germany and Edi Ameen Uganda and melesovichs serbia i strongly conddmn Indian Govt for thier violation of fundamenatl and human rights in kashmir इसको इसकी औकात दिखाने ओर अक्कल ठिकाने लाने के लिए यह ट्रीटमेंट जरूरी है ।

तैनूँ की ?

Jis adhar par America ne iamsrk ki paint utrwai thi Terrorist sympathizers have no right. This is not the time when Congress has the sympathy to these double standard people. वो हिन्दुस्तानी नहीं है। लोगों को भड़काने के जुर्म में देश विरोधी गतिविधियों के जुर्म में Uski ki gaan... mein khujali ho rahi thi.,😉 Isliye

Jis addhar pe iske grand father ko rakha tha.... Hitlerizm adhaar pe इसके लिये किसी आधार की जरुरत नही है। समस्या की जड ये और इनके पप्पा ही है । के हिन्दुओ के कत्ल के गुनाह में ओर देश द्रोह में ओर ओर बहुत कुछ उसके जीजा पायलेट का फोन आया था,😑🤣🤣🤣

NSA बिल्कुल ऐसे ही जैसे डॉ कफिल खान को बंद कर दिया गया है 😡 Desh drohiyo ko band na kare to aur kya kare. मेहबूबा,उमर,ओर फारूक को बंध करने के बाद कश्मीर में आतंक बंध हो / कम हो गया यही तो कारण हे, तेरी गांड में दम है तो ये भी पूछ कश्मीरी पंडितों को किस आधार पर मार भगाया गया था है दम भोसडी के Indian Muslim hone ke liye

तेरी मा चोदेने के आरोप में बंदी बनाया हैं वाले दल्ले कही के भांड भोसडी का तेरे बाप का साला लगता है क्या PSA. इस कानून को उमर अब्दुल्ला के दादाजी ने जम्मू कश्मीर में लागू किया था। इस कानून का प्रयोजन जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा समृद्धि करना है। फास्सिटों को कैद करने आधार नही चाहिए ! मौलिक अधिकारों का इतना हनन करने के बाद दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र कहना हास्यास्पद लगता है जिनके साथ(मुफ्ती) सरकार चलाये और उसीकी गिरफ्तार? मोदी औपनिवेशिक शासन काल की याद दिला रहें हैं..! दमन कर शासन संभव तो अंग्रेज भारत क्यों छोड़ते...?

उन्होंने भारत का नाम रोशन किया है इसलिए

Aap questions poochne ki bajay reportong kiya karo ये दो कोढ़ी का विदेशी मीडिया बतायेगा हमें। चुप आतंकवादी चैनल Sirf aur sirf julm barbariyat ke aadhar par lekin ai jalimo sun lo tumhara Julmjaroor khatam hoga aur insaf aman jaroor qayam higa बीजेपी जिससे डरती है उसको बंद कर देती है 'आधार' कार्ड नहीं था 🤣🤣😂

इसलिए के वो कश्मीर की आवाज़ है, जो भारत का अभिन्न अंग है, 😊 Desh se gddari ke achmy jurm me देश द्रोही हैं और क्या साफ सुथडी बात है आप भी उसी आधार को सपोर्ट कीजिए आपको भी बंद कर दिया जाएगा। Tere jese vo bhi jaichand he

उनको सोशल मीडिया पर देश विरोधी ट्वीट के द्वारा धमकी के लिए किया गया है। और ऐसे ही रहेंगे। Isliye ki woh desh ke liye awaz uthayega ऐसे तो बहुत से सवाल है कि डॉक्टर कफील को किस आधार पर बंद किया गया या फिर ये कहिए भारत के अल्पसंख्यकों से ही शांति भंग का खतरा रहता है हमेशा मौजूदा सरकार को । Wo KASHMIR k hai isliye clean answer

Is waja se Modi ka kya hai kisi bhi aadhar pe kar sakta hai, aur aadhar na ho to rashan card pe bhi kar sakta hai.



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