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Uttar Pradesh, Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश: राजनीतिक विरोधियों पर भारी पड़ रहे हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्रिमंडल विस्तार पर भी संशय!

उत्तर प्रदेश: राजनीतिक विरोधियों पर भारी पड़ रहे हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्रिमंडल विस्तार पर भी संशय!

02-06-2021 17:21:00

उत्तर प्रदेश: राजनीतिक विरोधियों पर भारी पड़ रहे हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्रिमंडल विस्तार पर भी संशय!

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपना दमखम दिखाया है और माना जा रहा है कि इसके चलते राज्य सरकार के मंत्रिमंडल

बताते हैं मख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अरविंद कुमार शर्मा मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाने के लायक भी नहीं नजर आ रहे हैं। मौजूदा दोनों उप मुख्यमंत्रियों (दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य) से फिलहाल योगी को एतराज नहीं है और वह उनकी भूमिका में भी बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में योगी के तमाम शुभ चिंतक मौजूद हैं। उन्हें भी लग रहा है कि पिछले दो सप्ताह में जो कुछ हुआ, उसका तरीका थोड़ा अलग होना चाहिए था। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के लखनऊ प्रवास, पार्टी-संगठन पर चर्चा तथा प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, भाजपा के संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ मंत्रणा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री को विश्वास में लेना चाहिए था। इससे एक गलत संदेश गया है।

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विरोधियों को फिर भी है थोड़ी उम्मीदउत्तर प्रदेश में भाजपा में एक खेमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज के तरीके से काफी नाराज है। इसका कहना है कि राज्य में नौकरशाही का बोलबाला है। भाजपा कार्यकर्ताओं और संगठन के लोगों की अनदेखी हो रही है। कार्यकर्ताओं में भी एक वर्ग है, जो मंत्रियों विधायकों के व्यवहार से तंग है। मंत्रियों में भी एक वर्ग है, जिसे लग रहा है कामकाज और कोरोना के कुप्रबंधन के चलते 2022 का विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती बन सकता है। इस खेमे के मंत्रियों को अभी भी प्रदेश में सुधार की दिशा में बड़ा प्रयास होने की उम्मीद है। मध्य उत्तर प्रदेश से आने वाले एक मंत्री ने बताया कि संगठन मंत्री बीएल संतोष ने कई मंत्रियों और नेताओं को बुलाकर उनसे अकेले में मंत्रणा की है। इसलिए इस कवायद को हल्के में नहीं लेना चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री के कामकाज की तारीफ करने वाले वर्ग के चेहरे पर फिर मुस्कान लौट आई है। हालांकि यह वर्ग पहले से मानकर चल रहा था कि ढोल चाहे जितना जोर से बजाया जाए, लेकिन कुछ होने वाला नहीं है।

एक नजर बीएल संतोष के ट्वीट परभाजपा के संगठन मंत्री बीएल संतोष ने उत्तर प्रदेश सरकार के कोरोना से निपटने को लेकर उसकी पीठ थपथपाई है। इस ट्वीट के तमाम माने निकाले जा रहे हैं। एक अर्थ यह भी है कि प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले कोई भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ किसी मुहिम को न चलाए। गलत मंशा न पाले। विरोधियों के अनुसार कुछ इसके उलट भी हो सकता है। इसलिए समय का इंतजार करना चाहिए। खैर, बीएल संतोष ने अपने ट्वीट में कहा कि है कि पांच सप्ताह के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को कोरोना संक्रमण के मामले 93 फीसदी तक कम करने में सफलता मिली। इसे याद रखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ से अधिक है। इसके सामानांतर डेढ़ करोड़ जनसंख्या और एक नगर निगम वाले राज्य के मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर पाए। इस तरह से देखें तो योगी ने अपनी जिम्मेदारी प्रभावी तरीके से निभाई। बीएल संतोष के इस ट्वीट को लोगों की नाराजगी को संतुलित करने, केन्द्र और राज्य के बीच में अच्छा वातावरण बनाने तथा पार्टी और कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित होने से बचाने के तौर पर देखा जा रहा है। headtopics.com

क्या मुख्यमंत्री किसी की नहीं सुनते?ऐसा कदापि नहीं है। लेकिन योगी के बारे में आम है कि वह अपना पक्ष भी मजबूती से रखते हैं। मसलन केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद योगी कुछ दिनों तक असहज थे। इसकी एक बड़ी वजह उनके हर दौरे में दोनों उप मुख्यमंत्रियों का दौरा तय होना भी था। योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर अपनी नाराजगी जताई और सफल हुए। इसी तरह से योगी आदित्यनाथ ने केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर पार्टी संगठन और मंत्रिमंडल तक अपने कामकाजी व्यवहार से साफ किया कि वह रबर स्टांप मुख्यमंत्री नहीं हैं। वह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाने आए हैं और इसे पूरी मेहनत, ईमानदारी से निभाएंगे।

मुख्यमंत्री के करीबी बताते हैं कि उन्हें केन्द्र द्वारा मुख्यमंत्री बनाने का अहसास कराना अखरता है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पद को पाने के पहले पार्टी के कोई पदाधिकारी नहीं थे। उनके पास कोई बड़ा पद, अनुभव भी नहीं था। जबकि केशव प्रसाद मौर्य के पास उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष का प्रभार था। लेकिन वह उपमुख्यमंत्री बने और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री। योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने में संघ का बड़ा योगदान रहा। इसलिए योगी के समर्थक यह अहसास कराने से नहीं चूकते कि प्रधानमंत्री मोदी के बाद पार्टी में कोई चेहरा केवल मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ही हैं, इनका विकल्प नहीं है।

योगी के व्यक्तित्व को भी समझना होगागोरक्षा पीठाधीश्वर स्व. महंत अवैद्यनाथ के शिष्य योगी आदित्यनाथ आरंभ से ही अपने धुन के पक्के हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके इस व्यक्तित्व में कोई बदलाव नहीं आया। मुख्यमंत्री स्वाभिमानी भी हैं। इसे एक उदाहरण से समझना चाहिए। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले लखनऊ के संक्षिप्त प्रवास पर थे। लेकिन लखनऊ आने के पहले वह केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य के साथ बैठक कर चुके थे। कहीं न कहीं यह बात योगी को खटकी। बताते हैं योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी तरफ से दत्तात्रेय होसबोले से मिलने की कोई पहल नहीं की। वह लखनऊ से मिर्जापुर के दौरे पर चले गए। मिर्जापुर से गोरखपुर और अपने तय कार्यक्रम के अनुसार व्यस्त हो गए। सूत्र बताते हैं कि दत्तात्रेय होसबोले ने मुख्यमंत्री की व्यस्तता देखकर एक दिन और प्रवास किया। इसके बाद भी कोई संकेत न मिलने पर वह लौट आए।

क्या कोरोना कुप्रबंधन के लिए योगी सरकार ही दोषी है?उत्तर प्रदेश के एक मंत्री कहते हैं कि जिस तरह से तमाम नगरों में कोरोना संक्रमण बढ़ने पर हाहाकार देखा गया, उसे क्या कहा जाए? वह साफ कहते हैं कि अगर कुछ न किया गया तो क्षेत्र में जाने पर जनता की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। लेकिन इसके सामानांतर टीम योगी का तर्क दूसरा है। उसका कहना है कि उत्तर प्रदेश में कोई सुविधा और संसाधन रातों-रात नहीं खड़ा किया जा सकता। जब निष्पक्ष आकलन किया जाएगा तो सबको दिखाई पड़ेगा कि अप्रैल के तीसरे सप्ताह से योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बहुत प्रभावी तरीके से कदम उठाया है। दबी जुबान से यह टीम केन्द्र पर दोष मढ़ने में पीछे नहीं रहती। इसका कहना है कि केन्द्र को भी अंदाजा नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर कितनी घातक होगी? कोई चेतावनी या सलाह भी तो जारी नहीं हुई थी। जो जारी होती है, उसका पालन करने में उत्तर प्रदेश नंबर एक पर रहता है। headtopics.com

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विस्तारभाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों का दरवाजा खोल दिया है, लेकिन पार्टी के एक धड़े को निराशा हाथ लगती नजर आ रही है। में फेरबदल की संभावना धूमिल नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाने वाले भाजपा के कुछ विधायक, राज्य सरकार के मंत्री और नेता स्थिति देखकर फिर 'ऑफ द रिकार्ड' की शैली में आ गए हैं। वहीं केन्द्र सरकार से जनवरी महीने में इस्तीफा देकर गए विधान परिषद सदस्य अरविंद कुमार शर्मा को बड़ी कुर्सी मिलने पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

विज्ञापनबताते हैं मख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अरविंद कुमार शर्मा मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाने के लायक भी नहीं नजर आ रहे हैं। मौजूदा दोनों उप मुख्यमंत्रियों (दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य) से फिलहाल योगी को एतराज नहीं है और वह उनकी भूमिका में भी बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में योगी के तमाम शुभ चिंतक मौजूद हैं। उन्हें भी लग रहा है कि पिछले दो सप्ताह में जो कुछ हुआ, उसका तरीका थोड़ा अलग होना चाहिए था। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के लखनऊ प्रवास, पार्टी-संगठन पर चर्चा तथा प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, भाजपा के संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ मंत्रणा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री को विश्वास में लेना चाहिए था। इससे एक गलत संदेश गया है।

विरोधियों को फिर भी है थोड़ी उम्मीदउत्तर प्रदेश में भाजपा में एक खेमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज के तरीके से काफी नाराज है। इसका कहना है कि राज्य में नौकरशाही का बोलबाला है। भाजपा कार्यकर्ताओं और संगठन के लोगों की अनदेखी हो रही है। कार्यकर्ताओं में भी एक वर्ग है, जो मंत्रियों विधायकों के व्यवहार से तंग है। मंत्रियों में भी एक वर्ग है, जिसे लग रहा है कामकाज और कोरोना के कुप्रबंधन के चलते 2022 का विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती बन सकता है। इस खेमे के मंत्रियों को अभी भी प्रदेश में सुधार की दिशा में बड़ा प्रयास होने की उम्मीद है। मध्य उत्तर प्रदेश से आने वाले एक मंत्री ने बताया कि संगठन मंत्री बीएल संतोष ने कई मंत्रियों और नेताओं को बुलाकर उनसे अकेले में मंत्रणा की है। इसलिए इस कवायद को हल्के में नहीं लेना चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री के कामकाज की तारीफ करने वाले वर्ग के चेहरे पर फिर मुस्कान लौट आई है। हालांकि यह वर्ग पहले से मानकर चल रहा था कि ढोल चाहे जितना जोर से बजाया जाए, लेकिन कुछ होने वाला नहीं है।

एक नजर बीएल संतोष के ट्वीट परभाजपा के संगठन मंत्री बीएल संतोष ने उत्तर प्रदेश सरकार के कोरोना से निपटने को लेकर उसकी पीठ थपथपाई है। इस ट्वीट के तमाम माने निकाले जा रहे हैं। एक अर्थ यह भी है कि प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले कोई भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ किसी मुहिम को न चलाए। गलत मंशा न पाले। विरोधियों के अनुसार कुछ इसके उलट भी हो सकता है। इसलिए समय का इंतजार करना चाहिए। खैर, बीएल संतोष ने अपने ट्वीट में कहा कि है कि पांच सप्ताह के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को कोरोना संक्रमण के मामले 93 फीसदी तक कम करने में सफलता मिली। इसे याद रखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ से अधिक है। इसके सामानांतर डेढ़ करोड़ जनसंख्या और एक नगर निगम वाले राज्य के मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर पाए। इस तरह से देखें तो योगी ने अपनी जिम्मेदारी प्रभावी तरीके से निभाई। बीएल संतोष के इस ट्वीट को लोगों की नाराजगी को संतुलित करने, केन्द्र और राज्य के बीच में अच्छा वातावरण बनाने तथा पार्टी और कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित होने से बचाने के तौर पर देखा जा रहा है। headtopics.com

In five weeks,'s Uttar Pradesh reduced the new daily case count by 93% ... Remember it’s a state with 20+ Cr population . When municipality CMs could not manage a city of 1.5Cr population , Yogiji managed quite effectively .— B L Santhosh (@blsanthosh)

June 1, 2021क्या मुख्यमंत्री किसी की नहीं सुनते?ऐसा कदापि नहीं है। लेकिन योगी के बारे में आम है कि वह अपना पक्ष भी मजबूती से रखते हैं। मसलन केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद योगी कुछ दिनों तक असहज थे। इसकी एक बड़ी वजह उनके हर दौरे में दोनों उप मुख्यमंत्रियों का दौरा तय होना भी था। योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर अपनी नाराजगी जताई और सफल हुए। इसी तरह से योगी आदित्यनाथ ने केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर पार्टी संगठन और मंत्रिमंडल तक अपने कामकाजी व्यवहार से साफ किया कि वह रबर स्टांप मुख्यमंत्री नहीं हैं। वह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाने आए हैं और इसे पूरी मेहनत, ईमानदारी से निभाएंगे।

देसी घी के चूरमे से होगा रवि दहिया का वेलकम: ओलिंपिक में सिल्वर जीतने के बाद मां बोली-अगली बार जरूर सोना ही लेकर आएगा मेरा लाल टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम, कल कहां-कहां से हैं मेडल की उम्मीदें? ओलिंपिक मेडलिस्ट पर इनामों की बौछार: मेडल जीतकर मालामाल हुए भारतीय खिलाड़ी, सरकारी नौकरी से लेकर मिला करोड़ों रुपए का प्राइज

मुख्यमंत्री के करीबी बताते हैं कि उन्हें केन्द्र द्वारा मुख्यमंत्री बनाने का अहसास कराना अखरता है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पद को पाने के पहले पार्टी के कोई पदाधिकारी नहीं थे। उनके पास कोई बड़ा पद, अनुभव भी नहीं था। जबकि केशव प्रसाद मौर्य के पास उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष का प्रभार था। लेकिन वह उपमुख्यमंत्री बने और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री। योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने में संघ का बड़ा योगदान रहा। इसलिए योगी के समर्थक यह अहसास कराने से नहीं चूकते कि प्रधानमंत्री मोदी के बाद पार्टी में कोई चेहरा केवल मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ही हैं, इनका विकल्प नहीं है।

योगी के व्यक्तित्व को भी समझना होगागोरक्षा पीठाधीश्वर स्व. महंत अवैद्यनाथ के शिष्य योगी आदित्यनाथ आरंभ से ही अपने धुन के पक्के हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके इस व्यक्तित्व में कोई बदलाव नहीं आया। मुख्यमंत्री स्वाभिमानी भी हैं। इसे एक उदाहरण से समझना चाहिए। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले लखनऊ के संक्षिप्त प्रवास पर थे। लेकिन लखनऊ आने के पहले वह केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य के साथ बैठक कर चुके थे। कहीं न कहीं यह बात योगी को खटकी। बताते हैं योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी तरफ से दत्तात्रेय होसबोले से मिलने की कोई पहल नहीं की। वह लखनऊ से मिर्जापुर के दौरे पर चले गए। मिर्जापुर से गोरखपुर और अपने तय कार्यक्रम के अनुसार व्यस्त हो गए। सूत्र बताते हैं कि दत्तात्रेय होसबोले ने मुख्यमंत्री की व्यस्तता देखकर एक दिन और प्रवास किया। इसके बाद भी कोई संकेत न मिलने पर वह लौट आए।

क्या कोरोना कुप्रबंधन के लिए योगी सरकार ही दोषी है?उत्तर प्रदेश के एक मंत्री कहते हैं कि जिस तरह से तमाम नगरों में कोरोना संक्रमण बढ़ने पर हाहाकार देखा गया, उसे क्या कहा जाए? वह साफ कहते हैं कि अगर कुछ न किया गया तो क्षेत्र में जाने पर जनता की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। लेकिन इसके सामानांतर टीम योगी का तर्क दूसरा है। उसका कहना है कि उत्तर प्रदेश में कोई सुविधा और संसाधन रातों-रात नहीं खड़ा किया जा सकता। जब निष्पक्ष आकलन किया जाएगा तो सबको दिखाई पड़ेगा कि अप्रैल के तीसरे सप्ताह से योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बहुत प्रभावी तरीके से कदम उठाया है। दबी जुबान से यह टीम केन्द्र पर दोष मढ़ने में पीछे नहीं रहती। इसका कहना है कि केन्द्र को भी अंदाजा नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर कितनी घातक होगी? कोई चेतावनी या सलाह भी तो जारी नहीं हुई थी। जो जारी होती है, उसका पालन करने में उत्तर प्रदेश नंबर एक पर रहता है।

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आज की पॉजिटिव खबर: गुजरात के किसान ने बंजर जमीन पर 10 साल पहले ऑर्गेनिक खजूर लगाए, अब हर साल 35 लाख रुपए की कमाई

जहां तापमान ज्यादा हो, पानी की कमी हो, दूसरी फसलों की खेती न के बराबर होती हो, उन जगहों पर ऑर्गेनिक खजूर की खेती की जा सकती है। इसमें लागत भी कम होगी और बढ़िया आमदनी भी होगी। गुजरात के पाटन जिले के रहने वाले एक किसान निर्मल सिंह वाघेला ने इसकी पहल की है। करीब 10 साल पहले उन्होंने अपनी जमीन के बड़े हिस्से में ऑर्गेनिक खजूर के प्लांट लगाए थे। अब वे प्लांट तैयार हो गए हैं और उनसे फल निकलने लगे हैं। इ... | Farmer of Gujarat started farming of organic dates on barren land, earning Rs 35 lakh in first year itself

जय श्री राम ❤️🙏 Koi nahi hai takkar me Kyon pade ho chakkar me Jai ho mahraj g इस समय प्रदेश में योगी जी का कोई विकल्प नहीं ।भाजपा को ऐसा सोचना भी उसके पतन का प्रारम्भ होगा । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आएगी जनता की बारी। फैसला तो जनता को करना है। भारतीय जनता पार्टी के अंदर क्या फैसला होता है अंदरूनी मामला। फैसला तो जनता जनार्दन का अंतिम होता है। वह अभी बाकी है। वह तो चुनाव के वक्त होगा।

सबको पता है... ढा़ई आदमी और मीडिया के कुछ लोग मिलकर एक अयोग्य मुख्यमंत्री को हीरो बनाने में लगे हैं! जनता माफ नहीं करेगी! yadavakhilesh बाइस_में_बाइसिकल योगी आदित्यनाथ जी महाराज की जय हो

पाकिस्तान में पत्रकार और न्यूज एंकर हामिद मीर पर गिरी गाज, टाक शो पर लगी रोकपाकिस्तान में एक स्वतंत्र पत्रकार पर जानलेवा हमले के बाद देश के वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज एंकर हामिद मीर के टीवी पर उनके चर्चित कैपिटल टाक शो को भी रोक दिया गया है। सरकार के दबाव में जियो न्यूज ने हामिद मीर को छुट्टी पर भेज दिया है। ShirazHassan मुझे समझ नही हामिद मीर जैसे 2 कौड़ी के आतंकी मुल्क के पत्रकारों को भारतीय मीडिया इतनी तवज्जो क्यों देता है जो हामिद मीर भारत के खिलाफ प्रोपोगेंडा चलाता है उसकी न्यूज़ देश मे शर्म की बात Rabbis kr

01 जून : आज दिनभर इन खबरों पर बनी रहेगी नजर, जिनका होगा आप पर असरहर रोज हम अलग-अलग खबरों से दो-चार होते हैं। हमारी आंखों के सामने से कई सारी खबरें गुजरती हैं। इनमें से कुछ ऐसी अहम खबरें RVUNL के Ope/Tech. 3rd के रिक्त पदो को नौसिखियो से नही बल्कि निगम से ही 3 वर्ष प्रशिक्षण प्राप्त कुशल अनुभवी युवा बेरोजगारो से अप्रेन्टिस एक्ट 1961 धारा 22 उप धारा 1 के तहत मैरिट से नियुक्ति दिजिये RahulGandhi RajCMO ashokgehlot51 DrBDKallaINC टेक्निकल_हेल्पर_भर्ती_जारी_करो

12वीं की परीक्षा पर आज आना है फैसला, पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बिगड़ी तबीयत!12वीं की परीक्षा पर आज आना है फैसला, पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बिगड़ी तबीयत! कोरोना के बाद की जटिलताओं के चलते ले जाए गए AIIMS

कोहली के शाकाहारी होने पर प्रश्नचिह्न, अंडा खाने की बात पर विराट का उड़ा मजाकविराट कोहली ने अक्टूबर 2019 में कहा था कि वह पूरी तरह से शाकाहारी एथलीट हैं। हालांकि, Vegan डाइट में केवल उन्हीं खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है जो पूरी तरह से प्राकृतिक हों और जो उत्पाद जानवरों से जुड़े हुए नहीं हों।

नारदा मामलाः SG के सवाल पर बोला HC- वर्चुअल सुनवाई में जज पर कैसा दबावजस्टिस आईपी मुखर्जी ने कहा कि संविधान के तहत भी ये आजादी लोगों को दी गई है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन के जरिए वो अपनी बात रख सकते हैं। ऐसे में आम आदमी ये बात कैसे मान सकता है कि इस तरह के विरोध से कोई भी कोर्ट प्रभावित हो सकती है। न्याय होता सा दिखाई देना चाहिए

आयातित ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर पर आईजीएसटी को असंवैधानिक क़रार देने के आदेश पर रोकसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 21 मई के आदेश के ख़िलाफ़ वित्त मंत्रालय की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह रोक लगाई. दिल्ली हाईकोर्ट के व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लोगों द्वारा आयातित ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए जा रहे एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) को असंवैधानिक क़रार दिया गया था.