इंजीनियरिंग सर्टिफ़िकेट के लिए दलित लड़की कर रही है मज़दूरी - BBC News हिंदी

इंजीनियरिंग सर्टिफ़िकेट के लिए दलित लड़की कर रही है मनरेगा में मज़दूरी

27-01-2021 13:51:00

इंजीनियरिंग सर्टिफ़िकेट के लिए दलित लड़की कर रही है मनरेगा में मज़दूरी

उन्होंने इंजीनियरिंग डिप्लोमा की अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है लेकिन फ़ीस नहीं देने की वजह से कॉलेज ने सर्टिफ़िकेट देने से मना कर दिया.

समाप्त'मनरेगा' में एक दिन के काम के लिए 207 रुपये मिलते हैं हालांकि अभी तक उन्हें या उनकी बहनों को कोई मेहनताना नहीं मिला है.मदद की पेशकशइमेज स्रोत,COURTESY - SANDEEP SAHUकाम का मेहनताना भले न मिला हो लेकिन रोज़ी की ख़बर मीडिया की सुर्ख़ियों में आने के बाद अब देशभर से उनके लिए मदद की पेशकश आने लगी हैं.

गंगूबाई काठियावाड़ीः जिनके क़िस्से में हैं करीम लाला भी, नेहरू भी - BBC News हिंदी खट्टर सरकार से समर्थन वापस लेने वाले निर्दलीय MLA के 30 ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा मध्य प्रदेश: हिन्दू महासभा के नेता कांग्रेस में शामिल ! कमलनाथ भी थे मौजूद

रोज़ी ने बताया कि, "अभी तक उन्हें ज़िला प्रशासन की ओर से 30,000, अभिनेत्री रानी पंडा की ओर से 25, 000 और चेन्नई के अशोक नाम के किसी व्यक्ति की ओर से 10,000 रुपये मिल चुके हैं. और भी कई लोगों ने मदद की पेशकश की है और अकाउंट नंबर लिया है."पता चला है कि मदद की पेशकश करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के एक जज भी शामिल हैं.

ज़ाहिर है रोज़ी की मदद के लिए जितनी रक़म की पेशकश हो चुकी है या आने वाले दिनों में होने वाली है, वह उनकी आवश्यकता से कहीं ज़्यादा है. तो कॉलेज का देय 24,000 रुपये चुकाने के बाद जो रक़म बचेगी, उसका रोज़ी क्या करेंगी?वो कहती हैं, "मैं सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहती हूँ. जो पैसे आएंगे, उसी के लिए ख़र्च होंगे. वैसे तो कुछ कॉलेज हैं जहां शायद मुझे स्कॉलरशिप मिल जाए. लेकिन मैं किसी अच्छे इंस्टीट्यूट से बीटेक करना चाहती हूँ, जहां प्रैक्टिकल सहित सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हों." headtopics.com

इमेज स्रोत,COURTESY - SANDEEP SAHUबीटेक करने के बाद रोज़ी सरकारी नौकरी करना चाहती हैं.रोज़ी के पिता मिस्त्री का काम करते हैं जबकि उनकी मां खेतों में मज़दूरी करती हैं. उनके माता-पिता के पास साधन नहीं है कि वे रोज़ी को या अपने दूसरे बच्चों को उच्च शिक्षा मुहैया करवा पाएं. रोज़ी पाँच बहनों में सबसे बड़ी हैं. उनसे छोटी बहन बीटेक कर रही है और उससे छोटी प्लस टू की छात्रा है.

यह भी पढ़ें:नवदीप कौर: मज़दूरों के लिए आवाज़ उठाने वाली कार्यकर्ता पुलिस हिरासत मेंउनसे छोटी दो बहनों में एक आठवीं कक्षा में पढ़ती है जबकि सबसे छोटी पाँचवीं कक्षा में. इसलिए उन पर परिवार की ज़िम्मेदारी भी है. ऐसे में अपनी पढ़ाई के लिए वे अपने माता-पिता से किसी प्रकार की सहायता की उम्मीद नहीं रख सकती थीं.

क्या कोई दूसरा विकल्प नहीं थाइमेज स्रोत,COURTESY - SANDEEP SAHUलेकिन क्या उन्हें मज़दूरी के अलावा कोई और काम जैसे कि ट्यूशन देना नहीं सूझा?इसके जवाब में रोज़ी कहती हैं, "मेरी छोटी बहन ट्यूशन किया करती थी. लेकिन एक तो गांव में ट्यूशन से अधिक पैसे नहीं मिलते. ऊपर से उसे ठीक से, समय पर पैसे नहीं मिलते थे. वैसे भी गांव में पहले से ही कई लोग मौजूद हैं जो पेशे से शिक्षक हैं. उन्हें छोड़कर कोई हमसे ट्यूशन क्यों पढ़ेगा?"

यह भी पढ़ें:भारत में महिलाओं के घरेलू कामकाज का मेहनताना अगर होता तो कितना?रोज़ी मानती हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. इसलिए सिर पर मिट्टी ढोने में उन्हें कभी शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई.मैंने रोज़ी से पूछा कि उन्होंने कॉलेज के इस रवैये के ख़िलाफ़ राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद का दरवाज़ा क्यों नहीं खटखटाया, तो उनका कहना था, "मुझे पता नहीं था." headtopics.com

नेपाल में ओली बने रहेंगे, प्रचंड आएँगे या फिर नया समीकरण बनेगा - BBC News हिंदी प्रधानमंत्री ने सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर दिया जोर, कहा- सरकार का काम नहीं है बिजनेस करना LIVE: पुडुचेरी में बोले PM मोदी- यहां के पूर्व सीएम लोगों की नहीं कांग्रेस हाईकमान की सुनते थे

रोज़ी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों, लेकिन अगर निष्ठा और लगन हो तो आदमी कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकता है. और पढो: BBC News Hindi »

'एक लड़की को पिलाना चाहता था जहर', देखें उन्नाव केस के बड़े खुलासे

उन्नाव में दलित परिवार की दो लड़कियों की संदिग्ध मौत के मामले में यूपी पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मुख्य आरोपी का नाम विनय उर्फ लंबू है. वहीं दूसरा आरोपी विनय का दोस्त है जो नाबालिग है. पुलिस ने बताया कि विनय एक लड़की से प्रेम करता था. उसने उसके सामने प्रस्ताव भी रखा था. लेकिन उसने ठुकरा दिया.

Yeh hai 2021 bharat😔 SThakur101 obsessed with the word 'Dalit' !! I have seen many other caste girls n women working to keep their families afloat! अपना भारत, निर्धनों का भारत कब तक बदलेगा ये आम बात है जी हज़ारों की संख्या में ऐसे लोग है जिनको जानता हूं। जिन्होंने रोजी मजदूरी, हमाली वाली, करके अपना एजुकेशन पूरा किया है। लड़के और लड़कियां भी

25000/207=Months.I observe a lot of faces on the particular place waiting for even Manrega with failure. A lot of schools are not paying even 207 to the teachers. Nevertheless FCI godowns will be replaced by Tycoons' hoarding to get desirable profit by BILLS! Very bad ... Bad news अच्छे दिन दलित लड़की kya hai ...ladki ladki hoti hai ...esme bhi jat pat hain

Kya baat he.....Mahenat to hum bhi kar rahe he ......khet majduri karke.......fir bhi jub Exam dene jate he to Unse jyada marks lane padte he vaha ......Dalit hone se fark nahi fadta.....Hum bhi insan nahi he kya......kyu hume unse jyada marks lane padte he Very bad youth_millat Islamee balatkariyo par bhee likh diya karo. Jihadiyo

Cc ManMundra sir 🙏 As if tie wale raajtantra chalaate hain😁😁😁😁 Aa gaye achche din.