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आज का शब्द: सोम और रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'विजयी के सदृश जियो रे'

19-04-2021 06:16:00

आज का शब्द: सोम और रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'विजयी के सदृश जियो रे' AajKaShabd Som RamdhariSinghDinkar Dinkar

हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है - सोम जिसका अर्थ है 1. सोमवार 2. चंद्रमा 3. एक प्राचीन लता जिसके रस का सेवन वैदित ऋषि करते थे। इस शब्द का प्रयोग कवि रामधारी सिंह दिनकर अपनी कविता में यूं करते हैं।वैराग्य छोड़ बांहों की विभा संभालोचट्टानों की छाती से दूध निकालो

पेट्रोल-डीजल में लगी 'आग' से अब NDA में शुरू हुआ मतभेद, JDU ने कहा- कीमतें अब चुभने लगी हैं धारावी ने किया कमाल, 24 घंटों में कोरोना का एक भी नया मामला नहीं, केवल 13 एक्टिव केस बचे आज का कार्टून: टीआरपी वाले दिन - BBC News हिंदी

है रुकी जहां भी धार शिलाएं तोड़ोपीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ोचढ़ तुंग शैल शिखरों परसोमयोगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे!जब कुपित काल धीरता त्याग जलता हैचिनगी बन फूलों का पराग जलता हैसौन्दर्य बोध बन नयी आग जलता हैऊंचा उठकर कामार्त्त राग जलता हैअम्बर पर अपनी विभा प्रबुद्ध करो रे

गरजे कृशानु तब कंचन शुद्ध करो रे!जिनकी बांहें बलमयी ललाट अरुण हैभामिनी वही तरुणी नर वही तरुण हैहै वही प्रेम जिसकी तरंग उच्छल हैवारुणी धार में मिश्रित जहां गरल हैउद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती हैतलवार प्रेम से और तेज होती है!छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये headtopics.com

मत झुको अनय पर भले व्योम फट जायेदो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता हैमरता है जो एक ही बार मरता हैतुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रेजीना हो तो मरने से नहीं डरो रे!स्वातंत्र्य जाति की लगन व्यक्ति की धुन हैबाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण हैवीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रे

जो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे!जब कभी अहम पर नियति चोट देती हैकुछ चीज़ अहम से बड़ी जन्म लेती हैनर पर जब भी भीषण विपत्ति आती हैवह उसे और दुर्धुर्ष बना जाती हैचोटें खाकर बिफरो, कुछ अधिक तनो रेधधको स्फुलिंग में बढ़ अंगार बनो रे!उद्देश्य जन्म का नहीं कीर्ति या धन है

सुख नहीं धर्म भी नहीं, न तो दर्शन हैविज्ञान ज्ञान बल नहीं, न तो चिंतन हैजीवन का अंतिम ध्येय स्वयं जीवन हैसबसे स्वतंत्र रस जो भी अनघ पियेगापूरा जीवन केवल वह वीर जियेगा! और पढो: Amar Ujala »

भास्कर एक्सप्लेनर: कोवीशील्ड को भी तो नहीं मिला है अमेरिका में अप्रूवल, फिर कोवैक्सिन से जुड़े फैसले पर क्यों मचा है बवाल?

अमेरिका ने कोवैक्सिन को इमरजेंसी यूज की अनुमति (EUA) देने से इनकार कर दिया। कई देशों में कोवैक्सिन लगवाने वालों को वैक्सीनेट लोगों में नहीं गिना जा रहा। इन खबरों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन खराब है? क्या वह हमें कोरोनावायरस से सुरक्षित रखने में कमजोर है? यह ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब वैक्सीन लगवाने से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। | US FDA rejected Emergency Use Approval Application for Covaxin; All You Need To Know About Covaxin India Trial Data; क्या स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन खराब है? क्या वह हमें कोरोनावायरस से सुरक्षित रखने में कमजोर है?

जिस दिन सरकार बनाने के लिए 50% बहुमत की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी और ब्रिटन की तरह सबसे बड़ी पार्टी की सरकार बनने लगेगी उस दिन से देश की सारी समस्याएं दूर हो जायेंगी। गठबंधन का मतलब ही भ्रष्टाचार है। देश को एक जुट करना है तो यही एक मात्र उपाय है मास्क लगाना सिर्फ जरूरी ही नहीं है बल्कि ये हमारीे जिम्मेदारी भी है, इस जिम्मेदारी का पालन ना करना ही मौजूदा त्रासदी का एक एक बड़ा कारण है,

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आज का शब्द: निर्मल और रमानाथ अवस्थी का गीत- दुनिया बे-पहचानी ही रह जातीआज का शब्द: निर्मल और रमानाथ अवस्थी का गीत- दुनिया बे-पहचानी ही रह जाती Aajkashabd Hindi HindiNews

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आज का शब्द: नभ और हरिवंशराय बच्चन की कविता- शब्द के आकाश पर उड़ता रहा...आज का शब्द: नभ और हरिवंशराय बच्चन की कविता- शब्द के आकाश पर उड़ता रहा... AajKaShabd Hindi HindiNews

आज का जीवन मंत्र: प्रकृति का संदेश समझें, प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग करने से बचेंकहानी - त्रेतायुग में राक्षसों का आतंक काफी बढ़ गया था। राक्षसों से तंग आकर मुनि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे। अयोध्या में विश्वामित्र ने राजा दशरथ से कहा, 'आप मुझे अपने दो पुत्र राम-लक्ष्मण कुछ दिनों के लिए सौंप दीजिए। मैं इन्हें वन में ले जाऊंगा। वन में राक्षसों का आतंक है। राम-लक्ष्मण उन राक्षसों का वध कर देंगे और सभी ऋषि-मुनियों को सुरक्षित करेंगे। | aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, significance of natural resources, story of ramayana, ram and vishwamitra hamare_hanuman Yeh Sarkar Ko smjhao