अयोध्या में जन्मभूमि शिलान्यास के मायने भविष्य के भारत के लिए- नज़रिया

अयोध्या में जन्मभूमि शिलान्यास के मायने भविष्य के भारत के लिए- नज़रिया

03-08-2020 13:20:00

अयोध्या में जन्मभूमि शिलान्यास के मायने भविष्य के भारत के लिए- नज़रिया

ये समारोह 'एक नये भारत' का भी शिलान्यास है जिसमें नागरिकों की पहचान में उनके धर्म की अहम भूमिका होगी.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटGetty Imagesसाल 1951 से ही इस बहस की शुरूआत हो गई थी, और अब यह बहस एक निर्णायक दौर में पहुँच गई है.गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद उसके उद्घाटन की तारीख़ रखी गई और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को बुलावा भेजा गया, तो प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू चाहते थे कि 'धार्मिक मुद्दों को राष्ट्र के मुद्दों से अलग रखा जाए' और उन्होंने राजेंद्र प्रसाद को सलाह दी कि 'वे इस कार्यक्रम का हिस्सा न बनें.'

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कई सदियों में कई बार मुसलमान राजाओं के आक्रमणों के बाद ध्वस्त हो चुके सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण 1947 में तब शुरू हुआ जब तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस मंदिर का दौरा किया.नेहरू इस बात से चिंतित थे कि ऐसे किसी कार्यक्रम को भारत सरकार का मुखर समर्थन विभाजन के बाद लोगों के बीच पैदा हुई दरारों को और बढ़ा देगा. नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद को पत्र में लिखा था,"मुझे लगता है कि सोमनाथ मंदिर के मामले में इतने बड़े स्तर का कार्यक्रम, इस समय होना, मुझे उचित नहीं लगता."

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की सलाह नहीं मानी और कार्यक्रम में हिस्सा लिया. हालांकि उन्होंने वहाँ जाकर 'गांधीवादी विचारधारा, धर्मनिरपेक्षता और शांति बहाली' पर ज़ोर दिया.इमेज कॉपीरइटGetty Imagesसोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में होने जा रहे राम मंदिर के शिलान्यास समारोह की तुलना करने का प्रयास किया जा रहा है, पर इन दोनों की तुलना सही नहीं है.

पहली बात तो ये कि राष्ट्रपति राम मंदिर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नहीं हैं जैसा सोमनाथ मंदिर के मामले में था. तब के प्रधानमंत्री सरकार से जुड़े लोगों को इस कार्यक्रम से दूर रहने के लिए कह रहे थे, अब के प्रधानमंत्री चाँदी की ईंटे अपने हाथों से नींव में रखने वाले हैं.

और 'बड़े स्तर के कार्यक्रम' ऐसे समय पर हो रहा है जब पूरा विश्व कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है और भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, यहाँ तक कि देश के गृह मंत्री भी संक्रमित हो गए हैं.अयोध्या मंदिर शिलान्यास: मुहूर्त, कोरोना और बिहार चुनाव को लेकर उठते सवाल

अर्थव्यवस्था बेहद सुस्त है और भारत की पूर्वी सीमा सुरक्षा के नज़रिए से चिंता का विषय बनी हुई है. ऐसी हालत में न सिर्फ़ राम मंदिर कार्यक्रम को बढ़-चढ़कर आयोजित किया जा रहा है, बल्कि पूरे देश को इसके लिए ज़ोरदार उत्सव का माहौल तैयार किया जा रहा है.Image caption

अयोध्यासवाल आस्था काभगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या भारत के सबसे ख़ूबसूरत शहरों में से एक है, सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है और इस शहर का एक संपन्न इतिहास रहा है.बौद्ध धर्म को मानने वाले इस जगह को साकेत कहते हैं. 15 जुलाई को ही आज़ाद बौद्ध धर्मसेना ने एक अनशन किया था जिसमें बौद्ध भिक्षुओं ने यह दावा किया कि राम जन्मभूमि का प्रांगण एक प्राचीन बौद्ध भूमि है और खुदाई कर इस जगह की छानबीन यूनेस्को को करनी चाहिए.

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इसी तरह जैन और सिख भी इस जगह से अपने रिश्ते बताते रहे हैं. इसी जगह पर 400 साल तक बाबरी मस्जिद रही. यानी कुल मिलाकर यह भारत की मिली-जुली संस्कृति का एक केंद्र रहा है और राजनीतिक इच्छाशक्ति होती तो इसे उसी रूप में दोबारा स्थापित किया जा सकता था.लेकिन इसे अलग-अलग तरह की राजनीतिक रोटियाँ सेकने का ज़रिया बनाया जा रहा है जिसमें 'आस्था' को लोगों के बीच अंतर पैदा करने के लिए और भारत की युवा पीढ़ी में दरारें डालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

Image captionअयोध्या (1990 की फ़ाइल तस्वीर)आडवाणी की रथ-यात्राइसका अतीत गंभीर रहा है. साल 1990 में जब लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीयों को 'जागृत करने के लिए' एक रथ यात्रा शुरू की, यह वही समय था जब वीपी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों को लागू किया था.

आडवाणी की रथयात्रा को 'मंडल का जवाब कमंडल' कहा गया. रथयात्रा आठ राज्यों से गुज़रती हुई छह हज़ार किलोमीटर से अधिक का सफर तय करने वाली थी.राजनीतिक विश्लेषकों ने दर्ज किया कि 1990 में करीब सवा महीने रथयात्रा के कारण पैदा हुए सांप्रदायिक तनाव की वजह से लगभग 300 लोगों की मौत हो गई, दंगे हुए और हिंसा की घटनाएँ हुईं, इसके बाद बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी के रथ को समस्तीपुर ज़िले में रोक दिया.

क्या ये तीन भी ‘बाबरी मस्जिद’ हैं?1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस भी अपने साथ मौतों का एक सिलसिला लेकर आया और देश में सामाजिक तनाव बढ़ा जिसने भारतीय गणराज्य को हिलाकर रख दिया.साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भले ही सारी विवादित ज़मीन मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी, लेकिन कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपने फ़ैसले में लिखा कि 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का गिराया जाना 'क़ानून-व्यवस्था का अहंकारी उल्लंघन' था और सार्वजनिक उपासना स्थल को गिराए जाने की यह 'सोची-समझी साज़िश' थी.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि मुसलमानों को ग़लत तरीक़े से एक मस्जिद से वंचित किया गया जो 450 साल पहले बनाई गई थी.Image captionबाबरी विध्वंस के बाद विवादित स्थल को लंबे वक़्त तक पुलिस निगरानी में रखा गयासर्वधर्म समभाव?इस मामले में लिब्राहन आयोग के गठन के वर्षों बाद भी, मस्जिद को गिराने की साज़िश रचने वाले लोगों का फ़ैसला होना अभी बाक़ी है. जैसे 6 दिसंबर 1992 की घटना ने लोकतांत्रिक भारत की जड़ों को हिला दिया था, उसी तरह यह शिलान्यास 'भारतीय गणराज्य' का स्वरूप बदलने की शुरूआत करने वाला है, बदला हुआ भारत कैसा होगा, इसका अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है.

मशहूर किताब 'द इमरजेंसी क्रॉनिकल्स' के लेखक, प्रोफ़ेसर ज्ञान प्रकाश कहते हैं,"मंदिर की नींव रखने का समारोह समान नागरिकता के संवैधानिक सिद्धांत की नींव पर हमला है. भारत का सेक्युलर पक्ष सुरक्षित नहीं है. बीजेपी सरकार और न्यायपालिका, एक व्यवस्थित रूप से भारत में 'निरंकुश हिंदू राष्ट्र' की नींव रख रहे हैं."

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भारत सरकार का रवैया यहाँ के 'सर्वधर्म समभाव' की विचारधारा के ठीक विपरीत दिख रहा है. ये हमें बताता है कि कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएँ, बाकियों की भावना से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं. वहीं 'मुस्लिम' पक्ष को हर मध्यस्थता-वार्ता के दौरान यह समझाया गया कि उन्हें इस मामले को ख़त्म करना चाहिए और उस ज़मीन पर से अपना दावा वापस लेना चाहिए.

इमेज कॉपीरइटREUTERS/Amit Daveनेहरू के दौर का अंत?यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओस्लो में 'सेंटर ऑफ़ रिसर्च ऑन एक्सट्रीमिज़्म' की स्कॉलर एवियान लेइडिग कहती हैं कि"ये क़दम भारतीय गणतंत्र को एक नई दिशा में ले जाएगा. 5 अगस्त के समारोह में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे तो वो भारत के हिन्दुत्व आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा. वो हिन्दुत्व आंदोलन जो 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान सुर्खियों में आया और हिन्दुत्ववादी हिंसा जो भारत में छुटपुट स्तर पर होती रही है, उस पर अब सरकार के समर्थन की मुहर लग जाएगी."

वे कहती हैं,"यह क़दम इस बात को भी स्थापित करेगा कि हिन्दुत्व को बाकी धर्मों के मुक़ाबले ज़्यादा तरजीह मिलेगी. यह आख़िरी बार नहीं होगा जब मोदी सरकार हिन्दुत्व के एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएगी."अगर भारतीय गणतंत्र में 'नेहरू का दौर' ख़त्म हो रहा है, तो ये इस बात का सबसे बड़ा प्रतीक है कि भारत उन देशों की पंक्ति में खड़ा होने जा रहा है जो नागरिकता और धर्म को जोड़कर देखते हैं.

आडवाणी और जोशी की गवाही: बाबरी मुक़दमा, जिसे फै़सले का है इंतज़ारजाने-माने स्कॉलर क्रिस्टॉफ़ जैफ़रलै कहते हैं कि"शिलान्यास के लिए जो तारीख़ चुनी गई है, उसका महत्व मंदिर की ओपनिंग से ज़्यादा बड़ा है. इसी दिन जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को छीन लिया गया था और इसी तारीख़ पर बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर को खड़ा करना, यह बताता है कि इन दोनों ही क़दमों का एक उद्देश्य है- 'भारत को हिन्दू राष्ट्र के तौर पर स्थापित करना' और 'भारत के बहुसांस्कृतिक संविधान से कमज़ोर करना'. भारत इसराइल, तुर्की, पाकिस्तान और ऐसे ही दूसरे देशों के रास्ते पर चल रहा है."

महात्मा गांधी ने अपने अख़बार 'हरिजन' में 9 अगस्त 1942 को लिखा था,"हिन्दुस्तान हर उस इंसान का है जो यहाँ पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े और जिनके पास अपना कहने के लिए यही देश है इसलिए यह देश पारसियों, बेनी-इसराइलियों, भारतीय ईसाइयों, मुसलमानों और दूसरे ग़ैर-हिन्दुओं का उतना ही है, जितना हिन्दुओं का है. आज़ाद भारत में हिन्दू-राज नहीं होगा, बल्कि भारत-राज होगा जो किसी धर्म या समुदाय पर आधारित ना होकर, लोगों पर आधारित होगा."

इमेज कॉपीरइटGetty Imagesदुख की बात ये...महात्मा गांधी ने अपने अख़बार 'हरिजन' में 9 अगस्त 1942 को लिखा था,"हिन्दुस्तान हर उस इंसान का है जो यहाँ पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े और जिनके पास अपना कहने के लिए यही देश है इसलिए यह देश पारसियों, बेनी-इसराइलियों, भारतीय ईसाइयों, मुसलमानों और दूसरे ग़ैर-हिन्दुओं का उतना ही है, जितना हिन्दुओं का है. आज़ाद भारत में हिन्दू-राज नहीं होगा, बल्कि भारत-राज होगा जो किसी धर्म या समुदाय पर आधारित ना होकर, लोगों पर आधारित होगा."

राम मंदिर का शिलान्यास 'एक नये भारत' का भी शिलान्यास है जो अपने लोगों को उनके धर्म से परखता है, और ये सब राम के नाम पर हो रहा है, ये वही राम हैं जिन्हें 1990 की अयोध्या रथयात्रा के दौरान 'सियापति' या 'सियावर' के बदले 'श्री राम' बुलाया जाने लगा.

इन मर्यादा-पुरुषोत्तम को भारत में 'एक सिकुड़ती हुई सोच का प्रतीक' बनाया जा रहा है. हम भले ही इसे एक नए भारत का नाम दें, पर ये उस भारतीय गणतंत्र पर गहरा आघात है जिसमें सबके लिए जगह थी.(आलेख में लेखिका के निजी विचार हैं.) और पढो: BBC News Hindi »

पहले अकेले फिर करिश्मा के साथ दीपिका पादुकोण से NCB करेगी पूछताछ

बॉलीवुड के ड्रग्स के दलदल की जांच कर रही एनसीबी कल सुबह तीन बड़ी हीरोइनों से पूछताछ करेगी. इनमें सबसे बड़ा नाम दीपिका पादुकोण का है जिनको एनसीबी ने कल सुबह 10 बजे अपने गेस्ट हाउस में बुलाया है. इनके अलावा सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को पूछताछ के लिए एनसीबी ने कल सुबह ही साढ़े दस बजे बुलाया है. आज क्वान कंपनी की मैनेजर करिश्मा प्रकाश से सीबीआई ने पूछताछ की लेकिन कल भी उन्हें बुलाया है और कल उन्हें दीपिका के साथ आमने सामने बिठाकर भी पूछताछ की जाएगी. उससे पहले एनसीबी दीपिका से अकेले में पूछताछ करेगी. देखें 10तक.

सच्ची रामायण किताब जो हमेशा से विवादों में रही हैं. पेरियार द्वारा लिखी गई इस किताब पर क्यों मचा है विवाद. PageTurner में बता रही हैं ज्योति यादव jyotiyadaav निजी विचार लिखकर आखिर में बीबीसी ने दिखा दिया कि ये नजरिया सिर्फ कमाई का जरिया भर है अगर अयोध्या का राम मंदिर बनना आपकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का अंत है तो थू है ऐसी धर्मनिरपेक्षता पर।

इतना नफ़रत कहां से लाते हो,? हिन्दू १९७६ में धर्मनिरपेक्ष नहीं हुआ, आदि काल से है। राम मंदिर का निर्माण भारतीय मूल्यों का पालन करना मात्र है। Kuch din mein bhagwan raam ko bhi sab bhool jainge kis dharm mein likh log bhooke aur bimari mare aur hum Mandir masjid mein daan de ya mandir masjeed banwate phire sharam ki baat aaj hum kis ko dhooka de rahe hai khud ko ya ......

लूटा हुआ वापस लेने की प्रतिबद्धता।।।। it proves that Nehru was also playing communal politics by facilitating congress leaders to join the programme.Same thing was repeated by Rajiv Gandhi&Narsimarao. BBC always against hindu and Hinduism का सम्मान करता हूँ लेकिन seemay तुष्टीकरण को भूल गयीं।सनातन हिन्दू को,उसकी परंपराओं-पद्धतियों-मान्यताओं को एक संवेग से ठुकराते रहने का कटु परिणाम है कि यह समुदाय आज अस्मिता से जुड़े मंदिर-निर्माण के पक्ष में है।पूर्व BBC सदस्या की प्रस्तुति में चिंतन कम,चिंता अधिक है।

नए भारत में प्रवेश कर गए हैं या अभी नहीं। भोला सनातन 2500 साल से जिस दिवाली की बाट जोह रहा ऑख पथराई लग रहा उसे असली दिवाली हंस चुग रहा दाना कौन मोती खा रहा योगी बना मुख्यमंत्री कौन प्रधानमंत्री हो रहा पहले राखी आती गरीब को बाटते मिठाई ब्राह्मण को पैसा आज अमीर तम्, नामी; बहनो से बात कर लेते ट्विटर ट्विटर खेल लेते😁

Desh ka bhala ho jayega Chup chap jamin de dete to ye sab nahi hota Muslim bhi jamin dene ke ready the Lekin leftist Congress ch*tiyo ne ye sab nahi hone diya Uska fayda BJP valo ko mil gya Wahi Nehru ka beta rajiv ne Masdij ka tala khola tha Bhul gye ! Ab ham pakistan ke barabar khade hue 70 salo se yahi to pahuchana chahte the

Bharat ap pakistan aur aur turkey aur Israel ke jagah bahut jaldi hi lelega इनको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं साम्प्रदायिकता को बढ़ावा मिलेगा भविष्य में Only a stupid can advise to not participate on historical Mandir's foundation or inauguration. Its right from born to Hindu person. 🤣🤣🤣🤣🤣 Pahli fursat me nikal......✌

BJP RSS should be banned. They are terrorists organisation

भारत में कोरोना संक्रमितों के कुल मामले 18 लाख के पारChutiya banane ka thekka tumko hi mila h kya चिंता का विषय भारत सरकार को इसके लिए कोई नई पहल और नई योजनाएं लागू करनी चाहिए मोदी जी अब आप इस्तीफा दे दो आपसे नहीं संभल रहा

केंद्र ने भारत में आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए जारी की नई गाइडलाइन्सगृह मंत्रालय ने भारत में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के जरिए आने वाले यात्रियों के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किया है. 24 मई को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए एयर इंडिया ने आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट किया है. Namaste Trump🙏 Modi sarkar kisko Jada support krti hai Dear media team first allow the visitors families to uae 🇦🇪 govt uae started issuing new employment visas entry more tn 10 k young newly recuited recutires given deadline for joining UAE allowing but why the govt india stopping same jobs recutires diverted to Pakistan res countrs

कोरोना अपडेट: भारत में ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन के दूसरे और तीसरे ह्यूमन ट्रायल को मंज़ूरी - BBC Hindiसीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने देश में ऑक्सफ़ोर्ड की कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ पार्टनरशिप की है, जिसे कोविशिल्ड नाम दिया गया है. कोरोना संक्रमण से जुड़े हर ज़रूरी और लाइव अपडेट. Nice Jab tak IndianParliament hostage by RSS_Terrorist saaf Nahi hojata Tab tak vaccine hi naa nikale..🤞 भारतीयों की आन बान शान सस्ती है

युद्ध की स्थिति में तिब्बत में राफेल से भारत को काफी फायदा मिलेगा : पूर्व वायुसेना प्रमुखवायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (अवकाश प्राप्त) बीएस धनोआ ने कहा कि पहाड़ी तिब्बत क्षेत्र में चीन के साथ किसी भी हवाई संघर्ष की स्थिति में भारत को राफेल विमानों से सामरिक लाभ मिलेगा. India could have bought 16 RafaleJets if calculated as per old UPA deal price ₹526 crore each jet, canceled by respected narendramodi ji in 2015 instead of buying ₹4230 crore BoeingAirplanes for PMOIndia & rashtrapatibhvn wasting tax payers money for lavishly travels 🙏 युद्ध के सारे राज़ खोल दोगे तो युद्ध कैसे कामयाब होगा, .... 🐗🐗🐗

भारत का ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति को मिस्टर डेमोक्रेसी कहना चीन के लिए संदेश?भारत का चीन को संदेश, सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच और राजस्थान का घमासान दिल्ली से छपने वाले अख़बारों की आज की प्रमुख खबरें. AFTER GETTING RAFALE ..ITNA TO BANTAA HAI BHAIO BEHNO AB TO NASM BHI LEY SAKTEY HAIN CHINA KILLED OUR 20 SOLDIERS CAPTURED MORE THAN 10 AND INTRUDED IN INDIAN TERRITORY. Bilkul theek kiya. China is bad for own people and for the world We dont bother what u say! Tell me how did they kill our 20 soldiers? Stop playing word game.

अयोध्या मंदिर शिलान्यास: राममय हुआ पूरा शहर, अंतिम दौर में हैं तैयारियांअयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन में अब बस तीन दिन बचे हैं. अयोध्या में इस ऐतिहासिक मौके के लिए जबरदस्त तैयारी चल रही है. गलियों और इमारतों को सजाया-संवारा जा रहा है. भूमिपूजन का वो पवित्र दिन करीब आ रहा है जो लंबे संघर्ष के बाद साकार हो रहा है. इसलिए अभूतपूर्व तैयारियां हो रही हैं. रामलला के मंदिर के भूमिपूजन से पहले अयोध्या राममय हो चुकी है. मंदिरों का रंग-रोगन हो रहा. केसरिया पताके लहरा रहे है. बंदनवार और तोरण द्वारों की सजावट है. देखें वीडियो. अंधकारमय Jai Sri ram 🙏🏻