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अब खाना ऑर्डर करने पर ग्राहकों को देना होगा जीएसटी, जानें क्या था पहले का नियम

अब महंगा पड़ेगा ऑनलाइन खाना मंगाना!

18-09-2021 12:54:00

अब महंगा पड़ेगा ऑनलाइन खाना मंगाना!

नए साल से आपको फूड डिलिवरी ऐप से खाना मंगवाना महंगा पड़ सकता है। जीएसटी काउंसिल में फैसला किया गया है कि अब जीएसटी डिलिवरी पॉइंट पर दिया जाएगा। यानी ग्राहकों को जीएसटी का भुगतान करना होगा।

अब जोमैटो और स्विगी से खाना मंगवाने पर आपको देना होगा जीएसटी। एक्सप्रेस आर्काइवअब जोमैटो या स्विगी से खाना मंगाना पहले के मुकाबले महंगा हो सकता है। फूड डिलिवरी ऐप की सेवाओं को जीएसटी के दायरे में लागाय गया है। एक जनवरी से फूड डिलिवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी वसूला जाएगा। दरअसल पहले यह टैक्स रेस्तरां को भरना पड़ता था लेकिन अब डिलिवरी पॉइंट पर यानी ग्राहकों से यह वसूला जाएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह कोई नया टैक्स नहीं है। पहले इसे रेस्तरां भरते थे और अब ग्राहक सीधे भर दिया करेगा।

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लखनऊ में शुक्रवार को हुई 45वीं जीएसटी परिषद की बैठक में की अहम फैसले लिए गए हैं। नए साल यानी एक जनवरी से संक्षिप्त रिटर्न और मासिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों को आगे के महीने के लिए जीएसटीआर-1 बिक्री रिटर्न दाखिल करने की अनुमति नहीं होगी।

जीएसटी परिषद की बैठक में अनुपालन को सुसंगत बनाने की दृष्टि से कई फैसले किए गए। इसमें कंपनियों या कारोबारियों द्वारा रिफंड का दावा करने के लिए आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जाना भी शामिल है। माना जा रहा है कि इन कदमों से जीएसटी की चोरी से राजस्व में होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा। जीएसटी व्यवस्था एक जुलाई, 2017 को लागू हुई थी। headtopics.com

जीएसटी परिषद ने एक जनवरी, 2022 से केंद्रीय जीएसटी नियम के नियम 59 (6) में संशोधन करने का फैसला किया है। इसके तहत यदि किसी पंजीकृत व्यक्ति ने पिछले महीने का फॉर्म जीएसटीआर-3बी में रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उसे जीएसटीआर-1 जमा करने की अनुमति नहीं होगी।

अभी कंपनियां यदि पिछले दो माह क जीएसटीआर-3बी जमा करने में चूक जाती हैं, तो उन्हें बाहरी आपूर्ति या जीएसटीआर-1 जमा कराने की अनुमति नहीं होती। कंपनियों को किसी महीने के लिए जीएसटीआर-1 बाद के महीने के 11वें दिन तक जमा कराना होता है। वहीं जीएसटीआर-3बी जिसके जरिये कंपनियां कर का भुगतान करती हैं, उसके बाद के माह के 20वें से 24वें दिन जमा कराना होता है।

इसके अलावा परिषद ने जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है तभी कोई कंपनी रिफंड के लिए दावा कर सकेगी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार सत्यापन को 21 अगस्त, 2020 से अनिवार्य किया था। परिषद ने अब फैसला किया है कि कंपनियों को अपने जीएसटी पंजीकरण को बायोमीट्रिक आधार से जोड़ना होगा, तभी वे रिफंड के लिए दावा कर सकेंगी या रद्द पंजीकरण को फिर बहाल करने के लिए आवदेन कर सकेंगी। (भाषा से इनपुट्स के साथ)

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