अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादी कैंप लगे तो भारत पर पड़ेगा असर, बोले सुरक्षा परिषद अध्यक्ष - BBC Hindi

अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादी कैंप लगे तो भारत पर पड़ेगा असर, बोले सुरक्षा परिषद अध्यक्ष

03-08-2021 13:25:00

अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादी कैंप लगे तो भारत पर पड़ेगा असर, बोले सुरक्षा परिषद अध्यक्ष

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक बार फिर आतंकवादी शिविरों को नहीं लगने दिया जा सकता.

5:07फ़लस्तीनियों ने ठुकराया इसराइली सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव, शेख़ जर्रा में मांगा संपत्ति का अधिकारABBAS MOMANI/AFP via Getty ImagesCopyright: ABBAS MOMANI/AFP via Getty Imagesफ़लस्तीनियों ने शेख़ जर्रा में उनके घर खाली कराए जाने की धमकी और यहूदी बस्तियों को बसाने के मामले में इसराइली सुप्रीम कोर्ट के सुलह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

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इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वी येरुशलम के शेख़ जर्रा में रहने वाले फ़लस्तीनी लोगों और यहूदी लोगों के बीच चली आर रही लंबी क़ानूनी लड़ाई को ख़त्म करने का प्रस्ताव दिया.अदालत ने फ़लस्तीनी परिवारों से कहा कि वो अगर यह स्वीकार कर लें कि शेख़ जर्रा की ज़मीन यहूदी कंपनी की और वो घरों का किराया दें तो वो वहाँ रह सकते हैं. लेकिन फ़लस्तीनी पक्ष ने इससे इनकार कर दिया.

कोर्ट ने जो रास्ता सुझाया था उसके तहत शेख जर्रा में रहने वाले दर्जनों परिवारों को ‘सुरक्षित किराएदार’ का दर्जा मिल सकता था.प्रस्ताव के मुताबिक़ फ़लस्तीनियों से निकट भविष्य में जबरन घर खाली नहीं कराए जा सकते थे जब तक कि वो उस यहूदी कंपनी को किराया देते रहें, जिसकी यह ज़मीन मानी जाती है. headtopics.com

हालाँकि फ़लस्तीनियों ने अदालत का यह सुझाव मानने से इनकार कर दिया और कहा कि वो संपत्ति का अधिकार चाहते हैं.AHMAD GHARABLI/AFP via Getty ImagesCopyright: AHMAD GHARABLI/AFP via Getty Imagesइसी विवाद के कारण इसराइल और हमास में छिड़ी थी जंगशेख़ जर्रा के इस मुद्दे के कारण ही पिछले कुछ महीने इसराइली और फ़लस्तीनियों में भारी तनाव और हिंसा हुई थी.

इस साल मई में पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद इसराइली पुलिस और फ़लस्तीनियों में हिंसा शुरू हो गई थी.इस हिंसा की शुरुआत के बाद फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठ हमास और इसराइल में जंग छिड़ गई थी जो करीब 11 दिनों तक जारी रही.

इस इलाके को यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं. हमास ने इसराइल पर शेख़ जर्रा में लोगों के ‘उत्पीड़न’ का आरोप लगाया था और रॉकेट दागे थे.इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच विवाद का यह मुद्दा दुनिया भर की नज़र में आ गया था.संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख ने इसराइल से कहा था कि वो शेख़ जर्रा से लोगों को न निकाले

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था ने चेताया था कि अगर इसराइल ऐसा कुछ करता है तो अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत इसे ‘युद्ध अपराध’ माना जा सकता है.Faiz Abu Rmeleh/Anadolu Agency via Getty ImagesCopyright: Faiz Abu Rmeleh/Anadolu Agency via Getty Imagesक्या है headtopics.com

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यरुशलम का पूराविवाद?1967 के मध्य पूर्व युद्ध के बाद इसराइल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है.हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका समर्थन नहीं करता. फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के एक आज़ाद मुल्क़ की राजधानी के तौर पर देखते हैं.

पिछले कुछ महीने पढ़े इसी को लेकर फ़लस्तीनियों और इसराइल में तनाव बढ़ा था.आरोप थे कि ज़मीन के इस हिस्से पर हक़ जताने वाले यहूदी फलस्तीनियों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे लेकर विवाद है.अक्टूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है.

यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने यह प्रस्ताव पास किया था.इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अल-अक्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है.वहीं, यहूदी इसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है.

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