अफ़ग़ानिस्तान के किन-किन इलाकों तक फैल गया है तालिबान? - BBC News हिंदी

अफ़ग़ानिस्तान के किन-किन इलाकों तक फैल गया है तालिबान?

28-07-2021 08:06:00

अफ़ग़ानिस्तान के किन-किन इलाकों तक फैल गया है तालिबान?

साल 2001 के बाद से तालिबान के कब्ज़े में इतना बड़ा इलाक़ा कभी नहीं रहा. जानिए किन-किन इलाकों तक पहुंच गया है तालिबान.

EPAनियंत्रण से हमारा तात्पर्य उन ज़िलों से है जहां प्रशासनिक केंद्र, पुलिस मुख्यालय और अन्य सभी सरकारी संस्थान को तालिबान नियंत्रित करता है.अमेरिकी सैनिकों और उनके नेटो और क्षेत्रीय सहयोगियों ने नवंबर 2001 में तालिबान को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था.इस समूह ने अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन और अल-क़ायदा के अन्य लड़ाकों को पनाह दी थी.

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लेकिन इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की मौजूदगी, अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के लिए अरबों डॉलर के समर्थन और प्रशिक्षण के बावजूद तालिबान एकबार फिर संगठित हुआ और अब तो उसने धीरे-धीरे ही सही, लेकिन दूरदराज के भी कई क्षेत्रों में अपनी खोई ताक़त हासिल कर ली है.

तालिबान पारंपरिक तौर पर अपने मज़बूत गढ़ रहे दक्षिणी और दक्षिण पश्चिमी इलाक़ों कंधार, उत्तरी हेलमंड, उरूज़गान और जाबुल प्रांतों में ही प्रभावी था. लेकिन वो दक्षिणी फ़रयाब के पहाड़ी इलाक़ों और उत्तर-पूर्व में बदख़शां की पर्वत श्रंखला में भी मज़बूत था.2017 में बीबीसी के एक शोध में कई ज़िलों में तालिबान के पूर्ण नियंत्रण का पता चला था. उस शोध से ये भी पता चला था कि तालिबान देश के कई दसूरे हिस्सों में भी सक्रिय है और कुछ इलाक़ों में हर सप्ताह हमले कर रहा था. इससे पूर्व के अनुमानों के मुताबिक तालिबान के कहीं अधिक ताक़तवर होने के संकेत मिले थे. headtopics.com

क्या तालिबान अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है?आज तालिबान के नियंत्रण में 2001 के बाद से सबसे बड़ा इलाक़ा है, लेकिन ज़मीन पर हालात बहुत नाज़ुक हैं.अफ़ग़ानिस्तान की सरकार कई ऐसे ज़िलों से स्वयं ही पीछे हट गई जहां वो तालिबान के दबाव को झेलने की स्थिति में नहीं थी. वहीं दूसरे ज़िलों पर तालिबान ने ताक़त के दम पर क़ब्ज़ा किया है.

कुछ इलाक़ों में जहां सरकारी बल फिर से संगठित हो सके हैं या स्थानीय मिलीशिया को संगठित किया है वहां सरकार ने गंवाए गए इलाक़े अपने नियंत्रण में लिए हैं या वहां भीषण लड़ाई चल रही है.हालांकि अफ़ग़ानिस्तान से अधिकतर अमेरिकी सैनिक वापस लौट चुके हैं, कुछ सीमित संख्या में सैनिक काबुल में मौजूद हैं और अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने हाल के दिनों में तालिबान के ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी सैन्यबलों के नियंत्रण में वही शहर और ज़िले हैं जो या तो मैदनी इलाक़ों में है या फिर नदियों की घाटियों में है. यही वो इलाक़े भी हैं जहां देश की अधिकतर आबादी रहती है.जिन इलाक़ों पर तालिबान का नियंत्रण है वहां आबादी बहुत कम है. कई जगह तो एक वर्ग किलोमीटर में पचास तक लोग ही रहते हैं.

सरकार का कहना है कि उन सभी शहरों में सैनिक भेजे गए हैं जहां तालिबान के आने का ख़तरा है. इसके अलावा देशभर में एक महीने का नाइट कर्फ्यू भी लगा दिया गया है ताकि तालिबान को आगे बढ़ने से रोका जा सके.हालांकि तालिबान हेरात और कंधार जैसे शहरों के नज़दीक आ गए हैं, लेकिन वो अभी तक इनमें से एक पर भी नियंत्रण नहीं कर सके हैं, पर जिन इलाक़ों पर उन्होंने क़ब्ज़ा किया है उनके दम पर वो शांतिवार्ता में अपनी स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं. यहां से उन्हें टैक्स भी मिल सकता है और अन्य ज़रिए भी हासिल हो सकते हैं. headtopics.com

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इमेज स्रोत,Getty Imagesइस साल अब तक हिंसा की वजह से रिकॉर्ड संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र अब तक मारे गए 1600 नागरिकों के लिए तालिबान और दूसरे सरकार विरोधी तत्वों को ही ज़िम्मेदार मानता है. हिंसा की वजह से बड़ी तादाद में लोगों को घर भी छोड़ना पड़ रहा है. इस साल की शुरुआत से ही तीन लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़ चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी मामलों की संस्था यूएनएचसीआर के मुताबिक बदख़शां, कुंदूज़, बल्ख़, बाग़लान और ताख़र में बड़ी तादाद में लोग विस्थापित हो रहे हैं. यहां बड़े इलाक़ों पर तालिबान ने नियंत्रण कर लिया है.कुछ लोग पास के गांवों या ज़िलों की तरफ़ भाग जाते हैं और कुछ दिन बाद लौट आते हैं. हालांकि बहुत से ऐसे हैं जो लंबे समय तक विस्थापित रह रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्टों के मतुबाकि तालिबान के हमलों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के सैनिकों और नागरिकों ने पड़ोसी देश ताजिकिस्तान में शरण ली है.तालिबान ने जिन सीमा चौकियों पर क़ब्ज़ा किया है वहां से हो रहे व्यापार पर वही टैक्स वसूल रहे हैं.हालांकि ये टैक्स कितना है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है क्योंकि युद्ध की स्थिति की वजह से कारोबार भी कम हुआ है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक ईरान की सीमा पर स्थित इस्लाम क़ला से ही हर महीने 2 करोड़ डॉलर तक का टैक्स जुटाया जा सकता है.

आयात-निर्यात पर हुए असर की वजह से बाज़ार में चीज़ों के दाम भी बढ़ रहे हैं ख़ासकर ईंधन और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ें महंगी हो रही हैं.ये भी पढ़ें और पढो: BBC News Hindi »

महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में लड़की का जिक्र, देखें हल्ला बोल

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. महंत नरेंद्र गिरी देश के बड़े और प्रभावशाली संतों में से थे. ऐसे में उनकी संदिग्ध मौत ने हर किसी को चौंका दिया है. उनकी मौत प्रयागराज के बाघंबरी मठ में हुई है. महंत नरेंद्र गिरी का शव उनके कमरे में नायलॉन की रस्सी से लटका हुआ पाया गया था. पुलिस के मुताबिक, उनके कमरे से एक 6-7 पन्ने का सुसाइड नोट बरामद किया गया है. अब ये सुसाइड सामने आया है. जिसमें उन्होंने आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी अद्या तिवारी, संदीप तिवारी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया है और कई बातों का उल्लेख किया. इस पर देखें हल्ला बोल.

Ap hi bata do ap bhi repoter ho तालिबान अफगानिस्तान के ही बाशिंदे हैं वो किसी दूसरे मुल्क पर कब्जा नहीं कर रहे। बल्कि अपने देश के शासन को सुसंगठित करने में लगे हुए है incredible Afghanistan How does this Taliban people's household expenses go? अफगानिस्तान पूरा तालिबान ही है।अमरीका ने तालिबान को हटा कर 5%वाले को दे दिया था।गनी को चहिए की अपने सैनिकों के साथ हतियार डाल देना चाहिए। गनी भी जानते हैं कि वह नहीं जीतेंगे तालिबान से। इसमें यही भलाई है की गनी को सत्ता छोड़ देना चाहिए। अपने आवाम के खातिर।

ये तालिबान अतnकवाद का ही रूप है जेहाद है शांति प्रिय धर्म का If you Follow me I will give you Follow back 💯% followme NFTGiveaway followback WearAMask webdevelopment WednesdayMotivation tuesdayvibe tuesdaymotivations trending followback Fortnite FaTejo FolloForFolloBack twitter Olympics OnePlusNord2 OlympicGames Tezos

अफगान सेना प्रमुख ने भारत का दौरा टाला, तालिबान के बढ़ते हमलों के बीच फैसलातालिबान का दावा है कि उसका देश के 400 में से 200 के करीब जिलों में कब्जा हो चुका है. मई के अंत से ही आतंकी मूह ने ईरान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान से लगी कई सीमावर्ती जिलों में अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है.

तालिबान के दुष्प्रचार को प्रसारित करने पर चार अफगान पत्रकार गिरफ्तारअफगान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइज स्टैनिकजई ने कहा, 'आतंकवादियों और दुश्मन को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ अफगानिस्तान के राष्ट्रीय हित के खिलाफ किसी भी तरह के प्रचार को अपराध के रूप में गिना जाएगा।'

दिल्ली के तरह लखनऊ घेरने के एलान के साथ किसानों का मिशन उत्तर प्रदेश का आगाजउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब किसान संगठनों ने भी अपनी ताल ठोंक दी है। आज लखनऊ में संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन को और तेज करने का एलान किया। इसके साथ भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली की तरह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ घेरने का भी एलान किया है।

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'गांव-गांव श्मशान घाट बनवाएंगे', Nitish के मंत्री के बयान पर बवालबिहार में शमशान को लेकर सियासी शोर तेज हो रहा है. सरकार और विपक्ष इस मसले पर आमने सामने है. दरअसल, बिहार सरकार में मंत्री सम्राट चौधरी ने बयान दिया है कि हम हर गांव में श्मशान बनाएंगे. नीतीश के मंत्री ने आगे कहा कि लोग कब्रिस्तान बनाते हैं और श्मशान भूल जाते हैं. लेकिन हम 85 प्रतिशत आबादी को भूल जाएं, ये हो नहीं सकता. वहीं इस बयान पर विपक्ष हमला करने से नहीं चूका. आरजेडी विधायक मुकेश रौशन ने कहा कि जहां अस्पताल की जरूरत है, वहां सरकार श्मसान बनाने की कोशिश कर रही है. आरजेडी विधायक ने कहा कि हम बिहार में श्मशान नहीं बनाने देंगे. देखिए ये वीडियो. Mukhiya ji maalamaal ho jayenge बहुत खूब भाई और कुछ हो न हो पर ये सोच तो सब काम ठीक कर देगी। जिंदगी भर पेट खाना,रहने के लिए जगह और बिमारी के लिए अस्पताल और पढ़ाई के लिए स्कूल बनाने की जरूरत नहीं। मरने पर सही जगह वाह।

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