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अंग्रेजों के बोए बीजों से आग के सामने कमजोर हो गए हमारे जंगल

जंगल-जंगल आग लगी है 🔥 (रिपोर्ट @bharatjourno)

07-06-2019 06:34:00

जंगल-जंगल आग लगी है 🔥 (रिपोर्ट bharatjourno)

जंगलों में आग लगने की घटनाएं नई नहीं हैं. कई बार तो जंगलों में घास की अच्छी पैदावार के लिए खुद नियंत्रित तरीके से आग लगाई जाती रही है. लेकिन इन दिनों जंगलों की आग विकराल रूप धारण करती जा रही है, जो कई बार हफ्तों तक जारी रहती है. कई बार यह आग बारिश होने के बाद ही बुझती है.

जंगल मतलब सिर्फ पेड़ नहींचिपको आंदोलन के एक्टिविस्ट और फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन में अधिकारी रहे विनोद पांडे कहते हैं पहले तो जंगलों का मतलब सिर्फ पेड़ मानने वाली सोच को बदलना होगा. वह कहते हैं कि जंगलों में पेड़ों के अलावा पौधे, बेल, लताएं, मशरूम, जड़ें और सैकड़ों किस्म के जीव जंतु होते हैं. जंगल इन सबसे मिलकर बनता है और आग लगने पर इन छोटे जीवों और वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचता है.

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अंग्रेजों ने बदली जंगलों की सूरतअसल में जंगलों के खात्मे की शुरुआत ब्रिटिश काल से ही हो गई थी. अंग्रेजों ने देश में रेल लाइनें बिछाने और लीसा (Resin) हासिल करने के लिए जंगलों में चीड़ के पेड़ों को रोपना शुरू किया. इससे उत्तराखंड में मिश्रित वन खत्म होकर चारों ओर चीड़ के जंगल फैल गए. चीड़ के न गलने वाले पत्ते जंगल की मिट्टी में नमी को रोकने में नाकाम रहे और जंगलों की बायोडायवर्सिटी खत्म करने की बड़ी वजह बने. विनोद पांडे कहते हैं कि 60-70 साल तो ये जंगल चीड़ के पेड़ों को झेल गए, लेकिन आज हालात चीड़ के पेड़ों के लिए भी खत्म होते जा रहे हैं और अब यहां मेक्सिकन डेविल (काला बांसा) होने लगा है.

जंगलों के लिए फायदेमंद होती है आग यह सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन आग कई मायनों में जंगलों के लिए फायदेमंद साबित होती आई है. आग फॉरेस्ट इकोलॉजी का हिस्सा मानी जाती रही है. जंगलों में कई किस्मों की घास के बीज के खोल काफी सख्त होते हैं. हल्की रोस्टिंग से टूटने के बाद ही इन बीजों में जर्मिनेशन की प्रकिया शुरू होती है. इनमें उत्तराखंड में पाए जाने वाले काफल (Myrica Esculenta) का बीज भी शामिल है. आग हमेशा से सिल्वीकल्चर का हिस्सा रही है. इसलिए यह कहना सरलीकरण करना होगा कि जंगलों में आग लकड़ी के तस्कर लगाते हैं.

पढ़ें: जंगल-जंगल आग लगी है...साल में लाखों बार लगी है...खुद अपनी आग बुझा लेते थे जंगलकुछ समय पहले तक जंगल अपनी आग खुद नियंत्रित कर लिया करते थे. अब ऐसा न हो पाने की वजह जंगलों में खत्म होती नमी है. हजारों-लाखों सालों से अपनी प्रतिरोधक क्षमता की मदद से खुद को बचाने वाले जंगल आज कमजोर पड़ते जा रहे हैं. जंगल बारिश के पानी को सहेजकर अपनी जमीन में नमी बनाए रखते थे. पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां इस काम में अहम रोल निभाती थीं. चीड़ के पेड़ आ जाने से इसके पत्ते जंगलों को सुखाने का काम कर रहे हैं.

जंगलों की आग बेकाबू होने के तीन बड़े कारण वरिष्ठ पत्रकार और नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन साह कहते हैं कि पुराने समय में जंगलों, वन विभाग और स्थानीय निवासियों के बीच एक आपसी संबंध बना रहता था और लोग आग बुझाने के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. बाद में जंगलों में जाने पर प्रतिबंध लगने और वनवासियों के अधिकार कम होने से यह संबंध टूटता चला गया. आग बेकाबू होने का दूसरा कारण उत्तराखंड के गांवों का पलायन भी है. अब आग बुझाने में हाथ बंटाने के लिए गांव में लोग ही नहीं बचे हैं. तीसरा कारण विनोद पांडे बताते हैं कि वन विभाग में अधिकारी तो जरूरत से पांच गुना मौजूद हैं लेकिन आग बुझाने वाले फॉरेस्ट गार्ड के एक तिहाई से ज्यादा पद खाली पड़े हैं.

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bharatjourno सही है अपनी नाकामी छुपाने के लिए अंग्रेजो को दोष जंगल में आग लगे - दोषी अंग्रेज शिक्षा व्यवस्था - दोषी अंग्रेज दंगे - दोषी अंग्रेज

दंगल: कश्मीर में मजहब की आड़ में आतंकराष्ट्रवाद के नाम पर चुन कर आई नई सरकार के लिए कश्मीर कितनी बड़ी चुनौती है, आज इसकी एक तस्वीर सामने आई.  तस्वीर कल की है, ईद के दिन की जब कुलगाम की एक मस्जिद में तीन आतंकियों ने पिस्तौल लहरायी और वहां मौजूद लोगों के सामने तकरीर की. ये तीनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़े बताए गए हैं, इन आतंकियों ने वहां पहुंचकर लोगों को धमकाया. एक-एक कर मारे जा रहे आतंकियों को लेकर लोगों पर मुखबिरी का शक जताया और इसके बाद वहां पैसे इकट्ठे किए.  वैसे तो पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, लेकिन ईद के दिन आतंक फैलाने के लिए मस्जिद का इस्तेमाल करना - अपने आप में बेहद खतरनाक संकेत देता है.  कश्मीर में मजहब के नाम पर आतंक फैलाने की कोशिशें पहले भी सामने आई हैं.  हाल ही में मारे गए जाकिर मूसा के पिता ने उसकी मौत के बाद कहा कि ये लड़ाई अल्लाह के नाम पर हो रही है.  साफ है कश्मीरियत की आड़ में कश्मीर में आतंकवाद का जो खेल शुरू हुआ था उसका असली चेहरा अब सामने आ गया. सवाल ये है कि अमित शाह की अगुवाई वाला गृह मंत्रालय क्या इस हालात से निपटने के लिए क्या करेगा? sardanarohit 100 करोड़ की स्कॉलरशिप देकर 800 करोड़ की हज सब्सिडी बन्द कर दी खैर तुम लोग मोदी को क्या समझोगे....😂 sardanarohit तो कराइए ना हिन्दू मुस्लिम क्या दिक्कत आ रही है TRP चली गई क्या ? sardanarohit रोहित भाई जी आजतक में इतनी रात को बैठ के ट्वीट को करता है?🤔🤔🤔

ईद के मौके पर कुछ ऐसा है जामा मस्जिद का नजारादेश भर में आज ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. रात भर बाजारों में रौनक रही और लोगों ने सेवई, कपड़ों की खरीदारी की. वहीं अलग-अलग मस्जिदों में लोग नमाज के लिए पहुंच रहे हैं. दिल्ली मुंबई और लेह में अब से कुछ देर पहले लोगों ने ईद की नमाज अदा की और सुख-शांति के साथ तरक्की की दुआ मांगी. k_navjyot bharat me muslim jansakshya itna badhchuki heki kuch din bad aye log air port ko bhi baap ka raj samajhke namaz padengai, k_navjyot सड़को पर रोड पर भीड़ के चलते सड़क परिवहन बंद है ये भी तो दिखा दीजिए k_navjyot सभी को मेरे और मेरे परिवार की तरफ से ईद की राम राम । eid_ki_ramram

ईद के दिन शाहरुख के साथ दिखा ये बुजुर्ग शख्स, जानिए कौन है येShahrukh Khan: ईद के खास मौके पर शाहरुख खान जब अपने फैंस से मिलने पहुंचे तो उनके साथ उनका बेटा अबराम था। साथ में एक शख्स और था जिसकी काफी चर्चा हो रही है। सब पूछ रहे हैं कि आखिर वह शख्स कौन है जो कि एसआरके के साथ खड़ा है...

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3700 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपी दंपती ने पुलिसकर्मियों के साथ पार्टी की, 6 निलंबितआरोपी अनुभव मित्तल और उसकी पत्नी आयुषी को पेशी के लिए लखनऊ से फरीदाबाद लाया गया था पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से अनुभव लखनऊ लौटने के बजाय दोस्त से मिलने नोएडा पहुंच गए | 6 policemen suspended for celebrating party with Accused