नवनीत गुर्जर का कॉलम: बच्चियो! गलियों में खेलकर भी आओ तो हम तुम्हारे पैर धो दें!

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देश के कई हिस्सों में बाढ़ है। जहां बाढ़ नहीं है, वहां बादलों ने घेरा डाल रखा है। बादल अंधेरों की तरह घिरते जा रहे हैं। कभी-कभी बूंदें उदासी की तरह रह रहकर टपकती भी हैं, पर बादल हैं कि खुलते नहीं। धुलते नहीं… और घुलते भी नहीं। कई प्रदेशों में लम्बे समय से सूरज कहीं खो गया है। अपना चांद हमें खुद ही बेलना पड़ रहा है। बाढ़ मंद नहीं पड़ रही। नीचे पेट फुलाए हुए फैला पानी देखकर लगता है- धरती पर आसमान उत... | Girls! Come even after playing in the streets, then let us wash your feet!