क्षमा हि मूलं सर्वतपसाम्

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अर्थात् क्षमा एक तरफ जहां दुर्बल की ताकत है, दूसरी तरफ बलवान का गहना है। ऐसा कौन सा काम है जो क्षमा के द्वारा संभव नहीं है।